Shatkarma Vidhaan षट्कर्म विधान

Shatkarma Vidhaan षट्कर्म विधान

New Book Written By Sri Yogeshwaranand Ji & Sumit Girdharwal Ji

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Sumit Girdharwal
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गणपति प्रयोग , हनुमत प्रयोग , बगलामुखी प्रयोग , धनदा यक्षिणी प्रयोग , प्रत्यंगिरा प्रयोग,  शीघ्र विवाह हेतु अघोरी प्रयोग, सौर्न्दर्य लहरी के तांत्रिक प्रयोग , दुर्गा तंत्र प्रयोग

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Baglamukhi Pratyangira Kavach बगला प्रत्यंगिरा कवच

Baglamukhi Pratyangira Kavach बगला प्रत्यंगिरा कवच

pitambara

इस कवच के पाठ से वायु भी स्थिर हो जाती है। शत्रु का विलय हो जाता है। विद्वेषण, आकर्षण, उच्चाटन, मारण तथा शत्रु का स्तम्भन भी इस कवच के पढ़ने से होता है। बगला प्रत्यंगिरा सर्व दुष्टों का नाश करने वाली, सभी दुःखो को हरने वाली, पापों का नाश करने वाली, सभी शरणागतों का हित करने वाली, भोग, मोक्ष, राज्य और सौभाग्य प्रदायिनी तथा नवग्रहों के दोषों को दूर करने वाली हैं। जो साधक इस कवच का पाठ तीनों समय अथवा एक समय भी स्थिर मन से करता है, उसके लिए यह कल्पवृक्ष के समान है और तीनों लोकों में उसके लिए कुछ भी दुर्लभ नहीं है। साधक जिसकी ओर भरपूर दृष्टि से देख ले, अथवा हाथ से किसी को छू भर दे, वही मनुष्य दासतुल्य हो जाता है।
इस कवच के पाठ से भयंकर से भयंकर तंत्र प्रयोग को भी नष्ट किया जा सकता है लेकिन इसका पाठ केवल बगलामुखी में दीक्षित साधक ही कर सकते हैं। बिना गुरू आज्ञा के इसका पाठ नही करना चाहिए।

 

The recitation of baglamukhi pratyangira kavacham (armor) can stall even the wind, enemies get destroyed. This kavacham can bring any attempt of the enemy to a still. This kavacham destroys all the enemies, ends all sorrows & sins, mitigates the ill-effects of the planetary positions in horoscope, protects the devotees and bestows wealth, kingdom (fame) & fortune. This kavacham is like a wish-fulfilling tree to the devotee who chants this kavacham three times a day or at least once daily with concentration, there is nothing unattainable for him. Any person, who is touched by the devotee or even glanced by him, becomes a slave to the devotee.

This amour destroys even the most invincible spells cast by enemies. But, this should be chanted only after obtaining the deeksha and initiation from a preceptor (Guru).

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Baglamukhi Pratyangira Kavach in Hindi Pdf Free Download Secret and Powerful Tantra

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Bhagwati Baglamukhi Sarva Jana Vashikaran Mantra in Hindi and English भगवती बगलामुखी सर्वजन वशीकरण मंत्र

Bhagwati Baglamukhi Sarva Jana Vashikaran Mantra in Hindi and English भगवती बगलामुखी सर्वजन वशीकरण मंत्र

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मां बगलामुखी को सामान्यतः सभी लोग शत्रुओं का नाश करने वाली, उनकी गति, मति, बुद्धि का स्तम्भन करने वाली, मुकदमे एवं चुनाव आदि में विजय दिलाने वाली शक्ति के रूप में जानते हैं। लेकिन यह बात केवल कुछ ही लोग जानते हैं कि वे जगत का वशीकरण भी करने वाली हैं। यदि उनकी कृपा प्राप्त हो जाये तो साधक की ओर सभी आकर्षित होने लगते हैं, वह जंहा बोलता है, वंही उसे सुनने को जन समूह उमड़ पड़ता है। उसका दायरा बहुत व्यापक हो जाता है। कोई भी स्त्री, पुरूष, बच्चा उसके आकर्षण में ऐसा बंध जाता है कि अपनी सुध-बुध खो बैठता है और वही करने के लिए विवश हो जाता है, जो साधक चाहता है।
इस साधन को करने के लिए अति गोपनीय मंत्र का उल्लेख मैं यंहा साधकों के लिए कर रहा हॅू, लेकिन साधक सदैव स्मरण रखें कि ऐसी साधनाओं का दुष्प्रयोग कभी नहीं करना चाहिए अन्यथा साधक की साधना क्षीण होने लगती है। मंत्र का प्रयोग सदैव समाज कल्याण के लिए करना चाहिए, न कि समाज-विरोधी गतिविधियों के लिए ।
सर्वप्रथम भगवती बगलामुखी की मंत्र दीक्षा ग्रहण करें उसके पश्चात गुरू आज्ञानुसार साधना करें

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Pushp Kinnari Sadhana Evam Mantra Siddhi पुष्प किन्नरी साधना एवं मंत्र सिद्धि

Pushp Kinnari Sadhana Evam Mantra Siddhi  पुष्प किन्नरी साधना एवं मंत्र  सिद्धि

Pushp kinnari sadhana Evam Mantra siddhi in Hindi Pdf

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

प्रत्येक व्यक्ति की आकांक्षा होती है कि उसका व्यक्तित्व आकर्षण से भरा हुआ हो; प्रत्येक व्यक्ति उसकी ओर मुड़-मुड़ कर देखे, प्रत्येक व्यक्ति उसकी ओर चुम्बक के समान खिंचा चला आए। वह चाहता है कि उसका प्रभाव ऐसा हो, जो प्रत्येक व्यक्ति को अपने आकर्षण के बंधन में बांध ले और कोई उससे मुक्त न हो सके।
यदि किसी भी व्यक्ति में ऐसा आकर्षण हो तो ऐसा हो ही नहीं सकता कि वह किसी भी क्षेत्र में असफल हो जाए। ऐसे व्यक्ति को हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है। ऐसे व्यक्तित्व वाला व्यक्ति जो भी करेगा लोग उसका अनुसरण करेंगें, उसकी प्रत्येक बात पर एक विषेष ध्यान देंगें, उसकी प्रत्येक बात मानने को उत्सुक रहेंगे। ऐसा ही आकर्षण प्रदान करने वाली साधना का उल्लेख मैं यंहा कर रहा हॅॅू, जिसका नाम हेै पुष्प किन्नरी साधना ।

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Pushp Kinnari Sadhana Evam Mantra Siddhi in Hindi

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Ma Baglamukhi Unnisakshara Mantra (Bhakt Mandaar Mantra for Money & Wealth)

Ma Baglamukhi Unnisakshara Mantra Sadhana Vidhi (Bhakt Mandaar Mantra for Money & Wealth)

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भगवती बगलामुखी की उपासना कलियुग में सभी कष्टों एवं दुखों से मुक्ति प्रदान करने वाली है। संसार में कोई कष्ट अथवा दुख ऐसा नही है जो भगवती पीताम्बरा की सेवा एवं उपासना से दूर ना हो सकता हो, बस साधकों को चाहिए कि धैर्य पूर्वक प्रतिक्षण भगवती की सेवा करते रहें।

भगवती बगलामुखी का यह भक्त मंदार मंत्र साधकों की हर मनोकामनां पूर्णं करने वाला है। इस मंत्र का विशेष प्रभाव यह है कि इसे करने वाले साधक को कभी भी धन का अभाव नही होता। भगवती की कृपा से वह सभी प्रकार की धन सम्पत्ति का स्वामी बन जाता है।  आज के युग में धन के अभाव में व्यक्ति का कोई भी कार्य पूर्ण नही होता। धन का अभाव होने पर ना ही उसका कोई मित्र होता है और ना ही समाज में उसे सम्मान प्राप्त होता है। इस मंत्र के प्रभाव से धीरे-धीरे साधक को अपने सभी कार्यो में सफलता मिलनी प्रारम्भ  हो जाती है एवं धन का आगमन होना प्रारम्भ हो जाता है।

ऐसा भी देखने में आता है कि कुछ लोग धन तो बहुत अधिक कमातें हैं लेकिन उनके पास बचता कुछ भी नही है, बिना वजह उनके धन का नाश होता है। ऐसे लोगो की जब हम कुण्डली देखते हैं तो षष्ठ(कर्ज) एवं द्वादश (व्यय) भाव शुभ ग्रहों द्वारा प्रभावित होते हैं अथवा एकादश (लाभ) भाव का स्वामी द्वादश (व्यय) भाव में अथवा द्वादश भाव के स्वामी के प्रभाव में होता है, जिस कारण वो जितना भी धन कमाते हैं उतना ही किसी ना किसी रूप में व्यय हो जाता है।

भगवती पीताम्बरा इस सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को चलाने वाली शक्ति हैं। नवग्रहों को भगवती के द्वारा ही विभिन्न कार्य सौपे गये हैं जिनका वो पालन करते हैं। नवग्रह स्वयं भगवती की सेवा में सदैव उपस्थित रहते हैं। जब साधक भगवती की उपसना करता है तो उसे नवग्रहों की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यदि साधक को उसके कर्मानुसार कहीं पर दण्ड भी मिलना होता है तो वह दण्ड भी भगवती की कृपा से न्यून हो जाता है एवं जगदम्बा अपने प्रिय भक्त को इतना साहस प्रदान करती हैं कि वह दण्ड साधक को प्रभवित नही कर पाता। इस सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में कोई भी इतना शक्तिवान नही है जो जगदम्बा कें भक्तो का एक बाल भी बांका कर सके। कहने का तात्पर्य यह है कि कारण चाहें कुछ भी हो भगवती बगलामुखी की उपासना आपको किसी भी प्रकार की समस्या से मुक्त करा सकती है।

मां की कृपा को वही जान पाया है जो उनकी शरण में गया है, इसीलिए अपने शब्दों को यही पर विराम देते हुए मां भगवती से प्रार्थना करता हूं कि आप सभी को भगवती अपनी शरण प्रदान करें एवं आपका कल्याण करे।

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Chinnamasta Mantra Sadhana Evam Siddhi in Hindi

Chinnamasta Mantra Sadhana Evam Siddhi in Hindi

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छिन्नमस्ता दशमहाविद्याओं में षष्ठी महाविद्या हैं। इनका दूसरा नाम ‘प्रचण्ड चण्डिका’ भी हैं। हिरण्यकश्यपु और वैरोचन का मनोरथ पूर्ण करने वाली होने से वज्रवैरोचनीया भी कहलाती हैें।
योगियों के लिए इनकी साधना सर्वश्रेष्ठ है। जो साधक कुण्डलिनी जागरण करना चाहते हैं उन्हें यह साधना गुरू मार्गदर्शन में अवश्य करनी चाहिए।

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Vipreet Pratyangira Mantra Sadhna Evam Siddhi & Puja Vidhi

Vipreet Pratyangira Mantra Sadhna Evam Siddhi & Puja Vidhi   ( श्री विपरीत प्रत्यंगिरा मंत्र  साधना एवं सिद्धि )

Pratyangira Mantra Sadhna Evam Siddhi

 

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Vipreet Pratyangira Mantra Benefits in Hindi

यदि शत्रु निरंतर आप पर अभिचारिक कर्म कर रहा हो, निरंतर किसी न किसी रूप में आपको आर्थिक, मानसिक, सामाजिक, शारीरिक क्षति पहुंचा रहा हो और आपके भविष्य को चैपट कर रहा हो, तब भद्रकाली के इस स्वरूप, अर्थात विपरीत प्रत्यंगिरा का आश्रय लेना सर्वोत्तम उपाय है। जिस दिन से साधक इस महाविधा का प्रयोग आरम्भ करता है, उसी दिन से ही भगवती भद्र काली उसकी सुरक्षा करने लगती हैं और शत्रु द्वारा किये गये अभिचाारिक कर्म दोगुने वेग से उसी पर लौटकर अपना प्रहार करते हैं। इसके अतिरिक्त राजकीय बाधा, अरिष्ट ग्रह बाधा निवारण में तथा अपना खोया हुआ पद, आस्तित्व ओर गरिमा प्राप्ति में भी यह विद्या सर्वोत्तम मानी जाती है। साधक की आयु, यश तथा तेज की वृद्धि करने में भी यह विद्या बहुत उत्तम मानी जाती है।

Vipreet Pratyangira Mantra Benefits in English

A most powerful Mantra Sadhana to invoke Devi Pratyangira is given here. Vipreet Pratyangira Mantra Sadhna  is  used to destroy the mind of an enemy who is unnecessarily troubling and bent upon harming some innocent and helpless person. confuses the enemy by destroying  his harmful and destructive thinking and by confusing his mind. As always clarified such sadhnas should only be performed under the highly advanced practitioner (Your Guru) after mantra diksha.

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आप सभी को कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें krishna janmashtami 2016

आप सभी को कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें।  वेदान्त के परम ब्रह्म ही साकार रूप में भगवान श्रीकृष्ण हैं| उनका जन्म निरंतर हमारे ह्रदय में हो, हम निरंतर उनके चैतन्य में रहें, उनकी ज्योति हमारी ज्योति हो, और उनके व हमारे मध्य कोई भेद ना हो|

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“न तत्र सूर्यो भाति न चन्द्र तारकं,
नेमा विद्युतो भान्ति कुतोSयमग्निः,
तमेव भान्तमनुभाति सर्वं,
तस्य भासा सर्वमिदं विभाति |”

श्री कृष्णजन्माष्टमी भगवान श्री कृष्ण का जनमोत्स्व है। योगेश्वर कृष्ण के भगवद गीता के उपदेश अनादि काल से जनमानस के लिए जीवन दर्शन प्रस्तुत करते रहे हैं। जन्माष्टमी भारत में हीं नहीं बल्कि विदेशों में बसे भारतीय भी इसे पूरी आस्था व उल्लास से मनाते हैं। श्रीकृष्ण ने अपना अवतार भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि को अत्याचारी कंस का विनाश करने के लिए मथुरा में लिया। चूंकि भगवान स्वयं इस दिन पृथ्वी पर अवतरित हुए थे अत: इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं।

श्रीकृष्ण-जन्माष्टमी की रात्रि को मोहरात्रि कहा गया है। इस रात में योगेश्वर श्रीकृष्ण का ध्यान, नाम अथवा मंत्र जपते हुए जगने से संसार की मोह-माया से आसक्तिहटती है। जन्माष्टमी का व्रत व्रतराज है। इसके सविधि पालन से आज आप अनेक व्रतों से प्राप्त होने वाली महान पुण्यराशिप्राप्त कर लेंगे।

sri krishna maha mantra

 

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Shatkarm Vidhan Upcoming Book

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प्रबल कामना और अभ्यास ही सफलता और चमत्कार की कुंजी है।

प्रबल कामना और अभ्यास ही सफलता और चमत्कार की कुंजी है।
बहुत से लोग संदेह में ही अपनी सफलता को नष्ट कर लेते हैं। जरा सी कठिनाई हुई नहीं कि असमंजस में पड़ जाते हैं। प्रकृति से भी कुछ नहीं सीखते। यहाँ एक व्यवस्था कायम है। आप जैसी कामना करेंगे और उस पर अभ्यास करेंगे, वह सब कुछ आपको प्राप्त होगा। प्रकृति के शब्दकोश में असंभव शब्द नहीं है।
आध्यात्मिक रूप से कहा जाए, तो इस प्रकृति के प्रत्येक इकाई में परमात्मा का ही अंश विद्यमान है। भले ही वह स्थानीय धाराओं और अपने ऊर्जा चक्रों में बंधा हुआ है, पर वह परमात्मा है। वह लगातार गहन कामना करता रहे और अपने शरीर को कामना के अनुसार अभ्यासित करता रहे ; तो वह अपनी कामना के अनुरूप ही अतिरिक्त शक्तियों को प्राप्त कर सकता है। सर्कस में , रेस में, पर्वतारोहण में सर्वत्र इसे फलित होते देखनेवाला मनुष्य यह नहीं देखता कि किसीने चाहा कि दुनिया को रौशन कर दे, उसने कर दिया। किसी ने चाहा कि वह हवा में उड़े, उसने सबको उड़ने का मार्ग बता दिया। साधनाएं चाहे बाहरी आविष्कारों की हो, या शरीर की ऊर्जा को प्रयुक्त करने की नियम सबकी प्राप्ति के लिए एक ही हैं। प्रबल कामना , अभ्यास और जिद्द । प्रो. राम मूर्ती इतने दुर्बल थे कि हाईस्कूल तक सभी उनका मजाक उड़ाते थे और यह व्यक्ति अपनी छाती पर हाथियों को पास करवाने लगा। किशोर कुमार ने कहीं संगीत की शिक्षा नहीं ली थी। एक व्यक्ति में नेचर था कि जैसे ही कुछ शरीर के नजदीक आता, वह सिहर जाता था।किशोरवस्था में ही उसके शरीर में बिजली बनने लगी।

जब मैं सनातन धर्म के इन नियमों का परिक्षण कर रहा था, मुझे जानकारियों के लिए बहुत परिश्रम करना पड़ता था। हर चीज स्वयं परीक्षित और अनुभव करनी पड़ती थी, पर आज जब मैं डिस्कवरी जैसे चैनलों को देखता हूँ; तो पाता हूँ कि प्रत्येक जीव ने अपनी-अपनी अलग-अलग क्षमताएं विकसित कर ली है। कुछ हवा से पानी में उतर गये और उसके अनुसार ढल गये। जिसको जहाँ जैसा खतरा हुआ, वैसा ही रूप रंग शरीर विकसित हो गया , जिसको जहाँ जैसे औजार कीई जरूरत हुई , वह उसके शरीर में ही विकसित हो गये। यहाँ तक कि जीन्स तक परिवर्तित हो गये, अंग परिवर्तित हो गये।
इन्हें अलग-अलग मत देखिये। इनमें इन नियमों की समानता देखिये, जिसने जैसी कामना की, जैसा अभ्यास  किया , वह वैसा ही हो गया। योग का एक आधार सूत्र है कि ध्यान योग में डूबकर जैसी कामना करोगे, वैसे ही हो जाओगे। तन्त्र भी यही कहता है और समस्त आध्यात्मिक जगत इसी सूत्र पर खड़ा है। जैसी भावना होगी, वैसे ही कर्म होंगे , वैसा ही अगला-पिछ्ला जन्म होगा।
एक बहुत बड़ी अज्ञानता है यह सोचना कि यह केवल आध्यात्म के सूत्र हैं। यह जीवन के प्रत्येक क्षेत्र की प्राप्ति के लिए सफलता के सूत्र हैं। यह प्रकृति परमात्मा की कामना से उत्पन्न हुई है और यह वचनबद्ध है (नियमबद्ध है) कि अपने अंदर की प्रत्येक इकाई की कामना की पूर्ती करे। इसके प्रत्येक क्षेत्र में व्याप्त ऊर्जा में घूर्णन बल अधिक है, इसलिए परिवर्तन की गति संघर्ष युक्त होने के कारण तुंरत फल अनुभूत नहीं होता, पर यदि भावनात्मक गहनता अधिक हो, तो यह शीघ्र ही अनुभूत होने लगता है

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Upcoming Book Shatkarm Vidhan

All the articles on Mantra Tantra Sadhana

1. Baglamukhi Puja Vidhi in English (Ma Baglamukhi Pujan Vidhi)

2. Dus Mahavidya Tara Mantra Sadhana Evam Siddhi

3. Baglamukhi Pitambara secret mantras by Shri Yogeshwaranand Ji

4. Bagalamukhi Beej Mantra Sadhana Vidhi

5. Baglamukhi Pratyangira Kavach

6. Durga Shabar Mantra

7. Orignal Baglamukhi Chalisa from pitambara peeth datia

8. Baglamukhi kavach in Hindi and English

9. Baglamukhi Yantra Puja

10. Download Baglamukhi Chaturakshari Mantra and Puja Vidhi in Hindi Pdf

11. Dusmahavidya Dhuamavai (Dhoomavati) Mantra Sadhna Vidhi 

12. Mahashodha Nyasa from Baglamukhi Rahasyam Pitambara peeth datia

13. Mahamritunjaya Mantra Sadhana Vidhi in Hindi and Sanskrit

14. Very Rare and Powerful Mantra Tantra by Shri Yogeshwaranand Ji

15. Mahavidya Baglamukhi Sadhana aur Siddhi

16. Baglamukhi Bhakt Mandaar Mantra 

17. Baglamukhi Sahasranamam

18. Dusmahavidya Mahakali Sadhana

19. Shri Balasundari Triyakshari Mantra Sadhana

20. Sri Vidya Sadhana

21. Click Here to Download Sarabeswara Kavacham

22. Click Here to Download Sharabh Tantra Prayoga

23. Click Here to Download Swarnakarshan Bhairav Mantra Sadhana Vidhi By Gurudev Shri Yogeshwaranand Ji

34. Download Mahakali Mantra Tantra Sadhna Evam Siddhi in Hindi Pdf

35. Download Twenty Eight Divine Names of Lord Vishnu in Hindi Pdf

36. Download Shri Hanuman Vadvanal Stotra in Hindi Sanskrit and English Pdf

37. Download Shri Narasimha Gayatri Mantra Sadhna Evam Siddhi in Hindi Pdf

38. Download Santan Gopal Mantra Vidhi in Hindi and Sanskrit  Pdf

39. Download Shabar Mantra Sadhana Vidhi in Hindi Pdf

40. Download sarva karya siddhi hanuman mantra in hindi

41. Download Baglamukhi Hridaya Mantra in Hindi Pdf

42. Download Baglamukhi Mantra Avam Sadhna Vidhi in Hindi

43. Download Shiva Shadakshari Mantra Sadhna Evam Siddhi ( Upasana Vidhi)

44. Download Vipreet Pratyangira Mantra Sadhna Evam Siddhi & Puja Vidhi in Hindi Pdf

45. Download Aghorastra Mantra Sadhna Vidhi in Hindi & Sanskrit  Pdf

46. Download Shri Lalita Tripura Sundari khadgamala Stotram in Sanskrit & Hindi Pdf

47. Download Sarva Karya Siddhi Saundarya Lahri Prayoga in Hindi Pdf

48. Download Pashupatastra Mantra Sadhana Evam Siddhi  Pdf in Hindi & Sanskrit

49. Download Param Devi Sukt of Ma Tripursundari Mantra to attract Money & Wealth

50. Download Very Powerful Hanuman Mantra Sadhna and Maruti Kavach in Hindi Pdf

51. Download Baglamukhi Pitambara Ashtottar Shatnam Stotram

52. Download Magha Gupta Navaratri 2015 Puja Vidhi and Panchanga

53. Download Baglamukhi Chaturakshari Mantra and Puja Vidhi in Hindi Pdf

54. Chinnamasta Mantra Sadhana Evam Siddhi in Hindi

55. Download Baglamukhi Ashtakshar Mantra Sadhana in Hindi

56. Download Baglamukhi Bhakt Mandaar Mantra for Wealth & Money

57. Download Shiv Sadhana Vidhi on Shivratri 12 August 2015 Shiv Puja Vidhi in Hindi Pdf

58. Pushp Kinnari Sadhana Evam Mantra Siddhi in Hindi

59. Download Bhagwati Baglamukhi Sarva Jana Vashikaran Mantra in Hindi and English Pdf

श्रावण शिवरात्रि पूजा विधि How to do Pooja on Shivratri 1 August 2016

श्रावण शिवरात्रि पूजा विधि How to do Pooja on Shivratri  1 August 2016

सबसे पहले आप सभी को श्रावण मॉस शिवरात्रि की बहुत बहुत शुभकामनाएं। हमारी महाकाल से यही प्रार्थना है कि आप सभी सपरिवार सदैव प्रसन्न रहें और और आपके सभी कष्ट इस पवित्र शिवरात्रि पर दूर हो जाएँ।

अधिक जानकारी के लिए हमें संपर्क करें –

9410030994 (Sumit Girdharwal Ji) or 9917325788 (Shri Yogeshwaranand Ji)

lord shiva

आज के समय व्यस्तता के कारण किसी के पास अधिक समय नहीं है और न ही बहुत ही अधिक विधि विधान से पूजा करने का तरीका पता है। ऐसे लोगो के लिए ही हम यहाँ भगवान् शिव की पूजा की सरल विधि प्रस्तुत कर रहें हैं –

१- कल शिवलिंग पर एक लोटा जल चढ़ाएँ। जो थोड़ा अधिक कर सकतें हैं वो लोटे में सबसे पहले थोड़ा गंगा जल, उसके बाद साधारण जल , थोड़ा शहद , थोड़ा कच्चा दूध मिला लें और फिर ॐ नमः शिवाय बोलते हुए शिवलिंग पर चढ़ा दें। साथ में यदि हो सके तो कुछ बेल पत्र भी चढ़ाएँ। जो लोग और अधिक करना चाहते है वो १०८ लोटों से शिवलिंग को स्नान कराएं।

२ – जो लोग मंदिर नहीं जा सकते है वो लोग घर पर ही भगवान् शिव के सामने दीपक जलाएं यथा संभव ॐ नमः शिवाय का जप करें।

३ – सभी को यथा संभव पुरे दिन ॐ नमः शिवाय का मानसिक रूप से जप करना चाहिए।

४ – कल जिनके पास समय है उन्हें रुद्राभिषेक करना चाहिए। जो स्वयं नहीं कर सकते उन्हें किसी वेद पाठी ब्राह्मण से रुद्राभिषेक कराना चाहिए।

५- जो लोग स्वयं रुद्राभिषेक करना चाहते हैं उनके लिए नीचे यूटयूब वीडियो दी गयी है। जो लोग पाठ नहीं कर सकते वो इसको सुनकर लाभ ले सकते है। पढ़ने के लिए पीडीऍफ़ भी दी गयी है हिंदी इंग्लिश एवं संस्कृत में।

 

Rudrashtadhyayi HindiBook Pdf

Complete PDF of 16 Verses in praise of Rudra from Rudrashtadhyayi

हमारे द्वारा लिखे हुए कुछ अन्य लेख जो शिव साधना के लिए बहुत अधिक उपयोगी हैं नीचे दिए गए हैं –

Shiva Shadakshari Mantra Sadhna Evam Siddhi

Pashupatastra Mantra Sadhana Evam Siddhi

Aghorastra Mantra Sadhna Vidhi

Shiv Sadhana Vidhi on Shivratri

जानिए शिवपुराण के अनुसार धन लाभ यश प्राप्ति के उपाय

जो लोग कल रुद्राभिषेक करना चाहते हैं लेकिन किसी कारण आप उसमे स्वयं उपस्थित नहीं हो सकते तो हम आपके नाम से यह पाठ करा सकते हैं। इसके लिए आप हमें नीचे लिखी जानकारी भेजें –  (Those who want to get Rudrabhishek done on their behalf send us below details)
१. आपका नाम  ( Your Name )
२. आपके माता पिता का नाम  (Your Parent’s Name)
३. आपके परिवार के अन्य सदस्यों का नाम  (Name of other family members who want to get benefit)
४. आपका गोत्र  (Your gotra. If you don’t know it is ok not to send)
५. आपका एक फोटोग्राफ (Your latest photograph)

६. आपका पता जहां पूजा का प्रसाद आपको भेजा जायेगा। (Your address where we will send pooja prasaad)

पूजा के दौरान एक पारद शिवलिंग एवं एक रुद्राक्ष को प्राण प्रतिष्टित किया जायेगा जो आपके पते पर आपको भेज दिया जायेगा। इस पारद शिवलिंग को घर के पूजा घर में स्थापित करना है और रुद्राक्ष को अपने गले में अथवा पूजा घर में ही रखा जा सकता है। ( We will send one parad shivling and one rudraksha at your given address as a prasaad after this pooja )

इस संपूर्ण पूजा का  शुल्क Rs 3100 है जिसे आप नीचे लिखे अकाउंट में जमा करा सकते हैं।  (Deposit Rs 3100/= in below account)

Sumit Girdharwal
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IFSC Code – UTIB0001094

OR
Rupali Singh
34362973431
State Bank of India
IFSC Code – SBIN0003058

अधिक जानकारी के लिए हमें संपर्क करें –

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सरल स्वभाव एवं अंतः करण की शुद्धता

इस कहानी को पढ़कर बहुत ही अच्छा लगा सोचा आप सब लोगों से भी शेयर करूँ।  इससे हमें यह शिक्षा मिलती है की प्रभु को प्राप्त करने के लिए कठोर साधना की नहीं बल्कि सरल स्वभाव एवं शुद्ध अंतः करण  की आवश्यक्ता है।

छोटे-से गांव में एक दरिद्र विधवा ब्राह्मणी रहती थी। छह वर्षीय बालक मोहन के अतिरिक्त उसका और कोई नहीं था।

वह दो-चार भले घरों से भिक्षा मांगकर अपना तथा बच्चे का पेट भर लेती और भगवान का भजन करती थी। भीख पूरी न मिलती तो बालक को खिलाकर स्वयं उपवास कर लेती। यह कम चलता रहा।  ब्राह्मणी को लगा कि ब्राह्मण के बालक को दो अक्षर न आए यह ठीक नहीं है। गांव में पढ़ाने  की व्यवस्था नहीं थी। गाँव से दो कोस पर एक पाठशाला थी। ब्राह्मणी अपने बेटे को लेकर वहा गई। उसकी दरिद्रता तथा रोने पर दया करके वहां के अध्यापक ने बच्चे को पढ़ाना स्वीकार कर लिया।

वहां पढने वाले छात्र गुरु के घर में रहते थे किंतु ब्राह्मणी का पुत्र मोहन अभी बहुत छोटा था और ब्राह्मणी को भी अपने पुत्र को देखे विना चैन नहीं पड़ता था अत: मोहन नित्य पढ़ने जाता और सायंकाल घर लौट आता। उसको विद्या प्राप्ति के लिए प्रतिदिन चार कोस चलना पड़ता। मार्ग में कुछ दूर जंगल था। शाम को लौटने में अंधेरा होने लगता था। उस जंगल में मोहन को डर लगता था।

एक दिन गुरुजी के यहा कोई उत्सव था। मोहन को अधिक देर हो गई और जब वह घर लौटने लगा रात्रि हो गई थी। अंधेरी रात जंगली जानवरों की आवाजों से बालक मोहन भय से थर-थर कांपने लगा। ब्राह्मणी भी देर होने के कारण बच्चे को ढूंढने निकली थी। किसी प्रकार अपने पुत्र को वह घर ले आई। मोहन ने सरलता से कहा : ”मां ! दूसरे लड़को को साथ ले जाने तो उनके नौकर आते हैं। मुझे जंगल में आज बहुत डर लगा। तू मेरे लिए भी एक नौकर रख दे।” बेचारी ब्राह्मणी रोने लगी। उसके पास इतना पैसा कहा कि नौकर रख सके।

माता को रोते देख मोहन ने कहा : ”मां ! तू रो मत ! क्या हमारा और कोई नहीं है ?” अब ब्राह्मणी क्या उत्तर दे ? उसका हृदय व्यथा से भर गया।उसने कहा : ”बेटा ! गोपाल को छोड़कर और कोई हमारा नहीं है।” बच्चे की समझ में इतनी ही बात आई कि कोई गोपाल उसका है।
उसने पूछा : ”गोपाल कौन ? वे क्या लगते हैं मेरे और कहा रहते हैं ?” ब्राह्मणी ने सरल भाव से कह दिया : ”वे तुम्हारे भाई लगते हैं। सभी जगह रहते हैं परंतु आसानी से नहीं दिखते। संसार में ऐसा कौन सा स्थान है जहां वे नहीं रहते। लेकिन उनको तो देखा था ध्रुव ने, प्रहलाद ने ओर गोकुल के गोपों ने।” बालक को तो अपने गोपाल भाई को जानना था। वह पूछने लगा : गोपाल मुझसे छोटे हैं या बड़े अपने घर आते हैं या नहीं?माता ने उसे बताया : ”तुमसे वे बड़े हैं और घर भी आते हैं पर हम लोग उन्हें देख नहीं सकते। जो उनको पाने के लिए व्याकुल होता है उसी के पुकारने पर वे उसके पास आते हैं।”

मोहन ने कहा : ”जंगल में आते समय मुझे बड़ा डर लगता है। मैं उस समय खूब व्याकुल हो जाता हूं। वहां पुकारू तो क्या गोपाल भाई आएंगे ?” माता ने कहा : ”तू विश्वास के साथ पुकारेगा तो अवश्य वे आएंगे।” मोहन की समझ में इतनी बात आई कि जंगल में अब डरने की जरूरत नहीं है। डर लगने पर मैं व्याकुल होकर पुकारूंगा तो मेरा गोपाल भाई वहा आ जाएगा। दूसरे दिन पाठशाला से लौटते समय जब वह वन में पहुचा उसे डर लगा। उसने पुकारा : ”गोपाल भाई ! तुम कहां हो ? मुझे यहा डर लगता है। मैं व्याकुल हो रहा हूं। गोपाल भाई !” जो दीनबंधु हैं दीनों के पुकारने पर वह कैसे नहीं बोलेंगे। मोहन को बड़ा ही मधुर स्वर सुनाई पड़ा : ”भैया ! तू डर मत। मैं यह आया।” यह स्वर सुनते ही मोहन का भय भाग गया।

थोड़ी दूर चलते ही उसने देखा कि एक बहुत ही सुंदर ग्वालबाल उसके पास आ गया। वह हाथ पकड़कर बातचीत करने लगा। साथ-साथ चलने लगा। उसके साथ खेलने लगा। वन की सीमा तक वह पहुंचाकर लौट गया। गोपाल भाई को पाकर मोहन का भय जाता रहा। घर आकर उसने जब माता को सब बातें बताईं तब वह ब्राह्मणी हाथ जोडकर गदगद हो अपने प्रभु को प्रणाम करने लगी।

उसने समझ लिया जो दयामयी द्रोपदी और गजेंद्र की पुकार पर दौड़ पड़े थे मेरे भोले बालक की पुकार पर भी वही आए थे। ऐसा ही नित्य होने लगा.. एक दिन उसके गुरुजी के पिता का श्राद्ध होने लगा। सभी विद्यार्थी कुछ न कुछ भेंट देंगे। गुरुजी सबसे कुछ लाने को कह रहे थे।

मोहन ने भी सरलता से पूछा : “गुरुजी ! मैं क्या ले आऊं ?” गुरु को ब्राह्मणी की अवस्था का पता था। उन्होंने कहा : ‘बेटा ! तुमको कुछ नहीं लाना होगा।’ लेकिन मोहन को यह बात कैसे अच्छी लगती। सब लड़के लाएंगे तो मैं क्यों न लाऊं उसके हठ को देखकर गुरुजी ने कह दिया : ”अच्छा तुम एक लोटा दूध ले आना।”  घर जाकर मोहन ने माता से गुरुजी के पिता के श्राद्ध की बात कही और यह भी कहा” मुझे एक लोटा दूध ले जाने की आज्ञा मिली है।” ब्राह्मणी के घर में था क्या जो वह दूध ला देती। मांगने पर भी उसे दूध कौन देता लेकिन मोहन ठहरा बालक। वह रोने लगा।  अंत में माता ने उसे समझाया : ”तू गोपाल भाई से दूध मांग लेना। वे अवश्य प्रबंध कर देंगे।”
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दूसरे दिन मोहन ने जंगल में गोपाल भाई को जाते ही पुकारा और मिलने पर कहा : ”आज मेरे गुरुजी के पिता का श्राद्ध है। मुझे एक लोटा दूध ले जाना है। मां ने कहा है कि गोपाल भाई से मांग लेना। सौ मुझे तुम एक लोटा दूध लाकर दो।”  गोपाल ने कहा : ”मैं तो पहले से यह लौटा भर दूध लाया हूं । तुम इसे ले जाओ।” मोहन बड़ा प्रसन्न हुआ।  पाठशाला में गुरुजी दूसरे लड़कों के उपहार देखने और रखवाने में लगे थे। मोहन हंसता हुआ पहुंचा। कुछ देर तो वह प्रतीक्षा करता रहा कि उसके दूध को भी गुरुजी देखेंगे। पर जब किसी का ध्यान उसकी ओर न गया तब वह बोला : ‘गुरुजी ! मैं दूध लाया हूं।’ गुरु जी ढेरों चीजें सम्हालने में व्यस्त थे। मोहन ने जब उन्हें स्मरण दिलाया तब झुंझलाकर बोले : ”जरा-सा दूध लाकर यह लड़का कान खाए जाता है जैसे इसने हमें निहाल कर दिया। इसका दूध किसी बर्तन से डालकर हटाओ इसे यहां से।” मोहन अपने इस अपमान से खिन्न हो गया। उसका उत्साह चला गया। उसके नेत्रों से आंसू गिरने लगे। नौकर ने लोटा लेकर दूध कटोरे मे डाला तो कटोरा भर गया फिर गिलास में डाला तो वह भी भर गया। बाल्टी में टालने लगा तो वह भी भर गई। भगवान के हाथ से दिया वह लोटा भर दूध तो अक्षय था। नौकर घबराकर गुरुजी के पास गया। उसकी बात सुनकर गुरुजी तथा और सब लोग वहां आए अपने सामने एक बड़े पात्र में दूध डालने को उन्होंने कहा। पात्र भर गया पर लोटा तनिक भी खाली नहीं हुआ। इस प्रकार बड़े-बड़े बर्तन दूध से भर गए।
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अब गुरुजी ने पूछा : ”बेटा ! तू दूध कहां से लाया हें ?” सरलता से बालक ने कहा : ”मेरे गोपाल भाईआ ने दिया।” गुरुजी और चकित हुए। उन्होंने पूछा : ”गोपाल भाई कौन ? तुम्हारे तो कोई भाई नहीं।” मोहन ने दृढ़ता से कहा : ”है क्यों नहीं। गौपाल भाई मेरा बड़ा भाई है। वह मुझे रोज वन में मिल जाते है। मां कहती हैं कि वह सब जगह रहता है पर दिखता नहीं कोई उसे खूब व्याकुल होकर पुकारे तभी वह आ जाता है। उससे जो कुछ मांगा जाए वह तुरंत दे देता है।” अब गुरुजी को कुछ समझना नहीं था। मोहन को उन्होंने हृदय से लगा लिया। श्राद्ध में उस दूध से खीर बनी और ब्राह्मण उसके स्वाद का वर्णन करते हुए तृप्त नहीं होते थे । गोपाल भाई के दूध का स्वाद स्वर्ग के अमृत में भी नहीं तब संसार के किसी पदार्थ में कहां से होगा। उस दूध का बना श्राद्धान्त पाकर गुरुजी के पितर तृप्त ही नहीं हुए, माया से मुक्त भी हो गए।

श्राद्ध समाप्त हुआ। संध्या को सब लोग चले गए। मोहन को गुरुजी ने रोक लिया था। अब उन्होंने कहा : ”बेटा ! मैं तेरे साथ चलता हूं। तू मुझे अपने गोपाल भाई के दर्शन करा देगा न ?” मोहन ने कहा : ”चलिए मेरा गोपाल भाई तो पुकारते ही आ जाता है।” वन में पहुंच कर उसने पुकारा। उत्तर में उसे सुनाई पड़ा : ”आज तुम अकेले तो हो नहीं तुम्हें डर तो लगता नहीं, फिर मुझे क्यों बुलाते हो ?”  मोहन ने कहा : ”मेरे गुरुजी तुम्हें देखना चाहते हैं तुम जल्दी आओ !” जब मोहन ने गोपाल भाई को देखा तो गुरुजी से कहा : ”आपने देखा मेरा गोपाल भाई कितना सुदर है ?”  गुरुजी कहने लगे : “मुझे तो दिखता ही नहीं। मैं तो यह प्रकाशमात्र देख रहा हूं।”  अब मोहन ने कहा : “गोपाल भाई ! तुम मेरे गुरुजी को दिखाई क्यों नहीं पड़ते ?”

उत्तर मिला : ”तुम्हारी बात दूसरी है। तुम्हारा अत: करण शुद्ध है तुम्हारा स्वभाव सरल है, अत: मैं तुम्हारे पास आता हूं।तुम्हारे गुरुदेव को जो प्रकाश दिख गया उनके लिए वही बहुत है। उनका इतने से ही कल्याण हो जाएगा।”  उस अमृत भरे स्वर को सुनकर गुरुदेव का हृदय गदगद हो गया। उनको अपने हृदय में भगवान के दर्शन हुए। भगवान की उन्होंने स्तुति की। कुछ देर में जब भगवान अंतर्धान हो गए, तब मोहन को साथ लेकर वे उसके घर आए और वहां पहुंचकर उनके नेत्र भी धन्य हो गए।

गोपाल भाई उस ब्राह्मणी की गोद में बैठे थे और माता के नेत्रों की अश्रुधार उनकी काली धराली अलकों को भिगो रही थी। माता को शरीर की सुध-बुध ही नहीं थी।


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भक्ति

भक्ति में कामना जरा भी नहीं रहती…..अगर भक्ति में कामना रहे, तो भक्ति का प्रश्न ही नहीं। अगर आपने परमात्मा से कुछ मांगा, तो चूक गए…कुछ भी मांगा तो चूक गए। आपने कहा कि मेरी पत्नी बीमार है ठीक हो जाए, कि मेरे बेटे को नौकरी नहीं लगती नौकरी लग जाए, तो समझो आप चूक रहे हो, अवसर को खो रहे हो…फिर तो यह प्रार्थना न रही, यह तो कामना हो गयी।

भक्ति तो तभी है जब कोई भी मांग न हो, जब कोई अपेक्षा न हो, जब स्वयं का कोई विचार ही न हो, सब कुछ मौन में परिवर्तित हो जाये कहने को कुछ शेष रहे ही ना शब्द उनकी कृपा में विलीन हो जाये। भक्ति शुद्ध धन्यवाद है, मांग का सवाल ही नहीं है..

जो दिया वह इतना ज्यादा है कि हम अनुगृहीत हैं। जो दिया, वह हमारी पात्रता से कहीँ अधिक है, जिस संसार सागर के गर्त में हम गिरे हुए है हम तो जरा सी कृपा के अधिकारी भी नहीँ फिर भी हम भक्ति के अधिकारी हुए ये उनकी कृपा नही तो और क्या है।

ऐसी कृतज्ञता का नाम ही तो भक्ति है, भक्ति सौ प्रतिशत प्रीति है..!

Bhakti ka Vastwik Arth

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Guru Purnima Puja Vidhi in Hindi 19th July 2016 गुरूपूर्णिमा पूजन विधि

Guru Purnima Puja Vidhi in Hindi 19th July 2016  गुरूपूर्णिमा पूजन विधि

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ईश्वर उपासना में सर्वप्रथम गुरू पूजन किया जाता है। परमात्मा का साक्षात्कार तो इतना सरल नही है लेकिन वही परमात्मा इस संसार में साकार रूप में आपकी प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप में सहायता करता है। गुरूदेव के मार्गदर्शन से ही साधक ईश्वर को प्राप्त करता है। बिना गुरू के ईश्वर को पाना इतना सरल नही है। यदि ईश्वर को पाना इतना सरल हो जाये तो ईश्वर का महत्व ही इस संसार से समाप्त हो जायेगा। यदि ईश्वर की अनुभूति शीघ्र हो जाये तो साधक को इस बात का अंहकार हो जाता है एवं उसकी आध्यात्मिक प्रगति रूक जाती है, इसीलिए ईश्वर ही स्वप्न व ध्यान में संकेत द्वारा गुरू रूप में दर्शन देकर मार्ग प्रदर्शन करता है। इष्ट ही गुुरू रूप में दर्शन देता है। गुरू ईश्वर की महिमा का वर्णन करता है एवं इष्ट ही गुरू रूप में दर्शन देकर गुरू की महिमा बढ़ाता है।
आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा या व्यास पूर्णिमा कहते हैं। भारत भर में यह पर्व बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दिन गुरुपूजा का विधान है।
वैसे तो दुनिया में कई विद्वान हुए हैं परंतु चारों वेदों के प्रथम व्याख्या कर्ता व्यास ऋषि थे, जिनकी आज के दिन पूजा की जाती है। हमें वेदों का ज्ञान देने वाले व्यासजी ही हैं। अतः वे हमारे आदिगुरु हुए, इसीलिए गुरुपूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है।
उनकी स्मृति को ताजा रखने के लिए हमें अपने-अपने गुरुओं को व्यासजी का अंश मानकर उनकी पूजा करके उन्हें कुछ न कुछ दक्षिणा देते हैं। हमें यह याद रखना चाहिए कि महात्माओं का श्राप भी मोक्ष की प्राप्ति कराता है। यदि राजा परीक्षित को ऋषि का श्राप नहीं होता तो उनकी संसार के प्रति जो आसक्ति थी वह दूर नहीं होती। आसक्ति होने के कारण उन्हें वैराग्य नहीं होता और वैराग्य के बिना श्रीमद्भागवत के श्रवण का अधिकार प्राप्त नहीं होता। साधु के श्राप से ही उन्हें भगवान नारायण, शुकदेव के दर्शन और उनके द्वारा देव दुर्लभ श्रीमद्भागवत का श्रवण प्राप्त हुआ।
इसके मूल में ही साधु का श्राप था। जब साधु का श्राप इतना मंगलकारी है तो साधु की कृपा न जाने क्या फल देने वाली होती होगी। अतः हमें गुरूपूर्णिमा के दिन अपने गुरु का स्मरण अवश्य करना चाहिए।

गुरू पूजन विधि
यदि इस दिन अपने गुरू देव के दर्शन प्राप्त हो जाये तो इससे अधिक प्रसन्नता का विषय तो हो नही सकता, लेकिन किसी कारण वश यदि गुरू देव का साक्षात्कार इस दिन ना हो सके तो उनका पूजन अवश्य करना चाहिए।
सर्वप्रथम आसन पर बैठ जायें एवं आचमन करें। उसके पश्चात अपने गुरूदेव का ध्यान करें एवं उनकी फोटो के आगे दीपक जलायें, यदि फोटो ना हो तो भगवान शिव के आगे भी ऐसा कर सकते हैं। उसके पश्चात उनके आगे कुछ प्रसाद रखें एवं पीले पुुष्पों की माला उनका भेंट करें। सामर्थ्यानुसार  उनके लिए कुछ दक्षिणा एवं कपडे़ रखने चाहिए जिन्हे बाद मेें मिलने पर उन्हें भेंट करें।
इसके पश्चात गुरू मंत्र का अधिक से अधिक संख्या में जप करना चाहिए।
मंत्र – ओम् परमतत्वाय योगेश्वराय गुरूभ्यो नमः
इसके पश्चात अपने इष्ट का जप करें एवं वह जप अपने गरूदेव को समर्पित करें।
इस दिन अपने गुरू देव के सर्व मंगल की एवं उनके शतायु होने की प्रार्थना परमात्मा से अवश्य करनी चाहिए।
आप सभी पर परमात्मा एवं गुरूजनों की सदैव अनुकम्पा बनी रहे, इसी प्रार्थना के साथ अपने शब्दों  को विराम देते हैं।

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जानिए शिवपुराण के अनुसार धन लाभ यश प्राप्ति के उपाय

इस सृष्टि का निर्माण भगवान शिव की इच्छा मात्र से ही हुआ है। अत: इनकी भक्ति करने वाले व्यक्ति को संसार की सभी वस्तुएं प्राप्त हो सकती हैं। शिवजी अपने भक्तों की समस्त मनोकामनाएं पूरी कर देते हैं। शिवपुराण के अनुसार, नियमित रूप से शिवलिंग का पूजन करने वाले व्यक्ति के जीवन में दुखों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है।

शिवपुराण एक ऐसा शास्त्र है, जिसमें शिवजी और सृष्टि के निर्माण से जुड़ी रहस्यमयी बातें बताई गई हैं। इस पुराण में कई चमत्कारी उपाय भी बताए गए हैं, जो हमारे जीवन की धन संबंधी समस्याएं को तो खत्म करते हैं। साथ ही, अक्षय पुण्य भी प्रदान करते हैं।

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 इन उपायों से पिछले पापों का नाश होता है और भविष्य सुखद बनता है।

यदि आप भी शिवजी की कृपा से धन संबंधी समस्याओं से छुटकारा पाना चाहते हैं तो यहां बताया गया आसान और उपाय रोज रात को करना चाहिए, यह उपाय शिव पुराण में बताया गया है…

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Ashadha Gupta Navratri Starting 5th July 2016 गुप्त नवरात्री

Ashadha Gupta Navratri Starting 5th July 2016

maa durga nava roop nine forms of shakti

प्रत्येक वर्ष आने वाले दो नवरात्रों से तो आप सभी लोग परिचित हैं लेकिन इनके अलावा प्रत्येक वर्ष दो और नवरात्री होती हैं जिन्हें गुप्त नवरात्री कहा जाता है। पूर्व काल में इनका ज्ञान केवल उच्च कोटि के साधकों को होता था जो इस समय का उपयोग विशिष्ट साधनाओं को सम्पन्न करने में किया करते थे।
गुप्त नवरात्र में पूजा, उपासना सामान्य नवरात्रों के समान ही होती हैा तान्त्रिक समाज में इन नवरात्रों का बहुत ही महत्व है, जो इस समय की लगातार प्रतिक्षा करतें हैं।

If you need any guidance please call us on 9410030994 (Sumit Girdharwal Ji) or 9917325788 (Shri Yogeshwaranand Ji). Visit http://www.baglamukhi.info or http://www.yogeshwaranand.org for more info.

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Baglamukhi Kavach ( बगलामुखी कवच )

Baglamukhi Kavach ( बगलामुखी कवच  )

मां बगलामुखी के प्रत्येक साधक को प्रतिदिन जाप प्रारम्भ करने से पहले इस कवच का पाठ अवश्य करना चाहिए । यदि हो सके तो सुबह दोपहर शाम तीनों समय इसका पाठ करें । यह कवच विश्वसारोद्धार तन्त्र से लिया गया है। पार्वती जी के द्वारा भगवान शिव से पूछे जाने पर भगवती बगला के कवच के विषय में प्रभु वर्णन करते हैं कि देवी बगला शत्रुओं के कुल के लिये जंगल में लगी अग्नि के समान हैं। वे साम्रज्य देने वाली और मुक्ति प्रदान करने वाली हैं।
भगवती बगलामुखी के इस कवच के विषय में बहुत कुछ कहा गया है। इस कवच के पाठ से अपुत्र को धीर, वीर और शतायुष पुत्र की प्राप्ति होति है और निर्धन को धन प्राप्त होता है। महानिशा में इस कवच का पाठ करने से सात दिन में ही असाध्य कार्य भी सिद्ध हो जाते हैं। तीन रातों को पाठ करने से ही वशीकरण सिद्ध हो जाता है। मक्खन को इस कवच से अभिमन्त्रित करके यदि बन्धया स्त्री को खिलाया जाये, तो वह पुत्रवती हो जाती है। इसके पाठ व नित्य पूजन से मनुष्य बृहस्पति के समान हो जाता है, नारी समूह में साधक कामदेव के समान व शत्रओं के लिये यम के समान हो जाता है। मां बगला के प्रसाद से उसकी वाणी गद्य-पद्यमयी हो जाती है । उसके गले से कविता लहरी का प्रवाह होने लगता है। इस कवच का पुरश्चरण एक सौ ग्यारह पाठ करने से होता है, बिना पुरश्चरण के इसका उतना फल प्राप्त नहीं होता। इस कवच को भोजपत्र पर अष्टगंध से लिखकर पुरुष को दाहिने हाथ में व स्त्री को बायें हाथ में धारण करना चाहिये

भगवती बगलामुखी की उपासना कलियुग में सभी कष्टों एवं दुखों से मुक्ति प्रदान करने वाली है। संसार में कोई कष्ट अथवा दुख ऐसा नही है जो भगवती पीताम्बरा की सेवा एवं उपासना से दूर ना हो सकता हो, बस साधकों को चाहिए कि धैर्य पूर्वक प्रतिक्षण भगवती की सेवा करते रहें।

(कृपया दीक्षित साधक ही इसका जप करें। जिनकी दीक्षा नही हुई है वो सबसे पहले दीक्षा ग्रहण करें )

Baglamukhi Kavach in Hindi

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