Devi Baglamukhi Mantra Evam Puja Vidhi

Devi Baglamukhi Mantra Evam Puja Vidhi (Baglamukhi Beej Mantra Sadhna Vidhi )

Devi Pitambara Peeth Photo

Download Baglamukhi Mantra Avam Sadhna Vidhi in Hindi

   भगवती बगलामुखी  के इस मंत्र को महामंत्र के नाम से जाना जाता हैा ऐसा कहा जाता है कि भगवती बगलामुखी की उपासना    करने वाले साधक के सभी कार्य बिना व्यक्त किये पूर्ण हो जाते हैं और जीवन की हर बाधा को वो हंसते हंसते पार कर जाते हैं।    मैनें स्वयं अपने जीवन में अनेको चमत्कार देखें हैं, जिनको सुनकर कोई भी यकीन नही करेगा लेकिन भगवती पीताम्बरा          अपने भक्तों के ऊपर ऐसे ही कृपा करती हैं।  एकाक्षरी मंत्र माँ पीताम्बरा का बीज मंत्र है, इसके जप के बिना माँ पीताम्बरा की     साधना पूर्ण नही होती । माँ पीताम्बरा की साधना इसी बीज मंत्र से प्रारम्भ होती है, एवं साधको को बीज मंत्र का नियमित          रूप से कम से कम 21 माला का जप अवश्य करना चाहिए,  क्योंकि  बीज मंत्र में ही देवता के प्राण होते हैं।  जिस प्रकार बीज        के बिना वृक्ष की कल्पना नही की जा सकती उसी तरह बीज मंत्र के जप के बिना साधना में सफलता के बारे में सोचना भी व्यर्थ है। भगवती की सेवा केवल मंत्र जप से ही नही होती है बल्कि उनके नाम का गुणगान करने से भी होती है । जिस प्रकार नारद ऋषि हर पल भगवान विष्णु का नाम जपते थे, उसी प्रकार सुधी साधको को माँ पीताम्बरा का नाम जप हर पल करना चाहिए एवं अन्य लोगो को भी उनके नाम की महिमा के बारे में बताना चाहिए । मैंने  अपने जीवन का केवल एक ही उद्देश्य बनाया है कि माँ पीताम्बरा के नाम को हर व्यक्ति तक पहुंचाना हैा आप सब भी यदि माँ की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं तो आज से ही भगवती के एकाक्षरी मंत्र को अपने जीवन में उतार लीजिए एवं माँ के नाम एवं उनकी महिमा का अधिक से अधिक प्रचार करना शुरू कर दीजिए। साधको के हितार्थ भगवती के बीज मंत्र की जानकारी यहां दे रहा हूँ, भगवती पीताम्बरा आप सब पर कृपा करें । 

For Ma Baglamukhi Mantra diksha and sadhna guidance email to sumitgirdharwal@yahoo.com. Call us on 9540674788 (Sumit Girdharwal Ji). Visit our website for more information – www.baglamukhi.net or www.yogeshwaranand.org

Read the rest of this entry

Mahashivratri Puja on 17th Feb 2015

Maha Shivratri Puja Vidhi in Hindi

lord shiva   शास्त्र कहते हैं कि संसार में अनेकानेक प्रकार के व्रत, विविध तीर्थस्नान नाना प्रकारेण दान अनेक प्रकार के यज्ञ तरह-तरह के तप      तथा जप आदि भी महाशिवरात्रि व्रत की समानता नहीं कर सकते। अतः अपने हित साधनार्थ सभी को इस व्रत का अवश्य पालन          करना चाहिए।  महाशिवरात्रि व्रत परम मंगलमय और दिव्यतापूर्ण है। इससे सदा सर्वदा भोग और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह शिव     रात्रि व्रत व्रतराज के नाम से विख्यात है एवं चारों पुरूषार्थो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाला है। हो सके तो इस व्रत को जीवन     पर्यंत करें नही तो चैदह वर्ष के बाद पूर्ण विधि विधान के साथ उद्यापन कर दें।

 

For astrology, mantra diksha & sadhna guidance email to sumitgirdharwal@yahoo.com, shaktisadhna@yahoo.com or call us on 9410030994, 9540674788. For more information visit http://www.baglamukhi.info or http://www.yogeshwaranand.org

Read the rest of this entry

Baglamukhi Chaturakshar Mantra Evam Pooja Vidhi in Hindi Pdf बगलामुखी (पीताम्बरा) चतुरक्षर मंत्र

Baglamukhi Chaturakshar Mantra Evam Pooja Vidhi in Hindi Pdf बगलामुखी (पीताम्बरा) चतुरक्षर मंत्र

भगवती बगलामुखी (पीताम्बरा) के इस मंत्र का अनुष्ठान बीज मंत्र  ( हल्रीं )  के अनुष्ठान के बाद किया जाता हैा ऐसा देखा गया है कि बीज मंत्र का अनुष्ठान तो साधक बिना किसी समस्या के कर लेते हैं, लेकिन चतुरक्षर के अनुष्ठान में उन्हें थोड़ी समस्या का सामना करना पड़ता है। समस्या से यहां तात्पर्य भगवती द्वारा ली जाने वाली परीक्षा से है। इस मंत्र में कई बार ऐसी परिस्थिति पैदा हो जाती है कि आपका अनुष्ठान बीच में ही छूट जाये, जैसे कहीं अचानक बाहर जाना पड़ जाये अथवा किसी काम में इतनी अधिक व्यस्तता हो जाये कि उस दिन के निर्धारित जप करने का समय ना मिले इत्यादि, लेकिन साधको को किसी भी परिस्थिति में किसी भी दिन जप नही छोड़ना है । यदि किसी कारण वश बाहर जाना भी पड़ भी जाये तो वही पर जाकर अपना जप पूर्ण करें एवं भगवती से क्षमा प्रार्थना करें । यदि आपने यह अनुष्ठान एक बार पूर्ण कर लिया तो भगवती की कृपा को प्राप्त करने से आपको कोई नही रोक सकता । भगवती पर विश्वास रखें एवं नियमित रूप से अपना जप करते रहें, आपको सफलता अवश्य मिलेगी ।

For Astrology, Mantra Diksha & Sadhana Guidance email to sumitgirdharwal@yahoo.com or call us on 9410030994, 9540674788. For more info visit http://www.baglamukhi.info or http://www.yogeshwaranand.org

Read the rest of this entry

Magha Gupta Navaratri 2015 गुप्त नवरात्री

Magha Gupta Navratri 2015 गुप्त नवरात्री

प्रत्येक वर्ष आने वाले दो नवरात्रों से तो आप सभी लोग परिचित हैं लेकिन इनके अलावा प्रत्येक वर्ष दो और नवरात्री होती हैं जिन्हें गुप्त नवरात्री कहा जाता है। पूर्व काल में इनका ज्ञान केवल उच्च कोटि के साधकों को होता था जो इस समय का उपयोग विशिष्ट साधनाओं को सम्पन्न करने में किया करते थे।
गुप्त नवरात्र में पूजा, उपासना सामान्य नवरात्रों के समान ही होती हैा तान्त्रिक समाज में इन नवरात्रों का बहुत ही महत्व है, जो इस समय की लगातार प्रतिक्षा करतें हैं।

साधना को आरम्भ करने से पूर्व एक साधक को चाहिए कि वह मां भगवती  की उपासना अथवा अन्य किसी भी देवी या देवता की उपासना निष्काम भाव से करे। उपासना का तात्पर्य सेवा से होता है। उपासना के तीन भेद कहे गये हैं:- कायिक अर्थात् शरीर से , वाचिक अर्थात् वाणी से और मानसिक- अर्थात् मन से।  जब हम कायिक का अनुशरण करते हैं तो उसमें पाद्य, अर्घ्य, स्नान, धूप, दीप, नैवेद्य आदि पंचोपचार पूजन अपने देवी देवता का किया जाता है। जब हम वाचिक का प्रयोग करते हैं तो अपने देवी देवता से सम्बन्धित स्तोत्र पाठ आदि किया जाता है अर्थात् अपने मुंह से उसकी कीर्ति का बखान करते हैं। और जब मानसिक क्रिया का अनुसरण करते हैं तो सम्बन्धित देवता का ध्यान और जप आदि किया जाता है।
जो साधक अपने इष्ट देवता का निष्काम भाव से अर्चन करता है और लगातार उसके मंत्र का जप करता हुआ उसी का चिन्तन करता रहता है, तो उसके जितने भी सांसारिक कार्य हैं उन सबका भार मां स्वयं ही उठाती हैं और अन्ततः मोक्ष भी प्रदान करती हैं। यदि आप उनसे पुत्रवत् प्रेम करते हैं तो वे मां के रूप में वात्सल्यमयी होकर आपकी प्रत्येक कामना को उसी प्रकार पूर्ण करती हैं जिस प्रकार एक गाय अपने बछड़े के मोह में कुछ भी करने को तत्पर हो जाती है। अतः सभी साधकों को मेरा निर्देष भी है और उनको परामर्ष भी कि वे साधना चाहे जो भी करें, निष्काम भाव से करें। निष्काम भाव वाले साधक को कभी भी महाभय नहीं सताता। ऐसे साधक के समस्त सांसारिक और पारलौकिक समस्त कार्य स्वयं ही सिद्ध होने लगते हैं उसकी कोई भी किसी भी प्रकार की अभिलाषा अपूर्ण नहीं रहती ।
मेरे पास ऐसे बहुत से लोगों के फोन और मेल आते हैं जो एक क्षण में ही अपने दुखों, कष्टों का त्राण करने के लिए साधना सम्पन्न करना चाहते हैं। उनका उद्देष्य देवता या देवी की उपासना नहीं, उनकी प्रसन्नता नहीं बल्कि उनका एक मात्र उद्देष्य अपनी समस्या से विमुक्त होना होता है। वे लोग नहीं जानते कि जो कष्ट वे उठा रहे हैं, वे अपने पूर्व जन्मों में किये गये पापों के फलस्वरूप उठा रहे हैं। वे लोग अपनी कुण्डली में स्थित ग्रहों को देाष देते हैं, जो कि बिल्कुल गलत परम्परा है। भगवान शिव ने सभी ग्रहों को यह अधिकार दिया है कि वे जातक को इस जीवन में ऐसा निखार दें कि उसके साथ पूर्वजन्मों का कोई भी दोष न रह जाए। इसका लाभ यह होगा कि यदि जातक के साथ कर्मबन्धन शेष नहीं है तो उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाएगी। लेकिन हम इस दण्ड को दण्ड न मानकर ग्रहों का दोष मानते हैं।

For astrology, mantra diksha and sadhna guidance email to sumitgirdharwal@yahoo.com or call us on 9540674788.

Read the rest of this entry

Baglamukhi Pitambara Ashtottar Shatnam Stotram in Hindi and Sanskrit with Audio Mp3

Baglamukhi Pitambara Ashtottar Shatnam Stotram in Hindi and Sanskrit with Audio Mp3

भगवती पीताम्बरा के भक्तों को प्रतिदिन मंत्र जप करने के पश्चात मां के अष्टोत्तर-शतनाम का पाठ करना चाहिए । इसके पाठ से भगवती की विशेष कृपा प्राप्त होती हैा जिन साधको ने भगवती पीताम्बरा की दीक्षा अभी तक प्राप्त नही की है वो सर्वप्रथम गुरू मुख से दीक्षा लें एवं उसी के पश्चात पाठ करें।

साधना को आरम्भ करने से पूर्व एक साधक को चाहिए कि वह मां भगवती  की उपासना अथवा अन्य किसी भी देवी या देवता की उपासना निष्काम भाव से करे। उपासना का तात्पर्य सेवा से होता है। उपासना के तीन भेद कहे गये हैं:- कायिक अर्थात् शरीर से , वाचिक अर्थात् वाणी से और मानसिक- अर्थात् मन से।  जब हम कायिक का अनुशरण करते हैं तो उसमें पाद्य, अर्घ्य, स्नान, धूप, दीप, नैवेद्य आदि पंचोपचार पूजन अपने देवी देवता का किया जाता है। जब हम वाचिक का प्रयोग करते हैं तो अपने देवी देवता से सम्बन्धित स्तोत्र पाठ आदि किया जाता है अर्थात् अपने मुंह से उसकी कीर्ति का बखान करते हैं। और जब मानसिक क्रिया का अनुसरण करते हैं तो सम्बन्धित देवता का ध्यान और जप आदि किया जाता है।
जो साधक अपने इष्ट देवता का निष्काम भाव से अर्चन करता है और लगातार उसके मंत्र का जप करता हुआ उसी का चिन्तन करता रहता है, तो उसके जितने भी सांसारिक कार्य हैं उन सबका भार मां स्वयं ही उठाती हैं और अन्ततः मोक्ष भी प्रदान करती हैं। यदि आप उनसे पुत्रवत् प्रेम करते हैं तो वे मां के रूप में वात्सल्यमयी होकर आपकी प्रत्येक कामना को उसी प्रकार पूर्ण करती हैं जिस प्रकार एक गाय अपने बछड़े के मोह में कुछ भी करने को तत्पर हो जाती है। अतः सभी साधकों को मेरा निर्देष भी है और उनको परामर्ष भी कि वे साधना चाहे जो भी करें, निष्काम भाव से करें। निष्काम भाव वाले साधक को कभी भी महाभय नहीं सताता। ऐसे साधक के समस्त सांसारिक और पारलौकिक समस्त कार्य स्वयं ही सिद्ध होने लगते हैं उसकी कोई भी किसी भी प्रकार की अभिलाषा अपूर्ण नहीं रहती ।
मेरे पास ऐसे बहुत से लोगों के फोन और मेल आते हैं जो एक क्षण में ही अपने दुखों, कष्टों का त्राण करने के लिए साधना सम्पन्न करना चाहते हैं। उनका उद्देष्य देवता या देवी की उपासना नहीं, उनकी प्रसन्नता नहीं बल्कि उनका एक मात्र उद्देष्य अपनी समस्या से विमुक्त होना होता है। वे लोग नहीं जानते कि जो कष्ट वे उठा रहे हैं, वे अपने पूर्व जन्मों में किये गये पापों के फलस्वरूप उठा रहे हैं। वे लोग अपनी कुण्डली में स्थित ग्रहों को देाष देते हैं, जो कि बिल्कुल गलत परम्परा है। भगवान शिव ने सभी ग्रहों को यह अधिकार दिया है कि वे जातक को इस जीवन में ऐसा निखार दें कि उसके साथ पूर्वजन्मों का कोई भी दोष न रह जाए। इसका लाभ यह होगा कि यदि जातक के साथ कर्मबन्धन शेष नहीं है तो उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाएगी। लेकिन हम इस दण्ड को दण्ड न मानकर ग्रहों का दोष मानते हैं।

Read the rest of this entry

Very Powerful Hanuman Mantra Sadhna and Maruti Kavach

Very Powerful Hanuman Mantra Sadhna and Maruti Kavach
For Astrology, Mantra Diksha & Sadhana Guidance email to sumitgirdharwal@yahoo.com or call on 9540674788,9410030994
भगवान शिव के ग्यारहवे रुद्रावतार हनुमानजी कलियुग के जाग्रत देवता हैं जो शीघ्र ही अपने भक्तों पर कृपा करते हैं, लेकिन बस आवश्यकता है सही विधि से उनकी साधना करने की ।
हनुमान जी ने जिस प्रकार श्री राम जी के समस्त कार्योे को सम्पन्न किया था उसी प्रकार वो अपने भक्तों के सभी कार्यो को सम्पन्न करते हैं।
हनुमान उपासना से साधक समस्त विघ्न व्याधियों पर विजय प्राप्त कर सकता है। हनुमान जी को नवग्रहों ने वरदान दिया था कि वो उनके भक्तों को कभी भी परेशान नही करेगें इसीलिए शनि-राहु आदि ग्रहों की महादशा में इनकी साधना से बहुत अधिक लाभ मिलता है। शनि देव के गुरू भगवान शिव हैं एवं हनुमान जी भगवान शिव के अवतार, इसीलिए शनिदेव शिव भक्तों एवं हनुमान भक्तों पर विशेष कृपा करते हैं।
प्रस्तुत हनुमत् मंत्र बहुत ही प्रभावशाली है जिसेे श्रीकृष्ण ने महाभारत काल में अर्जुन को प्रदान किया था। इसी मंत्र के प्रभाव से अर्जुन ने अजेय योद्धाओं पर विजय प्राप्त की थी। इस मंत्र के प्रभाव से साधक जन किसी भी प्रकार की तंत्रबाधा, रोग, शत्रुबाधा, नजर, कोर्ट-कचहरी एवं अन्य संकटों से मुक्ति प्राप्त कर सकता है।

Read the rest of this entry

Param Devi Sukta of Ma TripuraSundari ( Mantras and Stotras for Money and Wealth)

Param Devi Sukta of Ma TripuraSundari ( Mantras and Stotras for Money and Wealth)

For Astrology, Mantra Diksha & Sadhna Guidance email to sumitgirdharwal@yahoo.com or call us on 9410030994, 9540674788. For more information visit http://www.baglamukhi.net or http://www.yogeshwaranand.org

भगवती महात्रिपुर सुन्दरी का यह स्तोत्र अत्यन्त ही गोपनीय एवं प्रमाणित है, लेकिन यह गुरू-गम्य है। अर्थात् गुरू-मुख से प्राप्त करने के उपरान्त ही यह फलदायी होता है। यदि इस सूक्त का पाठ निरंतर तीन सालों तक किया जाये तो निश्चित रूप से साधक को भगवती त्रिपुर सुंदरी का साक्षात्कार होता है। इस स्तोत्र का नित्य पाठ करने वाला साधक समस्त सिद्धियों का स्वामी, सर्वत्र विजय प्राप्त करने वाला एवं संसार को वश में करने वाला हो जाता है। धन एवं सभी ऐश्वर्य उसके दास हो जाते हैं। उसकी जिह्वा पर साक्षात मां सरस्वती का निवास हो जाता है। उपरोक्त समस्त इच्छाएं रखने वाले साधक को चाहिए कि वह श्री गुरू-चरणों में बैठकर इस स्तोत्र को प्रयत्नपूर्वक प्राप्त करे । जो साधक श्री विद्या में दीक्षित नही हैं वो सर्वप्रथम श्री विद्या की दीक्षा अपने गुरूदेव से प्राप्त करें ।

श्री विद्या ललिता त्रिपुर सुन्दरी धन, ऐश्वर्य, भोग एवं मोक्ष की अधिष्ठाता देवी हैं। अन्य विद्याओं की उपासना मंत या तो भोग मिलता है या फिर मोक्ष, लेकिन श्री विद्या का उपासक जीवन पर्यन्त सारे ऐश्वर्य भोगते हुए अन्त में मोक्ष को प्राप्त करता है। इनकी उपासना तंत्र शास्त्रों में अति रहस्यमय एवं गुप्त रूप से प्रकट की गयी है। पूर्व जन्म के विशेष संस्कारों के बलवान होने पर ही इस विद्या की दीक्षा का योग बनता है। ऐसे बहुत ही कम लोग होते हैं जिन्हे इस जीवन में यह उपासना करने का सौभाग्य प्राप्त होता है। मुख्य रूप से इनके तीन स्वरूपों की पूजा होती है। प्रथम आठ वर्षीया स्वरूप बाला त्रिपुरसुन्दरी, द्वितीय सोलह वर्षीया स्वरूप षोडशी, तृतीय युवा अवस्था स्वरूप ललिता त्रिपुरसुन्दरी। श्री विद्या साधना में क्रम दीक्षा का विधान है एवं सर्वप्रथम बाला सुन्दरी के मंत्र की दीक्षा साधको को दी जाती है। यदि आप ये साधना करना चाहते हैं तो हमसे सम्पर्क कर सकते है।
हमारे शास्त्रों में करोड़ो मंत्र हैं लेकिन हर मंत्र आपके लिए सही नही है। शिष्य के लिए कौन सा मंत्र सही है इसका निर्णय केवल गुरू ही कर सकता है। इसलिए आप केवल अपने आप को गुरू को समर्पित कर दीजिए, इसके बाद गुरू स्वयं आपको सही राह दिखायेगा।

Read the rest of this entry

दीपावली पूजा विधि Ma Laxmi Pujan Vidhi on Diwali

Ma Laxmi  Pujan Vidhi on Diwali दीपावली पूजा विधि

Hindi-diwali-card

दीपावली पूजन समय – शाम  6.47  PM – 8.03 PM 23 Oct 2014

भक्ति भाव से किसी भी समय की गयी पूजा सदैव अच्छा फल देती है। इसलिए अगर किसी कारण से आप उपरोक्त दिये गये समय पर पूजा नही कर सकते तो जब भी समय मिले पूजा अर्चना अवश्य करें।

For Astrology, Mantra Diksha & Sadhna Guidance email to sumitgirdharwal@yahoo.com or call us on 9410030994, 9540674788. For information visit http://www.baglamukhi.net orhttp://www.yogeshwaranand.org

Read the rest of this entry

Pashupatastra Mantra Sadhana Evam Siddhi in Hindi & Sanskrit पाशुपतास्त्र मंत्र साधना एवं सिद्धि

Pashupatastra Mantra Sadhana Evam Siddhi in Hindi & Sanskrit  ( पाशुपतास्त्र मंत्र साधना एवं सिद्धि )

शिव का एक भीषण शूलास्त्र जिसे अर्जुन ने तपस्या करके प्राप्त किया था।  महाभारतका युद्ध हुआ, उसमें भगवान्‌ शंकरका दिया हुआ पाशुपतास्त्र अर्जुनके पास था, भगवान्‌ शंकरने कह दिया कि तुम्हें चलाना नहीं पड़ेगा । यह तुम्हारे पास पड़ा-पड़ा विजय कर देगा, चलानेकी जरूरत नहीं, चला दोगे तो संसारमें प्रलय हो जायगा । इसलिये चलाना नहीं ।

इस पाशुपत स्तोत्र का मात्र एक बार जप करने पर ही मनुष्य समस्त विघ्नों का नाश कर सकता है । सौ बार जप करने पर समस्त उत्पातो को नष्ट कर सकता है तथा युद्ध आदि में विजय प्राप्त कर सकता है । इस मंत्र का घी और गुग्गल से हवं करने से मनुष्य असाध्य कार्यो को पूर्ण कर सकता है । इस पाशुपातास्त्र मंत्र के पाठ मात्र से समस्त क्लेशो की शांति हो जाती है ।

यह अत्यन्त प्रभावशाली व शीघ्र फलदायी प्रयोग है। यदि मनुष्य इस स्तोत्र का पाठ गुरू के निर्देशानुसार संपादित करे तो  अवश्य फायदा मिलेगा। शनिदेव शिव भक्त भी हैं और शिव के शिष्य भी हैं। शनि के गुरु शिव होने के कारण इस अमोघ प्रयोग का प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है। यदि किसी साधारण व्यक्ति के भी गुरु की कोई आवभगत करें तो वह कितना प्रसन्न होता है। फिर शनिदेव अपने गुरु की उपासना से क्यों नहीं प्रसन्न होंगे। इस स्तोत्र के पाठ से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और शिव की प्रसन्नता से शनिदेव खुश होकर संबंधित व्यक्ति को अनुकूल फल प्रदान करते हैं। साथ ही एक विशेषता यह भी परिलक्षित होती है कि संबंधित व्यक्ति में ऐसी क्षमता आ जाती है कि वह शनिदेव के द्वारा प्राप्त दण्ड भी बड़ी सरलता से स्वीकार कर लेता है। साथ ही वह अपने जीवन में ऐसा कोई अशुभ कर्म भी नहीं करता जिससे उस पर शनिदेव भविष्य में भी नाराज हों।

यह किसी भी कार्य के लिए अमोघ राम बाण है। अन्य सारी बाधाओं को दूर करने के साथ ही युवक-युवतियों के लिए यह अकाटय प्रयोग माना ही नहीं जाता अपितु इसका अनेक अनुभूत प्रयोग किया जा चुका है। जिस वर या कन्या के विवाह में विलंब होता है, यदि इस पाशुपत-स्तोत्र का प्रयोग करें तो निश्चित रूप से शीघ्र ही उन्हें दाम्पत्य सुख का लाभ मिलता है। केवल इतना ही नहीं, अन्य सांसारिक कष्टों को दूर करने के लिए भी पाठ या जप, हवन, तर्पण, मार्जन आदि करने से अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है।

For Astrology, Mantra Diksha & Sadhna Guidance email to sumitgirdharwal@yahoo.com or call us on 9410030994, 9540674788. For information visit http://www.baglamukhi.net or http://www.yogeshwaranand.org

Read the rest of this entry

चंद्र ग्रहण में कैसे करें पूजा Lunar eclipse/Chandra Grahan on 8th October 2014

आज चंद्रमा पर राहु-केतु का पूरा असर होने से ग्रहण योग बना हैं। चंद्रमा आज मीन राशि में केतु के साथ है और उस पर राहु की पूरी दृष्टि हैं। इस तरह चंद्रमा, राहु-केतु से पूरी तरह पीडि़त हो गया हैं। इसके अलावा आज सूर्य भी इन दोनों ग्रहों से पीडि़त हैं, क्योंकि सूर्य राहु के साथ कन्या राशि में हैं। आज हो रहा चंद्र ग्रहण मीन राशि पर हैं।
दिल्ली में यह  चंद्र  ग्रहण  केवल कुछ मिनट  के लिए ही दिखेगा।  लेकिन  इसका प्रभाव दोपहर २ बजे से ही शुरू हो जायेगा।  साधको को परामर्श है कि दोपहर २. ३० से शाम ६. ३०  अपने इष्ट के मंत्रो का जप करें।  अपनेयदि आप माँ बगलामुखी की  साधना करतें हैं तो माँ के कवच एवं बीज मंत्र का जप करें।  यदि आप बीज  मंत्र के अलावा किसी और मंत्र का जप  करते है तो  कवच के  साथ  उसी का जप करें।   ग्रहण काल में जप  करने  से  मंत्र जाग्रत हो जाता है।ग्रहण के समय किसी भी मूर्ति अथवा यन्त्र को  हाथ ना लगाएं।  इस दौरान पूजा करते हुए दीपक अथवा धुप  ना जलाएं।  इस दौरान भगवान को भोग भी नहीं लगाया जाता है।  आपको केवल माला से मंत्र  जप करना है।  ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करने के बाद ही अपनी नियमित पूजा करें।  यन्त्र को स्नान कराये एवं  दीपक आदि जलाकर भोग लगाएं।

For Astrology, Mantra Diksha & Sadhana guidance email to sumitgirdharwal@yahoo.com or call us on 9540674788

Read the rest of this entry

Sarva Karya Siddhi Saundarya Lahri Mantra Prayoga समस्त कार्यों की सिद्धि हेतु सौन्दर्यलहरी के कुछ विशिष्ट प्रयोग

Sarva Karya Siddhi Saundarya Lahri Mantra Prayoga  ( समस्त कार्यों की सिद्धि हेतु सौन्दर्यलहरी के कुछ विशिष्ट प्रयोग )

For Astrology, Mantra Diksha & Sadhna guidance email to sumitgirdharwal@yahoo.com or call us on 9540674788, 9410030994. For more information visit http://www.yogeshwaranand.org or http://www.baglamukhi.net

आदिगुरू भगवत्पाद शंकराचार्य ने सौन्दर्य लहरी नामक ग्रन्थ में मां त्रिपुरसुन्दरी के स्वरूप का बहुत ही सुन्दर वर्णन किया है। उनके अनिवर्चनीय स्वरूप का वर्णन करने के लिए ही उन्होंने सौन्दर्य लहरी ग्रन्थ की रचना की जिसमें उन्होंने बहुत ही सुन्दर ढंग से मां की स्तुति की है। वास्तव में इसके दो खण्ड हैं…..आनन्द लहरी और सौन्दर्य लहरी। इन दोनों को एकत्र करके ही सौन्दर्य लहरी का नाम दिया गया है। इसमें प्रस्तुत स्तुति बहुत ही प्रभावी और रहस्यों से परिपूर्ण है। इससे कई साधनांए एवं ऐसे प्रयोग सिद्ध होते हैं, जो मानव जीवन के लिए अत्यन्त ही महत्वपूर्ण हैं।

भगवती त्रिपुर सुन्दरी की इस स्तुति से साधकों को अत्यन्त ही सुख, शांति एवं परम ज्ञान की प्राप्ति होती है। उस परम शक्ति के प्रकाश से सम्पूर्ण जगत प्रकाशमान है। यन्त्र, मन्त्र एवं तन्त्र के माध्यम से हम उनकी उपासना बाह्य रूप में करते हैं।

यंहा भी मैं कुछ ऐसे प्रयोग दे रहा हूँ जिनमें मन्त्र एवं यन्त्र का प्रयोग किया गया है। इन दोनों के माध्यम से हम अपने जीवन की बहुत सी समस्याओं का समाधान भगवती की कृपा से कर सकते हैं। यन्त्रों की उत्पत्ति भगवान शिव के ताण्डव नृत्य से मानी जाती है। मन्त्रों के साथ यन्त्रों का प्रयोग आदि काल से होता रहा है। अतः साधक दोनों का प्रयोग करें।

नोट – केवल श्री विद्या में दीक्षित साधक ही यह प्रयोग करें अथवा सर्वप्रथम श्री विद्या की दीक्षा प्राप्त करें।

Read the rest of this entry

Follow

Get every new post delivered to your Inbox.

Join 6,590 other followers