Devi Baglamukhi Mantra Evam Puja Vidhi

Devi Baglamukhi Mantra Evam Puja Vidhi

Devi Pitambara Peeth Photo

Download Baglamukhi Mantra Avam Sadhna Vidhi in Hindi

भगवती बगलामुखी  के इस मंत्र को महामंत्र के नाम से जाना जाता हैा ऐसा कहा जाता है कि भगवती बगलामुखी की उपासना करने वाले साधक के सभी कार्य बिना व्यक्त किये पूर्ण हो जाते हैं और जीवन की हर बाधा को वो हंसते हंसते पार कर जाते हैं।   मैनें स्वयं अपने जीवन में अनेको चमत्कार देखें हैं, जिनको सुनकर कोई भी यकीन नही करेगा लेकिन भगवती पीताम्बरा अपने भक्तों के ऊपर ऐसे ही कृपा करती हैं।  एकाक्षरी मंत्र माँ पीताम्बरा का बीज मंत्र है, इसके जप के बिना माँ पीताम्बरा की साधना पूर्ण नही होती । माँ पीताम्बरा की साधना इसी बीज मंत्र से प्रारम्भ होती है, एवं साधको को बीज मंत्र का नियमित रूप से कम से कम 21 माला का जप अवश्य करना चाहिए,  क्योंकि  बीज मंत्र में ही देवता के प्राण होते हैं।  जिस प्रकार बीज के बिना वृक्ष की कल्पना नही की जा सकती उसी तरह बीज मंत्र के जप के बिना साधना में सफलता के बारे में सोचना भी व्यर्थ है। भगवती की सेवा केवल मंत्र जप से ही नही होती है बल्कि उनके नाम का गुणगान करने से भी होती है । जिस प्रकार नारद ऋषि हर पल भगवान विष्णु का नाम जपते थे, उसी प्रकार सुधी साधको को माँ पीताम्बरा का नाम जप हर पल करना चाहिए एवं अन्य लोगो को भी उनके नाम की महिमा के बारे में बताना चाहिए । मैंने  अपने जीवन का केवल एक ही उद्देश्य बनाया है कि माँ पीताम्बरा के नाम को हर व्यक्ति तक पहुंचाना हैा आप सब भी यदि माँ की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं तो आज से ही भगवती के एकाक्षरी मंत्र को अपने जीवन में उतार लीजिए एवं माँ के नाम एवं उनकी महिमा का अधिक से अधिक प्रचार करना शुरू कर दीजिए। साधको के हितार्थ भगवती के बीज मंत्र की जानकारी यहां दे रहा हूँ, भगवती पीताम्बरा आप सब पर कृपा करें । 

For Ma Baglamukhi Mantra diksha and sadhna guidance email to shaktisadhna@yahoo.com or sumitgirdharwal@yahoo.com. Call us on 9917325788 (Shri Yogeshwaranand Ji) or 9540674788 (Sumit Girdharwal Ji). Visit our website for more information – www.baglamukhi.net or www.yogeshwaranand.org

Download Baglamukhi Mantra Avam Sadhna Vidhi in Hindi

साधना को आरम्भ करने से पूर्व एक साधक को चाहिए कि वह मां भगवती  की उपासना अथवा अन्य किसी भी देवी या देवता की उपासना निष्काम भाव से करे। उपासना का तात्पर्य सेवा से होता है। उपासना के तीन भेद कहे गये हैं:- कायिक अर्थात् शरीर से , वाचिक अर्थात् वाणी से और मानसिक- अर्थात् मन से।  जब हम कायिक का अनुशरण करते हैं तो उसमें पाद्य, अर्घ्य, स्नान, धूप, दीप, नैवेद्य आदि पंचोपचार पूजन अपने देवी देवता का किया जाता है। जब हम वाचिक का प्रयोग करते हैं तो अपने देवी देवता से सम्बन्धित स्तोत्र पाठ आदि किया जाता है अर्थात् अपने मुंह से उसकी कीर्ति का बखान करते हैं। और जब मानसिक क्रिया का अनुसरण करते हैं तो सम्बन्धित देवता का ध्यान और जप आदि किया जाता है।
जो साधक अपने इष्ट देवता का निष्काम भाव से अर्चन करता है और लगातार उसके मंत्र का जप करता हुआ उसी का चिन्तन करता रहता है, तो उसके जितने भी सांसारिक कार्य हैं उन सबका भार मां स्वयं ही उठाती हैं और अन्ततः मोक्ष भी प्रदान करती हैं। यदि आप उनसे पुत्रवत् प्रेम करते हैं तो वे मां के रूप में वात्सल्यमयी होकर आपकी प्रत्येक कामना को उसी प्रकार पूर्ण करती हैं जिस प्रकार एक गाय अपने बछड़े के मोह में कुछ भी करने को तत्पर हो जाती है। अतः सभी साधकों को मेरा निर्देष भी है और उनको परामर्ष भी कि वे साधना चाहे जो भी करें, निष्काम भाव से करें। निष्काम भाव वाले साधक को कभी भी महाभय नहीं सताता। ऐसे साधक के समस्त सांसारिक और पारलौकिक समस्त कार्य स्वयं ही सिद्ध होने लगते हैं उसकी कोई भी किसी भी प्रकार की अभिलाषा अपूर्ण नहीं रहती ।
मेरे पास ऐसे बहुत से लोगों के फोन और मेल आते हैं जो एक क्षण में ही अपने दुखों, कष्टों का त्राण करने के लिए साधना सम्पन्न करना चाहते हैं। उनका उद्देष्य देवता या देवी की उपासना नहीं, उनकी प्रसन्नता नहीं बल्कि उनका एक मात्र उद्देष्य अपनी समस्या से विमुक्त होना होता है। वे लोग नहीं जानते कि जो कष्ट वे उठा रहे हैं, वे अपने पूर्व जन्मों में किये गये पापों के फलस्वरूप उठा रहे हैं। वे लोग अपनी कुण्डली में स्थित ग्रहों को देाष देते हैं, जो कि बिल्कुल गलत परम्परा है। भगवान शिव ने सभी ग्रहों को यह अधिकार दिया है कि वे जातक को इस जीवन में ऐसा निखार दें कि उसके साथ पूर्वजन्मों का कोई भी दोष न रह जाए। इसका लाभ यह होगा कि यदि जातक के साथ कर्मबन्धन शेष नहीं है तो उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाएगी। लेकिन हम इस दण्ड को दण्ड न मानकर ग्रहों का दोष मानते हैं।व्यहार में यह भी आया है कि जो जितनी अधिक साधना, पूजा-पाठ या उपासना करता है, वह व्यक्ति ज्यादा परेशान रहता है। उसका कारण यह है कि जब हम कोई भी उपासना या साधना करना आरम्भ करते हैं तो सम्बन्धित देवी – देवता यह चाहता है कि हम मंत्र जप के द्वारा या अन्य किसी भी मार्ग से बिल्कुल ऐसे साफ-सुुथरे हो जाएं कि हमारे साथ कर्मबन्धन का कोई भी भाग शेष न रह जाए।

Baglamukhi Mantra in Hindi Part 1

Baglamukhi Mantra in Hindi Part 2

Baglamukhi Mantra in Hindi Part 3

Baglamukhi Mantra in Hindi Part 4

Baglamukhi Mantra in Hindi Part 5

Baglamukhi Mantra in Hindi Part 6

Baglamukhi Mantra in Hindi Part 7

Baglamukhi Mantra in Hindi Part 8

Baglamukhi Mantra in Hindi Part 9

Download Baglamukhi Mantra Avam Sadhna Vidhi in Hindi

 

Other Articles on Mantra Tantra Yantra

1. Baglamukhi Puja Vidhi in English (Maa Baglamukhi Pujan Vidhi)

2. Dus Mahavidya Tara Mantra Sadhana Evam Siddhi

3. Baglamukhi Pitambara secret mantras by Shri Yogeshwaranand Ji

4. Bagalamukhi Beej Mantra Sadhana Vidhi

5. Baglamukhi Pratyangira Kavach

6. Durga Shabar Mantra

7. Orignal Baglamukhi Chalisa from pitambara peeth datia

8. Baglamukhi kavach in Hindi and English

9. Baglamukhi Yantra Puja

10. Baglamukhi Chaturakshari Mantra Vidhi

11. Dusmahavidya Dhuamavai (Dhoomavati) Mantra Sadhna Vidhi 

12. Mahashodha Nyasa from Baglamukhi Rahasyam Pitambara peeth datia

13. Mahamritunjaya Mantra Sadhana Vidhi in Hindi and Sanskrit

14. Very Rare and Powerful Mantra Tantra by Shri Yogeshwaranand Ji

15. Mahavidya Baglamukhi Sadhana aur Siddhi

16. Baglamukhi Bhakt Mandaar Mantra 

17. Baglamukhi Sahasranamam

18. Dusmahavidya Mahakali Sadhana

19. Shri Balasundari Triyakshari Mantra Sadhana

20. Sri Vidya Sadhana

21. Click Here to Download Sarabeswara Kavacham

22. Click Here to Download Sharabh Tantra Prayoga

23. Click Here to Download Swarnakarshan Bhairav Mantra Sadhana Vidhi By Gurudev Shri Yogeshwaranand Ji

34. Download Mahakali Mantra Tantra Sadhna Evam Siddhi in Hindi Pdf

Support and Feedback

I am very pleased to say that we are taking a next step ahead in the field of spirituality by digitalizing all the available Sanskrit texts in the world related to secret mantras, tantras and yantras. In the first phase we will digitalize all the content provided by shri yogeshwaranand ji regarding das mahavidyas. We will not only make it available for Hindi and Sanskrit readers but also translate it into English so that whole world can get the benefits from our work. I can’t do it alone. To do the same I request all of you to help me achieve this goal.
Requirements to accomplish this goal
1. We need a person who can write articles in Hindi and Sanskrit in software like Adobe Indesign (Preferable font chanakya)
2. We need a graphic designer who can create good pictures to summarize the content.
3. We need an English translator who can translate these articles into English
4. Money which is highly needed for this project to complete. Any donation for the completion of this project will be highly appreciated.
I am waiting for your feedback and support.
Sumit Girdharwal
+91-9540674788,
+91-9410030994
sumitgirdharwal@yahoo.com
sumitgwal@gmail.com

Tantra Baadha Nivaran Baglamukhi Pratyangira Kavach तंत्र बाधा निवारण बगलामुखी प्रत्यंगिरा कवच

Shatru Baadha Nivaran Baglamukhi Pratyangira Kavach शत्रु बाधा  निवारण बगलामुखी प्रत्यंगिरा कवच

Yogeshwaranand Ji

Yogeshwaranand Ji

गुरू के संरक्षण में बगलामुखी प्रत्यंगिरा कवच का पाठ करने से भयंकर से भयंकर तंत्र प्रयोगो एवं ऊपरी बाधा का निवारण होता हैा     यदि किसी व्यक्ति का रोजगार एवं व्यापार शत्रु ने बंधवा दिया हो तो गुरू मुख से इस कवच को लेकर नियमित रूप से 108 बार        पाठ करें

This kavach helps you recover from any black magic effect. If you chant it regularly your enemies will    calm down and will become your friends. Effect of  Tantra Prayoga done against you will be  removed by reciting this kavach.

Click Here to Download Baglamukhi Pratyangira Kavach

Tantra Badha Nivaran Baglamukhi Pratyangira Kavach

Tantra Badha Nivaran Baglamukhi Pratyangira Kavach

Introduction of Dus Mahavidya Baglamukhi in Hindi

अष्टम  महाविद्या बगलामुखी का  परिचय हिंदी में                                                     Download this Article

For ma baglamukhi mantra diksha and sadhana guidance email to shaktisadhna@yahoo.com or sumitgirdharwal@yahoo.com. Call on 9917325788(Shri Yogeshwaranand Ji) or 9540674788 (Sumit Girdharwal Ji). For more information visit www.yogeshwaranand.org 

Click Here to Download Introduction of Eighth Mahavidya Baglamukhi in Hindi

Click Here to Download all the secret mantra of ma baglamukhi

Baglamukhi Information in Hindi

Devi Baglamukhi Manas Puja

Devi Baglamukhi Manas Pujan

Devi Baglamukhi Manas Pujan

भगवती बगला सुधा-समुद्र के मध्य में स्थित मणिमय  मण्डप में रत्नवेदी पर रत्नमय सिंहासन पर विराजती हैं।  पीतवर्णा होने के कारण ये पीत रंग के ही वस्त्र, आभूषण व माला धारण किये हुए हैं।इनके एक हाथ में शत्रु की  जिह्वा  और दूसरे हाथ में मुद्गर  है। व्यष्टि रूप में शत्रुओं का नाश करने वाली और समष्टि रूप में परम ईश्वर की सहांर-इच्छा  की अधिस्ठात्री शक्ति बगला है।

श्री प्रजापति ने बगला उपासना वैदिक रीती से की और वे सृस्टि की संरचना करने में सफल हुए। श्री प्रजापति ने इस    विद्या का उपदेश सनकादिक मुनियों को दिया।  सनत्कुमार ने इसका उपदेश श्री नारद को और श्री नारद ने सांख्यायन  परमहंस को दिया, जिन्होंने छत्तीस पटलों में “बगला तंत्र” ग्रन्थ की रचना की। “स्वतंत्र तंत्र” के अनुसार भगवान् विष्णु  इस विद्या के उपासक हुए। फिर श्री परशुराम जी और आचार्य द्रोण इस विद्या के उपासक हुए। आचार्य द्रोण ने यह  विद्या परशुराम जी से ग्रहण की।

श्री बगला महाविद्या ऊर्ध्वाम्नाय के अनुसार ही उपास्य हैं, जिसमें स्त्री (शक्ति) भोग्या नहीं बल्कि पूज्या है। बगला    महाविद्या “श्री कुल” से सम्बंधित हैं और अवगत हो कि श्रीकुल की सभी महाविद्याओं की उपासना अत्यंत सावधानी पूर्वक गुरु के मार्गदर्शन में शुचिता बनाते हुए, इन्द्रिय निग्रह पूर्वक करनी चाहिए। फिर बगला शक्ति तो अत्यंत तेजपूर्ण शक्ति हैं, जिनका उद्भव ही स्तम्भन हेतु हुआ था। इस विद्या के प्रभाव से ही महर्षि  च्यवन ने इंद्र के वज्र को स्तंभित कर दिया था। श्रीमद् गोविंदपाद की समाधि में विघ्न डालने से रोकने के लिए आचार्य श्री शंकर ने रेवा नदी का स्तम्भन इसी महाविद्या के प्रभाव से किया था। महामुनि श्री निम्बार्क ने कस्सी ब्राह्मण को इसी विद्या के प्रभाव से नीम के वृक्ष पर, सूर्यदेव का दर्शन कराया था। श्री बगलामुखी को “ब्रह्मास्त्र विद्या” के नामे से भी जाना जाता है।  शत्रुओं का दमन और विघ्नों का शमन करने में विश्व में इनके समकक्ष कोई अन्य देवता नहीं है।

Baglamukhi Mantra in Hindi
Baglamukhi Mantras in Hindi

भगवती बगलामुखी को स्तम्भन की देवी कहा गया है।  स्तम्भनकारिणी शक्ति नाम रूप से व्यक्त एवं अव्यक्त सभी पदार्थो की स्थिति का आधार पृथ्वी के रूप में शक्ति ही है, और बगलामुखी उसी स्तम्भन शक्ति की अधिस्ठात्री देवी हैं।  इसी स्तम्भन शक्ति से ही सूर्यमण्डल स्थित है, सभी लोक इसी शक्ति के प्रभाव से ही स्तंभित है।  अतः साधक गण को चाहिये कि ऐसी महाविद्या कि साधना सही रीति व विधानपूर्वक ही करें।

अब हम साधकगण को इस महाविद्या के विषय में कुछ और जानकारी देना आवश्यक समझते है, जो साधक इस साधना को पूर्ण कर, सिद्धि प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें इन तथ्यो की जानकारी होना अति आवश्यक है।

1 ) कुल : - महाविद्या बगलामुखी “श्री कुल” से सम्बंधित है।

2 ) नाम : - बगलामुखी, पीताम्बरा , बगला , वल्गामुखी , वगलामुखी , ब्रह्मास्त्र विद्या

3 ) कुल्लुका : - मंत्र जाप से पूर्व उस मंत्र कि कुल्लुका का न्यास सिर में किया जाता है। इस विद्या की कुल्लुका “ॐ हूं छ्रौम्” (OM HOOM Chraum)

4)  महासेतु  : - साधन काल में जप से पूर्व ‘महासेतु’ का जप किया जाता है।  ऐसा करने से लाभ यह होता है कि साधक प्रत्येक समय, प्रत्येक स्थिति में जप कर सकता है।  इस महाविद्या का महासेतु “स्त्रीं” (Streem)  है।  इसका जाप कंठ स्थित विशुद्धि चक्र में दस बार किया जाता है।

5)  कवचसेतु :- इसे मंत्रसेतु भी कहा जाता है।  जप प्रारम्भ करने से पूर्व इसका जप एक हजार बार किया जाता है।  ब्राह्मण व छत्रियों के लिए “प्रणव “, वैश्यों  के लिए “फट” तथा शूद्रों के लिए “ह्रीं” कवचसेतु  है।

6 ) निर्वाण :-  “ह्रूं ह्रीं श्रीं” (Hroom Hreem Shreem) से सम्पुटित मूल मंत्र का जाप ही इसकी निर्वाण विद्या है। इसकी दूसरी विधि यह है कि पहले प्रणव कर, अ , आ , आदि स्वर तथा क, ख , आदि व्यंजन पढ़कर मूल मंत्र पढ़ें और अंत में “ऐं” लगाएं और फिर विलोम गति से पुनरावृत्ति करें।

7 ) बंधन :- किसी विपरीत या आसुरी बाधा को रोकने के लिए इस मंत्र का एक हजार बार जाप किया जाता है। मंत्र इस प्रकार है ” ऐं ह्रीं ह्रीं ऐं ” (Aim Hreem Hreem Aim)

8) मुद्रा :- इस विद्या में योनि मुद्रा का प्रयोग किया जाता है।

9) प्राणायाम : -  साधना से पूर्व दो मूल मंत्रो से रेचक, चार मूल मंत्रो से पूरक तथा दो मूल मंत्रो से कुम्भक करना चाहिए। दो मूल मंत्रो से रेचक, आठ मूल मंत्रो से पूरक तथा चार मूल मंत्रो से कुम्भक करना और भी अधिक लाभ कारी है।

10 ) दीपन :-  दीपक जलने से जैसे रोशनी हो जाती है, उसी प्रकार दीपन से मंत्र प्रकाशवान हो जाता है। दीपन करने हेतु मूल मंत्र को योनि बीज ” ईं ” ( EEM ) से संपुटित कर सात बार जप करें

11) जीवन अथवा प्राण योग : - बिना प्राण अथवा जीवन के मन्त्र निष्क्रिय होता है,  अतः मूल मन्त्र के आदि और अन्त में माया बीज “ह्रीं” (Hreem) से संपुट लगाकर सात बार जप करें ।

12 ) मुख शोधन : -  हमारी जिह्वा अशुद्ध रहती है, जिस कारण उससे जप करने पर लाभ के स्थान पर हानि ही होती है। अतः “ऐं ह्रीं  ऐं ” मंत्र से दस बार जाप कर मुखशोधन करें

13 ) मध्य दृस्टि : - साधना के लिए मध्य दृस्टि आवश्यक है। अतः मूल मंत्र के प्रत्येक अक्षर के आगे पीछे “यं” (Yam) बीज का अवगुण्ठन कर मूल मंत्र का पाँच बार जप करना चाहिए।

14 ) शापोद्धार : - मूल मंत्र के जपने से पूर्व दस बार इस मंत्र का जप करें -
” ॐ हलीं बगले ! रूद्र शापं विमोचय विमोचय ॐ ह्लीं स्वाहा “

(OM Hleem Bagale ! Rudra Shaapam Vimochaya Vimochaya  OM Hleem Swaahaa )

15 ) उत्कीलन : - मूल मंत्र के आरम्भ में ” ॐ ह्रीं स्वाहा ” मंत्र का दस बार जप करें।

16 ) आचार :-  इस विद्या के दोनों आचार हैं, वाम भी और दक्षिण भी ।

17 ) साधना में सिद्धि प्राप्त न होने पर उपाय : -  कभी कभी ऐसा देखने में आता हैं कि बार बार साधना करने पर भी सफलता हाथ नहीं आती है। इसके लिए आप निम्न वर्णित उपाय करें -

a) कर्पूर, रोली, खास और चन्दन की स्याही से, अनार की कलम से भोजपत्र पर वायु बीज “यं” (Yam) से मूल मंत्र को अवगुण्ठित कर, उसका षोडशोपचार पूजन करें। निश्चय ही सफलता मिलेगी।

b) सरस्वती बीज “ऐं” (Aim)  से मूल मंत्र को संपुटित कर एक हजार जप करें।

c)  भोजपत्र पर गौदुग्ध से मूल मंत्र लिखकर उसे दाहिनी भुजा पर बांध लें। साथ ही मूल मंत्र को “स्त्रीं” (Steem)  से सम्पुटित कर उसका एक हजार जप करें

18 ) विशेष : - गंध,पुष्प, आभूषण, भगवती के सामने रखें। दीपक देवता के दायीं ओर व धूपबत्ती बायीं ओर रखनी चाहिए। नैवेद्य (Sweets, Dry Fruits ) भी देवता के दायीं ओर ही रखें। जप के उपरान्त आसन से उठने से पूर्व ही अपने द्वारा किया जाप भगवती के बायें हाथ में समर्पित कर दें।

अतः ऐसे साधक गण जो किन्ही भी कारणो से यदि अभी तक साधना में सफलता प्राप्त नहीं कर सकें हैं, उपर्युक्त निर्देशों का पालन करते हुए पुनः एक बार फिर संकल्प लें, तो निश्चय ही पराम्बा पीताम्बरा की कृपा दृस्टि उन्हें प्राप्त होगी – ऐसा मेरा पूर्ण विश्वास है।

Baglamukhi Mala Mantra

Click Here to Download Baglamukhi Mala Mantra 

Baglamukhi Mala Mantra in Hindi and Sanskrit

Baglamukhi Mala Mantra in Hindi and Sanskrit

Other articles on Mantra Tantra Sadhana in Hindi.

1. Baglamukhi Puja Vidhi in English (Maa Baglamukhi Pujan Vidhi)

2. Dus Mahavidya Tara Mantra Sadhana Evam Siddhi

3. Baglamukhi Pitambara secret mantras by Shri Yogeshwaranand Ji

4. Bagalamukhi Beej Mantra Sadhana Vidhi

5. Baglamukhi Pratyangira Kavach

6. Durga Shabar Mantra

7. Orignal Baglamukhi Chalisa from pitambara peeth datia

8. Baglamukhi kavach in Hindi and English

9. Baglamukhi Yantra Puja

10. Baglamukhi Chaturakshari Mantra Vidhi

11. Dusmahavidya Dhuamavai (Dhoomavati) Mantra Sadhna Vidhi 

12. Mahashodha Nyasa from Baglamukhi Rahasyam Pitambara peeth datia

13. Mahamritunjaya Mantra Sadhana Vidhi in Hindi and Sanskrit

14. Very Rare and Powerful Mantra Tantra by Shri Yogeshwaranand Ji

15. Mahavidya Baglamukhi Sadhana aur Siddhi

16. Baglamukhi Bhakt Mandaar Mantra 

17. Baglamukhi Sahasranamam

18. Dusmahavidya Mahakali Sadhana

19. Shri Balasundari Triyakshari Mantra Sadhana

20. Sri Vidya Sadhana

21. Click Here to Download Sarabeswara Kavacham

22. Click Here to Download Sharabh Tantra Prayoga

23. Click Here to Download Swarnakarshan Bhairav Mantra Sadhana Vidhi By Gurudev Shri Yogeshwaranand Ji

Ask Your Question

Introduction of Eighth Mahavidya Baglamukhi in Hindi महाविद्या बगलामुखी

Introduction of Dus Mahavidya Baglamukhi in Hindi

अष्टम  महाविद्या बगलामुखी का  परिचय हिंदी में                                                     Download this Article

For ma baglamukhi mantra diksha and sadhana guidance email to shaktisadhna@yahoo.com or sumitgirdharwal@yahoo.com. Call on 9917325788(Shri Yogeshwaranand Ji) or 9540674788 (Sumit Girdharwal Ji). For more information visit www.yogeshwaranand.org 

Click Here to Download Introduction of Eighth Mahavidya Baglamukhi in Hindi

Click Here to Download all the secret mantra of ma baglamukhi

Baglamukhi Information in Hindi

 भगवती बगला सुधा-समुद्र के मध्य में स्थित मणिमय  मण्डप में रत्नवेदी पर रत्नमय सिंहासन पर विराजती हैं।  पीतवर्णा होने के कारण ये पीत रंग के ही वस्त्र, आभूषण व माला धारण किये हुए हैं।इनके एक हाथ में शत्रु की  जिह्वा  और दूसरे हाथ में मुद्गर  है। व्यष्टि रूप में शत्रुओं का नाश करने वाली और समष्टि रूप में परम ईश्वर की सहांर-इच्छा  की अधिस्ठात्री शक्ति बगला है।

श्री प्रजापति ने बगला उपासना वैदिक रीती से की और वे सृस्टि की संरचना करने में सफल हुए। श्री प्रजापति ने इस    विद्या का उपदेश सनकादिक मुनियों को दिया।  सनत्कुमार ने इसका उपदेश श्री नारद को और श्री नारद ने सांख्यायन  परमहंस को दिया, जिन्होंने छत्तीस पटलों में “बगला तंत्र” ग्रन्थ की रचना की। “स्वतंत्र तंत्र” के अनुसार भगवान् विष्णु  इस विद्या के उपासक हुए। फिर श्री परशुराम जी और आचार्य द्रोण इस विद्या के उपासक हुए। आचार्य द्रोण ने यह  विद्या परशुराम जी से ग्रहण की।

श्री बगला महाविद्या ऊर्ध्वाम्नाय के अनुसार ही उपास्य हैं, जिसमें स्त्री (शक्ति) भोग्या नहीं बल्कि पूज्या है। बगला    महाविद्या “श्री कुल” से सम्बंधित हैं और अवगत हो कि श्रीकुल की सभी महाविद्याओं की उपासना अत्यंत सावधानी पूर्वक गुरु के मार्गदर्शन में शुचिता बनाते हुए, इन्द्रिय निग्रह पूर्वक करनी चाहिए। फिर बगला शक्ति तो अत्यंत तेजपूर्ण शक्ति हैं, जिनका उद्भव ही स्तम्भन हेतु हुआ था। इस विद्या के प्रभाव से ही महर्षि  च्यवन ने इंद्र के वज्र को स्तंभित कर दिया था। श्रीमद् गोविंदपाद की समाधि में विघ्न डालने से रोकने के लिए आचार्य श्री शंकर ने रेवा नदी का स्तम्भन इसी महाविद्या के प्रभाव से किया था। महामुनि श्री निम्बार्क ने कस्सी ब्राह्मण को इसी विद्या के प्रभाव से नीम के वृक्ष पर, सूर्यदेव का दर्शन कराया था। श्री बगलामुखी को “ब्रह्मास्त्र विद्या” के नामे से भी जाना जाता है।  शत्रुओं का दमन और विघ्नों का शमन करने में विश्व में इनके समकक्ष कोई अन्य देवता नहीं है।

Baglamukhi Mantra in Hindi

Baglamukhi Mantras in Hindi

भगवती बगलामुखी को स्तम्भन की देवी कहा गया है।  स्तम्भनकारिणी शक्ति नाम रूप से व्यक्त एवं अव्यक्त सभी पदार्थो की स्थिति का आधार पृथ्वी के रूप में शक्ति ही है, और बगलामुखी उसी स्तम्भन शक्ति की अधिस्ठात्री देवी हैं।  इसी स्तम्भन शक्ति से ही सूर्यमण्डल स्थित है, सभी लोक इसी शक्ति के प्रभाव से ही स्तंभित है।  अतः साधक गण को चाहिये कि ऐसी महाविद्या कि साधना सही रीति व विधानपूर्वक ही करें।

अब हम साधकगण को इस महाविद्या के विषय में कुछ और जानकारी देना आवश्यक समझते है, जो साधक इस साधना को पूर्ण कर, सिद्धि प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें इन तथ्यो की जानकारी होना अति आवश्यक है।

1 ) कुल : - महाविद्या बगलामुखी “श्री कुल” से सम्बंधित है।

2 ) नाम : - बगलामुखी, पीताम्बरा , बगला , वल्गामुखी , वगलामुखी , ब्रह्मास्त्र विद्या

3 ) कुल्लुका : - मंत्र जाप से पूर्व उस मंत्र कि कुल्लुका का न्यास सिर में किया जाता है। इस विद्या की कुल्लुका “ॐ हूं छ्रौम्” (OM HOOM Chraum)

4)  महासेतु  : - साधन काल में जप से पूर्व ‘महासेतु’ का जप किया जाता है।  ऐसा करने से लाभ यह होता है कि साधक प्रत्येक समय, प्रत्येक स्थिति में जप कर सकता है।  इस महाविद्या का महासेतु “स्त्रीं” (Streem)  है।  इसका जाप कंठ स्थित विशुद्धि चक्र में दस बार किया जाता है।

5)  कवचसेतु :- इसे मंत्रसेतु भी कहा जाता है।  जप प्रारम्भ करने से पूर्व इसका जप एक हजार बार किया जाता है।  ब्राह्मण व छत्रियों के लिए “प्रणव “, वैश्यों  के लिए “फट” तथा शूद्रों के लिए “ह्रीं” कवचसेतु  है।

6 ) निर्वाण :-  “ह्रूं ह्रीं श्रीं” (Hroom Hreem Shreem) से सम्पुटित मूल मंत्र का जाप ही इसकी निर्वाण विद्या है। इसकी दूसरी विधि यह है कि पहले प्रणव कर, अ , आ , आदि स्वर तथा क, ख , आदि व्यंजन पढ़कर मूल मंत्र पढ़ें और अंत में “ऐं” लगाएं और फिर विलोम गति से पुनरावृत्ति करें।

7 ) बंधन :- किसी विपरीत या आसुरी बाधा को रोकने के लिए इस मंत्र का एक हजार बार जाप किया जाता है। मंत्र इस प्रकार है ” ऐं ह्रीं ह्रीं ऐं ” (Aim Hreem Hreem Aim)

8) मुद्रा :- इस विद्या में योनि मुद्रा का प्रयोग किया जाता है।

9) प्राणायाम : -  साधना से पूर्व दो मूल मंत्रो से रेचक, चार मूल मंत्रो से पूरक तथा दो मूल मंत्रो से कुम्भक करना चाहिए। दो मूल मंत्रो से रेचक, आठ मूल मंत्रो से पूरक तथा चार मूल मंत्रो से कुम्भक करना और भी अधिक लाभ कारी है।

10 ) दीपन :-  दीपक जलने से जैसे रोशनी हो जाती है, उसी प्रकार दीपन से मंत्र प्रकाशवान हो जाता है। दीपन करने हेतु मूल मंत्र को योनि बीज ” ईं ” ( EEM ) से संपुटित कर सात बार जप करें

11) जीवन अथवा प्राण योग : - बिना प्राण अथवा जीवन के मन्त्र निष्क्रिय होता है,  अतः मूल मन्त्र के आदि और अन्त में माया बीज “ह्रीं” (Hreem) से संपुट लगाकर सात बार जप करें ।

12 ) मुख शोधन : -  हमारी जिह्वा अशुद्ध रहती है, जिस कारण उससे जप करने पर लाभ के स्थान पर हानि ही होती है। अतः “ऐं ह्रीं  ऐं ” मंत्र से दस बार जाप कर मुखशोधन करें

13 ) मध्य दृस्टि : - साधना के लिए मध्य दृस्टि आवश्यक है। अतः मूल मंत्र के प्रत्येक अक्षर के आगे पीछे “यं” (Yam) बीज का अवगुण्ठन कर मूल मंत्र का पाँच बार जप करना चाहिए।

14 ) शापोद्धार : - मूल मंत्र के जपने से पूर्व दस बार इस मंत्र का जप करें -
” ॐ हलीं बगले ! रूद्र शापं विमोचय विमोचय ॐ ह्लीं स्वाहा “

(OM Hleem Bagale ! Rudra Shaapam Vimochaya Vimochaya  OM Hleem Swaahaa )

15 ) उत्कीलन : - मूल मंत्र के आरम्भ में ” ॐ ह्रीं स्वाहा ” मंत्र का दस बार जप करें।

16 ) आचार :-  इस विद्या के दोनों आचार हैं, वाम भी और दक्षिण भी ।

17 ) साधना में सिद्धि प्राप्त न होने पर उपाय : -  कभी कभी ऐसा देखने में आता हैं कि बार बार साधना करने पर भी सफलता हाथ नहीं आती है। इसके लिए आप निम्न वर्णित उपाय करें -

a) कर्पूर, रोली, खास और चन्दन की स्याही से, अनार की कलम से भोजपत्र पर वायु बीज “यं” (Yam) से मूल मंत्र को अवगुण्ठित कर, उसका षोडशोपचार पूजन करें। निश्चय ही सफलता मिलेगी।

b) सरस्वती बीज “ऐं” (Aim)  से मूल मंत्र को संपुटित कर एक हजार जप करें।

c)  भोजपत्र पर गौदुग्ध से मूल मंत्र लिखकर उसे दाहिनी भुजा पर बांध लें। साथ ही मूल मंत्र को “स्त्रीं” (Steem)  से सम्पुटित कर उसका एक हजार जप करें

18 ) विशेष : - गंध,पुष्प, आभूषण, भगवती के सामने रखें। दीपक देवता के दायीं ओर व धूपबत्ती बायीं ओर रखनी चाहिए। नैवेद्य (Sweets, Dry Fruits ) भी देवता के दायीं ओर ही रखें। जप के उपरान्त आसन से उठने से पूर्व ही अपने द्वारा किया जाप भगवती के बायें हाथ में समर्पित कर दें।

अतः ऐसे साधक गण जो किन्ही भी कारणो से यदि अभी तक साधना में सफलता प्राप्त नहीं कर सकें हैं, उपर्युक्त निर्देशों का पालन करते हुए पुनः एक बार फिर संकल्प लें, तो निश्चय ही पराम्बा पीताम्बरा की कृपा दृस्टि उन्हें प्राप्त होगी – ऐसा मेरा पूर्ण विश्वास है।

Other articles on Mantra Tantra Sadhana in Hindi.

1. Baglamukhi Puja Vidhi in English (Maa Baglamukhi Pujan Vidhi)

2. Dus Mahavidya Tara Mantra Sadhana Evam Siddhi

3. Baglamukhi Pitambara secret mantras by Shri Yogeshwaranand Ji

4. Bagalamukhi Beej Mantra Sadhana Vidhi

5. Baglamukhi Pratyangira Kavach

6. Durga Shabar Mantra

7. Orignal Baglamukhi Chalisa from pitambara peeth datia

8. Baglamukhi kavach in Hindi and English

9. Baglamukhi Yantra Puja

10. Baglamukhi Chaturakshari Mantra Vidhi

11. Dusmahavidya Dhuamavai (Dhoomavati) Mantra Sadhna Vidhi 

12. Mahashodha Nyasa from Baglamukhi Rahasyam Pitambara peeth datia

13. Mahamritunjaya Mantra Sadhana Vidhi in Hindi and Sanskrit

14. Very Rare and Powerful Mantra Tantra by Shri Yogeshwaranand Ji

15. Mahavidya Baglamukhi Sadhana aur Siddhi

16. Baglamukhi Bhakt Mandaar Mantra 

17. Baglamukhi Sahasranamam

18. Dusmahavidya Mahakali Sadhana

19. Shri Balasundari Triyakshari Mantra Sadhana

20. Sri Vidya Sadhana

21. Click Here to Download Sarabeswara Kavacham

22. Click Here to Download Sharabh Tantra Prayoga

23. Click Here to Download Swarnakarshan Bhairav Mantra Sadhana Vidhi By Gurudev Shri Yogeshwaranand Ji

Ask Your Question

Baglamukhi Mantra Jaap Puja Vidhi in Hindi and English

Baglamukhi Mantra Jaap Puja Vidhi in Hindi and English PDF

After receiving so many requests from the readers of this blog we are publishing all the mantras of ma baglamukhi including their viniyoga, Rishiyadi-Nyasa, Shadanga-Nyasa, Kara-Nyasa in Hindi and English. It will not only help english readers but also those readers who are not very good at sanskrit pronunciation. It took a lot of effort to publish such a document but it is my dedication to provide more and more information to the people who worship ma pitambara. I dedicate this work to ma pitambara’s lotus feet and my father and my guru shri yogeshwaranand ji who taught me everything. I will add more info in this document in near future. Please let me know if you find any mistake in english, hindi or sanskrit. Please visit this blog again and again for more and updated information.

For Ma Bagamukhi Mantra diksha and sadhana guidance email to shaktisadhna@yahoo.com, sumitgirdharwal@yahoo.com or call on +91-9540674788, +91-9410030994

Download Baglamukhi Puja Vidhi in English and Hindi Pdf by Sumit Girdharwal

Click Here to Download Baglamukhi Secret Mantra Collection By Shri Yogeshwaranand Ji in Pdf


Some Articles on ma Baglamukhi Which You must read. All of them are in pdf Format. So You must have Acrobat Reader to Read those Documents. All the articles are written by Shri Yogeshwaranand Ji. To Download these Documents right click on the link and click on Save Target As (Internet Explorer) Or Save Link As (Other). File will be downloaded on your computer. Then You can Read it in any Pdf Reader
1. Ma Baglamukhi Bija Mantra Sadhana Vidhi

2. Ma Baglamukhi Complete Sadhna Vidhi
3. Ma Baglamukhi Kavach in Hindi and English
4. Ma Baglamukhi Stotram in Hindi
5. Ma Baglamukhi Stotram in English
6. Ma Baglamukhi Sahasranamam in Hindi
7. Baglamukhi Sahasra Namavali 1108 Names in English

8.  Baglamukhi Sahasra Namavali 1108 Names in Hindi
9. Ma Baglamukhi Shabar Mantra
10. Ma Baglamukhi diksha Vidhi
11. Ma Baglamukhi Brahmastra Mala Mantra in Hindi
12. Mahavidya Shri Baglamukhi Sadhana Aur Siddhi by Shri Yogeshwaranand Ji
13. Ma Baglamukhi yantra Puja
14. Ma Baglamukhi Panjar Stotram
15. Ma Baglamukhi Yantra on Bhojpatra
16. Baglamukhi Siddhi Shabar Mantra
17. Baglamukhi devi mata mantra in sanskrit and hindi in mp3 audio form

18. Ma Baglamukhi Mala Mantra in Hindi and English

Support and Feedback

I am very pleased to say that we are taking a next step ahead in the field of spirituality by digitalizing all the available Sanskrit texts in the world related to secret mantras, tantras and yantras. In the first phase we will digitalize all the content provided by shri yogeshwaranand ji regarding das mahavidyas. We will not only make it available for Hindi and Sanskrit readers but also translate it into English so that whole world can get the benefits from our work. I can’t do it alone. To do the same I request all of you to help me achieve this goal.
Requirements to accomplish this goal
1. We need a person who can write articles in Hindi and Sanskrit in software like Adobe Indesign (Preferable font chanakya)
2. We need a graphic designer who can create good pictures to summarize the content.
3. We need an English translator who can translate these articles into English
4. Money which is highly needed for this project to complete. Any donation for the completion of this project will be highly appreciated.
I am waiting for your feedback and support.
Sumit Girdharwal
+91-9540674788,
+91-9410030994
sumitgirdharwal@yahoo.com
sumitgwal@gmail.com

Baglamukhi Chalisa from Pitambara Peeth Datia

Baglamukhi Chalisa given below has been published by Pitambara Peeth Datia.
(पीताम्बरा  पीठ दतिया  से प्रकाशित बगलामुखी चालीसा)

Download Baglamukhi Puja Vidhi in English and Hindi Pdf
Mata baglamukhi Photo Image taken from pitambara shakti peeth

Mother Baglamukhi is that cosmic energy, which helps a person to conquer all his negative traits and raise his consciousness to higher levels by destroying his false ego and his diseases, sorrows and enemies. Only when a person escapes these negative influences can become determined, resolute and intelligent and go on to become a perfect human being. Any one can recite the below given Baglamukhi Chalisa at the time of Puja. To appease the mother one should wear yellow clothes. Baglamukhi Sadhak should offer yellow flowers onto the lotus feet of mother.

Click Here to Download Baglamukhi Chalisa in Hindi Pdf

Click Here to Download Baglamukhi Android Application from Google Market

If you wish to learn Ma Baglamukhi Sadhana and need guidance please email to shaktisadhna@yahoo.com or call on 9540674788,9917325788 (Shri Yogeshwaranand Ji).

We have developed an android application to access all the information related to mother baglamukhi. You can search it in google market by the name “Baglamukhi” or can directly access by the blow link

Click Here to Download Baglamukhi Android Application from Google Market

Below are articles related to Ma Baglamukhi

1. Collection of All the Mantras of Ma Baglamukhi 

2. Baglamukhi Sahasranamawali in Hindi Pdf

3. Baglamukhi Yantra Puja

4. Baglamukhi Puja Vidhi in Simple Way

Bija Mantra of Ma Baglamukhi is Hlreem. If you have never done this sadhana before then you should start your Sadhana from this bija mantra. You should take the diksha of baglamukhi bija mantra from your gurudev  and then you should do the anusthan or purascharan of this mantra. After the completion of purascharan you should recite some mala of this mantra everyday. You can do one,five,eleven,twenty one or more  malas everyday.  This bija mantra of ma baglamukhi will protect you from every evil power. If some one is creating hurdles in your life then ma will protect you as a child. This mantra can also protect you from false court cases and makes you winner. If you are facing the shani sadesati or under the dashas of malefic  planets and facing lots of problems in your life then Ma Pitambara is the only shelter which can create a hope in your life. If you are willing to die or having no hope then try this sadhana only once. I have no words to say anything about ma pitambara and her grace on her child but yes i can promise you that once you are under her shelter then  you will never look back in your life. Success will become your servant. I also want to make people aware about a wrong belief. People think that Ma Baglamukhi is cruel and if they will commit any mistake in her worship then   they will be punished. It is not true. I am aware of lots of people who even did not chant her mantra properly but still they got all the benefits which they should have got only after chanting the correct mantra . Never have any kind of fear in your mind. She is cruel only for your enemies but not for you. Every mother will become baglamukhi if someone would create any troubles for her child. Same concept applies here. So don’t waste your time, take diksha (initiation) of baglamukhi  mantra and start sadhana without any confusion.

माँ बगलामुखी की साधना करने के लिए सबसे पहले एकाक्षरी मंत्र ह्ल्रीं की दीक्षा अपने गुरुदेव के मुख से प्राप्त करें। एकाक्षरी मंत्र के एक लाख दस हजार
जप करने के पश्चात क्रमशः चतुराक्षरी, अष्टाक्षरी , उन्नीसाक्षरी, छत्तीसाक्षरी (मूल मंत्र ) आदि मंत्रो की दीक्षा अपने गुरुदेव से प्राप्त करें एवं गुरु आदेशानुसार मंत्रो का जाप संपूर्ण करें। कुछ ध्यान योग्य बातें बगलामुखी आराधना में निम्न बातों का विशेष ध्यान रखना जरूरी होता है। साधना में पीत वस्त्र धारण करना चाहिए एवं पीत वस्त्र का ही आसन लेना चाहिए। आराधना में पूजा की सभी वस्तुएं पीले रंग की होनी चाहिए। आराधना खुले आकाश के नीचे नहीं करनी चाहिए। आराधना काल में पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए तथा साधना क्रम में स्त्री स्पर्श, चर्चा और संसर्ग कतई नहीं करना चाहिए। बगलामुखी देवी अपने साधक की परीक्षा भी लेती हैं। साधना गुरु की आज्ञा लेकर ही करनी चाहिए और शुरू करने से पहले गुरु का ध्यान और पूजन अवश्य करना चाहिए। बगलामुखी के भैरव मृत्युंजय हैं, इसलिए साधना के पूर्व महामृत्युंजय मंत्र का एक माला जप अवश्य करना चाहिए। मंत्र का जप हल्दी की माला से करना चाहिए। साधना रात्रि में 9 बजे से 2 बजे के बीच करनी चाहिए। मंत्र के जप की संख्या निर्धारित होनी चाहिए और रोज उसी संख्या से जप करना चाहिए। यह संख्या साधक को स्वयं तय करना चाहिए। साधना गुप्त रूप से होनी चाहिए। साधना काल में दीप अवश्य जलाया जाना चाहिए। जो जातक इस बगलामुखी साधना को पूर्ण कर लेता है, वह अजेय हो जाता है, उसके शत्रु उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाते।

यदि एक बार आपने यह साधना पूर्ण कर ली तो इस संसार में ऐसी कोई भी वस्तु नहीं है जिसे आप प्राप्त नहीं कर सकते। यदि आप भोग विलास के पीछे दौड़ेंगे तो आपकी यह दौड़ कभी भी समाप्त नहीं होगी। लेकिन यदि आपका लक्ष्य प्रभु प्राप्ति होगा तो भोग विलास स्वयं ही आपके दास बनकर आपकी सेवा करेंगे। मानव जन्म बड़ी मुश्किल से प्राप्त होता है। इसे व्यर्थ ना गँवाये। हम सभी जानते है कि हम इस संसार से कुछ भी साथ लेकर नहीं जायेगे। यदि आपने यहाँ करोड़ो रुपये भी जोड़ लिए तो भी वो व्यर्थ ही हैं जब तक आप उस परमपिता को प्राप्त नहीं कर लेते। उस परमात्मा कि शरण में जो सुख है वह सुख इस संसार के किसी भी भोग विलास में नहीं है।

Shri Baglamukhi Sadhana Rahasya is the upcoming book of Gurudev Shri Yogeshwaranand Ji on Ma Baglamukhi. Only limited copies of this book are going to be published. If you want to secure your copy before all sold out please make a payment of Rs 680 into the below A/C
Sumit Girdharwal
Axis Bank
912020029471298
IFSC Code – UTIB0001094
After payment send your complete address and payment receipt to shaktisadhna@yahoo.com or info@yogeshwaranand.org. For more details please call on +91-9540674788

Feedback & Support


Being the editor and publisher of all the articles written by Shri Yogeshwaranand Ji I am very pleased to say that we are taking a next step ahead in the field of spirituality by digitalizing all the available Sanskrit texts in the world related to secret mantras, tantras and yantras. In the first phase we will digitalize all the content provided by shri yogeshwaranand ji regarding das mahavidyas. We will not only make it available for Hindi and Sanskrit readers but also translate it into English so that whole world can get the benefits from our work. I can’t do it alone. To do the same I request all of you to help me achieve this goal.
Requirements to accomplish this goal
1. We need a person who can write articles in Hindi and Sanskrit in software like Adobe Indesign (Preferable font chanakya) or Microsoft Office (Font Used Kruti Dev 020, Chanakya)
2. We need a graphic designer who can create good pictures to summarize the content.
3. We need an English translator who can translate these articles into English
4. Any donation which highly needed for this project to complete.
I am waiting for your feedback and support.
Sumit Girdharwal
+91-9540674788,
+91-9410030994
sumitgirdharwal@yahoo.com
sumitgwal@gmail.com
Jai Ma Pitambara

Ask Your Question

Thousand ( 1108 ) names of Shri Baglamukhi in Hindi

Originally posted on Mahavidya Shri Baglamukhi Sadhana Aur Siddhi:

Download Collection of All the Secret Mantras of Ma Baglamukhi by Shri Yogeshwaranand JiThese are the one thousand and one hundred names of shri baglamukhi in hindi. Do archan of ma baglamukhi with dry fruits, flowers or with rice by reciting these names. For mantra diksha and guidance email to shaktisadhna@yahoo.com or call on 9540674788 (Shri Yogeshwaranand Ji). For more information visit www.anusthanokarehasya.com or www.baglamukhi.info

Download 1108 names of shri baglamukhi in hindi
These 1108 names are also available in english. Click here to read in english

View original

माला और सुमेरु

माला और सुमेरु

जाप माला में सुमेरु को सबसे श्रेष्ठ स्थान प्राप्त होता है. १०८ मनके मिलाकर भी सुमेरु की बराबरी नहीं की जा सकती है.साधना मार्ग में सुमेरु को गुरु माना माना गया.

जाप करते समय कभी भी सुमेरु का उलंघन नहीं किया जाता है अन्यथा जाप का फल समाप्त हो जाता है. सुमेरु से जाप आरम्भ करके जब हम पुनः सुमेरु तक पहुँचते है तो वही से माला को पलटकर पुनः जाप करने लगते है.परन्तु ऐसा क्या है जो इसका उलंघन नहीं किया जाता है ?

मित्रो एक साधक अपने साधनात्मक जीवन का श्री गणेश गुरु से करता है.और वो कितना ही ज्ञानी क्यों न हो जाये परन्तु उसे सदा गुरु की शरण में रहना ही पड़ता है.इसलिए सुमेरु को गुरु कहा गया है.आप अपनी साधना उससे शुरु करते है और उसी पर समाप्त करते है.एक शिष्य गुरु से अपनी यात्रा आरम्भ करता है और अंत में पुनः गुरु तत्त्व में लीन हो जाता है.अतः घूम फिरकर पहुचता गुरु के पास ही है.

सुमेरु हमें शिक्षा देता है की जीवन में कितनी ही साधनाए कर लो,कितने ही जाप कर लो कितनी ही सिद्धियां अर्जित कर लो.परन्तु कभी गुरु का उलंघन न करना अन्यथा सब पुण्य,सब सिद्धियां समाप्त हो जाएगी।सिद्ध बनना, साधक बनना परन्तु गुरु शरण में जाते रहना जिस तरह तुम सुमेरु तक पहुंच जाते हो एक माला पूर्ण होते ही.उसी प्रकार थोड़ा थोड़ा अर्जित करते जाना परन्तु गुरु शरण में जाते रहना और पुनः एक नविन यात्रा आरम्भ कर देना।यह क्रिया तुम्हे अहंकार से सदा दूर रखेगी।साथ ही गुरु की महत्वता से भी अवगत कराती रहेगी।

For Mantra diksha and sadhna guidance email to shaktisadhna@yahoo.com or call us on 9917325788

Download Baglamukhi Mantra Avam Sadhna Vidhi in Hindi

Other Articles on Mantra Tantra Yantra

1. Baglamukhi Puja Vidhi in English (Maa Baglamukhi Pujan Vidhi)

2. Dus Mahavidya Tara Mantra Sadhana Evam Siddhi

3. Baglamukhi Pitambara secret mantras by Shri Yogeshwaranand Ji

4. Bagalamukhi Beej Mantra Sadhana Vidhi

5. Baglamukhi Pratyangira Kavach

6. Durga Shabar Mantra

7. Orignal Baglamukhi Chalisa from pitambara peeth datia

8. Baglamukhi kavach in Hindi and English

9. Baglamukhi Yantra Puja

10. Baglamukhi Chaturakshari Mantra Vidhi

11. Dusmahavidya Dhuamavai (Dhoomavati) Mantra Sadhna Vidhi 

12. Mahashodha Nyasa from Baglamukhi Rahasyam Pitambara peeth datia

13. Mahamritunjaya Mantra Sadhana Vidhi in Hindi and Sanskrit

14. Very Rare and Powerful Mantra Tantra by Shri Yogeshwaranand Ji

15. Mahavidya Baglamukhi Sadhana aur Siddhi

16. Baglamukhi Bhakt Mandaar Mantra 

17. Baglamukhi Sahasranamam

18. Dusmahavidya Mahakali Sadhana

19. Shri Balasundari Triyakshari Mantra Sadhana

20. Sri Vidya Sadhana

21. Click Here to Download Sarabeswara Kavacham

22. Click Here to Download Sharabh Tantra Prayoga

23. Click Here to Download Swarnakarshan Bhairav Mantra Sadhana Vidhi By Gurudev Shri Yogeshwaranand Ji

34. Download Mahakali Mantra Tantra Sadhna Evam Siddhi in Hindi Pdf

Ma Baglamukhi Puja Vidhi in Hindi and English

Ma Baglamukhi Puja Vidhi in Hindi and English

Download Baglamukhi Puja Vidhi in English and Hindi Pdf by Sumit Girdharwal

After receiving so many requests from the readers of this blog we are publishing all the mantras of ma baglamukhi including their viniyoga, Rishiyadi-Nyasa, Shadanga-Nyasa, Kara-Nyasa in Hindi and English. It will not only help english readers but also those readers who are not very good at sanskrit pronunciation. It took a lot of effort to publish such a document but it is my dedication to provide more and more information to the people who worship ma pitambara. I dedicate this work to ma pitambara’s lotus feet and my father and my guru shri yogeshwaranand ji who taught me everything. I will add more info in this document in near future. Please let me know if you find any mistake in english, hindi or sanskrit. Please visit this blog again and again for more and updated information.

For Ma Bagamukhi Mantra diksha and sadhana guidance email to shaktisadhna@yahoo.com, sumitgirdharwal@yahoo.com or call on +91-9540674788, +91-9410030994

Download Baglamukhi Puja Vidhi in English and Hindi Pdf by Sumit Girdharwal

साधना को आरम्भ करने से पूर्व एक साधक को चाहिए कि वह मां भगवती  की उपासना अथवा अन्य किसी भी देवी या देवता की उपासना निष्काम भाव से करे। उपासना का तात्पर्य सेवा से होता है। उपासना के तीन भेद कहे गये हैं:- कायिक अर्थात् शरीर से , वाचिक अर्थात् वाणी से और मानसिक- अर्थात् मन से।  जब हम कायिक का अनुशरण करते हैं तो उसमें पाद्य, अर्घ्य, स्नान, धूप, दीप, नैवेद्य आदि पंचोपचार पूजन अपने देवी देवता का किया जाता है। जब हम वाचिक का प्रयोग करते हैं तो अपने देवी देवता से सम्बन्धित स्तोत्र पाठ आदि किया जाता है अर्थात् अपने मुंह से उसकी कीर्ति का बखान करते हैं। और जब मानसिक क्रिया का अनुसरण करते हैं तो सम्बन्धित देवता का ध्यान और जप आदि किया जाता है।
जो साधक अपने इष्ट देवता का निष्काम भाव से अर्चन करता है और लगातार उसके मंत्र का जप करता हुआ उसी का चिन्तन करता रहता है, तो उसके जितने भी सांसारिक कार्य हैं उन सबका भार मां स्वयं ही उठाती हैं और अन्ततः मोक्ष भी प्रदान करती हैं। यदि आप उनसे पुत्रवत् प्रेम करते हैं तो वे मां के रूप में वात्सल्यमयी होकर आपकी प्रत्येक कामना को उसी प्रकार पूर्ण करती हैं जिस प्रकार एक गाय अपने बछड़े के मोह में कुछ भी करने को तत्पर हो जाती है। अतः सभी साधकों को मेरा निर्देष भी है और उनको परामर्ष भी कि वे साधना चाहे जो भी करें, निष्काम भाव से करें। निष्काम भाव वाले साधक को कभी भी महाभय नहीं सताता। ऐसे साधक के समस्त सांसारिक और पारलौकिक समस्त कार्य स्वयं ही सिद्ध होने लगते हैं उसकी कोई भी किसी भी प्रकार की अभिलाषा अपूर्ण नहीं रहती ।
मेरे पास ऐसे बहुत से लोगों के फोन और मेल आते हैं जो एक क्षण में ही अपने दुखों, कष्टों का त्राण करने के लिए साधना सम्पन्न करना चाहते हैं। उनका उद्देष्य देवता या देवी की उपासना नहीं, उनकी प्रसन्नता नहीं बल्कि उनका एक मात्र उद्देष्य अपनी समस्या से विमुक्त होना होता है। वे लोग नहीं जानते कि जो कष्ट वे उठा रहे हैं, वे अपने पूर्व जन्मों में किये गये पापों के फलस्वरूप उठा रहे हैं। वे लोग अपनी कुण्डली में स्थित ग्रहों को देाष देते हैं, जो कि बिल्कुल गलत परम्परा है। भगवान शिव ने सभी ग्रहों को यह अधिकार दिया है कि वे जातक को इस जीवन में ऐसा निखार दें कि उसके साथ पूर्वजन्मों का कोई भी दोष न रह जाए। इसका लाभ यह होगा कि यदि जातक के साथ कर्मबन्धन शेष नहीं है तो उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाएगी। लेकिन हम इस दण्ड को दण्ड न मानकर ग्रहों का दोष मानते हैं।व्यहार में यह भी आया है कि जो जितनी अधिक साधना, पूजा-पाठ या उपासना करता है, वह व्यक्ति ज्यादा परेशान रहता है। उसका कारण यह है कि जब हम कोई भी उपासना या साधना करना आरम्भ करते हैं तो सम्बन्धित देवी – देवता यह चाहता है कि हम मंत्र जप के द्वारा या अन्य किसी भी मार्ग से बिल्कुल ऐसे साफ-सुुथरे हो जाएं कि हमारे साथ कर्मबन्धन का कोई भी भाग शेष न रह जाए।

1. Baglamukhi Puja Vidhi in English (Maa Baglamukhi Pujan Vidhi)

2. Dus Mahavidya Tara Mantra Sadhana Evam Siddhi

3. Baglamukhi Pitambara secret mantras by Shri Yogeshwaranand Ji

4. Bagalamukhi Beej Mantra Sadhana Vidhi

5. Baglamukhi Pratyangira Kavach

6. Durga Shabar Mantra

7. Orignal Baglamukhi Chalisa from pitambara peeth datia

8. Baglamukhi kavach in Hindi and English

9. Baglamukhi Yantra Puja

10. Baglamukhi Chaturakshari Mantra Vidhi

11. Dusmahavidya Dhuamavai (Dhoomavati) Mantra Sadhna Vidhi 

12. Mahashodha Nyasa from Baglamukhi Rahasyam Pitambara peeth datia

13. Mahamritunjaya Mantra Sadhana Vidhi in Hindi and Sanskrit

14. Very Rare and Powerful Mantra Tantra by Shri Yogeshwaranand Ji

15. Mahavidya Baglamukhi Sadhana aur Siddhi

16. Baglamukhi Bhakt Mandaar Mantra 

17. Baglamukhi Sahasranamam

18. Dusmahavidya Mahakali Sadhana

19. Shri Balasundari Triyakshari Mantra Sadhana

20. Sri Vidya Sadhana

21. Click Here to Download Sarabeswara Kavacham

22. Click Here to Download Sharabh Tantra Prayoga

23. Click Here to Download Swarnakarshan Bhairav Mantra Sadhana Vidhi By Gurudev Shri Yogeshwaranand Ji

34. Download Mahakali Mantra Tantra Sadhna Evam Siddhi in Hindi Pdf

Support and Feedback

I am very pleased to say that we are taking a next step ahead in the field of spirituality by digitalizing all the available Sanskrit texts in the world related to secret mantras, tantras and yantras. In the first phase we will digitalize all the content provided by shri yogeshwaranand ji regarding das mahavidyas. We will not only make it available for Hindi and Sanskrit readers but also translate it into English so that whole world can get the benefits from our work. I can’t do it alone. To do the same I request all of you to help me achieve this goal.
Requirements to accomplish this goal
1. We need a person who can write articles in Hindi and Sanskrit in software like Adobe Indesign (Preferable font chanakya)
2. We need a graphic designer who can create good pictures to summarize the content.
3. We need an English translator who can translate these articles into English
4. Money which is highly needed for this project to complete. Any donation for the completion of this project will be highly appreciated.
I am waiting for your feedback and support.
Sumit Girdharwal
+91-9540674788,
+91-9410030994
sumitgirdharwal@yahoo.com
sumitgwal@gmail.com

Mahavidya MahaKali Mantra Tantra Sadhna Evam Siddhi

For Mahakali Mantra Diksha and Sadhana guidance email to shaktisadhna@yahoo.com or sumitgirdharwal@yahoo.com. You can call us on 9917325788 (Shri Yogeshwaranand Ji) or 9540674788 (Shri Sumit Girdharwal Ji). For more information visit http://www.yogeshwaranand.org or http://www.baglamukhi.net

Download Mahakali Mantra Tantra Sadhna Evam Siddhi in Hindi Pdf

महाकाली, महाकाल की वह शक्ति है जो काल व समय को नियन्त्रित करके सम्पूर्ण सृष्टि का संचालन करती हैं। आप दसों महाविद्याओं में प्रथम हैं और आद्याशक्ति कहलाती हैं। चतुर्भुजा के स्वरूप में आप चारों पुरूषार्थों को प्रदान करने वाली हैं जबकि दस सिर, दस भुजा तथा दस पैरों से युक्त होकर आप प्राणी की ज्ञानेन्द्रियों और कर्मेन्द्रियों को गति प्रदान करने वाली हैं। शक्ति स्वरूप में आप शव के उपर विराजित हैं। इसका अभिप्राय यह है कि शव में आपकी शक्ति समाहित होने पर ही शिव, शिवत्व को प्राप्त करते हेैं। यदि शक्ति को शिव से पृथक कर दिया जाये तो शिव भी शव-तुल्य हो जाते हैं। शिव-ई = शव । बिना शक्ति के सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड और शिव शव के समान हैं। मेरे कहने का तात्पर्य यह है कि इस सम्पूर्ण सृष्टि में शिव और शक्ति ही सर्वस्व हैं। उनके अतिरिक्त किसी का कोई आस्तित्व नहीं है।
इस साधना को आरम्भ करने से पूर्व एक साधक को चाहिए कि वह मां भगवती काली की उपासना अथवा अन्य किसी भी देवी या देवता की उपासना निष्काम भाव से करे। उपासना का तात्पर्य सेवा से होता है। उपासना के तीन भेद कहे गये हैं:- कायिक अर्थात् शरीर से , वाचिक अर्थात् वाणी से और मानसिक- अर्थात् मन से।  जब हम कायिक का अनुशरण करते हैं तो उसमें पाद्य, अर्घ्य, स्नान, धूप, दीप, नैवेद्य आदि पंचोपचार पूजन अपने देवी देवता का किया जाता है। जब हम वाचिक का प्रयोग करते हैं तो अपने देवी देवता से सम्बन्धित स्तोत्र पाठ आदि किया जाता है अर्थात् अपने मुंह से उसकी कीर्ति का बखान करते हैं। और जब मानसिक क्रिया का अनुसरण करते हैं तो सम्बन्धित देवता का ध्यान और जप आदि किया जाता है।
जो साधक अपने इष्ट देवता का निष्काम भाव से अर्चन करता है और लगातार उसके मंत्र का जप करता हुआ उसी का चिन्तन करता रहता है, तो उसके जितने भी सांसारिक कार्य हैं उन सबका भार मां स्वयं ही उठाती हैं और अन्ततः मोक्ष भी प्रदान करती हैं। यदि आप उनसे पुत्रवत् प्रेम करते हैं तो वे मां के रूप में वात्सल्यमयी होकर आपकी प्रत्येक कामना को उसी प्रकार पूर्ण करती हैं जिस प्रकार एक गाय अपने बछड़े के मोह में कुछ भी करने को तत्पर हो जाती है। अतः सभी साधकों को मेरा निर्देष भी है और उनको परामर्ष भी कि वे साधना चाहे जो भी करें, निष्काम भाव से करें। निष्काम भाव वाले साधक को कभी भी महाभय नहीं सताता। ऐसे साधक के समस्त सांसारिक और पारलौकिक समस्त कार्य स्वयं ही सिद्ध होने लगते हैं उसकी कोई भी किसी भी प्रकार की अभिलाषा अपूर्ण नहीं रहती ।
मेरे पास ऐसे बहुत से लोगों के फोन और मेल आते हैं जो एक क्षण में ही अपने दुखों, कष्टों का त्राण करने के लिए साधना सम्पन्न करना चाहते हैं। उनका उद्देष्य देवता या देवी की उपासना नहीं, उनकी प्रसन्नता नहीं बल्कि उनका एक मात्र उद्देष्य अपनी समस्या से विमुक्त होना होता है। वे लोग नहीं जानते कि जो कष्ट वे उठा रहे हैं, वे अपने पूर्व जन्मों में किये गये पापों के फलस्वरूप उठा रहे हैं। वे लोग अपनी कुण्डली में स्थित ग्रहों को देाष देते हैं, जो कि बिल्कुल गलत परम्परा है। भगवान शिव ने सभी ग्रहों को यह अधिकार दिया है कि वे जातक को इस जीवन में ऐसा निखार दें कि उसके साथ पूर्वजन्मों का कोई भी दोष न रह जाए। इसका लाभ यह होगा कि यदि जातक के साथ कर्मबन्धन शेष नहीं है तो उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाएगी। लेकिन हम इस दण्ड को दण्ड न मानकर ग्रहों का दोष मानते हैं।व्यहार में यह भी आया है कि जो जितनी अधिक साधना, पूजा-पाठ या उपासना करता है, वह व्यक्ति ज्यादा परेशान रहता है। उसका कारण यह है कि जब हम कोई भी उपासना या साधना करना आरम्भ करते हैं तो सम्बन्धित देवी – देवता यह चाहता है कि हम मंत्र जप के द्वारा या अन्य किसी भी मार्ग से बिल्कुल ऐसे साफ-सुुथरे हो जाएं कि हमारे साथ कर्मबन्धन का कोई भी भाग शेष न रह जाए।

Download Mahakali Mantra Tantra Sadhna Evam Siddhi in Hindi Pdf

Other articles on Mantra Tantra Sadhana in Hindi.

1. Baglamukhi Puja Vidhi in English (Maa Baglamukhi Pujan Vidhi)

2. Dus Mahavidya Tara Mantra Sadhana Evam Siddhi

3. Baglamukhi Pitambara secret mantras by Shri Yogeshwaranand Ji

4. Bagalamukhi Beej Mantra Sadhana Vidhi

5. Baglamukhi Pratyangira Kavach

6. Durga Shabar Mantra

7. Orignal Baglamukhi Chalisa from pitambara peeth datia

8. Baglamukhi kavach in Hindi and English

9. Baglamukhi Yantra Puja

10. Baglamukhi Chaturakshari Mantra Vidhi

11. Dusmahavidya Dhuamavai (Dhoomavati) Mantra Sadhna Vidhi 

12. Mahashodha Nyasa from Baglamukhi Rahasyam Pitambara peeth datia

13. Mahamritunjaya Mantra Sadhana Vidhi in Hindi and Sanskrit

14. Very Rare and Powerful Mantra Tantra by Shri Yogeshwaranand Ji

15. Mahavidya Baglamukhi Sadhana aur Siddhi

16. Baglamukhi Bhakt Mandaar Mantra 

17. Baglamukhi Sahasranamam

18. Dusmahavidya Mahakali Sadhana

19. Shri Balasundari Triyakshari Mantra Sadhana

20. Sri Vidya Sadhana

21. Click Here to Download Sarabeswara Kavacham

22. Click Here to Download Sharabh Tantra Prayoga

23. Click Here to Download Swarnakarshan Bhairav Mantra Sadhana Vidhi By Gurudev Shri Yogeshwaranand Ji

34. Download Mahakali Mantra Tantra Sadhna Evam Siddhi in Hindi Pdf

Follow

Get every new post delivered to your Inbox.

Join 3,969 other followers