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Shraddha and Pitra paksha poojan vidhan श्राद्ध और पितृ दोष

श्राद्ध और पितृ दोष

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इन दिनों पूरे भारत में श्राद्ध पक्ष चल रहा है। जगह जगह श्राद्ध तर्पण की क्रियाओं द्वारा पितरों को संतुष्ट करने का क्रम चल रहा है। हरिद्वार, काशी, इलाहाबाद आदि सभी तीर्थस्थलों में लोग अपने पितरों के श्राद्ध के लिए पहुंच रहे हैं। क्या आपके मन में यह सवाल नहीं उठता है कि लोग श्राद्ध क्यों करते हैं?
श्राद्ध का सीधा सा मतलब श्रद्धा से है।यदि आप श्रद्धा का अर्थ जानते है तो समझ लेंगे कि किस प्रकार हमारे पूर्वजों को तर्पण प्राप्त हो जाता है,श्रद्धा का अर्थ है किसी चीज के होने में संदेह का अभाव यानी जो भी हम अर्पण करेंगे उन्हें प्राप्त होगा ही,इसलिए तर्क – वितर्क में ना जाएँ और पितरों का श्राद्ध पूर्ण श्रद्धा से करें1 श्रद्धापूर्वक किये हुए कार्य को श्राद्ध कहते हैं। सत्कार्यों के लिए सत्पुरुषों के आदर की, कृतज्ञता की भावना रखना श्रद्धा कहलाता है। श्रुति और स्मृतियों में विधान पाया गया है कि मृत्यु के पश्चात पितृपक्ष में तिथि अनुसार श्राद्ध करने से व जल की अंजलि भर देने से स्वर्गीय पितृदेवों को मोक्ष प्राप्त होता है।
इन्हीं विशेष अवसरों पर हम अपने पूर्वजों के लिए अन्न, वस्त्र, पात्र आदि दान करते हैं और आशा करते हैं कि ये वस्तुएं हमारे पितरों को प्राप्त होंगी। भौतिक दृष्टि से दी गयी यह सामग्री ब्राह्मणों को प्राप्त होती है, किन्तु सूक्ष्म में यह दान पितरों को आत्मतृप्ति प्रदान करता है।

मरे हुए व्यक्ति का श्राद्ध करने से कुछ लाभ होता है या नहीं?

शास्त्रों के अनुसार मर जाने के उपरान्त जीव का अस्तित्व मिट नहीं जाता। वह किसी न किसी रूप में इस संसार में ही रहते है। स्वर्ग, नर्क, निर्देह, गर्भ आदि किसी न किसी अवस्था में इस संसार में वह बने रहते हैं। इसीलिए श्राद्ध की महत्ता है। श्राद्ध पूर्ण श्रद्धा, मनोयोग से करने पर पितरों के आशीर्वाद प्राप्त होते हैं।

पितरों से संबंधित दोष पितृदोष कहलाता है। यहां पितृ का अर्थ पिता नहीं वरन् ऐसे पूर्वज हैं जो अपने कर्मों के कारण आगे नहीं जा सके और पितृलोक में ही रहते है। अपने प्रियजनों से उन्हे विशेष स्नेह रहता है। श्राद्ध या अन्य धार्मिक कर्मकाण्ड नहीं करने से जब वे रुठ जाते हैं तो उसे पितृ दोष कहते है।
पितरों को भी सामान्य मनुष्यों की तरह सुख दुख मोह ममता भूख प्यास आदि का अनुभव होता है। समान्यतः इन पितर या अलौकिक देहधारी पितर अपने वंशजों के लिए चिंतित रहते हैं। पितर अपने प्रति श्रद्धा व्यक्त नहीं करने से खुद को निर्बल अनुभव करते हैं। यदि वह नाराज हो गए तो इनके परिजनों को तमाम कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
पितृ दोष होने पर व्यक्ति को तमाम तरह की परेशानियां उठानी पड़ती है जैसे घर में सदस्यों का बीमार रहना, संतान का जन्म नहीं लेना, परिवार के सदस्यों में मतभेद, जीविका में अस्थिरता आदि। प्रत्येक कार्य में अचानक रूकावटें आने और बनते हुए काम बिगड़ने और लगातार कर्ज का भार बने रहने जैसी दिक्कतें आती हैं।
अगर लगातार इस तरह की दिक्कतें समने आ रही हों तो समझना चाहिए कि पितर नाराज या दुखी हैं। उनकी प्रसन्नता के लिए घर में पूजा पाठ के विशेष अनुष्ठान करना चाहिए।
उन्हें प्रसन्न किया जाना चाहिए। भागवत और रामायण का विधिवत पारायण भी पितरों को कष्ट से उबारने का अच्छा उपाय हैं। माघ महीने में उस तरह के पुण्यकार्य किए जाएं तो उसके परिणाम तुरंत और तत्काल देखे जा सकते हैं।पितरो के लिए मृत्यु के उपरांत भी श्राद्ध करने वाले सद्गृहस्थ को स्वर्गलोक, विष्णुलोक और ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है। भारतीय वैदिक वांगमय के अनुसार, प्रत्येक मनुष्य को इस धरती पर जीवन लेने के पश्चात तीन प्रकार के ऋण होते हैं। पहला देव ऋण, दूसरा ऋषि ऋण और तीसरा पितृ ऋण। पितृ पक्ष के श्राद्ध यानी 16 श्राद्ध साल के ऐसे दिन हैं, जिनमें हम उपरोक्त तीनों ऋणों से मुक्त हो सकते हैं, श्राद्ध प्रक्रिया में शामिल होकर। जो लोग अपने पितरों के निमित्त दान श्राद्ध, तर्पण आदि नहीं करते, माता-पिता और बड़े-बुजुर्गों का आदर-सत्कार नहीं करते, पितृगण उनसे हमेशा नाराज रहते हैं। इसके कारण वे या उनके परिवार के अन्य सदस्य रोगी, दुखी और मानसिक अशांति और आर्थिक कष्टों से पीड़ित रहते हैं। वे निःसंतान भी हो सकते हैं अथवा पितृदोष के कारण उनको संतान का सुख भी दुर्लभ रहता है।महाभारत के प्रसंग के अनुसार, मृत्यु के उपरांत कर्ण को चित्रगुप्त ने मोक्ष देने से इनकार कर दिया था। कर्ण ने कहा कि मैंने तो अपनी सारी सम्पदा सदैव दान-पुण्य में ही समर्पित की है, फिर मेरे ऊपर यह कैसा ऋण बचा हुआ है? चित्रगुप्त ने जवाब दिया कि राजन, आपने देव ऋण और ऋषि ऋण तो चुका दिया है, लेकिन आपके ऊपर अभी पितृऋण बाकी हैं। जब तक आप इस ऋण से मुक्त नहीं होंगे, आपको मोक्ष मिलना कठिन होगा।
इसके उपरांत धर्मराज ने कर्ण को यह व्यवस्था दी कि आप 16 दिन के लिए पुनः पृथ्वी पर जाइए और अपने ज्ञात और अज्ञात पितरों का श्राद्धतर्पण तथा पिंडदान विधिवत करके आइए। तभी आपको मोक्ष यानी स्वर्ग लोक की प्राप्ति होगी।

Pitra Paksha Tithi Shraddha Puja Vidhi 2014

  1. Purnaima Shradh 2014 is on 8th of September 2014 on Monday.
  2. Pratipada Shradh 2014 is on 9th of September 2014 on Tuesday.
  3. Dwitiva Shradh 2014 is on 10th of September 2014 on Wednesday.
  4. Tritiya Shradh 2014 is on 11th of September 2014 on Thursday.
  5. Chaturthi Shradh 2014 is on 12th of September 2014 on Friday.
  6. Panchami Shradh 2014 is on 13th of September 2014 on Saturday.
  7. SashthiShradh 2014 is on 14th of September 2014 on Sunday.
  8. Saptami Shradh 2014 is on 15th of September 2014 on Monday.
  9. Ashtami Shradh 2014 is on 16th of September 2014 on Tuesday.
  10. Navami Shradh 2014 is on 17th of September 2014 on Wednesday.
  11. Dashmi Shradh 2014 is on 18th of September 2014 on Thursday.
  12. Ekadashi Shradh 2014 is on 19th of September 2014 on Friday
  13. Dwadashi Shradh 2014 is on 20th of September 2014 on Saturday.
  14. Travodashi Shradh 2014 is on 21th of September 2014 on Sunday.
  15. Chaturdashi Shradh 2014 is on 22th of September 2014 on Monday.
  16. Sarv Pitu Amavasya Shradh 2014 is on 23th of September 2014 on Tuesday.
Shraddh Ceremony 2014

On each day of the dark fortnight (Pitra Paksha), special offerings are made to the ancestors whose lunar date (Tithi) of death corresponds to that particular day. Favorite food items of the departed person are specially prepared and offered after performing a puja.

One must offer food to Brahmin and donate Yatha Shakti. A small portion of the food is also offered to the Cow (Gow Grass) before offering it to Brahmin..

A small portion of the food is also offered to the crow who is considered as a connection between the world of the living and the world of the dead. Round balls of rice and flour, called pinda , are also offered, along with the sacred kusha grass and flowers, amidst sprinkling of water and chanting of mantras from the Sam Veda.

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About sumit girdharwal

I am a professional astrologer and doing research in the field of effects of mantras. I have keen interest in tantra and it's methodology. For mantra sadhana guidance email me to sumitgirdharwal@yahoo.com or call on 9540674788. For more information visit our website www.anusthanokarehasya.com

Posted on September 9, 2014, in Shraddha and Pitra Dosha Puja and tagged , , , , , , . Bookmark the permalink. 3 Comments.

  1. Guruji kuch aakarsahan aur vashikara ka mantra aur sadhna bhejiye..

  2. sumit ji vidhi ko hindi main karna tha vo nahi kiya

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