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Author Archives: sumit girdharwal

दीपावली के लिए विशेष शाबर मंत्र

आज इस मंत्र की १६ माला जप करें लक्ष्मी जी वर्ष भर स्थाई रूप से रहेंगी

माला – स्फटिक की
दिशा – उत्तर
रेशमी आसान – लाल या गुलाबी
वस्त्र – लाल
समय – रात्रि १० बजे से शुरू करें
दीपक – शुद्ध घी
भोग – ५ प्रकार की मिठाई

मंत्र –

आवो लक्ष्मी बैठो आँगन,  रोरी तिलक चढ़ाऊँ।

गले में हार पहनाऊं। वचनों में बांधी आओ हमारे पास।

पहला वचन श्री राम का , दूजा वचन ब्रह्मा का , तीजा वचन महादेव का।

वचन चूके तो नरक पड़े। सकल पंच में पाठ करूं।

वरदान नहीं देवे तो महादेव शक्ति की आन !

 

मंत्र जप से पहले लक्ष्मी जी का षोडशोपचार पूजन कर लें।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें – 9540674788 , 9917325788

Lakshmi Pooja Vidhi on Deepawali

 

 

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Baglamukhi Mala Mantra Audio Mp3

Baglamukhi Mala Mantra ( बगलामुखी माला मंत्र )

बगलामुखी माला मंत्र के पाठ से बड़ी से बड़ी विपत्ति दूर हो जाती है। भयंकर से भयंकर गृह दोष भी इसके पाठ से दूर होता है। जिन लोगो की कुंडली में पितृ दोष, कालसर्प दोष अथवा अन्य कोई दोष है जिसकी वजह से आपके जीवन में कष्ट हैं तो आप बगलामुखी माला मंत्र का पाठ करके अपने जीवन को कष्टों से मुक्त कर सकते हैं।

बगलामुखी साधना से सम्बंधित अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क करें – श्री योगेश्वरानंद जी  (9917325788 ) सुमित गिरधरवाल जी  ( 9540674788 ) ईमेल करें – shaktisadhna@yahoo.com

To know more about baglamukhi mala mantra click on the below link –

https://shribaglamukhi.wordpress.com/2011/10/26/baglamukhi-mala-mantra-in-hindi-and-english/

शिवरात्रि पूजा विधि How to do Pooja on Shivratri  9 August 2018

शिवरात्रि पूजा विधि How to do Pooja on Shivratri  9 August 2018

सबसे पहले आप सभी को शिवरात्रि की बहुत बहुत शुभकामनाएं। हमारी महाकाल से यही प्रार्थना है कि आप सभी सपरिवार सदैव प्रसन्न रहें और और आपके सभी कष्ट इस पवित्र शिवरात्रि पर दूर हो जाएँ।

अधिक जानकारी के लिए हमें संपर्क करें –

9540674788 (Sumit Girdharwal Ji) or 9917325788 (Shri Yogeshwaranand Ji)

lord shiva

आज के समय व्यस्तता के कारण किसी के पास अधिक समय नहीं है और न ही बहुत ही अधिक विधि विधान से पूजा करने का तरीका पता है। ऐसे लोगो के लिए ही हम यहाँ भगवान् शिव की पूजा की सरल विधि प्रस्तुत कर रहें हैं –

१- शिवलिंग पर एक लोटा जल चढ़ाएँ। जो थोड़ा अधिक कर सकतें हैं वो लोटे में सबसे पहले थोड़ा गंगा जल, उसके बाद साधारण जल , थोड़ा शहद , थोड़ा कच्चा दूध मिला लें और फिर ॐ नमः शिवाय बोलते हुए शिवलिंग पर चढ़ा दें। साथ में यदि हो सके तो कुछ बेल पत्र भी चढ़ाएँ। जो लोग और अधिक करना चाहते है वो १०८ लोटों से शिवलिंग को स्नान कराएं।

२ – जो लोग मंदिर नहीं जा सकते है वो लोग घर पर ही भगवान् शिव के सामने दीपक जलाएं यथा संभव ॐ नमः शिवाय का जप करें।

३ – सभी को यथा संभव पुरे दिन ॐ नमः शिवाय का मानसिक रूप से जप करना चाहिए।

४ – जिनके पास समय है उन्हें रुद्राभिषेक करना चाहिए। जो स्वयं नहीं कर सकते उन्हें किसी वेद पाठी ब्राह्मण से रुद्राभिषेक कराना चाहिए।

५- जो लोग स्वयं रुद्राभिषेक करना चाहते हैं उनके लिए नीचे यूटयूब वीडियो दी गयी है। जो लोग पाठ नहीं कर सकते वो इसको सुनकर लाभ ले सकते है। पढ़ने के लिए पीडीऍफ़ भी दी गयी है हिंदी इंग्लिश एवं संस्कृत में।

Download Shiva Pooja Vidhi with All Mantras

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Chinnamasta Kavach छिन्नमस्ता कवच

Chinnamasta Kavach छिन्नमस्ता कवच

साधकों को मां छिन्नमस्ता का जप करने से पहले कवच का पाठ अवश्य करना चाहिए। यह एक बहुत ही उच्चकोटि की एवं उग्र साधना है, इसलिए सर्वप्रथम किसी योग्य गुरू से दीक्षा अवश्य ग्रहण करें। किताबों से पढकर यह साधना करने का प्रयास कदापि न करें। जो साधक कुण्डलिनी जागरण में रूचि रखते हैं उन्हें छिन्नमस्ता साधना अवश्य करनी चाहिए। मां छिन्नमस्ता की साधना से योग की सिद्धि भी सरलता से मिल जाती है। बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान इस साधना से सम्भव है। मां छिन्नमस्ता आप पर कृपा करें।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें – 9917325788, 9540674788

Download Chinnamasta Kavach in Hindi,Sanskrit and English Pdf

Read Another Article on Ma Chinnamasta Mantra Sadhana Evam Siddhi

 

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Guru Purnima Puja Vidhi in Hindi 27th July 2018 गुरूपूर्णिमा पूजन विधि

Guru Purnima Puja Vidhi in Hindi 27th July 2018  गुरूपूर्णिमा पूजन विधि

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For Mantra Diksha & Sadhana Guidance email to shaktisadhna@yahoo.com or call us on 9917325788 or 9540674788.

27th July 2018 को चंद्र ग्रहण होने के कारण पूजन सही समय पर कर लेना जरूरी है। ग्रहण का सूतक 27 जुलाई को दोपहर 2.54 बजे से शुरू हो जाएगा। इसलिए गुरु पूर्णिमा की पूजा सूतक प्रारम्भ होने से पहले ही कर लेना शुभ रहेगा।  चंद्र ग्रहण में मंत्र साधना कैसे करें 

ईश्वर उपासना में सर्वप्रथम गुरू पूजन किया जाता है। परमात्मा का साक्षात्कार तो इतना सरल नही है लेकिन वही परमात्मा इस संसार में साकार रूप में आपकी प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप में सहायता करता है। गुरूदेव के मार्गदर्शन से ही साधक ईश्वर को प्राप्त करता है। बिना गुरू के ईश्वर को पाना इतना सरल नही है। यदि ईश्वर को पाना इतना सरल हो जाये तो ईश्वर का महत्व ही इस संसार से समाप्त हो जायेगा। यदि ईश्वर की अनुभूति शीघ्र हो जाये तो साधक को इस बात का अंहकार हो जाता है एवं उसकी आध्यात्मिक प्रगति रूक जाती है, इसीलिए ईश्वर ही स्वप्न व ध्यान में संकेत द्वारा गुरू रूप में दर्शन देकर मार्ग प्रदर्शन करता है। इष्ट ही गुुरू रूप में दर्शन देता है। गुरू ईश्वर की महिमा का वर्णन करता है एवं इष्ट ही गुरू रूप में दर्शन देकर गुरू की महिमा बढ़ाता है।
आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा या व्यास पूर्णिमा कहते हैं। भारत भर में यह पर्व बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दिन गुरुपूजा का विधान है।
वैसे तो दुनिया में कई विद्वान हुए हैं परंतु चारों वेदों के प्रथम व्याख्या कर्ता व्यास ऋषि थे, जिनकी आज के दिन पूजा की जाती है। हमें वेदों का ज्ञान देने वाले व्यासजी ही हैं। अतः वे हमारे आदिगुरु हुए, इसीलिए गुरुपूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है।
उनकी स्मृति को ताजा रखने के लिए हमें अपने-अपने गुरुओं को व्यासजी का अंश मानकर उनकी पूजा करके उन्हें कुछ न कुछ दक्षिणा देते हैं। हमें यह याद रखना चाहिए कि महात्माओं का श्राप भी मोक्ष की प्राप्ति कराता है। यदि राजा परीक्षित को ऋषि का श्राप नहीं होता तो उनकी संसार के प्रति जो आसक्ति थी वह दूर नहीं होती। आसक्ति होने के कारण उन्हें वैराग्य नहीं होता और वैराग्य के बिना श्रीमद्भागवत के श्रवण का अधिकार प्राप्त नहीं होता। साधु के श्राप से ही उन्हें भगवान नारायण, शुकदेव के दर्शन और उनके द्वारा देव दुर्लभ श्रीमद्भागवत का श्रवण प्राप्त हुआ।
इसके मूल में ही साधु का श्राप था। जब साधु का श्राप इतना मंगलकारी है तो साधु की कृपा न जाने क्या फल देने वाली होती होगी। अतः हमें गुरूपूर्णिमा के दिन अपने गुरु का स्मरण अवश्य करना चाहिए।

गुरू पूजन विधि
यदि इस दिन अपने गुरू देव के दर्शन प्राप्त हो जाये तो इससे अधिक प्रसन्नता का विषय तो हो नही सकता, लेकिन किसी कारण वश यदि गुरू देव का साक्षात्कार इस दिन ना हो सके तो उनका पूजन अवश्य करना चाहिए।
सर्वप्रथम आसन पर बैठ जायें एवं आचमन करें। उसके पश्चात अपने गुरूदेव का ध्यान करें एवं उनकी फोटो के आगे दीपक जलायें, यदि फोटो ना हो तो भगवान शिव के आगे भी ऐसा कर सकते हैं। उसके पश्चात उनके आगे कुछ प्रसाद रखें एवं पीले पुुष्पों की माला उनका भेंट करें। सामर्थ्यानुसार  उनके लिए कुछ दक्षिणा एवं कपडे़ रखने चाहिए जिन्हे बाद मेें मिलने पर उन्हें भेंट करें।
इसके पश्चात गुरू मंत्र का अधिक से अधिक संख्या में जप करना चाहिए।

मंत्र – ओम् परमतत्वाय योगेश्वराय गुरूभ्यो नमः

इसके पश्चात अपने इष्ट का जप करें एवं वह जप अपने गरूदेव को समर्पित करें।
इस दिन अपने गुरू देव के सर्व मंगल की एवं उनके शतायु होने की प्रार्थना परमात्मा से अवश्य करनी चाहिए।
आप सभी पर परमात्मा एवं गुरूजनों की सदैव अनुकम्पा बनी रहे, इसी प्रार्थना के साथ अपने शब्दों  को विराम देते हैं।

Download Guru Purnima Puja Vidhi in Hindi Pdf 2018

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