Baglamukhi Mantra Utkilan Vidhaan बगलामुखी मंत्र वृहत् उत्कीलन विधान

Baglamukhi Mantra Utkilan Vidhaan (बगलामुखी मंत्र वृहत् उत्कीलन विधान)
मंत्रों का दुरुपयोग रोकने के लिए कलियुग के प्रारम्भ में भगवान शिव ने सभी मंत्रों का कीलन (शापित) कर दिया था। तब माँ पार्वती के अनुग्रह करने पर उन्होंने मंत्रों को उत्कीलित करने का विधान भी प्रस्तुत किया ताकि सत्पात्र एवं अधिकारी साधक भी मंत्र की सिद्धि प्राप्त कर सकें। यही मंत्रोंत्कीलन-विधान मंत्र-उपासना के अंग के रूप में उत्कीलक कहे जाते हैं। इसलिए साधक को कवच आदि का पाठ करने से पूर्व उत्कीलन करना चाहिए।
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Chaur Ganesh Mantra चौर गणेश मंत्र

Chaur Ganesh Mantra चौर गणेश मंत्र
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तन्त्र-शास्त्र ‘वर्णविल’ के अनुसार चौर गणेश-मन्त्र का जप किए बिना कोई पूजा-कर्म नहीं करना चाहिए। इसमें स्पष्ट कहा गया है कि चौर मंत्रो को जाने बिना जो पुराण भी पढ़ता है, वह साक्षात् ‘कलि’ के समान होता है। वह पापी, चोर अथवा कुत्ते की योनि में जाता है। इस मंत्र का जप किए बिना यदि पूजा या जप कर्म किया जाए तो पूजा व पूजा के तेज का स्वयं गणेश हरण कर लेते हैं।
मनुष्य-देह में कुण्डलिनी कमल के प्रत्येक द्वार के पथ में पचास गण, देवताओं के ज्योतिरूप जो मुनिगण हैं, वे जम्हाई लेते हैं तथा प्रत्येक चक्र के कमलदल में स्थित होकर जप का तेज हरण कर लेते हैं। स्मरण रखें! जप-तप आदि में एक दिव्य तेज होता है, जहां-जहां ये तेजस्वी क्रियाएं होती हैं, वहां-वहां ये चौर गण होते हैं। इसलिए इनके प्रबोधन हेतु ये मंत्र पढ़े जाते हैं।

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Vipreet Pratyangira Mantra Sadhana Evam Siddhi (श्री विपरीत प्रत्यंगिरा मंत्र साधना एवं सिद्धि )

Vipreet Pratyangira Mantra Sadhana Evam Siddhi (श्री विपरीत प्रत्यंगिरा मंत्र  साधना एवं सिद्धि )

यदि शत्रु निरंतर आप पर अभिचारिक कर्म कर रहा हो, निरंतर किसी न किसी रूप में आपको आर्थिक, मानसिक, सामाजिक, शारीरिक क्षति पहुंचा रहा हो और आपके भविष्य को चैपट कर रहा हो, तब भद्रकाली के इस स्वरूप, अर्थात विपरीत प्रत्यंगिरा का आश्रय लेना सर्वोत्तम उपाय है। जिस दिन से साधक इस महाविधा का प्रयोग आरम्भ करता है, उसी दिन से ही भगवती भद्र काली उसकी सुरक्षा करने लगती हैं और शत्रु द्वारा किये गये अभिचाारिक कर्म दोगुने वेग से उसी पर लौटकर अपना प्रहार करते हैं। इसके अतिरिक्त राजकीय बाधा, अरिष्ट ग्रह बाधा निवारण में तथा अपना खोया हुआ पद, आस्तित्व ओर गरिमा प्राप्ति में भी यह विद्या सर्वोत्तम मानी जाती है। साधक की आयु, यश तथा तेज की वृद्धि करने में भी यह विद्या बहुत उत्तम मानी जाती है।

A most powerful Mantra Sadhana to invoke Devi Pratyangira is given here. Vipreet Pratyangira Mantra Sadhna  is  used to destroy the mind of an enemy who is unnecessarily troubling and bent upon harming some innocent and helpless person. confuses the enemy by destroying  his harmful and destructive thinking and by confusing his mind. As always clarified such sadhnas should only be performed under the highly advanced practitioner (Your Guru) after mantra diksha.

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Baglamukhi Sarva Karya Siddhi Mantra बगलामुखी सर्वकार्य सिद्धि मंत्र

Baglamukhi Sarva Karya Siddhi Mantra बगलामुखी सर्वकार्य सिद्धि मंत्र

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Sri Kali Pratyangira Sadhana Evam Siddhi

Sri Kali Pratyangira Sadhana Evam Siddhi

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इस विद्या का तीनों संध्याओं में पाठ करने वाला साधक समस्त बाधाओं तथा शत्रुओं से सुरक्षित रहता है। किसी भी प्रकार की कोई विपत्ति उसे व्याप्त नहीं करती। ‘अंगिरा’ ऋषि द्वारा प्रणीत यह विद्या निश्चय ही साधक की समस्त आपदाओं का नाश करने वाली एवं सभी ग्रहों की कुदृष्टि से उसे सुरक्षित बनाने वाली है।
यह विद्या उग्र है इसलिए दीक्षित साधक ही इसका पाठ करें।

 

 

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Baglamukhi Kavach ( बगलामुखी कवच )

Baglamukhi Kavach ( बगलामुखी कवच  )

मां बगलामुखी के प्रत्येक साधक को प्रतिदिन जाप प्रारम्भ करने से पहले इस कवच का पाठ अवश्य करना चाहिए । यदि हो सके तो सुबह दोपहर शाम तीनों समय इसका पाठ करें । यह कवच विश्वसारोद्धार तन्त्र से लिया गया है। पार्वती जी के द्वारा भगवान शिव से पूछे जाने पर भगवती बगला के कवच के विषय में प्रभु वर्णन करते हैं कि देवी बगला शत्रुओं के कुल के लिये जंगल में लगी अग्नि के समान हैं। वे साम्रज्य देने वाली और मुक्ति प्रदान करने वाली हैं।
भगवती बगलामुखी के इस कवच के विषय में बहुत कुछ कहा गया है। इस कवच के पाठ से अपुत्र को धीर, वीर और शतायुष पुत्र की प्राप्ति होति है और निर्धन को धन प्राप्त होता है। महानिशा में इस कवच का पाठ करने से सात दिन में ही असाध्य कार्य भी सिद्ध हो जाते हैं। तीन रातों को पाठ करने से ही वशीकरण सिद्ध हो जाता है। मक्खन को इस कवच से अभिमन्त्रित करके यदि बन्धया स्त्री को खिलाया जाये, तो वह पुत्रवती हो जाती है। इसके पाठ व नित्य पूजन से मनुष्य बृहस्पति के समान हो जाता है, नारी समूह में साधक कामदेव के समान व शत्रओं के लिये यम के समान हो जाता है। मां बगला के प्रसाद से उसकी वाणी गद्य-पद्यमयी हो जाती है । उसके गले से कविता लहरी का प्रवाह होने लगता है। इस कवच का पुरश्चरण एक सौ ग्यारह पाठ करने से होता है, बिना पुरश्चरण के इसका उतना फल प्राप्त नहीं होता। इस कवच को भोजपत्र पर अष्टगंध से लिखकर पुरुष को दाहिने हाथ में व स्त्री को बायें हाथ में धारण करना चाहिये

भगवती बगलामुखी की उपासना कलियुग में सभी कष्टों एवं दुखों से मुक्ति प्रदान करने वाली है। संसार में कोई कष्ट अथवा दुख ऐसा नही है जो भगवती पीताम्बरा की सेवा एवं उपासना से दूर ना हो सकता हो, बस साधकों को चाहिए कि धैर्य पूर्वक प्रतिक्षण भगवती की सेवा करते रहें।

(कृपया दीक्षित साधक ही इसका जप करें। जिनकी दीक्षा नही हुई है वो सबसे पहले दीक्षा ग्रहण करें )

Baglamukhi Kavach in Hindi

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Baglamukhi Pratyangira Kavach बगला प्रत्यंगिरा कवच

Baglamukhi Pratyangira Kavach बगला प्रत्यंगिरा कवच

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इस कवच के पाठ से वायु भी स्थिर हो जाती है। शत्रु का विलय हो जाता है। विद्वेषण, आकर्षण, उच्चाटन, मारण तथा शत्रु का स्तम्भन भी इस कवच के पढ़ने से होता है। बगला प्रत्यंगिरा सर्व दुष्टों का नाश करने वाली, सभी दुःखो को हरने वाली, पापों का नाश करने वाली, सभी शरणागतों का हित करने वाली, भोग, मोक्ष, राज्य और सौभाग्य प्रदायिनी तथा नवग्रहों के दोषों को दूर करने वाली हैं। जो साधक इस कवच का पाठ तीनों समय अथवा एक समय भी स्थिर मन से करता है, उसके लिए यह कल्पवृक्ष के समान है और तीनों लोकों में उसके लिए कुछ भी दुर्लभ नहीं है। साधक जिसकी ओर भरपूर दृष्टि से देख ले, अथवा हाथ से किसी को छू भर दे, वही मनुष्य दासतुल्य हो जाता है।
इस कवच के पाठ से भयंकर से भयंकर तंत्र प्रयोग को भी नष्ट किया जा सकता है लेकिन इसका पाठ केवल बगलामुखी में दीक्षित साधक ही कर सकते हैं। बिना गुरू आज्ञा के इसका पाठ नही करना चाहिए।

The recitation of baglamukhi pratyangira kavacham (armor) can stall even the wind, enemies get destroyed. This kavacham can bring any attempt of the enemy to a still. This kavacham destroys all the enemies, ends all sorrows & sins, mitigates the ill-effects of the planetary positions in horoscope, protects the devotees and bestows wealth, kingdom (fame) & fortune. This kavacham is like a wish-fulfilling tree to the devotee who chants this kavacham three times a day or at least once daily with concentration, there is nothing unattainable for him. Any person, who is touched by the devotee or even glanced by him, becomes a slave to the devotee.

This amour destroys even the most invincible spells cast by enemies. But, this should be chanted only after obtaining the deeksha and initiation from a preceptor (Guru).

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Baglamukhi Pratyangira Kavach in Hindi Pdf Free Download Secret and Powerful Tantra

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Bhagwati Baglamukhi Sarva Jana Vashikaran Mantra in Hindi and English भगवती बगलामुखी सर्वजन वशीकरण मंत्र

Bhagwati Baglamukhi Sarva Jana Vashikaran Mantra in Hindi and English भगवती बगलामुखी सर्वजन वशीकरण मंत्र

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मां बगलामुखी को सामान्यतः सभी लोग शत्रुओं का नाश करने वाली, उनकी गति, मति, बुद्धि का स्तम्भन करने वाली, मुकदमे एवं चुनाव आदि में विजय दिलाने वाली शक्ति के रूप में जानते हैं। लेकिन यह बात केवल कुछ ही लोग जानते हैं कि वे जगत का वशीकरण भी करने वाली हैं। यदि उनकी कृपा प्राप्त हो जाये तो साधक की ओर सभी आकर्षित होने लगते हैं, वह जंहा बोलता है, वंही उसे सुनने को जन समूह उमड़ पड़ता है। उसका दायरा बहुत व्यापक हो जाता है। कोई भी स्त्री, पुरूष, बच्चा उसके आकर्षण में ऐसा बंध जाता है कि अपनी सुध-बुध खो बैठता है और वही करने के लिए विवश हो जाता है, जो साधक चाहता है।
इस साधन को करने के लिए अति गोपनीय मंत्र का उल्लेख मैं यंहा साधकों के लिए कर रहा हॅू, लेकिन साधक सदैव स्मरण रखें कि ऐसी साधनाओं का दुष्प्रयोग कभी नहीं करना चाहिए अन्यथा साधक की साधना क्षीण होने लगती है। मंत्र का प्रयोग सदैव समाज कल्याण के लिए करना चाहिए, न कि समाज-विरोधी गतिविधियों के लिए ।
सर्वप्रथम भगवती बगलामुखी की मंत्र दीक्षा ग्रहण करें उसके पश्चात गुरू आज्ञानुसार साधना करें

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Pushp Kinnari Sadhana Evam Mantra Siddhi पुष्प किन्नरी साधना एवं मंत्र सिद्धि

Pushp Kinnari Sadhana Evam Mantra Siddhi  पुष्प किन्नरी साधना एवं मंत्र  सिद्धि

Pushp kinnari sadhana Evam Mantra siddhi in Hindi Pdf

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

प्रत्येक व्यक्ति की आकांक्षा होती है कि उसका व्यक्तित्व आकर्षण से भरा हुआ हो; प्रत्येक व्यक्ति उसकी ओर मुड़-मुड़ कर देखे, प्रत्येक व्यक्ति उसकी ओर चुम्बक के समान खिंचा चला आए। वह चाहता है कि उसका प्रभाव ऐसा हो, जो प्रत्येक व्यक्ति को अपने आकर्षण के बंधन में बांध ले और कोई उससे मुक्त न हो सके।
यदि किसी भी व्यक्ति में ऐसा आकर्षण हो तो ऐसा हो ही नहीं सकता कि वह किसी भी क्षेत्र में असफल हो जाए। ऐसे व्यक्ति को हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है। ऐसे व्यक्तित्व वाला व्यक्ति जो भी करेगा लोग उसका अनुसरण करेंगें, उसकी प्रत्येक बात पर एक विषेष ध्यान देंगें, उसकी प्रत्येक बात मानने को उत्सुक रहेंगे। ऐसा ही आकर्षण प्रदान करने वाली साधना का उल्लेख मैं यंहा कर रहा हॅॅू, जिसका नाम हेै पुष्प किन्नरी साधना ।

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Pushp Kinnari Sadhana Evam Mantra Siddhi in Hindi

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Ma Baglamukhi Unnisakshara Mantra (Bhakt Mandaar Mantra for Money & Wealth)

Ma Baglamukhi Unnisakshara Mantra Sadhana Vidhi (Bhakt Mandaar Mantra for Money & Wealth)

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भगवती बगलामुखी की उपासना कलियुग में सभी कष्टों एवं दुखों से मुक्ति प्रदान करने वाली है। संसार में कोई कष्ट अथवा दुख ऐसा नही है जो भगवती पीताम्बरा की सेवा एवं उपासना से दूर ना हो सकता हो, बस साधकों को चाहिए कि धैर्य पूर्वक प्रतिक्षण भगवती की सेवा करते रहें।

भगवती बगलामुखी का यह भक्त मंदार मंत्र साधकों की हर मनोकामनां पूर्णं करने वाला है। इस मंत्र का विशेष प्रभाव यह है कि इसे करने वाले साधक को कभी भी धन का अभाव नही होता। भगवती की कृपा से वह सभी प्रकार की धन सम्पत्ति का स्वामी बन जाता है।  आज के युग में धन के अभाव में व्यक्ति का कोई भी कार्य पूर्ण नही होता। धन का अभाव होने पर ना ही उसका कोई मित्र होता है और ना ही समाज में उसे सम्मान प्राप्त होता है। इस मंत्र के प्रभाव से धीरे-धीरे साधक को अपने सभी कार्यो में सफलता मिलनी प्रारम्भ  हो जाती है एवं धन का आगमन होना प्रारम्भ हो जाता है।

ऐसा भी देखने में आता है कि कुछ लोग धन तो बहुत अधिक कमातें हैं लेकिन उनके पास बचता कुछ भी नही है, बिना वजह उनके धन का नाश होता है। ऐसे लोगो की जब हम कुण्डली देखते हैं तो षष्ठ(कर्ज) एवं द्वादश (व्यय) भाव शुभ ग्रहों द्वारा प्रभावित होते हैं अथवा एकादश (लाभ) भाव का स्वामी द्वादश (व्यय) भाव में अथवा द्वादश भाव के स्वामी के प्रभाव में होता है, जिस कारण वो जितना भी धन कमाते हैं उतना ही किसी ना किसी रूप में व्यय हो जाता है।

भगवती पीताम्बरा इस सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को चलाने वाली शक्ति हैं। नवग्रहों को भगवती के द्वारा ही विभिन्न कार्य सौपे गये हैं जिनका वो पालन करते हैं। नवग्रह स्वयं भगवती की सेवा में सदैव उपस्थित रहते हैं। जब साधक भगवती की उपसना करता है तो उसे नवग्रहों की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यदि साधक को उसके कर्मानुसार कहीं पर दण्ड भी मिलना होता है तो वह दण्ड भी भगवती की कृपा से न्यून हो जाता है एवं जगदम्बा अपने प्रिय भक्त को इतना साहस प्रदान करती हैं कि वह दण्ड साधक को प्रभवित नही कर पाता। इस सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में कोई भी इतना शक्तिवान नही है जो जगदम्बा कें भक्तो का एक बाल भी बांका कर सके। कहने का तात्पर्य यह है कि कारण चाहें कुछ भी हो भगवती बगलामुखी की उपासना आपको किसी भी प्रकार की समस्या से मुक्त करा सकती है।

मां की कृपा को वही जान पाया है जो उनकी शरण में गया है, इसीलिए अपने शब्दों को यही पर विराम देते हुए मां भगवती से प्रार्थना करता हूं कि आप सभी को भगवती अपनी शरण प्रदान करें एवं आपका कल्याण करे।

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माँ  आप बगलामुखी साधना से सम्बंधित अन्य जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो गुरुदेव श्री योगेश्वरानंद द्वारा लिखित पुस्तक बगलामुखी साधना और सिद्धि एवं षट्कर्म विधान अवश्य पढ़े।

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Baglamukhi (Pitambara ) Ashtakshari Mantra Sadhana Evam Siddhi in Hindi | Sarva Karya Siddhi Ma Baglamukhi Mantra

Baglamukhi (Pitambara ) Ashtakshari Mantra Sadhana Evam Siddhi in Hindi ( Sarva Karya Siddhi Ma Baglamukhi Mantra )

Devi Pitambara Peeth Photo

।। भगवती पीताम्बरा के अष्टाक्षर मंत्र का महात्म्य ।।

भगवती बगलामुखी (पीताम्बरा ) के इस मंत्र का अनुष्ठान चतुराक्षर मंत्र के अनुष्ठान के बाद किया जाता हैा भगवती का यह मंत्र बहुत ही प्रभावशाली एवं चमत्कारी हैा इसकी महिमा को बताने के लिए अपने एक शिष्य के अनुभव को यहां लिख रहा हूं –
मेरे एक शिष्य को बहुत प्रयास करने के बाद भी कहीं कोई नौकरी नही मिल रही थी। बहुत अच्छी डिग्रियां हाने के बाद भी सभी जगह से उसे निराशा ही हाथ लग रही थी। तब मैनें उसे इस मंत्र का एक अनुष्ठान करने को कहा । उसने विधिवत अनुष्ठान शुरू किया और एक सप्ताह बाद ही उसका बहुत बड़ी कम्पनी में चयन हो गया।
यह तो बस एक छोटा सा अनुभव है। इसके अलावा ऐसे बहुत सारे लोग हैं जिन्हें प्रेत बाधा, शत्रु बाधा, नौकरी, पारिवार में कलह, व्यवसाय में असफलता, विवाह, संतान ना होना, आदि समस्याओं में ऐसे परिणाम मिले हैं कि कोई साधारण मनुष्य तो विश्वास भी नही करेगा।
साधको के हितार्थ भगवती के अष्ठाक्षर मंत्र का विधान दे रहा हूं –
(कृपया दीक्षित साधक ही इसका जप करें। जिनकी दीक्षा नही हुई है वो सबसे पहले दीक्षा ग्रहण करें )

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Chinnamasta Mantra Sadhana Evam Siddhi in Hindi

Chinnamasta Mantra Sadhana Evam Siddhi in Hindi

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छिन्नमस्ता दशमहाविद्याओं में षष्ठी महाविद्या हैं। इनका दूसरा नाम ‘प्रचण्ड चण्डिका’ भी हैं। हिरण्यकश्यपु और वैरोचन का मनोरथ पूर्ण करने वाली होने से वज्रवैरोचनीया भी कहलाती हैें।
योगियों के लिए इनकी साधना सर्वश्रेष्ठ है। जो साधक कुण्डलिनी जागरण करना चाहते हैं उन्हें यह साधना गुरू मार्गदर्शन में अवश्य करनी चाहिए।

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Baglamukhi Chaturakshar Mantra Evam Pooja Vidhi in Hindi Pdf बगलामुखी (पीताम्बरा) चतुरक्षर मंत्र

Baglamukhi Chaturakshar Mantra Evam Pooja Vidhi in Hindi Pdf बगलामुखी (पीताम्बरा) चतुरक्षर मंत्र

भगवती बगलामुखी (पीताम्बरा) के इस मंत्र का अनुष्ठान बीज मंत्र  ( हल्रीं )  के अनुष्ठान के बाद किया जाता हैा ऐसा देखा गया है कि बीज मंत्र का अनुष्ठान तो साधक बिना किसी समस्या के कर लेते हैं, लेकिन चतुरक्षर के अनुष्ठान में उन्हें थोड़ी समस्या का सामना करना पड़ता है। समस्या से यहां तात्पर्य भगवती द्वारा ली जाने वाली परीक्षा से है। इस मंत्र में कई बार ऐसी परिस्थिति पैदा हो जाती है कि आपका अनुष्ठान बीच में ही छूट जाये, जैसे कहीं अचानक बाहर जाना पड़ जाये अथवा किसी काम में इतनी अधिक व्यस्तता हो जाये कि उस दिन के निर्धारित जप करने का समय ना मिले इत्यादि, लेकिन साधको को किसी भी परिस्थिति में किसी भी दिन जप नही छोड़ना है । यदि किसी कारण वश बाहर जाना भी पड़ भी जाये तो वही पर जाकर अपना जप पूर्ण करें एवं भगवती से क्षमा प्रार्थना करें । यदि आपने यह अनुष्ठान एक बार पूर्ण कर लिया तो भगवती की कृपा को प्राप्त करने से आपको कोई नही रोक सकता । भगवती पर विश्वास रखें एवं नियमित रूप से अपना जप करते रहें, आपको सफलता अवश्य मिलेगी ।

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Baglamukhi Pitambara Ashtottar Shatnam Stotram in Hindi and Sanskrit with Audio Mp3

Baglamukhi Pitambara Ashtottar Shatnam Stotram in Hindi and Sanskrit with Audio Mp3

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भगवती पीताम्बरा के भक्तों को प्रतिदिन मंत्र जप करने के पश्चात मां के अष्टोत्तर-शतनाम का पाठ करना चाहिए । इसके पाठ से भगवती की विशेष कृपा प्राप्त होती हैा जिन साधको ने भगवती पीताम्बरा की दीक्षा अभी तक प्राप्त नही की है वो सर्वप्रथम गुरू मुख से दीक्षा लें एवं उसी के पश्चात पाठ करें।

साधना को आरम्भ करने से पूर्व एक साधक को चाहिए कि वह मां भगवती  की उपासना अथवा अन्य किसी भी देवी या देवता की उपासना निष्काम भाव से करे। उपासना का तात्पर्य सेवा से होता है। उपासना के तीन भेद कहे गये हैं:- कायिक अर्थात् शरीर से , वाचिक अर्थात् वाणी से और मानसिक- अर्थात् मन से।  जब हम कायिक का अनुशरण करते हैं तो उसमें पाद्य, अर्घ्य, स्नान, धूप, दीप, नैवेद्य आदि पंचोपचार पूजन अपने देवी देवता का किया जाता है। जब हम वाचिक का प्रयोग करते हैं तो अपने देवी देवता से सम्बन्धित स्तोत्र पाठ आदि किया जाता है अर्थात् अपने मुंह से उसकी कीर्ति का बखान करते हैं। और जब मानसिक क्रिया का अनुसरण करते हैं तो सम्बन्धित देवता का ध्यान और जप आदि किया जाता है।
जो साधक अपने इष्ट देवता का निष्काम भाव से अर्चन करता है और लगातार उसके मंत्र का जप करता हुआ उसी का चिन्तन करता रहता है, तो उसके जितने भी सांसारिक कार्य हैं उन सबका भार मां स्वयं ही उठाती हैं और अन्ततः मोक्ष भी प्रदान करती हैं। यदि आप उनसे पुत्रवत् प्रेम करते हैं तो वे मां के रूप में वात्सल्यमयी होकर आपकी प्रत्येक कामना को उसी प्रकार पूर्ण करती हैं जिस प्रकार एक गाय अपने बछड़े के मोह में कुछ भी करने को तत्पर हो जाती है। अतः सभी साधकों को मेरा निर्देष भी है और उनको परामर्ष भी कि वे साधना चाहे जो भी करें, निष्काम भाव से करें। निष्काम भाव वाले साधक को कभी भी महाभय नहीं सताता। ऐसे साधक के समस्त सांसारिक और पारलौकिक समस्त कार्य स्वयं ही सिद्ध होने लगते हैं उसकी कोई भी किसी भी प्रकार की अभिलाषा अपूर्ण नहीं रहती ।
मेरे पास ऐसे बहुत से लोगों के फोन और मेल आते हैं जो एक क्षण में ही अपने दुखों, कष्टों का त्राण करने के लिए साधना सम्पन्न करना चाहते हैं। उनका उद्देष्य देवता या देवी की उपासना नहीं, उनकी प्रसन्नता नहीं बल्कि उनका एक मात्र उद्देष्य अपनी समस्या से विमुक्त होना होता है। वे लोग नहीं जानते कि जो कष्ट वे उठा रहे हैं, वे अपने पूर्व जन्मों में किये गये पापों के फलस्वरूप उठा रहे हैं। वे लोग अपनी कुण्डली में स्थित ग्रहों को देाष देते हैं, जो कि बिल्कुल गलत परम्परा है। भगवान शिव ने सभी ग्रहों को यह अधिकार दिया है कि वे जातक को इस जीवन में ऐसा निखार दें कि उसके साथ पूर्वजन्मों का कोई भी दोष न रह जाए। इसका लाभ यह होगा कि यदि जातक के साथ कर्मबन्धन शेष नहीं है तो उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाएगी। लेकिन हम इस दण्ड को दण्ड न मानकर ग्रहों का दोष मानते हैं।

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Very Powerful Hanuman Mantra Sadhna and Maruti Kavach

Very Powerful Hanuman Mantra Sadhna and Maruti Kavach
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भगवान शिव के ग्यारहवे रुद्रावतार हनुमानजी कलियुग के जाग्रत देवता हैं जो शीघ्र ही अपने भक्तों पर कृपा करते हैं, लेकिन बस आवश्यकता है सही विधि से उनकी साधना करने की ।
हनुमान जी ने जिस प्रकार श्री राम जी के समस्त कार्योे को सम्पन्न किया था उसी प्रकार वो अपने भक्तों के सभी कार्यो को सम्पन्न करते हैं।
हनुमान उपासना से साधक समस्त विघ्न व्याधियों पर विजय प्राप्त कर सकता है। हनुमान जी को नवग्रहों ने वरदान दिया था कि वो उनके भक्तों को कभी भी परेशान नही करेगें इसीलिए शनि-राहु आदि ग्रहों की महादशा में इनकी साधना से बहुत अधिक लाभ मिलता है। शनि देव के गुरू भगवान शिव हैं एवं हनुमान जी भगवान शिव के अवतार, इसीलिए शनिदेव शिव भक्तों एवं हनुमान भक्तों पर विशेष कृपा करते हैं।
प्रस्तुत हनुमत् मंत्र बहुत ही प्रभावशाली है जिसेे श्रीकृष्ण ने महाभारत काल में अर्जुन को प्रदान किया था। इसी मंत्र के प्रभाव से अर्जुन ने अजेय योद्धाओं पर विजय प्राप्त की थी। इस मंत्र के प्रभाव से साधक जन किसी भी प्रकार की तंत्रबाधा, रोग, शत्रुबाधा, नजर, कोर्ट-कचहरी एवं अन्य संकटों से मुक्ति प्राप्त कर सकता है।

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Param Devi Sukta of Ma TripuraSundari ( Mantras and Stotras for Money and Wealth)

Param Devi Sukta of Ma TripuraSundari ( Mantras and Stotras for Money and Wealth)

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भगवती महात्रिपुर सुन्दरी का यह स्तोत्र अत्यन्त ही गोपनीय एवं प्रमाणित है, लेकिन यह गुरू-गम्य है। अर्थात् गुरू-मुख से प्राप्त करने के उपरान्त ही यह फलदायी होता है। यदि इस सूक्त का पाठ निरंतर तीन सालों तक किया जाये तो निश्चित रूप से साधक को भगवती त्रिपुर सुंदरी का साक्षात्कार होता है। इस स्तोत्र का नित्य पाठ करने वाला साधक समस्त सिद्धियों का स्वामी, सर्वत्र विजय प्राप्त करने वाला एवं संसार को वश में करने वाला हो जाता है। धन एवं सभी ऐश्वर्य उसके दास हो जाते हैं। उसकी जिह्वा पर साक्षात मां सरस्वती का निवास हो जाता है। उपरोक्त समस्त इच्छाएं रखने वाले साधक को चाहिए कि वह श्री गुरू-चरणों में बैठकर इस स्तोत्र को प्रयत्नपूर्वक प्राप्त करे । जो साधक श्री विद्या में दीक्षित नही हैं वो सर्वप्रथम श्री विद्या की दीक्षा अपने गुरूदेव से प्राप्त करें ।

श्री विद्या ललिता त्रिपुर सुन्दरी धन, ऐश्वर्य, भोग एवं मोक्ष की अधिष्ठाता देवी हैं। अन्य विद्याओं की उपासना मंत या तो भोग मिलता है या फिर मोक्ष, लेकिन श्री विद्या का उपासक जीवन पर्यन्त सारे ऐश्वर्य भोगते हुए अन्त में मोक्ष को प्राप्त करता है। इनकी उपासना तंत्र शास्त्रों में अति रहस्यमय एवं गुप्त रूप से प्रकट की गयी है। पूर्व जन्म के विशेष संस्कारों के बलवान होने पर ही इस विद्या की दीक्षा का योग बनता है। ऐसे बहुत ही कम लोग होते हैं जिन्हे इस जीवन में यह उपासना करने का सौभाग्य प्राप्त होता है। मुख्य रूप से इनके तीन स्वरूपों की पूजा होती है। प्रथम आठ वर्षीया स्वरूप बाला त्रिपुरसुन्दरी, द्वितीय सोलह वर्षीया स्वरूप षोडशी, तृतीय युवा अवस्था स्वरूप ललिता त्रिपुरसुन्दरी। श्री विद्या साधना में क्रम दीक्षा का विधान है एवं सर्वप्रथम बाला सुन्दरी के मंत्र की दीक्षा साधको को दी जाती है। यदि आप ये साधना करना चाहते हैं तो हमसे सम्पर्क कर सकते है।
हमारे शास्त्रों में करोड़ो मंत्र हैं लेकिन हर मंत्र आपके लिए सही नही है। शिष्य के लिए कौन सा मंत्र सही है इसका निर्णय केवल गुरू ही कर सकता है। इसलिए आप केवल अपने आप को गुरू को समर्पित कर दीजिए, इसके बाद गुरू स्वयं आपको सही राह दिखायेगा।

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Pashupatastra Mantra Sadhana Evam Siddhi in Hindi & Sanskrit पाशुपतास्त्र मंत्र साधना एवं सिद्धि

Pashupatastra Mantra Sadhana Evam Siddhi in Hindi & Sanskrit  ( पाशुपतास्त्र मंत्र साधना एवं सिद्धि )

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Lord Shiva & Shakti ( Ardhanarishwar form)

शिव का एक भीषण शूलास्त्र जिसे अर्जुन ने तपस्या करके प्राप्त किया था।  महाभारतका युद्ध हुआ, उसमें भगवान्‌ शंकरका दिया हुआ पाशुपतास्त्र अर्जुनके पास था, भगवान्‌ शंकरने कह दिया कि तुम्हें चलाना नहीं पड़ेगा । यह तुम्हारे पास पड़ा-पड़ा विजय कर देगा, चलानेकी जरूरत नहीं, चला दोगे तो संसारमें प्रलय हो जायगा । इसलिये चलाना नहीं ।

इस पाशुपत स्तोत्र का मात्र एक बार जप करने पर ही मनुष्य समस्त विघ्नों का नाश कर सकता है । सौ बार जप करने पर समस्त उत्पातो को नष्ट कर सकता है तथा युद्ध आदि में विजय प्राप्त कर सकता है । इस मंत्र का घी और गुग्गल से हवं करने से मनुष्य असाध्य कार्यो को पूर्ण कर सकता है । इस पाशुपातास्त्र मंत्र के पाठ मात्र से समस्त क्लेशो की शांति हो जाती है ।

यह अत्यन्त प्रभावशाली व शीघ्र फलदायी प्रयोग है। यदि मनुष्य इस स्तोत्र का पाठ गुरू के निर्देशानुसार संपादित करे तो  अवश्य फायदा मिलेगा। शनिदेव शिव भक्त भी हैं और शिव के शिष्य भी हैं। शनि के गुरु शिव होने के कारण इस अमोघ प्रयोग का प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है। यदि किसी साधारण व्यक्ति के भी गुरु की कोई आवभगत करें तो वह कितना प्रसन्न होता है। फिर शनिदेव अपने गुरु की उपासना से क्यों नहीं प्रसन्न होंगे। इस स्तोत्र के पाठ से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और शिव की प्रसन्नता से शनिदेव खुश होकर संबंधित व्यक्ति को अनुकूल फल प्रदान करते हैं। साथ ही एक विशेषता यह भी परिलक्षित होती है कि संबंधित व्यक्ति में ऐसी क्षमता आ जाती है कि वह शनिदेव के द्वारा प्राप्त दण्ड भी बड़ी सरलता से स्वीकार कर लेता है। साथ ही वह अपने जीवन में ऐसा कोई अशुभ कर्म भी नहीं करता जिससे उस पर शनिदेव भविष्य में भी नाराज हों।

यह किसी भी कार्य के लिए अमोघ राम बाण है। अन्य सारी बाधाओं को दूर करने के साथ ही युवक-युवतियों के लिए यह अकाटय प्रयोग माना ही नहीं जाता अपितु इसका अनेक अनुभूत प्रयोग किया जा चुका है। जिस वर या कन्या के विवाह में विलंब होता है, यदि इस पाशुपत-स्तोत्र का प्रयोग करें तो निश्चित रूप से शीघ्र ही उन्हें दाम्पत्य सुख का लाभ मिलता है। केवल इतना ही नहीं, अन्य सांसारिक कष्टों को दूर करने के लिए भी पाठ या जप, हवन, तर्पण, मार्जन आदि करने से अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है।

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Sarva Karya Siddhi Saundarya Lahri Mantra Prayoga समस्त कार्यों की सिद्धि हेतु सौन्दर्यलहरी के कुछ विशिष्ट प्रयोग

Sarva Karya Siddhi Saundarya Lahri Mantra Prayoga  ( समस्त कार्यों की सिद्धि हेतु सौन्दर्यलहरी के कुछ विशिष्ट प्रयोग )

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आदिगुरू भगवत्पाद शंकराचार्य ने सौन्दर्य लहरी नामक ग्रन्थ में मां त्रिपुरसुन्दरी के स्वरूप का बहुत ही सुन्दर वर्णन किया है। उनके अनिवर्चनीय स्वरूप का वर्णन करने के लिए ही उन्होंने सौन्दर्य लहरी ग्रन्थ की रचना की जिसमें उन्होंने बहुत ही सुन्दर ढंग से मां की स्तुति की है। वास्तव में इसके दो खण्ड हैं…..आनन्द लहरी और सौन्दर्य लहरी। इन दोनों को एकत्र करके ही सौन्दर्य लहरी का नाम दिया गया है। इसमें प्रस्तुत स्तुति बहुत ही प्रभावी और रहस्यों से परिपूर्ण है। इससे कई साधनांए एवं ऐसे प्रयोग सिद्ध होते हैं, जो मानव जीवन के लिए अत्यन्त ही महत्वपूर्ण हैं।

भगवती त्रिपुर सुन्दरी की इस स्तुति से साधकों को अत्यन्त ही सुख, शांति एवं परम ज्ञान की प्राप्ति होती है। उस परम शक्ति के प्रकाश से सम्पूर्ण जगत प्रकाशमान है। यन्त्र, मन्त्र एवं तन्त्र के माध्यम से हम उनकी उपासना बाह्य रूप में करते हैं।

यंहा भी मैं कुछ ऐसे प्रयोग दे रहा हूँ जिनमें मन्त्र एवं यन्त्र का प्रयोग किया गया है। इन दोनों के माध्यम से हम अपने जीवन की बहुत सी समस्याओं का समाधान भगवती की कृपा से कर सकते हैं। यन्त्रों की उत्पत्ति भगवान शिव के ताण्डव नृत्य से मानी जाती है। मन्त्रों के साथ यन्त्रों का प्रयोग आदि काल से होता रहा है। अतः साधक दोनों का प्रयोग करें।

नोट – केवल श्री विद्या में दीक्षित साधक ही यह प्रयोग करें अथवा सर्वप्रथम श्री विद्या की दीक्षा प्राप्त करें।

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Shri Lalita Tripura Sundari Khadgamala Stotram in Sanskrit & Hindi श्री विद्या ललिता खड्गमाला स्तोत्र

Shri Lalita Tripura Sundari Khadgamala Stotram in Sanskrit & Hindi श्री विद्या ललिता खड्गमाला स्तोत्र
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किसी भी देवता की खड्गमाला अत्यन्त प्रभावशाली होती है। हमारे बहुत से काम ऐसे होते हैं, जिन्हें सामान्य तरीके अथवा पूजा से पूर्ण नहीं किया जा सकता है। यदि हम ये चाहते हैं कि हमारे षट्कर्म जैसे – मारण, मोहन, वशीकरण आदि सिद्ध हों तो हमें खड्गमाला का प्रयोग करना चाहिए। इस माला मन्त्र का कम से कम 1108 पाठ करें, आपका कार्य सिद्ध होगा। जो साधक श्री विद्या में दीक्षित हैं केवल वही इसका प्रयोग करें अथवा सर्वप्रथम अपने गुरूदेव से श्री विद्या की दीक्षा ग्रहण करें।
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Vipreet Pratyangira Mantra Sadhna Evam Siddhi & Puja Vidhi

Vipreet Pratyangira Mantra Sadhna Evam Siddhi & Puja Vidhi   ( श्री विपरीत प्रत्यंगिरा मंत्र  साधना एवं सिद्धि )

Pratyangira Mantra Sadhna Evam Siddhi

 

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Vipreet Pratyangira Mantra Benefits in Hindi

यदि शत्रु निरंतर आप पर अभिचारिक कर्म कर रहा हो, निरंतर किसी न किसी रूप में आपको आर्थिक, मानसिक, सामाजिक, शारीरिक क्षति पहुंचा रहा हो और आपके भविष्य को चैपट कर रहा हो, तब भद्रकाली के इस स्वरूप, अर्थात विपरीत प्रत्यंगिरा का आश्रय लेना सर्वोत्तम उपाय है। जिस दिन से साधक इस महाविधा का प्रयोग आरम्भ करता है, उसी दिन से ही भगवती भद्र काली उसकी सुरक्षा करने लगती हैं और शत्रु द्वारा किये गये अभिचाारिक कर्म दोगुने वेग से उसी पर लौटकर अपना प्रहार करते हैं। इसके अतिरिक्त राजकीय बाधा, अरिष्ट ग्रह बाधा निवारण में तथा अपना खोया हुआ पद, आस्तित्व ओर गरिमा प्राप्ति में भी यह विद्या सर्वोत्तम मानी जाती है। साधक की आयु, यश तथा तेज की वृद्धि करने में भी यह विद्या बहुत उत्तम मानी जाती है।

Vipreet Pratyangira Mantra Benefits in English

A most powerful Mantra Sadhana to invoke Devi Pratyangira is given here. Vipreet Pratyangira Mantra Sadhna  is  used to destroy the mind of an enemy who is unnecessarily troubling and bent upon harming some innocent and helpless person. confuses the enemy by destroying  his harmful and destructive thinking and by confusing his mind. As always clarified such sadhnas should only be performed under the highly advanced practitioner (Your Guru) after mantra diksha.

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शिवरात्रि पूजा विधि How to do Pooja on Shivratri 24 Feb 2017

शिवरात्रि पूजा विधि How to do Pooja on Shivratri  24 Feb 2017

सबसे पहले आप सभी को शिवरात्रि की बहुत बहुत शुभकामनाएं। हमारी महाकाल से यही प्रार्थना है कि आप सभी सपरिवार सदैव प्रसन्न रहें और और आपके सभी कष्ट इस पवित्र शिवरात्रि पर दूर हो जाएँ।

अधिक जानकारी के लिए हमें संपर्क करें –

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Magh Gupt Navratri 2017 Dates माघ गुप्त नवरात्रि 2017

Magh Gupt Navratri 2017 Dates माघ गुप्त नवरात्रि 2017

maa durga nava roop nine forms of shakti

प्रत्येक वर्ष आने वाले दो नवरात्रों से तो आप सभी लोग परिचित हैं लेकिन इनके अलावा प्रत्येक वर्ष दो और नवरात्री होती हैं जिन्हें गुप्त नवरात्री कहा जाता है। पूर्व काल में इनका ज्ञान केवल उच्च कोटि के साधकों को होता था जो इस समय का उपयोग विशिष्ट साधनाओं को सम्पन्न करने में किया करते थे।
गुप्त नवरात्र में पूजा, उपासना सामान्य नवरात्रों के समान ही होती हैा तान्त्रिक समाज में इन नवरात्रों का बहुत ही महत्व है, जो इस समय की लगातार प्रतिक्षा करतें हैं।

2017 Magha Gupta Navratri Puja Vidhi & Dates  माघ गुप्त नवरात्री  पूजा विधि   (28th January 2017 – 6th Feburary 2017)

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Note – we will update this page for more information before 28th January 2017. Keep visiting it everyday for updated information

2017 Magha Gupta Navratri Dates

28 January 2017 ( Saturday ) Pratipada Ghatasthapana Shailputri Puja
29  January 2017 ( Sunday) Dwitiya Brahmacharini Puja
30 January 2017  ( Monday ) Tritiya Chandraghanta Puja
31 January 2017 ( Tuesday ) Chaturthi Kushmanda Puja
01 February 2017 ( Wednesday ) Panchami Skandamata Puja
02 February 2017 ( Thursday ) Shashthi Katyayani Puja
03 February 2017 ( Friday) Saptami Kalaratri Puja
04 February 2017 ( Saturday) Ashtami Durga Ashtami Mahagauri Puja Sandhi Puja
05 February 2017 ( Sunday) Navami Siddhidatri Puja
06 February 2017 ( Monday) Dashami Navratri Parana

28 जनवरी 2017 ( शनिवार ) घट स्थापना, शैलपुत्री पूजा
29 जनवरी 2017 ( रविवार ) द्वितीया ब्रह्मचारिणी पूजा
30 जनवरी 2017  ( सोमवार ) तृतीया चंद्रघंटा पूजा
31 जनवरी 2017 ( मंगलवार) चतुर्थी कुष्मांडा पूजा
01 फरवरी 2017 ( बुधवार ) पंचमी स्कंदमाता पूजा
02 फरवरी 2017 ( गुरुवार) षष्ठी कात्यायनी पूजा
03 फरवरी 2017 ( शुक्रवार) सप्तमी कालरात्रि पूजा
04 फरवरी 2017 ( शनिवार ) अष्टमी महागौरी पूजा, दुर्गा महा अष्टमी पूजा,
05 फरवरी 2017 ( रविवार ) नवमी  सिद्धिदात्री पूजा
06 फरवरी 2017 ( सोमवार ) दशमी नवरात्री परायण

यह है घट स्थापना का समय

माघ गुप्त नवरात्री का पहला दिन इस बार 28 January 2017 को पड़ रहा है। इस दिन कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 09:33 बजे से 10:47 बजे तक है।

यह है कलश स्थापना के लिए सामान

नवरात्रि के लिए मिट्टी का पात्र और जौ, शुद्ध, साफ मिट्टी, शुद्ध जल से भरा हुआ सोना, चांदी, तांबा, पीतल या मिट्टी का कलश, मोली (कलवा), साबुत सुपारी, कलश में रखने के लिए सिक्के, फूल और माला, अशोक या आम के 5 पत्ते, कलश को ढकने के लिए मिट्टी का ढक्कन, साबुत चावल, एक पानी वाला नारियल, लाल कपड़ा या चुनरी की आवस्यकता होती है।

ऐसे करें कलश स्थापना

  • नवरात्रि में कलश स्थापना करने के दौरान सबसे पहले पूजा स्थल को शुद्ध कर लें।
  • लकड़ी की चौकी रखकर उसपर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं।
  • कपड़े पर थोड़े-थोड़े चावल रखें।
  • चावल रखते हुए सबसे पहले गणेश जी का स्मरण करें।
  • एक मिट्टी के पात्र में जौ बोयें।
  • इस पात्र पर जल से भरा हुआ कलश स्थापित करें।
  • कलश पर रोली से स्वस्तिक या ‘ऊँ’ बनायें।
  • कलश के मुख पर कलवा बांधकर इसमें सुपारी, सिक्का डालकर आम या अशोक के पत्ते रखें।
  • कलश के मुख को चावल से भरी कटोरी से ढक दें।
  • एक नारियल पर चुनरी लपेटकर इसे कलवे से बांधें और चावल की कटोरी पर रख दें।
  • सभी देवताओं का आवाहन करें और धूप दीप जलाकर कलश की पूजा करें।
  • भोग लगाकर मां की पूजा करें।

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गुप्त नवरात्रि साधना (Gupt Navratri Sadhna)

Download Durga Saptasati in Hindi and Sanskrit Pdf

Download Durga Shabar Mantra with Dushmahavidya and Shiva Sadhana

गुप्त नवरात्रि का महत्व ( Importance Of Gupt Navratri)

These nine days are very good to start any sadhana. If anyone is willing to do dus mahavidya upasana then he/she should not waste this time. These nine days alone can change your life & your future, but it depends on you how you spend your life in these nine days. Those who never had any spiritual experience in their life they should practice mantras in these navaratri. Those who have taken diksha from us they must do anusthaan in this navaratri. It is not compulsory to 1.25 lakh mantras. You can do anusthaan of 21000 mantras, 31000 mantras etc, but you have to complete in nine days only. Homam can be done on 10th day.  Who have already in any anusthaan please do continue it , no new anusthaan is required for them.

Those who have not taken mantra diksha as of yet they should take it in this navaratri as it is the best time.

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Good Books on Mantra & Tantra Sadhana

Dear Readers,

Thanks for Reading our blog. As of today we have around 16000 subscribers of this blog which shows your love and affection.

Since you loved our blog we suggest you to read our books too as they have lots of information for you. You will love reading them.

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How to stop worrying and remove stress and depression of life

Dear Friends,

Today i watched this video and thought to share this with all of you. May be this can help you somewhere in your life. It also proves that why people in the field of Sadhna and spirituality lives a very happy life as they leave all their problems in hand of their deity. Adding to this you should chant mantras and remove all the burden from your head.

अपनी सभी चिंताओं को परमपिता के चरणों में समर्पित कर दो और एक सुन्दर व खुशहाल जीवन जियो


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Agama Rahasya Book By Sri Yogeshwaranand & Sumit Girdharwal

We are very happy to announce that Agama Rahasya book written by Sri Yogeshwaranand Ji  is getting released now. This book will provide you in depth knowledge of tantra and will clear many of your doubts related to tantra.

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