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Powerful Lakshmi Sadhana on Deepawali दीपावली के लिए विशिष्ट लक्ष्मी साधना

Powerful Lakshmi Sadhana on Deepawali दीपावली के लिए विशिष्ट लक्ष्मी साधना

सर्वप्रथम आप सभी को दीपावली की बहुत-बहुत शुभ कामनाएं । आप सभी स्वस्थ और धनवान बने। भगवती की कृपा से सभी प्रकार की खुशियाँ आपके जीवन को नवीन रंग-बिरंगे प्रकाश से परिपूर्ण कर आलोकित कर दें।
दीपावली के इस पावन अवसर पर आप सभी के लिए मैं यंहा दो साधनाएं स्पष्ट कर रहा हॅॅू, जो धन की कामना करने वाले सभी साधकों के लिए अत्यन्त ही महत्वपूर्ण हैं।

मानव-जीवन में विपरीत परिस्थितियां, अवांछित बाधाएं, प्रतिकूलता- ये सब ही सृष्टि का विधान हैं। यदि मनुष्य के जीवन में इन सबका प्रवेश न हो तो मनुष्य अपनी सम्पूर्णता की ओर बढ़ने का प्रयत्न ही न करे। यदि ये सब न होे तो एक भी व्यक्ति ईश्वर की उपासना के मार्ग पर न चले। दुर्भाग्य, रोग, विपन्नता, कष्ट आदि सभी प्रतिकूलता के अभिन्न अंग हैं। यही वे संसाधन हैं जो व्यक्ति को उपासना की ओर अग्रसर करते हैं। ये मनुष्य को पुनः पुनः कुछ कर्म करने के लिए, जीवन के स्तर में सुधार लाने के लिए, ज्ञान-प्राप्ति के लिए और सबसे अधिक बढ़कर यह बात है कि इन सभी के कारण मनुष्य गुरू और परमात्मा की ओर अग्रसर होता है। आपको मेरा विश्वास करना होगा कि इस सृष्टि में कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं है, जो समस्याओं से ग्रसित न हो। निष्चय ही आपको नहीं मिलेगा।

अध्यात्म का प्रत्येक अंग अर्थात् ईश्वरीय सत्ता की उपासना, मंत्र, योग, सिद्धि, ध्यान, तन्त्र-मन्त्र दीक्षा आदि का उद्देश्य एक मात्र यही है कि मनुष्य की समस्याओं का समाधान हो, उनसे व्यक्ति को छुटकारा मिले। ये सभी जनकल्याण हेतु अति विशिष्ट संसाधन है। आवश्यकता है सही मार्गदर्शन और आवश्यक दिशा-निर्देष की ।

किवदन्ति के अनुसार एक समय की घटना है, भगवान भोलेनाथ ने 24 वर्ष के लिए समाधि लगायी। इस अवधि के समाप्त होने के उपरान्त जब उन्होंने अपने नेत्र खोले तो देखा कि वे तो शमशान में साधनारत् हैं और उनके चारों ओर हड्डियां, राख, जलते हुए शव और कंपकपा देेने वाली हवा , यानि कि चारों ओर दरिद्रता का निवास था। इन सबकों देखकर भगवान शिव को क्षोभ उत्पन्न हुआ और उन्होने भगवती महालक्ष्मी की आराधना करने का निश्चय करते हुए 12 वर्ष के लिए समाधि लगायी। उक्त अवधि के व्यतीत होने पर भगवती लक्ष्मी वंहा प्रगट हुई तो भगवान भोले नाथ ने उनसे निवेदन किया कि मैं आपसे कोई ऐसी साधना के विषय में जानना चाहता हॅू, जो अभी तक भी प्रगट नहीं हुई हो और अत्यन्त गोपनीय हो। वह साधना ऐसी हो कि उसे करने से आप स्थायी रूप से जन्म-जन्मान्तर के लिए उस साधक के घर में निवास करें। उस साधना के परिणाम स्वरूप वंहा किसी प्रकार का दुख-दारिद्रय, अकाल मृत्यु अथवा किसी प्रकार का कोई कष्ट न रहे। उसे जीवन में सम्पन्नता, उत्तम सन्तान की प्राप्ति और आनन्दपूर्ण भोगों की प्राप्ति हो।

भगवान शिव के ऐसे वचन सुनकर लक्ष्मीजी ने चारों ओर दृष्टिपात किया और देखा कि वंहा केवल और केवल भूख-प्यास और अभाव का डेरा था। स्वयं भगवान शिव के शरीर पर भस्म लगी हुई थी। कुल मिलाकर वंहा अलक्ष्मी का निवास था। तब लक्ष्मी जी ने भगवान षिव को एक दुर्लभ और पूर्ण रूपेण सर्वथा गोपनीय साधना का रहस्य बताया और अदृश्य हो गयी। स्वयं भगवान शिव ने इस साधना को किया। इसीलिए इस साधना का नाम ‘‘शिवोक्त महातत्व लक्ष्मी अश्टोत्तरशत साधना’’ पड़ा।

महालक्ष्मी की प्रसन्नता और कृपा-प्राप्ति के लिए इस साधना को एक पूरे वर्ष में केवल दीपावली के अवसर पर ही सम्पन्न किया जा सकता है। यह केवल तीन दिवस की साधना है जिसे दिन अथवा रात्रि में कभी भी सम्पन्न किया जा सकता है किन्तु रात्रिकाल में 11 बजे से लेकर दो बजे तक का समय विशिष्ट माना जाता है। परन्तु इसमें निर्धारित समय का विशेष ध्यान रखना चाहिए। जिस समय भी इस साधना को आरम्भ किया जाये, प्रतिदिन उसी समय पर साधना आरम्भ करनी चाहिए।

प्रस्तुत साधना ‘श्री’ बीज की उच्च कोटि की साधना है। साधक को चाहिए कि वह दीपावली के दिन लगभग 10 बजे पूर्ण शुद्धता के साथ स्नान करके श्वेत वस्त्र धारण करे तथा साधना मे श्वेत आसन का प्रयोग करे। उसे आसन पर उत्तर दिशा की ओर मुंह करके बैठना चाहिए। सामने की ओर भगवती का चित्र अथवा मूर्ति स्थापित हो। महालक्ष्मी यन्त्र तथा उनके एक सोै आठ स्वरूपों के लिए 108 गोमती चक्र प्रतिकात्मक रूप में स्थापित करके उनका यथाशक्ति पूजन करें।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें – 9410030994 , 9540674788

Powerful Laxmi Sadhana on Deepawali

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Sri Dhumavati Sadhana Aur Siddhi in Hindi and Sanskrit By Sri Yogeshwaranand Ji ( श्री धूमावती साधना और सिद्धि )

Sri Dhumavati Sadhana Aur Siddhi in Hindi and Sanskrit By Sri Yogeshwaranand Ji ( श्री धूमावती साधना और सिद्धि )

माँ पीताम्बरा की कृपा से श्री धूमावती साधना और सिद्धि ग्रन्थ का  प्रकाशन सम्भव हुआ। आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि ये आपके जीवन में उपयोगी सिद्ध होगी। अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें – 9540674788 , 9410030994. Email : shaktisadhna@yahoo.com

यदि किसी व्यक्ति को विशिष्ट पूजा एवं अनुष्ठान आदि करने पर भी कोई फल प्राप्त नहीं हो रहा है तो इसका तात्पर्य यह है कि उसके ग्रहों की मारकेश दशा चल रही है , अपने प्रारब्ध का फल उसे भोगना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में उसे धूमावती महाविद्या का आश्रय लेना चाहिए।

धूमावती की साधना रात्रि काल में ही की जाती है। इन देवी का स्वरुप बड़ा विचित्र है। इनके शरीर का आकर स्थूल है। केश रूखे सूखे हैं , वेश मलिन है , दोनों स्तन नीचे की और लटके हुए हैं , झुके हुए हैं जैसे किसी वृद्धा स्त्री के होते हैं।

वैसे तो साधारणतया सभी प्रकार की मनोकामनाएं लेकर धूमावती की साधना की जाती है, परन्तु दरिद्रता को दूर करने के लिए , कर्ज से छुटकारे के लिए , किसी को कर्ज दिया हो और वो पैसा वापिस न दे रहा हो , कोई आपको अकारण सता रहा हो , आपकी जमीन मकान पर कब्ज़ा किये बैठा हो , अनाधिकृत रूप से आपका हक मार रहा हो , घर मे हमेशा दरिद्रता वीरानगी बनी रहती हो , सब कुछ होते हुए भी संतान की प्राप्ति न होना आदि – जब ऐसी स्थितियां दिखायी दें तो भगवती धूमावती की उपासना करना अत्यन्त ही हितकारी होता है। किसी के द्वारा कोख बंधन कर दिया गया हो, आपका व्यावसायिक प्रतिष्ठान बांध दिया गया हो , रोजगार आमदनी बांध दी गयी हो , मित्र से, अधिकारी से, घर के लोगों से विद्वेषण उच्चाटन करा दिया गया हो तो इसके लिए इन भगवती की उपासना करनी चाहिए।

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Sri Tara Tantram 2nd Mahavidya By Shri Yogeshwaranand ( श्री तारा तंत्रम द्वितीय महाविद्या )

Sri Tara Tantram 2nd Mahavidya By Shri Yogeshwaranand ( श्री तारा तंत्रम द्वितीय महाविद्या )

माँ पीताम्बरा की कृपा से श्री तारा तंत्रम ग्रन्थ का ग्रंथ का प्रकाशन सम्भव हुआ। आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि ये आपके जीवन में उपयोगी सिद्ध होगी। अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें – 9540674788 , 9410030994. Email : shaktisadhna@yahoo.com

 

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Ma Baglamukhi Jayanti 2019 माँ बगलामुखी जन्मोत्सव 2019

Baglamukhi Jayanti 2019 ( माँ बगलामुखी जन्मोत्सव 2019 )

This year baglamukhi jayanti is on 12th May 2019 ( Sunday ). Baglamukhi jayanti is considered to be a very auspicious day for baglamukhi puja , baglamukhi mantra diksha and sadhana for getting rid of court cases, bad enemies and critical health problems.

How to do Baglamukhi Puja on Baglamukhi Jayanti

12 May 2019 (वैशाख शुक्ल अष्टमी) को देवी बगलामुखी जयंती  ( अवतरण दिवस )  है। आप सभी को बगलामुखी जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं।  माँ पीताम्बरा की कृपा से आप सदैव प्रसन्न रहें एवं भक्ति के मार्ग पर अग्रसर रहें यही माँ बगलामुखी से हमरी विनती है।  वैसे न तो ईश्वर का कभी जन्म होता एवं न ही मृत्यु। हाँ ये जरूर है कि ईश्वर समय समय पर अपने भक्तो की रक्षा हेतु इस संसार में समय समय पर प्रकट अवश्य होते है।  

यह दिन सभी भक्तों के लिए एक विशेष महत्व रखता है और प्रत्येक भक्त ऐसे शुभ दिन पर माँ की अधिक से अधिक कृपा प्राप्त करना चाहता है।  यहाँ आपको बताते है कि कैसे आप भी माँ की उपासना कर उन्हें प्रसन्न कर सकते है।

एक बात अवश्य ध्यान रखें कि ईश्वर के रूप में आपके माता पिता आपके घर में उपस्थित है। ईश्वर के किसी भी रूप की आप उपासना करें अथवा न करें लेकिन अपने माता पिता की यदि आपने ईश्वर मानकर उपासना कर ली तो इस संसार से तरने से आपको कोई नहीं रोक सकता। यदि आप अपने माता पिता का दिल दुखाते हैं तो ईश्वर कभी भी आपके द्वारा की गयी पूजा को स्वीकार नहीं करेंगे।  इसीलिए माँ बगलामुखी पूजा करने से पहले अपने माता पिता की सेवा करें एवं उनको जो भी पसंद हो उन्हें अर्पित  करें ।

For Astrology, Mantra Diksha & Sadhana Guidance email to sumitgirdharwal@yahoo.com or call us on 9410030994 (Sri Yogeshwaranand Ji) and 9540674788 ( Sumit Girdharwal Ji).

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Baglamukhi Jayanti Pooja Vidhi (बगलामुखी जयंती पूजा विधि )

बगलामुखी जयंती की यह पूजा कोई भी व्यक्ति कर सकता है चाहे वह दीक्षित है अथवा नहीं।  यह पूजा आप सुबह में अथवा रात्रि में करें।  माँ बगलामुखी का एक नाम पीताम्बरा भी है,  इन्हें पीला रंग अति प्रिय है इसलिए इनके पूजन में पीले रंग की सामग्री का उपयोग सबसे ज्यादा होता है। पीले रंग का आसन  लेकर उत्तर अथवा पूर्व दिशा की ओर मुखे करके बैठ जाएं। अपने सामने माँ बगलामुखी का चित्र अथवा यन्त्र रख लें।  यदि आपके पास यह सामग्री नहीं है तो इस पूजा को आप माँ दुर्गा के चित्र के सामने भी कर सकते हैं।

गाय के शुद्ध घी , सरसो अथवा तिल के तेल से दीपक जलाएं।  सर्वप्रथम अपने गुरुदेव का ध्यान करें एवं गुरु मंत्र का जप करें। जिनके पास गुरु मंत्र नहीं है वो “ॐ श्री गुरुवे नमः” का ११ बार जप कर सकते है।  इसके पश्चात गणेश जी का ध्यान करके “ॐ गं गणपतये नमः” का जप करें।  इसके पश्चात भैरव जी से माँ बगलामुखी की पूजा करने की आज्ञा लें – ” हे ! भैरव भगवान् मैं माँ पीताम्बरा की पूजा करने जा रहा/रही हूँ, कृपया मुझे अनुमति प्रदान करें। ” ऐसा बोलकर भैरव जी का ध्यान करें।  इसके बाद माँ बगलामुखी का ध्यान करें एवं उनका आवाहन करें। माँ को पीला प्रसाद चढ़ाएँ जैसे बादाम, किशमिश, मौसमी फल अथवा जो आपका दिल करे ( एक बच्चा अपनी माता को प्रेम से जो भी अर्पित कर देगा, माता प्रेम से वही स्वीकार कर लेगी )। उन्हें पुष्प समर्पित करें। इसके पश्चात माँ बगलामुखी सहस्रनाम (१००० नाम ) का पाठ करें और यदि हो सके तो प्रत्येक नाम के साथ माँ को पीला पुष्प अथवा बादाम या किशमिश समर्पित करें। लेकिन ऐसा करने के लिए आपको माता का चित्र एक बड़े थाल अथवा बड़े कपडे पर रखना होगा ताकि सामग्री बाहर जमीन पर न गिरे। जिनके पास कम समय है वो बगलामुखी अष्टोत्तर शतनाम (१०८ नाम ) का पाठ भी कर सकते है।  ये पाठ आप हमारी वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं जिनका लिंक हम निचे दे रहे हैं। आप जितना अधिक पूजा करना चाहे आप कर सकते हैं लेकिन ज्यादा न कर सको तो कम से कम माँ को प्रेम से एक पुष्प जरूर चढ़ा देना।

 

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जो लोग दीक्षित है वो इसके बाद माँ बगलामुखी के मंत्र का जप हल्दी माला पर कर सकते हैं। जिन लोगो ने अभी तक माँ बगलामुखी की दीक्षा नहीं ली है वो इस दिन माँ बगलामुखी की दीक्षा ग्रहण कर सकते हैं।  पूजा समाप्त करने के पश्चात माँ बगलामुखी से अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगे एवं सदैव आपके परिवार के ऊपर कृपा बनाए रखने के लिए प्रार्थना करें।  इसके बाद एक माला मृत्युंजय मंत्र – ” हौं जूंं  सः ” का जप अवश्य करें।  पूजा करने के बाद प्रसाद सभी को बांट दें।

यदि किसी कारणवश आप स्वयं इस पूजा को नहीं कर सकते और आप अपने परिवार की सुख शान्ति, शत्रु पीड़ा से मुक्ति प्राप्त करने के लिए यह पूजा करना चाहते है तो हमने ऐसे  लोगों के लिए कल विशेष पूजा का आयोजन किया है।  अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें – 9410030994, 9540674788

शास्त्रों में देवी-देवताओं को प्रसन्न करने हेतु उपासना-विधियों में सर्वोत्तम उपासना-विधि उनके षोडशोपचार पूजन को माना गया है। षोडशोपचार पूजन का अर्थ होता है – सोलह उपचारों से पूजन करना। सोलह उपचार निम्नवत् कहे गए हैं।
(1) आवाहन (2) आसन (3) पाद्य (4) अर्घ्य (5) स्नान (6) वस्त्र
(7) यज्ञोपवीत (8) गन्ध (9) पुष्प तथा पुष्पमाला (10) दीपक (11) अक्षत (चावल) (12) पान-सुपारी-लौंग (13) नैवेद्य (14) दक्षिणा (15) आरती (16) प्रदक्षिणा तथा पुष्पाञ्जलि।

यदि संभव हो तो षोडशोपचार पूजन अवश्य करें –

बगलामुखी षोडशोपचार पूजन

Download Baglamukhi Shodashopchar Poojan बगलामुखी षोडशोपचार पूजन

Baglamukhi 1000 names (sahasranamam) Download

Baglamukhi Pitambara Ashtottar Shatnam Stotram in Hindi

Baglamukhi Chalisa

Download Baglamukhi Bhakt Mandaar Mantra for Wealth & Money

Those who want to learn Sadhana & want Ma Diksha please send us the below details to sumitgirdharwal@yahoo.com /  shaktisadhna@yahoo.com
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Sri Durga Saptashloki ( श्री दुर्गा सप्तश्लोकी )

Sri Durga Saptashloki ( श्री दुर्गा सप्तश्लोकी )

माँ दुर्गा साधना के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए श्री योगेश्वरानंद जी से संपर्क करें – 9917325788 अथवा सुमित गिरधरवाल जी से संपर्क करें – 9540674788 Email : – shaktisadhna@yahoo.com

Download Sri Saptashloki Durga Stuti Pdf

शिव उवाच –
देवी त्वं भक्तसुलभे सर्वकार्यविधायिनी |
कलौ हि कार्यसिद्ध्यर्थमुपायं ब्रूहि यत्नतः ||
देव्युवाच –
शृणु देव प्रवक्ष्यामि कलौ सर्वेष्टसाधनम् |
मया तवैव स्नेहेनाप्यम्बास्तुतिः प्रकाश्यते ||

ॐ अस्य श्रीदुर्गासप्तश्लोकीस्तोत्रमहामन्त्रस्य नारायण ऋषिः, अनुष्टुप छन्दः, श्रीमहाकालीमहालक्ष्मीमहासरस्वत्यो देवताः , श्रीदुर्गाप्रीत्यर्थं सप्तश्लोकीदुर्गापाठे विनियोगः ॥

ज्ञानिनामपि चेतांसि देवि भगवती हि सा । बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति ॥१॥

दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि । दारिद्रयदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्र चित्ता ॥2॥

सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥3॥

शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे । सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥4॥

सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते । भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवी नमोऽस्तु ते ॥5॥

रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान् । त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति ॥6॥

सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि । एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरि विनाशनम् ॥7॥

Sri Durga Saptashloki Path in Hindi

शिव उवाच – शिवजी बोले – हे देवी ! तुम भक्तों के लिये सुलभ हो और समस्त कर्मों का विधान करनेवाली हो। कलियुग में कामनाओं की सिद्धि हेतु यदि कोई उपाय हो तो उसे अपनी वाणी द्वारा सम्यकरूपसे व्यक्त करो।

देवी ने कहा – हे देव ! आपका मेरे ऊपर बहुत स्नेह है। कलियुग में समस्त कामनाओं को सिद्ध करने वाला जो साधन है वह बतलाऊँगी , सुनो ! उसका नाम है अम्बास्तुति।

वे भगवती महामाया देवी ज्ञानियों के भी चित्त को बलपूर्वक खींचकर मोह में डाल देती हैं ।

माँ दुर्गे ! आप स्मरण करने पर सब प्राणियों का भय हर लेती हैं और स्वस्थ पुरुषों द्धारा चिन्तन करने पर उन्हें परम कल्याणमयी बुद्धि प्रदान करती हैं । दुःख, दरिद्रता और भय हरनेवाली देवी ! आपके सिवा दूसरी कौन है, जिसका चित्त सबका उपकार करने के लिए सदा ही दयार्द्र रहता हो ।

नारायणी ! आप सब प्रकार का मंगल प्रदान करनेवाली मंगलमयी हैं, आप ही कल्याणदायिनी शिवा हैं । आप सब पुरुषार्थ्रो को सिद्ध करने वाली, शरणागतवत्सला, तीन नेत्रों वाली गौरी हैं । आपको नमस्कार है ।

शरणागतों, दिनों एवं पीड़ितों की रक्षा में संलग्न रहनेवाली तथा सबकी पीड़ा दूर करनेवाली नारायणी देवी ! आपको नमस्कार है ।

सर्वस्वरूपा, सर्वेश्वरी तथा सब प्रकार की शक्तियों से सम्पन्न दिव्यरूपा दुर्गे देवी ! सब भयों से हमारी रक्षा कीजिये आपको नमस्कार है ।

देवी ! आप प्रसन्न होने पर सब रोगों को नष्ट कर देती हैं और कुपित होने पर मनोवांछित सभी कामनाओं का नाश कर देती हैं । जो लोग आपकी शरण में हैं, उनपर विपत्ति तो आती ही नहीं ; आपकी शरण में गए हुए मनुष्य दूसरों को शरण देनेवाले हो जाते हैं ।

सर्वेश्वरि ! आप ऐसी प्रकार तीनों लोकों की समस्त बाधाओं को शान्त करें और हमारे शत्रुओं का नाश करती रहें ।

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42. Download Magha Gupta Navaratri 2015 Puja Vidhi and Panchanga

43. Download Baglamukhi Chaturakshari Mantra and Puja Vidhi in Hindi Pdf

44. Chinnamasta Mantra Sadhana Evam Siddhi in Hindi

45. Download Baglamukhi Ashtakshar Mantra Sadhana in Hindi

46. Download Baglamukhi Bhakt Mandaar Mantra for Wealth & Money

47. Download Shiv Sadhana Vidhi on Shivratri 12 August 2015 Shiv Puja Vidhi in Hindi pdf

48. Pushp Kinnari Sadhana Evam Mantra Siddhi in Hindi

49. Download Bhagwati Baglamukhi Sarva Jana Vashikaran Mantra in Hindi and English Pdf

50. Downloadd Sri Kali Pratyangira Sadhana Evam Siddhi in Hindi and Sanskrit Pdf

51. Which Sadhana is Best? कौन सी साधना उत्तम है?

52. Download Chaur Ganesh Mantra चौर गणेश मंत्र Pdf

53. Download Baglamukhi Utkeelan Utkilan Mantra Evam Keelak Stotra in Hindi

54. Download Sri Baglamukhi Panjar Stotram Pdf

55. Download Devi Baglamukhi Hridaya Stotra in Hindi & Sanskrit Pdf

56. Download Baglamukhi Shodashopchar Poojan बगलामुखी षोडशोपचार पूजन

57. Download Gupt Navratri Puja Kamakhya Sadhana Vidhi in Hindi

Baglamukhi Shabar Mantra ( बगलामुखी शाबर मंत्र )

Baglamukhi Shabar Mantra ( बगलामुखी शाबर मंत्र )

इस परिशिष्ट में जिन मन्त्रों का उल्लेख किया जा रहा है, वे लोक- परम्परा से सम्बद्ध भगवती-उपासकों द्वारा पुनः-पुनः सराहे गए हैं। इन मन्त्रों का प्रभाव असंदिग्ध है, जबकि इनके साधन में औपचारिकताएं नाम मात्र की हैं। यदि भगवती बगलाम्बा के प्रति पूर्ण आस्था एवं श्रद्धा-भाव रखते हुए इन मन्त्रों की साधना की जाए, तो कोई कारण नहीं है कि साधक को उसके अभीष्ट की प्राप्ति न हो।

बगलामुखी साधना से सम्बंधित अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए हमें संपर्क करें – 9917325788 ( श्री योगेश्वरानंद जी ) , 9540674788 ( सुमित गिरधरवाल )  ईमेल – shaktisadhna@yahoo.com

यहाँ पर उल्लिखित शाबर मन्त्र के सम्बन्ध में अनुभवी साधकों का यह निष्कर्ष है कि यह परमशक्तिशाली मन्त्र है और इसका प्रयोग कभी निष्फल नहीं होता है। इसका सिद्धि-विधान भी अत्यन्त ही सरल है। इसके लिए साधक को यह निर्देश है कि भगवती बगला की सम्यक् उपासना एवं उपचार के उपरान्त प्रतिदिन दो माला जप एक महीने तक करें। इतने अल्प समय और अल्प परिश्रम से ही यह मन्त्र अपना प्रभाव प्रकट करने लगता है।

  बगलामुखी शाबर मंत्र –  1

ॐ मलयाचल बगला भगवती महाक्रूरी महाकराली राजमुख बन्धनं ग्राममुख बन्धनं ग्रामपुरुष बन्धनं कालमुख बन्धनं चौरमुख बन्धनं व्याघ्रमुख बन्धनं सर्वदुष्ट ग्रह बन्धनं सर्वजन बन्धनं वशीकुरु हुं फट् स्वाहा। 

( Baglamukhi Shabar Mantra in English- 1)

oṃ malayācala bagalā bhagavatī mahākrūrī mahākarālī rājamukha bandhanaṃ grāmamukha bandhanaṃ grāmapuruṣa bandhanaṃ kālamukha bandhanaṃ cauramukha bandhanaṃ vyāghramukha bandhanaṃ sarvaduṣṭa graha bandhanaṃ sarvajana bandhanaṃ vaśīkuru huṃ phaṭ svāhā।

बगलामुखी शाबर मंत्र – 2

ॐ सौ सौ सुता समुन्दर टापू, टापू में थापा, सिंहासन पीला, सिंहासन पीले ऊपर कौन बैसे? सिंहासन पीला ऊपर बगलामुखी बैसे। बगलामुखी के कौन संगी, कौन साथी? कच्ची बच्ची काक कुतिआ स्वान चिड़िया। ॐ बगला बाला हाथ मुदगर मार, शत्रु-हृदय पर स्वार, तिसकी जिह्ना खिच्चै। बगलामुखी मरणी-करणी, उच्चाटन धरणी , अनन्त कोटि सिद्धों ने मानी। ॐ बगलामुखीरमे ब्रह्माणी भण्डे, चन्द्रसूर फिरे खण्डे-खण्डे, बाला बगलामुखी नमो नमस्कार।

Baglamukhi Shabar Mantra in English- 2

oṃ sau sau sutā samundara ṭāpū, ṭāpū meṃ thāpā, siṃhāsana pīlā, siṃhāsana pīle ūpara kauna baise? siṃhāsana pīlā ūpara bagalāmukhī baise। bagalāmukhī ke kauna saṃgī, kauna sāthī? kaccī baccī kāka kutiā svāna ciड़iyā। oṃ bagalā bālā hātha mudagara māra, śatru-hṛdaya para svāra, tisakī jihnā khiccai। bagalāmukhī maraṇī-karaṇī, uccāṭana dharaṇī , ananta koṭi siddhoṃ ne mānī। oṃ bagalāmukhīrame brahmāṇī bhaṇḍe, candrasūra phire khaṇḍe-khaṇḍe, bālā bagalāmukhī namo namaskāra।

वास्तव में शाबर-मंत्र अंचलीय-भाषाओं से सम्बद्ध होते हैं, जिनका उद्गम सिद्ध उपासकों से होता है। इन सिद्धों की साधना का प्रभाव ही उनके द्वारा कहे गए शब्दों में शक्ति जाग्रत कर देता है। इन मन्त्रों में न भाषा की शुद्धता होती है और न ही संस्कृत जैसी क्लिष्टता। बल्कि ये तो एक साधक के हृदय की भावना होती है जो उसकी अपनी अंचलीय ग्रामीण भाषा में सहज ही प्रस्फुटित होती है। इसलिए इन मन्त्रों की भाषा-शैली पर विचार करने की आवश्यकता नहीं है। यदि आवश्यकता है तो वह है इनका प्रभाव महसूस करने की।

क्रम संख्या 2 पर उल्लिखित यह मन्त्र भी अंचलीय भाषा में है, जिसे किसी सिद्ध ग्रामीण साधक द्वारा कहा गया है। इस मन्त्र की नित्य-प्रति एक माला जप एक माह तक करने से इसका प्रभाव प्रकट होने लगता है। वैसे अनुभव में यह आया है कि शाबर मन्त्रों के जप यदि होली, दीपावली की रात्रि अथवा ग्रहण काल में ही कर लिया जाए तो वह भी पर्याप्त होता है। लेकिन उत्तम यह है कि इन्हें ग्रहण काल में पर्याप्त मात्रा में जपकर एक माह तक नित्य-प्रति निर्दिष्ट संख्या में जपा जाए।

बगलामुखी शाबर मंत्र –  3

इन दो बगला-शाबर मन्त्रों के अतिरिक्त भी एक अन्य शाबर मंत्र गुरु-प्रसाद स्वरूप हमें प्राप्त हुआ था, जिसका उल्लेख मैं यहाँ कर रहा हूं। इस मन्त्र का विधान यह है कि सर्वप्रथम भगवती का पूजन करके इस मन्त्र का दस हजार की संख्या में जप करने हेतु संकल्पित होना चाहिए। तदोपरान्त एक निश्चित अवधि में जप पूर्ण करके एक हजार की संख्या में इसका हवन ‘मालकांगनी’ से करना चाहिए। तदोपरान्त तर्पण, मार्जन व ब्राह्मण भोजन कराना चाहिए। तर्पण गुड़ोदक से करें। इस प्रकार इस मन्त्र का अनुष्ठान पूर्ण होता है। फिर नित्य-प्रति एक माला इस मन्त्र की जपते रहना चाहिए। इस मन्त्र का प्रभाव भी अचूक है अतः निश्चित रूप से साधक के प्रत्येक अभीष्ट की पूर्ति होती है। मन्त्र इस प्रकार है

ॐ ह्रीं बगलामुखि! जगद्वशंकरी! मां बगले प्रसीद-प्रसीद मम सर्व मनोरथान पूरय-पूरय ह्रीं ॐ स्वाहा।

Baglamukhi Shabar Mantra in English – 3

oṃ hrīṃ bagalāmukhi! jagadvaśaṃkarī! māṃ bagale prasīda-prasīda mama sarva manorathāna pūraya-pūraya hrīṃ oṃ svāhā।

यदि आपको इन मन्त्रों का प्रभाव देखना है तो निर्देशानुसार इनका साधन कर अभीष्ट की प्राप्ति करें। ये मन्त्र किस प्रमाणिक ग्रन्थ में हैं, यह कुछ स्पष्ट नहीं है। प्रमाण केवल यही है कि ये गुरुमुख से प्राप्त हैं। शेष जब आप इनकी साधना करेंगे तो प्राप्त होने वाला परिणाम ही इनकी प्रमाणिकता का साक्षी होगा।

बगलामुखी साधना से सम्बंधित अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए हमें संपर्क करें – 9917325788 ( श्री योगेश्वरानंद जी ) , 9540674788 ( सुमित गिरधरवाल )  ईमेल – shaktisadhna@yahoo.com

यदि आप माँ बगलामुखी साधना के बारे में अधिक जानना चाहते हैं तो नीचे दिये गए लेख पढ़ें –

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Baglamukhi Mala Mantra Audio Mp3

Baglamukhi Mala Mantra ( बगलामुखी माला मंत्र )

बगलामुखी माला मंत्र के पाठ से बड़ी से बड़ी विपत्ति दूर हो जाती है। भयंकर से भयंकर गृह दोष भी इसके पाठ से दूर होता है। जिन लोगो की कुंडली में पितृ दोष, कालसर्प दोष अथवा अन्य कोई दोष है जिसकी वजह से आपके जीवन में कष्ट हैं तो आप बगलामुखी माला मंत्र का पाठ करके अपने जीवन को कष्टों से मुक्त कर सकते हैं।

बगलामुखी साधना से सम्बंधित अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क करें – श्री योगेश्वरानंद जी  (9917325788 ) सुमित गिरधरवाल जी  ( 9540674788 ) ईमेल करें – shaktisadhna@yahoo.com

To know more about baglamukhi mala mantra click on the below link –

https://shribaglamukhi.wordpress.com/2011/10/26/baglamukhi-mala-mantra-in-hindi-and-english/

Chinnamasta Kavach छिन्नमस्ता कवच

Chinnamasta Kavach छिन्नमस्ता कवच

साधकों को मां छिन्नमस्ता का जप करने से पहले कवच का पाठ अवश्य करना चाहिए। यह एक बहुत ही उच्चकोटि की एवं उग्र साधना है, इसलिए सर्वप्रथम किसी योग्य गुरू से दीक्षा अवश्य ग्रहण करें। किताबों से पढकर यह साधना करने का प्रयास कदापि न करें। जो साधक कुण्डलिनी जागरण में रूचि रखते हैं उन्हें छिन्नमस्ता साधना अवश्य करनी चाहिए। मां छिन्नमस्ता की साधना से योग की सिद्धि भी सरलता से मिल जाती है। बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान इस साधना से सम्भव है। मां छिन्नमस्ता आप पर कृपा करें।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें – 9917325788, 9540674788

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श्री कामाख्या साधना रहस्य Shri Kamakhya Sadhana Rahasya By Sri Yogeshwaranand Ji & Sumit Girdharwal

श्री कामाख्या साधना रहस्य Shri Kamakhya Sadhana Rahasya By Sri Yogeshwaranand Ji & Sumit Girdharwal

माँ पीताम्बरा की कृपा से श्री कामाख्या साधना रहस्य ग्रंथ का प्रकाशन सम्भव हुआ। आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि ये आपके जीवन में उपयोगी सिद्ध होगी।  अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें – 9540674788 , 9410030994. Email : shaktisadhna@yahoo.com. ISBN – 978-93-5300-470-5

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Our Other Books which you can buy –

  1. Sri Baglamukhi Tantram श्री बगलामुखी तन्त्रम
  2. Agama Rahasya आगम रहस्य
  3. Shatkarm Vidhaan षट्कर्म विधान
  4. Pratyangira Sadhana Rahasya श्री प्रत्यंगिरा साधना रहस्य ग्रन्थ
  5. Yantra Sadhana यन्त्र साधना
  6. Shodashi Mahavidya षोडशी महाविद्या
  7. Mahavidya Sri Baglamukhi Sadhana Aur Siddhi ( महाविद्या श्री बगलामुखी साधना और सिद्धि योगेश्वरानंद )

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Yantra Sadhana Book By Sri Yogeshwaranand & Sumit Girdharwal

Yantra Sadhana Book by Sri Yogeshwaranand Ji & Sumit Girdharwal (Collection of 131 Divine & Rare Yantras)

माँ पीताम्बरा की कृपा से यन्त्र साधना पुस्तक का प्रकाशन सम्भव हुआ। आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि ये आपके जीवन में उपयोगी सिद्ध होगी।

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Baglamukhi Shodashopachara Pujan बगलामुखी षोडशोपचार पूजन

Baglamukhi Shodashopachara Pujan बगलामुखी षोडशोपचार पूजन

शास्त्रों में देवी-देवताओं को प्रसन्न करने हेतु उपासना-विधियों में सर्वोत्तम उपासना-विधि उनके षोडशोपचार पूजन को माना गया है। षोडशोपचार पूजन का अर्थ होता है – सोलह उपचारों से पूजन करना। सोलह उपचार निम्नवत् कहे गए हैं।
(1) आवाहन (2) आसन (3) पाद्य (4) अर्घ्य (5) स्नान (6) वस्त्र
(7) यज्ञोपवीत (8) गन्ध (9) पुष्प तथा पुष्पमाला (10) दीपक (11) अक्षत (चावल) (12) पान-सुपारी-लौंग (13) नैवेद्य (14) दक्षिणा (15) आरती (16) प्रदक्षिणा तथा पुष्पाञ्जलि।
इन उपचारों के अतिरिक्त पांच उपचार, दश उपचार, बारह उपचार, अट्ठारह उपचार आदि भी होते हैं। लेकिन यहां 16 उपचारों की पूजन- सामग्री एवं उनका विधान अंकित किया जा रहा है। सामग्री को पूजा से पहले अपने पास रख लेना चाहिए। यहां सामग्री में हवन की सामग्री भी लिखी गयी है। यदि केवल पूजन ही करना हो तो वांछित सामग्री का चयन साधक अपनी सुविधा तथा उपलब्धता के अनुसार करके एकत्र कर लें।

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Devi Baglamukhi Hridaya Stotra in Hindi & Sanskrit (बगलामुखी हृदय स्तोत्र)

Baglamukhi Hridaya Stotram बगलामुखी हृदय स्तोत्र

This Hymn  (Baglamukhi Hridaya Stotram) is considered to be heart of the Mother. Hymn’s follower attains whatever he see in this world.

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किसी भी देवी या देवता से सम्बन्धित हृदय-स्तोत्र देवता का हृदय ही होता है। यह स्तोत्र भगवती बगलामुखी से सम्बन्धित है। उनके हृदय में बस जाना या फिर उन्हें अपने हृदय में बसा लेना ये दोनों ही विकल्प इस पाठ का उद्देश्य हैं। उनके हृदय में निवास कर पाना तो एक स्वप्न मात्र ही है, क्योंकि इसके लिए तो परम शक्तिमान भी लालायित रहते हैं। हां, हमारी भक्ति के प्रसाद-स्वरूप यह फल अवश्य मिल सकता है कि ये विश्वाश्रय हमारे हृदय में बस जाएं और वास्तव में जीवन का यही तो लक्ष्य है; तभी तो हमारा उद्धार सम्भव है।
‘हृदय-स्तोत्र’ के द्वारा भगवती बगला की कृपा प्राप्त करने हेतु एक विशिष्ट प्रयोग है। आश्विन मास की महा-अष्टमी के दिन पीताचारी, पीताहारी होकर किसी प्राचीन शिवालय अथवा शक्तिपीठ में इस हृदय-स्तोत्र का अनुष्ठान संकल्प लेकर करें। इस प्रकार इस स्तोत्र का पाठ करने से मां पीताम्बरा की कृपा प्राप्त होती है और साधक के शत्रु पराभव को प्राप्त होते हैं। (यह अनुभूत प्रयोग है।) बगला-हृदय-स्तोत्र वास्तव में साधक के लिए ‘वांछाकल्पद्रुम’ के समान है। यूं तो इस पाठ के विषय में कुछ भी कहना सूर्य को दीपक दिखाने के समान ही होगा, तो भी सामान्यतः कुछ विशिष्टताओं को स्पष्ट करना यहां उचित प्रतीत होता है।

यथा
1. यदि मात्र बगला-हृदय-स्तोत्र का ही पाठ कर लिया जाए तो फिर साधक को जप आदि अथवा अनुष्ठान की कोई आवश्यकता नहीं रहती।
2. इस पाठ के स्मरण-मात्र से ही साधक के सभी अभीष्ट पूर्ण हो जाते हैं।
3. इस स्तोत्र का पाठ करने वाले के लिए इस पृथ्वी पर कुछ भी अप्राप्य नहीं रह जाता है।
4. इस स्तोत्र का तीनों समय पाठ करने के प्रभाव से गूंगा बोलने लगता है, पंगु चलने लगता है, दीन सर्वशक्तिमान हो जाता है; घोर दरिद्र व्यक्ति धनवान हो जाता है; चारों ओर से निन्दित व्यक्ति भी ख्याति प्राप्त कर लेता है; और मूर्खतम व्यक्ति की वाणी में ओज एवं कवित्व की शक्ति आ जाती है।
5. इस स्तोत्र के पाठ में ध्यान आदि आवश्यक नहीं है। जप, होम, तर्पण आदि की भी कोई आवश्यकता नहीं है।
6. इस स्तोत्र-पाठ के पाठी का उल्लंघन करने मात्र से स्वयं ब्रह्मा भी सकुशल नहीं रह सकते। यह स्तोत्र परम संतोष-प्रदायक एवं सिद्धियां प्रदान करने वाला है, क्योंकि यह साक्षात् मां बगला का हृदय है।

भगवती बगला के इस हृदय स्तोत्र से प्राप्त होने वाले अनेक परिणामों के विषय में मेरा सुखद अनुभव रहा है। इसलिए मैं ऐसे पाठकों/साधकों को भी इस स्तोत्र का अनुष्ठान करने का परामर्श दूंगा।

जो सब तरफ से निराश हो चुके हैं और जिनको कोई भी रास्ता स्पष्ट नहीं होता। उनसे मैं निवेदन करूंगा कि संकल्प लेकर कम से कम ग्यारह सौ स्तोत्रों का अनुष्ठान अवश्य करें।

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Shri Baglamukhi Tantram Book by Sri Yogeshwaranand & Sumit Girdharwal

Shri Baglamukhi Tantram Book by Sri Yogeshwaranand & Sumit Girdharwal

baglamukhi-tantram-book

 

माँ पीताम्बरा की अनुकम्पा से ” श्री बगलामुखी तन्त्रम ” ग्रंथ का प्रकाशन संभव हुआ। आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि यह आपके जीवन में आपका मार्गदर्शन करेगा। ISBN – 9789352884773,9352884779

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें – 9540674788

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Sri Baglamukhi Panjar Stotram बगलामुखी पञ्जर स्तोत्र

Sri Baglamukhi Panjar Stotram बगलामुखी पञ्जर स्तोत्र

यह अति गोपनीय व रहस्यपूर्ण पञ्जर स्तोत्र अति दुर्लभ तथा परीक्षित है। इस पञ्जर का जप अथवा पाठ करने वाला साधक प्रत्येक क्षेत्र में सफलता का सोपान करता है। घोर दारिद्रय व विघ्नों के नाशक इस स्तोत्र का पाठ करने वाले साधक की माँ बगला स्वयं रक्षा करती हैं। शत्रु दल साधक को मूक होकर देखते रह जाते हैं।

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It is a very secret, mysterious and rare stotra of Devi Baglamukhi known as Panjar Stotram. It has been proved many times that it helped many people in getting success in their life. It is said that one who recite Panjar Stotra everyday Ma Baglamukhi protect him herself. This stotra is the giver of wealth, health and overall happiness in life.

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Sri Pratyangira Sadhana Rahasya (Mantra Vidhaan Evam Prayog) Book

Sri Pratyangira Sadhana Rahasya (Mantra Vidhaan Evam Prayog) Book

माँ पीताम्बरा की अनुकम्पा से श्री प्रत्यंगिरा साधना रहस्य ग्रन्थ का प्रकाशन संभव हुआ। आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि यह आपके जीवन में आपका मार्गदर्शन करेगा।

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Baglamukhi Mantra Utkilan Vidhaan बगलामुखी मंत्र वृहत् उत्कीलन विधान

Baglamukhi Mantra Utkilan Vidhaan (बगलामुखी मंत्र वृहत् उत्कीलन विधान)

मंत्रों का दुरुपयोग रोकने के लिए कलियुग के प्रारम्भ में भगवान शिव ने सभी मंत्रों का कीलन (शापित) कर दिया था। तब माँ पार्वती के अनुग्रह करने पर उन्होंने मंत्रों को उत्कीलित करने का विधान भी प्रस्तुत किया ताकि सत्पात्र एवं अधिकारी साधक भी मंत्र की सिद्धि प्राप्त कर सकें। यही मंत्रोंत्कीलन-विधान मंत्र-उपासना के अंग के रूप में उत्कीलक कहे जाते हैं। इसलिए साधक को कवच आदि का पाठ करने से पूर्व उत्कीलन करना चाहिए।
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Chaur Ganesh Mantra चौर गणेश मंत्र

Chaur Ganesh Mantra चौर गणेश मंत्र
ganesha-mantra

तन्त्र-शास्त्र ‘वर्णविल’ के अनुसार चौर गणेश-मन्त्र का जप किए बिना कोई पूजा-कर्म नहीं करना चाहिए। इसमें स्पष्ट कहा गया है कि चौर मंत्रो को जाने बिना जो पुराण भी पढ़ता है, वह साक्षात् ‘कलि’ के समान होता है। वह पापी, चोर अथवा कुत्ते की योनि में जाता है। इस मंत्र का जप किए बिना यदि पूजा या जप कर्म किया जाए तो पूजा व पूजा के तेज का स्वयं गणेश हरण कर लेते हैं।
मनुष्य-देह में कुण्डलिनी कमल के प्रत्येक द्वार के पथ में पचास गण, देवताओं के ज्योतिरूप जो मुनिगण हैं, वे जम्हाई लेते हैं तथा प्रत्येक चक्र के कमलदल में स्थित होकर जप का तेज हरण कर लेते हैं। स्मरण रखें! जप-तप आदि में एक दिव्य तेज होता है, जहां-जहां ये तेजस्वी क्रियाएं होती हैं, वहां-वहां ये चौर गण होते हैं। इसलिए इनके प्रबोधन हेतु ये मंत्र पढ़े जाते हैं।

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Vipreet Pratyangira Mantra Sadhana Evam Siddhi (श्री विपरीत प्रत्यंगिरा मंत्र साधना एवं सिद्धि )

Vipreet Pratyangira Mantra Sadhana Evam Siddhi (श्री विपरीत प्रत्यंगिरा मंत्र  साधना एवं सिद्धि )

यदि शत्रु निरंतर आप पर अभिचारिक कर्म कर रहा हो, निरंतर किसी न किसी रूप में आपको आर्थिक, मानसिक, सामाजिक, शारीरिक क्षति पहुंचा रहा हो और आपके भविष्य को चैपट कर रहा हो, तब भद्रकाली के इस स्वरूप, अर्थात विपरीत प्रत्यंगिरा का आश्रय लेना सर्वोत्तम उपाय है। जिस दिन से साधक इस महाविधा का प्रयोग आरम्भ करता है, उसी दिन से ही भगवती भद्र काली उसकी सुरक्षा करने लगती हैं और शत्रु द्वारा किये गये अभिचाारिक कर्म दोगुने वेग से उसी पर लौटकर अपना प्रहार करते हैं। इसके अतिरिक्त राजकीय बाधा, अरिष्ट ग्रह बाधा निवारण में तथा अपना खोया हुआ पद, आस्तित्व ओर गरिमा प्राप्ति में भी यह विद्या सर्वोत्तम मानी जाती है। साधक की आयु, यश तथा तेज की वृद्धि करने में भी यह विद्या बहुत उत्तम मानी जाती है।

A most powerful Mantra Sadhana to invoke Devi Pratyangira is given here. Vipreet Pratyangira Mantra Sadhna  is  used to destroy the mind of an enemy who is unnecessarily troubling and bent upon harming some innocent and helpless person. confuses the enemy by destroying  his harmful and destructive thinking and by confusing his mind. As always clarified such sadhnas should only be performed under the highly advanced practitioner (Your Guru) after mantra diksha.

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Baglamukhi Sarva Karya Siddhi Mantra बगलामुखी सर्वकार्य सिद्धि मंत्र

Baglamukhi Sarva Karya Siddhi Mantra बगलामुखी सर्वकार्य सिद्धि मंत्र

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Sri Kali Pratyangira Sadhana Evam Siddhi

Sri Kali Pratyangira Sadhana Evam Siddhi

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इस विद्या का तीनों संध्याओं में पाठ करने वाला साधक समस्त बाधाओं तथा शत्रुओं से सुरक्षित रहता है। किसी भी प्रकार की कोई विपत्ति उसे व्याप्त नहीं करती। ‘अंगिरा’ ऋषि द्वारा प्रणीत यह विद्या निश्चय ही साधक की समस्त आपदाओं का नाश करने वाली एवं सभी ग्रहों की कुदृष्टि से उसे सुरक्षित बनाने वाली है।
यह विद्या उग्र है इसलिए दीक्षित साधक ही इसका पाठ करें।

 

 

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Baglamukhi Kavach ( बगलामुखी कवच )

Baglamukhi Kavach ( बगलामुखी कवच  )

मां बगलामुखी के प्रत्येक साधक को प्रतिदिन जाप प्रारम्भ करने से पहले इस कवच का पाठ अवश्य करना चाहिए । यदि हो सके तो सुबह दोपहर शाम तीनों समय इसका पाठ करें । यह कवच विश्वसारोद्धार तन्त्र से लिया गया है। पार्वती जी के द्वारा भगवान शिव से पूछे जाने पर भगवती बगला के कवच के विषय में प्रभु वर्णन करते हैं कि देवी बगला शत्रुओं के कुल के लिये जंगल में लगी अग्नि के समान हैं। वे साम्रज्य देने वाली और मुक्ति प्रदान करने वाली हैं।
भगवती बगलामुखी के इस कवच के विषय में बहुत कुछ कहा गया है। इस कवच के पाठ से अपुत्र को धीर, वीर और शतायुष पुत्र की प्राप्ति होति है और निर्धन को धन प्राप्त होता है। महानिशा में इस कवच का पाठ करने से सात दिन में ही असाध्य कार्य भी सिद्ध हो जाते हैं। तीन रातों को पाठ करने से ही वशीकरण सिद्ध हो जाता है। मक्खन को इस कवच से अभिमन्त्रित करके यदि बन्धया स्त्री को खिलाया जाये, तो वह पुत्रवती हो जाती है। इसके पाठ व नित्य पूजन से मनुष्य बृहस्पति के समान हो जाता है, नारी समूह में साधक कामदेव के समान व शत्रओं के लिये यम के समान हो जाता है। मां बगला के प्रसाद से उसकी वाणी गद्य-पद्यमयी हो जाती है । उसके गले से कविता लहरी का प्रवाह होने लगता है। इस कवच का पुरश्चरण एक सौ ग्यारह पाठ करने से होता है, बिना पुरश्चरण के इसका उतना फल प्राप्त नहीं होता। इस कवच को भोजपत्र पर अष्टगंध से लिखकर पुरुष को दाहिने हाथ में व स्त्री को बायें हाथ में धारण करना चाहिये

भगवती बगलामुखी की उपासना कलियुग में सभी कष्टों एवं दुखों से मुक्ति प्रदान करने वाली है। संसार में कोई कष्ट अथवा दुख ऐसा नही है जो भगवती पीताम्बरा की सेवा एवं उपासना से दूर ना हो सकता हो, बस साधकों को चाहिए कि धैर्य पूर्वक प्रतिक्षण भगवती की सेवा करते रहें।

(कृपया दीक्षित साधक ही इसका जप करें। जिनकी दीक्षा नही हुई है वो सबसे पहले दीक्षा ग्रहण करें )

Baglamukhi Kavach in Hindi

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Baglamukhi Pratyangira Kavach बगला प्रत्यंगिरा कवच

Baglamukhi Pratyangira Kavach बगला प्रत्यंगिरा कवच

pitambara

इस कवच के पाठ से वायु भी स्थिर हो जाती है। शत्रु का विलय हो जाता है। विद्वेषण, आकर्षण, उच्चाटन, मारण तथा शत्रु का स्तम्भन भी इस कवच के पढ़ने से होता है। बगला प्रत्यंगिरा सर्व दुष्टों का नाश करने वाली, सभी दुःखो को हरने वाली, पापों का नाश करने वाली, सभी शरणागतों का हित करने वाली, भोग, मोक्ष, राज्य और सौभाग्य प्रदायिनी तथा नवग्रहों के दोषों को दूर करने वाली हैं। जो साधक इस कवच का पाठ तीनों समय अथवा एक समय भी स्थिर मन से करता है, उसके लिए यह कल्पवृक्ष के समान है और तीनों लोकों में उसके लिए कुछ भी दुर्लभ नहीं है। साधक जिसकी ओर भरपूर दृष्टि से देख ले, अथवा हाथ से किसी को छू भर दे, वही मनुष्य दासतुल्य हो जाता है।
इस कवच के पाठ से भयंकर से भयंकर तंत्र प्रयोग को भी नष्ट किया जा सकता है लेकिन इसका पाठ केवल बगलामुखी में दीक्षित साधक ही कर सकते हैं। बिना गुरू आज्ञा के इसका पाठ नही करना चाहिए।

The recitation of baglamukhi pratyangira kavacham (armor) can stall even the wind, enemies get destroyed. This kavacham can bring any attempt of the enemy to a still. This kavacham destroys all the enemies, ends all sorrows & sins, mitigates the ill-effects of the planetary positions in horoscope, protects the devotees and bestows wealth, kingdom (fame) & fortune. This kavacham is like a wish-fulfilling tree to the devotee who chants this kavacham three times a day or at least once daily with concentration, there is nothing unattainable for him. Any person, who is touched by the devotee or even glanced by him, becomes a slave to the devotee.

This amour destroys even the most invincible spells cast by enemies. But, this should be chanted only after obtaining the deeksha and initiation from a preceptor (Guru).

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Baglamukhi Pratyangira Kavach in Hindi Pdf Free Download Secret and Powerful Tantra

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Bhagwati Baglamukhi Sarva Jana Vashikaran Mantra in Hindi and English भगवती बगलामुखी सर्वजन वशीकरण मंत्र

Bhagwati Baglamukhi Sarva Jana Vashikaran Mantra in Hindi and English भगवती बगलामुखी सर्वजन वशीकरण मंत्र

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मां बगलामुखी को सामान्यतः सभी लोग शत्रुओं का नाश करने वाली, उनकी गति, मति, बुद्धि का स्तम्भन करने वाली, मुकदमे एवं चुनाव आदि में विजय दिलाने वाली शक्ति के रूप में जानते हैं। लेकिन यह बात केवल कुछ ही लोग जानते हैं कि वे जगत का वशीकरण भी करने वाली हैं। यदि उनकी कृपा प्राप्त हो जाये तो साधक की ओर सभी आकर्षित होने लगते हैं, वह जंहा बोलता है, वंही उसे सुनने को जन समूह उमड़ पड़ता है। उसका दायरा बहुत व्यापक हो जाता है। कोई भी स्त्री, पुरूष, बच्चा उसके आकर्षण में ऐसा बंध जाता है कि अपनी सुध-बुध खो बैठता है और वही करने के लिए विवश हो जाता है, जो साधक चाहता है।
इस साधन को करने के लिए अति गोपनीय मंत्र का उल्लेख मैं यंहा साधकों के लिए कर रहा हॅू, लेकिन साधक सदैव स्मरण रखें कि ऐसी साधनाओं का दुष्प्रयोग कभी नहीं करना चाहिए अन्यथा साधक की साधना क्षीण होने लगती है। मंत्र का प्रयोग सदैव समाज कल्याण के लिए करना चाहिए, न कि समाज-विरोधी गतिविधियों के लिए ।
सर्वप्रथम भगवती बगलामुखी की मंत्र दीक्षा ग्रहण करें उसके पश्चात गुरू आज्ञानुसार साधना करें

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Pushp Kinnari Sadhana Evam Mantra Siddhi पुष्प किन्नरी साधना एवं मंत्र सिद्धि

Pushp Kinnari Sadhana Evam Mantra Siddhi  पुष्प किन्नरी साधना एवं मंत्र  सिद्धि

Pushp kinnari sadhana Evam Mantra siddhi in Hindi Pdf

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

प्रत्येक व्यक्ति की आकांक्षा होती है कि उसका व्यक्तित्व आकर्षण से भरा हुआ हो; प्रत्येक व्यक्ति उसकी ओर मुड़-मुड़ कर देखे, प्रत्येक व्यक्ति उसकी ओर चुम्बक के समान खिंचा चला आए। वह चाहता है कि उसका प्रभाव ऐसा हो, जो प्रत्येक व्यक्ति को अपने आकर्षण के बंधन में बांध ले और कोई उससे मुक्त न हो सके।
यदि किसी भी व्यक्ति में ऐसा आकर्षण हो तो ऐसा हो ही नहीं सकता कि वह किसी भी क्षेत्र में असफल हो जाए। ऐसे व्यक्ति को हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है। ऐसे व्यक्तित्व वाला व्यक्ति जो भी करेगा लोग उसका अनुसरण करेंगें, उसकी प्रत्येक बात पर एक विषेष ध्यान देंगें, उसकी प्रत्येक बात मानने को उत्सुक रहेंगे। ऐसा ही आकर्षण प्रदान करने वाली साधना का उल्लेख मैं यंहा कर रहा हॅॅू, जिसका नाम हेै पुष्प किन्नरी साधना ।

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Pushp Kinnari Sadhana Evam Mantra Siddhi in Hindi

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Ma Baglamukhi Unnisakshara Mantra (Bhakt Mandaar Mantra for Money & Wealth)

Ma Baglamukhi Unnisakshara Mantra Sadhana Vidhi (Bhakt Mandaar Mantra for Money & Wealth)

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भगवती बगलामुखी की उपासना कलियुग में सभी कष्टों एवं दुखों से मुक्ति प्रदान करने वाली है। संसार में कोई कष्ट अथवा दुख ऐसा नही है जो भगवती पीताम्बरा की सेवा एवं उपासना से दूर ना हो सकता हो, बस साधकों को चाहिए कि धैर्य पूर्वक प्रतिक्षण भगवती की सेवा करते रहें।

भगवती बगलामुखी का यह भक्त मंदार मंत्र साधकों की हर मनोकामनां पूर्णं करने वाला है। इस मंत्र का विशेष प्रभाव यह है कि इसे करने वाले साधक को कभी भी धन का अभाव नही होता। भगवती की कृपा से वह सभी प्रकार की धन सम्पत्ति का स्वामी बन जाता है।  आज के युग में धन के अभाव में व्यक्ति का कोई भी कार्य पूर्ण नही होता। धन का अभाव होने पर ना ही उसका कोई मित्र होता है और ना ही समाज में उसे सम्मान प्राप्त होता है। इस मंत्र के प्रभाव से धीरे-धीरे साधक को अपने सभी कार्यो में सफलता मिलनी प्रारम्भ  हो जाती है एवं धन का आगमन होना प्रारम्भ हो जाता है।

ऐसा भी देखने में आता है कि कुछ लोग धन तो बहुत अधिक कमातें हैं लेकिन उनके पास बचता कुछ भी नही है, बिना वजह उनके धन का नाश होता है। ऐसे लोगो की जब हम कुण्डली देखते हैं तो षष्ठ(कर्ज) एवं द्वादश (व्यय) भाव शुभ ग्रहों द्वारा प्रभावित होते हैं अथवा एकादश (लाभ) भाव का स्वामी द्वादश (व्यय) भाव में अथवा द्वादश भाव के स्वामी के प्रभाव में होता है, जिस कारण वो जितना भी धन कमाते हैं उतना ही किसी ना किसी रूप में व्यय हो जाता है।

भगवती पीताम्बरा इस सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को चलाने वाली शक्ति हैं। नवग्रहों को भगवती के द्वारा ही विभिन्न कार्य सौपे गये हैं जिनका वो पालन करते हैं। नवग्रह स्वयं भगवती की सेवा में सदैव उपस्थित रहते हैं। जब साधक भगवती की उपसना करता है तो उसे नवग्रहों की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यदि साधक को उसके कर्मानुसार कहीं पर दण्ड भी मिलना होता है तो वह दण्ड भी भगवती की कृपा से न्यून हो जाता है एवं जगदम्बा अपने प्रिय भक्त को इतना साहस प्रदान करती हैं कि वह दण्ड साधक को प्रभवित नही कर पाता। इस सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में कोई भी इतना शक्तिवान नही है जो जगदम्बा कें भक्तो का एक बाल भी बांका कर सके। कहने का तात्पर्य यह है कि कारण चाहें कुछ भी हो भगवती बगलामुखी की उपासना आपको किसी भी प्रकार की समस्या से मुक्त करा सकती है।

मां की कृपा को वही जान पाया है जो उनकी शरण में गया है, इसीलिए अपने शब्दों को यही पर विराम देते हुए मां भगवती से प्रार्थना करता हूं कि आप सभी को भगवती अपनी शरण प्रदान करें एवं आपका कल्याण करे।

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माँ  आप बगलामुखी साधना से सम्बंधित अन्य जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो गुरुदेव श्री योगेश्वरानंद द्वारा लिखित पुस्तक बगलामुखी साधना और सिद्धि एवं षट्कर्म विधान अवश्य पढ़े।

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Baglamukhi (Pitambara ) Ashtakshari Mantra Sadhana Evam Siddhi in Hindi | Sarva Karya Siddhi Ma Baglamukhi Mantra

Baglamukhi (Pitambara ) Ashtakshari Mantra Sadhana Evam Siddhi in Hindi ( Sarva Karya Siddhi Ma Baglamukhi Mantra )

Devi Pitambara Peeth Photo

।। भगवती पीताम्बरा के अष्टाक्षर मंत्र का महात्म्य ।।

भगवती बगलामुखी (पीताम्बरा ) के इस मंत्र का अनुष्ठान चतुराक्षर मंत्र के अनुष्ठान के बाद किया जाता हैा भगवती का यह मंत्र बहुत ही प्रभावशाली एवं चमत्कारी हैा इसकी महिमा को बताने के लिए अपने एक शिष्य के अनुभव को यहां लिख रहा हूं –
मेरे एक शिष्य को बहुत प्रयास करने के बाद भी कहीं कोई नौकरी नही मिल रही थी। बहुत अच्छी डिग्रियां हाने के बाद भी सभी जगह से उसे निराशा ही हाथ लग रही थी। तब मैनें उसे इस मंत्र का एक अनुष्ठान करने को कहा । उसने विधिवत अनुष्ठान शुरू किया और एक सप्ताह बाद ही उसका बहुत बड़ी कम्पनी में चयन हो गया।
यह तो बस एक छोटा सा अनुभव है। इसके अलावा ऐसे बहुत सारे लोग हैं जिन्हें प्रेत बाधा, शत्रु बाधा, नौकरी, पारिवार में कलह, व्यवसाय में असफलता, विवाह, संतान ना होना, आदि समस्याओं में ऐसे परिणाम मिले हैं कि कोई साधारण मनुष्य तो विश्वास भी नही करेगा।
साधको के हितार्थ भगवती के अष्ठाक्षर मंत्र का विधान दे रहा हूं –
(कृपया दीक्षित साधक ही इसका जप करें। जिनकी दीक्षा नही हुई है वो सबसे पहले दीक्षा ग्रहण करें )

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Chinnamasta Mantra Sadhana Evam Siddhi in Hindi

Chinnamasta Mantra Sadhana Evam Siddhi in Hindi

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Chinnamasta Mantra Sadhana Evam Siddhi In Hindi Image

छिन्नमस्ता दशमहाविद्याओं में षष्ठी महाविद्या हैं। इनका दूसरा नाम ‘प्रचण्ड चण्डिका’ भी हैं। हिरण्यकश्यपु और वैरोचन का मनोरथ पूर्ण करने वाली होने से वज्रवैरोचनीया भी कहलाती हैें।
योगियों के लिए इनकी साधना सर्वश्रेष्ठ है। जो साधक कुण्डलिनी जागरण करना चाहते हैं उन्हें यह साधना गुरू मार्गदर्शन में अवश्य करनी चाहिए।

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Baglamukhi Chaturakshar Mantra Evam Pooja Vidhi in Hindi Pdf बगलामुखी (पीताम्बरा) चतुरक्षर मंत्र

Baglamukhi Chaturakshar Mantra Evam Pooja Vidhi in Hindi Pdf बगलामुखी (पीताम्बरा) चतुरक्षर मंत्र

भगवती बगलामुखी (पीताम्बरा) के इस मंत्र का अनुष्ठान बीज मंत्र  ( हल्रीं )  के अनुष्ठान के बाद किया जाता हैा ऐसा देखा गया है कि बीज मंत्र का अनुष्ठान तो साधक बिना किसी समस्या के कर लेते हैं, लेकिन चतुरक्षर के अनुष्ठान में उन्हें थोड़ी समस्या का सामना करना पड़ता है। समस्या से यहां तात्पर्य भगवती द्वारा ली जाने वाली परीक्षा से है। इस मंत्र में कई बार ऐसी परिस्थिति पैदा हो जाती है कि आपका अनुष्ठान बीच में ही छूट जाये, जैसे कहीं अचानक बाहर जाना पड़ जाये अथवा किसी काम में इतनी अधिक व्यस्तता हो जाये कि उस दिन के निर्धारित जप करने का समय ना मिले इत्यादि, लेकिन साधको को किसी भी परिस्थिति में किसी भी दिन जप नही छोड़ना है । यदि किसी कारण वश बाहर जाना भी पड़ भी जाये तो वही पर जाकर अपना जप पूर्ण करें एवं भगवती से क्षमा प्रार्थना करें । यदि आपने यह अनुष्ठान एक बार पूर्ण कर लिया तो भगवती की कृपा को प्राप्त करने से आपको कोई नही रोक सकता । भगवती पर विश्वास रखें एवं नियमित रूप से अपना जप करते रहें, आपको सफलता अवश्य मिलेगी ।

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Baglamukhi Pitambara Ashtottar Shatnam Stotram in Hindi and Sanskrit with Audio Mp3

Baglamukhi Pitambara Ashtottar Shatnam Stotram in Hindi and Sanskrit with Audio Mp3

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भगवती पीताम्बरा के भक्तों को प्रतिदिन मंत्र जप करने के पश्चात मां के अष्टोत्तर-शतनाम का पाठ करना चाहिए । इसके पाठ से भगवती की विशेष कृपा प्राप्त होती हैा जिन साधको ने भगवती पीताम्बरा की दीक्षा अभी तक प्राप्त नही की है वो सर्वप्रथम गुरू मुख से दीक्षा लें एवं उसी के पश्चात पाठ करें।

साधना को आरम्भ करने से पूर्व एक साधक को चाहिए कि वह मां भगवती  की उपासना अथवा अन्य किसी भी देवी या देवता की उपासना निष्काम भाव से करे। उपासना का तात्पर्य सेवा से होता है। उपासना के तीन भेद कहे गये हैं:- कायिक अर्थात् शरीर से , वाचिक अर्थात् वाणी से और मानसिक- अर्थात् मन से।  जब हम कायिक का अनुशरण करते हैं तो उसमें पाद्य, अर्घ्य, स्नान, धूप, दीप, नैवेद्य आदि पंचोपचार पूजन अपने देवी देवता का किया जाता है। जब हम वाचिक का प्रयोग करते हैं तो अपने देवी देवता से सम्बन्धित स्तोत्र पाठ आदि किया जाता है अर्थात् अपने मुंह से उसकी कीर्ति का बखान करते हैं। और जब मानसिक क्रिया का अनुसरण करते हैं तो सम्बन्धित देवता का ध्यान और जप आदि किया जाता है।
जो साधक अपने इष्ट देवता का निष्काम भाव से अर्चन करता है और लगातार उसके मंत्र का जप करता हुआ उसी का चिन्तन करता रहता है, तो उसके जितने भी सांसारिक कार्य हैं उन सबका भार मां स्वयं ही उठाती हैं और अन्ततः मोक्ष भी प्रदान करती हैं। यदि आप उनसे पुत्रवत् प्रेम करते हैं तो वे मां के रूप में वात्सल्यमयी होकर आपकी प्रत्येक कामना को उसी प्रकार पूर्ण करती हैं जिस प्रकार एक गाय अपने बछड़े के मोह में कुछ भी करने को तत्पर हो जाती है। अतः सभी साधकों को मेरा निर्देष भी है और उनको परामर्ष भी कि वे साधना चाहे जो भी करें, निष्काम भाव से करें। निष्काम भाव वाले साधक को कभी भी महाभय नहीं सताता। ऐसे साधक के समस्त सांसारिक और पारलौकिक समस्त कार्य स्वयं ही सिद्ध होने लगते हैं उसकी कोई भी किसी भी प्रकार की अभिलाषा अपूर्ण नहीं रहती ।
मेरे पास ऐसे बहुत से लोगों के फोन और मेल आते हैं जो एक क्षण में ही अपने दुखों, कष्टों का त्राण करने के लिए साधना सम्पन्न करना चाहते हैं। उनका उद्देष्य देवता या देवी की उपासना नहीं, उनकी प्रसन्नता नहीं बल्कि उनका एक मात्र उद्देष्य अपनी समस्या से विमुक्त होना होता है। वे लोग नहीं जानते कि जो कष्ट वे उठा रहे हैं, वे अपने पूर्व जन्मों में किये गये पापों के फलस्वरूप उठा रहे हैं। वे लोग अपनी कुण्डली में स्थित ग्रहों को देाष देते हैं, जो कि बिल्कुल गलत परम्परा है। भगवान शिव ने सभी ग्रहों को यह अधिकार दिया है कि वे जातक को इस जीवन में ऐसा निखार दें कि उसके साथ पूर्वजन्मों का कोई भी दोष न रह जाए। इसका लाभ यह होगा कि यदि जातक के साथ कर्मबन्धन शेष नहीं है तो उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाएगी। लेकिन हम इस दण्ड को दण्ड न मानकर ग्रहों का दोष मानते हैं।

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Very Powerful Hanuman Mantra Sadhna and Maruti Kavach

Very Powerful Hanuman Mantra Sadhna and Maruti Kavach ( हनुमान मंत्र साधना एवं मारुती कवच )

भगवान शिव के ग्यारहवे रुद्रावतार हनुमानजी कलियुग के जाग्रत देवता हैं जो शीघ्र ही अपने भक्तों पर कृपा करते हैं, लेकिन बस आवश्यकता है सही विधि से उनकी साधना करने की ।
हनुमान जी ने जिस प्रकार श्री राम जी के समस्त कार्योे को सम्पन्न किया था उसी प्रकार वो अपने भक्तों के सभी कार्यो को सम्पन्न करते हैं। हनुमान उपासना से साधक समस्त विघ्न व्याधियों पर विजय प्राप्त कर सकता है। हनुमान जी को नवग्रहों ने वरदान दिया था कि वो उनके भक्तों को कभी भी परेशान नही करेगें इसीलिए शनि-राहु आदि ग्रहों की महादशा में इनकी साधना से बहुत अधिक लाभ मिलता है। शनि देव के गुरू भगवान शिव हैं एवं हनुमान जी भगवान शिव के अवतार, इसीलिए शनिदेव शिव भक्तों एवं हनुमान भक्तों पर विशेष कृपा करते हैं।
प्रस्तुत हनुमत् मंत्र बहुत ही प्रभावशाली है जिसेे श्रीकृष्ण ने महाभारत काल में अर्जुन को प्रदान किया था। इसी मंत्र के प्रभाव से अर्जुन ने अजेय योद्धाओं पर विजय प्राप्त की थी। इस मंत्र के प्रभाव से साधक जन किसी भी प्रकार की तंत्रबाधा, रोग, शत्रुबाधा, नजर, कोर्ट-कचहरी एवं अन्य संकटों से मुक्ति प्राप्त कर सकता है।

हनुमान मंत्र साधना एवं सिद्धि  ( हनुमान सिद्ध मंत्र )

हनुमान जी का यह मंत्र सिद्ध है एवं तुरंत फल देने वाला है।  ॐ नमो भगवते हनुमते महारुद्रात्मकाय हुम् फट् स्वाहा

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Param Devi Sukta of Ma TripuraSundari ( Mantras and Stotras for Money and Wealth)

Param Devi Sukta of Ma TripuraSundari ( Mantras and Stotras for Money and Wealth)

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भगवती महात्रिपुर सुन्दरी का यह स्तोत्र अत्यन्त ही गोपनीय एवं प्रमाणित है, लेकिन यह गुरू-गम्य है। अर्थात् गुरू-मुख से प्राप्त करने के उपरान्त ही यह फलदायी होता है। यदि इस सूक्त का पाठ निरंतर तीन सालों तक किया जाये तो निश्चित रूप से साधक को भगवती त्रिपुर सुंदरी का साक्षात्कार होता है। इस स्तोत्र का नित्य पाठ करने वाला साधक समस्त सिद्धियों का स्वामी, सर्वत्र विजय प्राप्त करने वाला एवं संसार को वश में करने वाला हो जाता है। धन एवं सभी ऐश्वर्य उसके दास हो जाते हैं। उसकी जिह्वा पर साक्षात मां सरस्वती का निवास हो जाता है। उपरोक्त समस्त इच्छाएं रखने वाले साधक को चाहिए कि वह श्री गुरू-चरणों में बैठकर इस स्तोत्र को प्रयत्नपूर्वक प्राप्त करे । जो साधक श्री विद्या में दीक्षित नही हैं वो सर्वप्रथम श्री विद्या की दीक्षा अपने गुरूदेव से प्राप्त करें ।

श्री विद्या ललिता त्रिपुर सुन्दरी धन, ऐश्वर्य, भोग एवं मोक्ष की अधिष्ठाता देवी हैं। अन्य विद्याओं की उपासना मंत या तो भोग मिलता है या फिर मोक्ष, लेकिन श्री विद्या का उपासक जीवन पर्यन्त सारे ऐश्वर्य भोगते हुए अन्त में मोक्ष को प्राप्त करता है। इनकी उपासना तंत्र शास्त्रों में अति रहस्यमय एवं गुप्त रूप से प्रकट की गयी है। पूर्व जन्म के विशेष संस्कारों के बलवान होने पर ही इस विद्या की दीक्षा का योग बनता है। ऐसे बहुत ही कम लोग होते हैं जिन्हे इस जीवन में यह उपासना करने का सौभाग्य प्राप्त होता है। मुख्य रूप से इनके तीन स्वरूपों की पूजा होती है। प्रथम आठ वर्षीया स्वरूप बाला त्रिपुरसुन्दरी, द्वितीय सोलह वर्षीया स्वरूप षोडशी, तृतीय युवा अवस्था स्वरूप ललिता त्रिपुरसुन्दरी। श्री विद्या साधना में क्रम दीक्षा का विधान है एवं सर्वप्रथम बाला सुन्दरी के मंत्र की दीक्षा साधको को दी जाती है। यदि आप ये साधना करना चाहते हैं तो हमसे सम्पर्क कर सकते है।
हमारे शास्त्रों में करोड़ो मंत्र हैं लेकिन हर मंत्र आपके लिए सही नही है। शिष्य के लिए कौन सा मंत्र सही है इसका निर्णय केवल गुरू ही कर सकता है। इसलिए आप केवल अपने आप को गुरू को समर्पित कर दीजिए, इसके बाद गुरू स्वयं आपको सही राह दिखायेगा।

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Pashupatastra Mantra Sadhana Evam Siddhi in Hindi & Sanskrit पाशुपतास्त्र मंत्र साधना एवं सिद्धि

Pashupatastra Mantra Sadhana Evam Siddhi in Hindi & Sanskrit  ( पाशुपतास्त्र मंत्र साधना एवं सिद्धि )

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Lord Shiva & Shakti ( Ardhanarishwar form)

शिव का एक भीषण शूलास्त्र जिसे अर्जुन ने तपस्या करके प्राप्त किया था।  महाभारतका युद्ध हुआ, उसमें भगवान्‌ शंकरका दिया हुआ पाशुपतास्त्र अर्जुनके पास था, भगवान्‌ शंकरने कह दिया कि तुम्हें चलाना नहीं पड़ेगा । यह तुम्हारे पास पड़ा-पड़ा विजय कर देगा, चलानेकी जरूरत नहीं, चला दोगे तो संसारमें प्रलय हो जायगा । इसलिये चलाना नहीं ।

इस पाशुपत स्तोत्र का मात्र एक बार जप करने पर ही मनुष्य समस्त विघ्नों का नाश कर सकता है । सौ बार जप करने पर समस्त उत्पातो को नष्ट कर सकता है तथा युद्ध आदि में विजय प्राप्त कर सकता है । इस मंत्र का घी और गुग्गल से हवं करने से मनुष्य असाध्य कार्यो को पूर्ण कर सकता है । इस पाशुपातास्त्र मंत्र के पाठ मात्र से समस्त क्लेशो की शांति हो जाती है ।

यह अत्यन्त प्रभावशाली व शीघ्र फलदायी प्रयोग है। यदि मनुष्य इस स्तोत्र का पाठ गुरू के निर्देशानुसार संपादित करे तो  अवश्य फायदा मिलेगा। शनिदेव शिव भक्त भी हैं और शिव के शिष्य भी हैं। शनि के गुरु शिव होने के कारण इस अमोघ प्रयोग का प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है। यदि किसी साधारण व्यक्ति के भी गुरु की कोई आवभगत करें तो वह कितना प्रसन्न होता है। फिर शनिदेव अपने गुरु की उपासना से क्यों नहीं प्रसन्न होंगे। इस स्तोत्र के पाठ से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और शिव की प्रसन्नता से शनिदेव खुश होकर संबंधित व्यक्ति को अनुकूल फल प्रदान करते हैं। साथ ही एक विशेषता यह भी परिलक्षित होती है कि संबंधित व्यक्ति में ऐसी क्षमता आ जाती है कि वह शनिदेव के द्वारा प्राप्त दण्ड भी बड़ी सरलता से स्वीकार कर लेता है। साथ ही वह अपने जीवन में ऐसा कोई अशुभ कर्म भी नहीं करता जिससे उस पर शनिदेव भविष्य में भी नाराज हों।

यह किसी भी कार्य के लिए अमोघ राम बाण है। अन्य सारी बाधाओं को दूर करने के साथ ही युवक-युवतियों के लिए यह अकाटय प्रयोग माना ही नहीं जाता अपितु इसका अनेक अनुभूत प्रयोग किया जा चुका है। जिस वर या कन्या के विवाह में विलंब होता है, यदि इस पाशुपत-स्तोत्र का प्रयोग करें तो निश्चित रूप से शीघ्र ही उन्हें दाम्पत्य सुख का लाभ मिलता है। केवल इतना ही नहीं, अन्य सांसारिक कष्टों को दूर करने के लिए भी पाठ या जप, हवन, तर्पण, मार्जन आदि करने से अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है।

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Sarva Karya Siddhi Saundarya Lahri Mantra Prayoga समस्त कार्यों की सिद्धि हेतु सौन्दर्यलहरी के कुछ विशिष्ट प्रयोग

Sarva Karya Siddhi Saundarya Lahri Mantra Prayoga  ( समस्त कार्यों की सिद्धि हेतु सौन्दर्यलहरी के कुछ विशिष्ट प्रयोग )

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आदिगुरू भगवत्पाद शंकराचार्य ने सौन्दर्य लहरी नामक ग्रन्थ में मां त्रिपुरसुन्दरी के स्वरूप का बहुत ही सुन्दर वर्णन किया है। उनके अनिवर्चनीय स्वरूप का वर्णन करने के लिए ही उन्होंने सौन्दर्य लहरी ग्रन्थ की रचना की जिसमें उन्होंने बहुत ही सुन्दर ढंग से मां की स्तुति की है। वास्तव में इसके दो खण्ड हैं…..आनन्द लहरी और सौन्दर्य लहरी। इन दोनों को एकत्र करके ही सौन्दर्य लहरी का नाम दिया गया है। इसमें प्रस्तुत स्तुति बहुत ही प्रभावी और रहस्यों से परिपूर्ण है। इससे कई साधनांए एवं ऐसे प्रयोग सिद्ध होते हैं, जो मानव जीवन के लिए अत्यन्त ही महत्वपूर्ण हैं।

भगवती त्रिपुर सुन्दरी की इस स्तुति से साधकों को अत्यन्त ही सुख, शांति एवं परम ज्ञान की प्राप्ति होती है। उस परम शक्ति के प्रकाश से सम्पूर्ण जगत प्रकाशमान है। यन्त्र, मन्त्र एवं तन्त्र के माध्यम से हम उनकी उपासना बाह्य रूप में करते हैं।

यंहा भी मैं कुछ ऐसे प्रयोग दे रहा हूँ जिनमें मन्त्र एवं यन्त्र का प्रयोग किया गया है। इन दोनों के माध्यम से हम अपने जीवन की बहुत सी समस्याओं का समाधान भगवती की कृपा से कर सकते हैं। यन्त्रों की उत्पत्ति भगवान शिव के ताण्डव नृत्य से मानी जाती है। मन्त्रों के साथ यन्त्रों का प्रयोग आदि काल से होता रहा है। अतः साधक दोनों का प्रयोग करें।

नोट – केवल श्री विद्या में दीक्षित साधक ही यह प्रयोग करें अथवा सर्वप्रथम श्री विद्या की दीक्षा प्राप्त करें।

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Shri Lalita Tripura Sundari Khadgamala Stotram in Sanskrit & Hindi श्री विद्या ललिता खड्गमाला स्तोत्र

Shri Lalita Tripura Sundari Khadgamala Stotram in Sanskrit & Hindi श्री विद्या ललिता खड्गमाला स्तोत्र
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किसी भी देवता की खड्गमाला अत्यन्त प्रभावशाली होती है। हमारे बहुत से काम ऐसे होते हैं, जिन्हें सामान्य तरीके अथवा पूजा से पूर्ण नहीं किया जा सकता है। यदि हम ये चाहते हैं कि हमारे षट्कर्म जैसे – मारण, मोहन, वशीकरण आदि सिद्ध हों तो हमें खड्गमाला का प्रयोग करना चाहिए। इस माला मन्त्र का कम से कम 1108 पाठ करें, आपका कार्य सिद्ध होगा। जो साधक श्री विद्या में दीक्षित हैं केवल वही इसका प्रयोग करें अथवा सर्वप्रथम अपने गुरूदेव से श्री विद्या की दीक्षा ग्रहण करें।
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Vipreet Pratyangira Mantra Sadhna Evam Siddhi & Puja Vidhi

Vipreet Pratyangira Mantra Sadhna Evam Siddhi & Puja Vidhi   ( श्री विपरीत प्रत्यंगिरा मंत्र  साधना एवं सिद्धि )

 

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Vipreet Pratyangira Mantra Benefits in Hindi

यदि शत्रु निरंतर आप पर अभिचारिक कर्म कर रहा हो, निरंतर किसी न किसी रूप में आपको आर्थिक, मानसिक, सामाजिक, शारीरिक क्षति पहुंचा रहा हो और आपके भविष्य को चैपट कर रहा हो, तब भद्रकाली के इस स्वरूप, अर्थात विपरीत प्रत्यंगिरा का आश्रय लेना सर्वोत्तम उपाय है। जिस दिन से साधक इस महाविधा का प्रयोग आरम्भ करता है, उसी दिन से ही भगवती भद्र काली उसकी सुरक्षा करने लगती हैं और शत्रु द्वारा किये गये अभिचाारिक कर्म दोगुने वेग से उसी पर लौटकर अपना प्रहार करते हैं। इसके अतिरिक्त राजकीय बाधा, अरिष्ट ग्रह बाधा निवारण में तथा अपना खोया हुआ पद, आस्तित्व ओर गरिमा प्राप्ति में भी यह विद्या सर्वोत्तम मानी जाती है। साधक की आयु, यश तथा तेज की वृद्धि करने में भी यह विद्या बहुत उत्तम मानी जाती है।

Vipreet Pratyangira Mantra Benefits in English

A most powerful Mantra Sadhana to invoke Devi Pratyangira is given here. Vipreet Pratyangira Mantra Sadhna  is  used to destroy the mind of an enemy who is unnecessarily troubling and bent upon harming some innocent and helpless person. confuses the enemy by destroying  his harmful and destructive thinking and by confusing his mind. As always clarified such sadhnas should only be performed under the highly advanced practitioner (Your Guru) after mantra diksha.

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2019 Shardiya Navratri Puja Vidhi and Dates शारदीय 2019 नवरात्री पूजा विधि

2019 Shardiya Navratri Puja Vidhi and Dates 2019 शारदीय नवरात्री पूजा विधि

maa durga nava roop nine forms of shakti

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शारदीय नवरात्रि आज से प्रारम्भ हो रहे हैं और आने वाले नौ दिनों तक मां दुर्गा की 9 शक्ति की पूजा- आराधना की जाएगी। इस समय का उपयोग साधक विशिष्ट साधनाओं को सम्पन्न करने में किया करते हैं। यह समय सभी साधको के लिए बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इस काल में की गयी उपासना का विशेष फल प्राप्त होता है। जो लोग अभी तक किसी कारण से कोई अनुष्ठान अथवा पुरश्चरण नहीं कर सके हैं उन्हें वह अवश्य शरू कर देना चाहिए। यह जरुरी नहीं है कि नवरात्र में केवल माँ दुर्गा की ही उपासना की जाती है बल्कि इस समय आप किसी भी इष्ट देवता के मंत्रो का अनुष्ठान कर सकते हैं। नवरात्र के पहले दिन अपने गुरु देव से मंत्र दीक्षा लेकर, उसका अनुष्ठान करना चाहिए। कुछ साधको के मन में एक प्रश्न रहता है कि क्या नवरात्र में शरू किया गया अनुष्ठान नवरात्र में ही पूर्ण करना जरुरी है , नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं है। ये अनुष्ठान आप २१ अथवा ४० दिन में भी पूर्ण कर सकते हैं लेकिन यदि हो सके तो अंतिम नवरात्र तक पूर्ण कर लेना चाहिए। यदि किसी कारण से अनुष्ठान करना सम्भव नहीं है तो नवरात्र में जितना अधिक जप हो सके उतना ही अच्छा है।

नवरात्र में अपने इष्ट देव के सहस्रनाम से अर्चन करना चाहिए। सहस्त्रनाम में देवी/देवता के एक हजार नाम होते हैं। इसमें उनके गुण व कार्य के अनुसार नाम दिए गए हैं। सर्व कल्याण व कामना पूर्ति हेतु इन नामों से अर्चन करने का प्रयोग अत्यधिक प्रभावशाली है। जिसे सहस्त्रार्चन के नाम से जाना जाता है।  सहस्र नामावली के एक-एक नाम का उच्चारण करके देवी की प्रतिमा पर, उनके चित्र पर, उनके यंत्र पर या देवी का आह्वान किसी सुपारी पर करके प्रत्येक नाम के उच्चारण के पश्चात नमः बोलकर देवी की प्रिय वस्तु चढ़ाना चाहिए। जिस वस्तु से अर्चन करना हो वह शुद्ध, पवित्र, दोष रहित व एक हजार से अधिक संख्या में होनी चाहिए।अर्चन में बिल्वपत्र, हल्दी, केसर या कुंकुम से रंगे चावल, इलायची, लौंग, काजू, पिस्ता, बादाम, गुलाब के फूल की पंखुड़ी, मोगरे का फूल, चारौली, किसमिस, सिक्का आदि का प्रयोग शुभ व देवी को प्रिय है। यदि अर्चन एक से अधिक व्यक्ति एक साथ करें तो नाम का उच्चारण एक व्यक्ति को तथा अन्य व्यक्तियों को नमः का उच्चारण अवश्य करना चाहिए।सहस्त्रनाम के पाठ करने का फल भी महत्वपूर्ण है। अर्चन की सामग्री प्रत्येक नाम के पश्चात, प्रत्येक व्यक्ति को अर्पित करनी चाहिए। अर्चन के पूर्व पुष्प, धूप, दीपक व नैवेद्य देवी/देवता को अर्पित करना चाहिए। दीपक पूरी अर्चन प्रक्रिया तक प्रज्वलित रहना चाहिए।

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2019  Shardiya Navratri Dates

29 September 2019 ( Sunday ) Pratipada Ghatasthapana Shailputri Puja
30 September 2019 ( Monday ) Dwitiya Brahmacharini Puja
01 October 2019 ( Tuesday )  Tritiya Chandraghanta Puja
02 October 2019 ( Wednesday ) Chaturthi Kushmanda Puja
03 October 2019 ( Thursday) Panchami Skandamata Puja
04 October 2019( Friday) Shashthi Katyayani Puja
05 October 2019 ( Saturday) Saptami Kalaratri Puja
06 October 2019( Sunday ) Ashtami Durga Ashtami Mahagauri Puja Sandhi Puja
07 October 2019 ( Monday ) Navami Siddhidatri Puja
08 October 2019 ( Tuesday )  Dashami Navratri Parayna

29  सितम्बर 2019 ( रविवार ) घट स्थापना, शैलपुत्री पूजा
30 सितम्बर 2019 ( सोमवार ) द्वितीया ब्रह्मचारिणी पूजा
01 अक्टूबर 2019 ( मंगलवार )  तृतीया चंद्रघंटा पूजा
02 अक्टूबर 2019 (  बुधवार ) चतुर्थी कुष्मांडा पूजा
03 अक्टूबर 2019 (  गुरुवार ) पंचमी स्कंदमाता पूजा
04 अक्टूबर 2019 (  शुक्रवार ) षष्ठी कात्यायनी पूजा
05 अक्टूबर 2019 (  शनिवार ) सप्तमी कालरात्रि पूजा
06 अक्टूबर 2019 (  रविवार ) अष्टमी महागौरी पूजा, दुर्गा महा अष्टमी पूजा,
07 अक्टूबर 2019  (  सोमवार ) नवमी  सिद्धिदात्री पूजा
08 अक्टूबर 2019 (  मंगलवार )  दशमी नवरात्री परायण

यह है घट स्थापना का समय

कलश स्थापना :- दिन रविवार 29 सितंबर को द्विस्वभाव या स्थिर लग्न या अभिजित मुहुर्त दिन में 11:36 बजे से लेकर 12:24 बजे तक किया जायेगा । साथ ही यदि शुभ चौघड़िया भी मिल जाये तो अति उत्तम होगा। जो निम्न है–
सुबह 7:30 से 9 बजे तक चर चौघड़िया
सुबह 9:00 से 10:30 बजे तक लाभ चौघड़िया
सुबह 10:30 से 12 बजे तक अमृत चौघड़िया
दोपहर 1:30 बजे से 3 बजे तक शुभ चौघड़िया।

( अच्छा कर्म किसी भी समय किया जाय वह अच्छा फल ही प्रदान करता है। )

यह है कलश स्थापना के लिए सामान

नवरात्रि के लिए मिट्टी का पात्र और जौ, शुद्ध, साफ मिट्टी, शुद्ध जल से भरा हुआ सोना, चांदी, तांबा, पीतल या मिट्टी का कलश, मोली (कलवा), साबुत सुपारी, कलश में रखने के लिए सिक्के, फूल और माला, अशोक या आम के 5 पत्ते, कलश को ढकने के लिए मिट्टी का ढक्कन, साबुत चावल, एक पानी वाला नारियल, लाल कपड़ा या चुनरी की आवस्यकता होती है।

ऐसे करें कलश स्थापना

  • नवरात्रि में कलश स्थापना करने के दौरान सबसे पहले पूजा स्थल को शुद्ध कर लें।
  • लकड़ी की चौकी रखकर उसपर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं।
  • कपड़े पर थोड़े-थोड़े चावल रखें।
  • चावल रखते हुए सबसे पहले गणेश जी का स्मरण करें।
  • एक मिट्टी के पात्र में जौ बोयें।
  • इस पात्र पर जल से भरा हुआ कलश स्थापित करें।
  • कलश पर रोली से स्वस्तिक या ‘ऊँ’ बनायें।
  • कलश के मुख पर कलवा बांधकर इसमें सुपारी, सिक्का डालकर आम या अशोक के पत्ते रखें।
  • कलश के मुख को चावल से भरी कटोरी से ढक दें।
  • एक नारियल पर चुनरी लपेटकर इसे कलवे से बांधें और चावल की कटोरी पर रख दें।
  • सभी देवताओं का आवाहन करें और धूप दीप जलाकर कलश की पूजा करें।
  • भोग लगाकर मां की पूजा करें।

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नवरात्रि साधना (Navratri Sadhna)

प्रतिपदा अर्थात् नवरात्र के प्रथम दिवस से चण्डी-पाठ अर्थात् दुर्गा सप्तशती का पाठ आरम्भ किया जाता है। कुछ साधक प्रतिदिन सम्पूर्ण दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं, लेकिन कुछ साधक समयाभाव के कारण अथवा अन्य किन्हीं कारणों से सम्पूर्ण दुर्गा सप्तशती का पाठ नहीं कर पाते हैं और वे नवरात्र के समापन तक दुर्गा सप्तशती पूर्ण करते है। ऐसे व्यक्ति, जो सम्पूर्ण नवरात्र में केवल दुर्गा सप्तशती का मात्र एक ही पाठ करते हों, उन्हें चाहिए कि वे निम्नानुसार अपने पाठ करें –

प्रतिपदा – अध्याय एक का पाठ करें।

द्वितीया – अध्याय दो व तीन का पाठ करें।

तृतीया – अध्याय चार का पाठ करें।

चतुर्थी – अध्याय पांच, छः, सात व आठ का पाठ करें।

पंचमी – अध्याय नौ व दस का पाठ करके लक्ष्मी-पूजन करें।

षष्ठी – अध्याय ग्यारह का पाठ करें।

सप्तमी – अध्याय बारह व तेरह का पाठ करें।

अष्टमी – इस दिन महा अष्टमी का व्रत रखें।

नवमी – महा नवमी व्रत, हवन

शापोद्धार मंत्र
ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं क्रां क्रीं चण्डिकादेव्यै शापनाशानुग्रहं कुरु कुरु स्वाहा। इस मंत्र का आदि और अन्त में सात बार जप करें।

उत्कीलन मंत्र
ॐ श्रीं क्लीं ह्रीं सप्तशति चण्डिके उत्कीलनं कुरु कुरु स्वाहा। इस मंत्र का आदि और अन्त में इक्कीस-इक्कीस बार जप करें।

मृत संजीवनी विद्या
ॐ ह्रीं ह्रीं वं वं ऐं ऐं मृत संजीवनी विद्ये मृतमुत्थापयोत्थापय क्रीं ह्रीं ह्रीं वं स्वाहा। इस मंत्र का आदि और अन्त में सात बार जप करें।

शाप विमोचन मंत्र ( मारीच कल्प के अनुसार )
ॐ श्रीं श्रीं क्लीं हूं छोभय मोहय उत्कीलय उत्कीलय उत्कीलय ठं ठं । इस मंत्र का आरम्भ में ही एक सौ आठ बार जप करना चाहिए, पाठ के अंत में नहीं।

इसके बाद छः अङ्गों सहित दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है। कवच , अर्गला , कीलक और तीनो रहस्य, ये ही सप्तशती के छः अङ्ग माने गए हैं।

Sri Durga Saptashloki ( श्री दुर्गा सप्तश्लोकी )

जो लोग समयाभाव के कारण दुर्गा सप्तशती का पाठ नहीं कर सकते उन्हें नियमित रूप से श्री दुर्गा सप्तश्लोकी का पाठ करना चाहिए

शिव उवाच –
देवी त्वं भक्तसुलभे सर्वकार्यविधायिनी |
कलौ हि कार्यसिद्ध्यर्थमुपायं ब्रूहि यत्नतः ||
देव्युवाच –
शृणु देव प्रवक्ष्यामि कलौ सर्वेष्टसाधनम् |
मया तवैव स्नेहेनाप्यम्बास्तुतिः प्रकाश्यते ||

ॐ अस्य श्रीदुर्गासप्तश्लोकीस्तोत्रमहामन्त्रस्य नारायण ऋषिः, अनुष्टुप छन्दः, श्रीमहाकालीमहालक्ष्मीमहासरस्वत्यो देवताः , श्रीदुर्गाप्रीत्यर्थं सप्तश्लोकीदुर्गापाठे विनियोगः ॥

ज्ञानिनामपि चेतांसि देवि भगवती हि सा । बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति ॥१॥

दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि । दारिद्रयदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्र चित्ता ॥2॥

सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥3॥

शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे । सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥4॥

सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते । भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवी नमोऽस्तु ते ॥5॥

रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान् । त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति ॥6॥

सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि । एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरि विनाशनम् ॥7॥

Sri Durga Saptashloki Path in Hindi

शिव उवाच – शिवजी बोले – हे देवी ! तुम भक्तों के लिये सुलभ हो और समस्त कर्मों का विधान करनेवाली हो। कलियुग में कामनाओं की सिद्धि हेतु यदि कोई उपाय हो तो उसे अपनी वाणी द्वारा सम्यकरूपसे व्यक्त करो।

देवी ने कहा – हे देव ! आपका मेरे ऊपर बहुत स्नेह है। कलियुग में समस्त कामनाओं को सिद्ध करने वाला जो साधन है वह बतलाऊँगी , सुनो ! उसका नाम है अम्बास्तुति।

वे भगवती महामाया देवी ज्ञानियों के भी चित्त को बलपूर्वक खींचकर मोह में डाल देती हैं ।

माँ दुर्गे ! आप स्मरण करने पर सब प्राणियों का भय हर लेती हैं और स्वस्थ पुरुषों द्धारा चिन्तन करने पर उन्हें परम कल्याणमयी बुद्धि प्रदान करती हैं । दुःख, दरिद्रता और भय हरनेवाली देवी ! आपके सिवा दूसरी कौन है, जिसका चित्त सबका उपकार करने के लिए सदा ही दयार्द्र रहता हो ।

नारायणी ! आप सब प्रकार का मंगल प्रदान करनेवाली मंगलमयी हैं, आप ही कल्याणदायिनी शिवा हैं । आप सब पुरुषार्थ्रो को सिद्ध करने वाली, शरणागतवत्सला, तीन नेत्रों वाली गौरी हैं । आपको नमस्कार है ।

शरणागतों, दिनों एवं पीड़ितों की रक्षा में संलग्न रहनेवाली तथा सबकी पीड़ा दूर करनेवाली नारायणी देवी ! आपको नमस्कार है ।

सर्वस्वरूपा, सर्वेश्वरी तथा सब प्रकार की शक्तियों से सम्पन्न दिव्यरूपा दुर्गे देवी ! सब भयों से हमारी रक्षा कीजिये आपको नमस्कार है ।

देवी ! आप प्रसन्न होने पर सब रोगों को नष्ट कर देती हैं और कुपित होने पर मनोवांछित सभी कामनाओं का नाश कर देती हैं । जो लोग आपकी शरण में हैं, उनपर विपत्ति तो आती ही नहीं ; आपकी शरण में गए हुए मनुष्य दूसरों को शरण देनेवाले हो जाते हैं ।

सर्वेश्वरि ! आप ऐसी प्रकार तीनों लोकों की समस्त बाधाओं को शान्त करें और हमारे शत्रुओं का नाश करती रहें ।

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जो लोग शत्रु , ऊपरी बाधा एवं तंत्र प्रयोगो से ग्रस्त हैं उन्हें नवरात्र में माँ बगलामुखी अथवा माँ प्रत्यंगिरा का अनुष्ठान करना चाहिए

Ma Pratyangira Puja Vidhi

Ma Baglamukhi Puja Vidhi Part 1

Ma Baglamukhi Puja Vidhi Part 2

धन प्राप्ति एवं जीवन में चारो और सफलता प्राप्ति के लिए नवरात्र में श्री विद्या उपासना करनी चाहिए

Sri Vidya Upasana Vidhi

दश महाविद्याओ के किसी भी स्वरुप की पूजा जीवन में सफलता लेकर आती है।

Dhumavati Upasana Vidhi

Ma Kamakhya Upasana Vidhi

Mahakali Upasana Vidhi

Ma Tara Upasana Vidhi

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नवरात्रि का महत्व ( Importance Of Navratri)

These nine days are very good to start any sadhana. If anyone is willing to do dus mahavidya upasana then he/she should not waste this time. These nine days alone can change your life & your future, but it depends on you how you spend your life in these nine days. Those who never had any spiritual experience in their life they should practice mantras in these navaratri. Those who have taken diksha from us they must do anusthaan in this navaratri. It is not compulsory to 1.25 lakh mantras. You can do anusthaan of 21000 mantras, 31000 mantras etc, but you have to complete in nine days only. Homam can be done on 10th day.  Who have already in any anusthaan please do continue it , no new anusthaan is required for them.

Those who have not taken mantra diksha as of yet they should take it in this navaratri as it is the best time.

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