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Author Archives: sumit girdharwal

Baglamukhi Jayanti 23rd April 2018 ( बगलामुखी प्रकटोत्सव 2018)

23 April 2018 (वैशाख शुक्ल अष्टमी) को देवी बगलामुखी जयंती  (अवतरण दिवस)  है। आप सभी को बगलामुखी जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं।  माँ पीताम्बरा की कृपा से आप सदैव प्रसन्न रहें एवं भक्ति के मार्ग पर अग्रसर रहें यही माँ बगलामुखी से हमरी विनती है।  वैसे न तो ईश्वर का कभी जन्म होता एवं न ही मृत्यु। हाँ ये जरूर है कि ईश्वर समय समय पर अपने भक्तो की रक्षा हेतु इस संसार में समय समय पर प्रकट अवश्य होते है।  

यह दिन सभी भक्तों के लिए एक विशेष महत्व रखता है और प्रत्येक भक्त ऐसे शुभ दिन पर माँ की अधिक से अधिक कृपा प्राप्त करना चाहता है।  यहाँ आपको बताते है कि कैसे आप भी माँ की उपासना कर उन्हें प्रसन्न कर सकते है।

एक बात अवश्य ध्यान रखें कि ईश्वर के रूप में आपके माता पिता आपके घर में उपस्थित है। ईश्वर के किसी भी रूप की आप उपासना करें अथवा न करें लेकिन अपने माता पिता की यदि आपने ईश्वर मानकर उपासना कर ली तो इस संसार से तरने से आपको कोई नहीं रोक सकता। यदि आप अपने माता पिता का दिल दुखाते हैं तो ईश्वर कभी भी आपके द्वारा की गयी पूजा को स्वीकार नहीं करेंगे।  इसीलिए माँ बगलामुखी पूजा करने से पहले अपने माता पिता की सेवा करें एवं उनको जो भी पसंद हो उन्हें अर्पित एवं प्रतिदिन उनकी सेवा करें ।

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Baglamukhi Jayanti Pooja Vidhi (बगलामुखी जयंती पूजा विधि )

बगलामुखी जयंती की यह पूजा कोई भी व्यक्ति कर सकता है चाहे वह दीक्षित है अथवा नहीं।  यह पूजा आप सुबह में अथवा रात्रि में करें।  माँ बगलामुखी का एक नाम पीताम्बरा भी है,  इन्हें पीला रंग अति प्रिय है इसलिए इनके पूजन में पीले रंग की सामग्री का उपयोग सबसे ज्यादा होता है। पीले रंग का आसन  लेकर उत्तर अथवा पूर्व दिशा की ओर मुखे करके बैठ जाएं। अपने सामने माँ बगलामुखी का चित्र अथवा यन्त्र रख लें।  यदि आपके पास यह सामग्री नहीं है तो इस पूजा को आप माँ दुर्गा के चित्र के सामने भी कर सकते हैं।

गाय के शुद्ध घी , सरसो अथवा तिल के तेल से दीपक जलाएं।  सर्वप्रथम अपने गुरुदेव का ध्यान करें एवं गुरु मंत्र का जप करें। जिनके पास गुरु मंत्र नहीं है वो “ॐ श्री गुरुवे नमः” का ११ बार जप कर सकते है।  इसके पश्चात गणेश जी का ध्यान करके “ॐ गं गणपतये नमः” का जप करें।  इसके पश्चात भैरव जी से माँ बगलामुखी की पूजा करने की आज्ञा लें – ” हे ! भैरव भगवान् मैं माँ पीताम्बरा की पूजा करने जा रहा/रही हूँ, कृपया मुझे अनुमति प्रदान करें। ” ऐसा बोलकर भैरव जी का ध्यान करें।  इसके बाद माँ बगलामुखी का ध्यान करें एवं उनका आवाहन करें। माँ को पीला प्रसाद चढ़ाएँ जैसे बादाम, किशमिश, मौसमी फल अथवा जो आपका दिल करे ( एक बच्चा अपनी माता को प्रेम से जो भी अर्पित कर देगा, माता प्रेम से वही स्वीकार कर लेगी )। उन्हें पुष्प समर्पित करें। इसके पश्चात माँ बगलामुखी सहस्रनाम (१००० नाम ) का पाठ करें और यदि हो सके तो प्रत्येक नाम के साथ माँ को पीला पुष्प अथवा बादाम या किशमिश समर्पित करें। लेकिन ऐसा करने के लिए आपको माता का चित्र एक बड़े थाल अथवा बड़े कपडे पर रखना होगा ताकि सामग्री बाहर जमीन पर न गिरे। जिनके पास कम समय है वो बगलामुखी अष्टोत्तर शतनाम (१०८ नाम ) का पाठ भी कर सकते है।  ये पाठ आप हमारी वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं जिनका लिंक हम निचे दे रहे हैं। आप जितना अधिक पूजा करना चाहे आप कर सकते हैं लेकिन ज्यादा न कर सको तो कम से कम माँ को प्रेम से एक पुष्प जरूर चढ़ा देना।

 

maa-pitambra-aadi-shakti
जो लोग दीक्षित है वो इसके बाद माँ बगलामुखी के मंत्र का जप हल्दी माला पर कर सकते हैं। जिन लोगो ने अभी तक माँ बगलामुखी की दीक्षा नहीं ली है वो इस दिन माँ बगलामुखी की दीक्षा ग्रहण कर सकते हैं।  पूजा समाप्त करने के पश्चात माँ बगलामुखी से अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगे एवं सदैव आपके परिवार के ऊपर कृपा बनाए रखने के लिए प्रार्थना करें।  इसके बाद एक माला मृत्युंजय मंत्र – ” हौं जूंं  सः ” का जप अवश्य करें।  पूजा करने के बाद प्रसाद सभी को बांट दें।

यदि किसी कारणवश आप स्वयं इस पूजा को नहीं कर सकते और आप अपने परिवार की सुख शान्ति, शत्रु पीड़ा से मुक्ति प्राप्त करने के लिए यह पूजा करना चाहते है तो हमने ऐसे  लोगों के लिए कल विशेष पूजा का आयोजन किया है।  अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें – 9410030994, 9540674788

शास्त्रों में देवी-देवताओं को प्रसन्न करने हेतु उपासना-विधियों में सर्वोत्तम उपासना-विधि उनके षोडशोपचार पूजन को माना गया है। षोडशोपचार पूजन का अर्थ होता है – सोलह उपचारों से पूजन करना। सोलह उपचार निम्नवत् कहे गए हैं।
(1) आवाहन (2) आसन (3) पाद्य (4) अर्घ्य (5) स्नान (6) वस्त्र
(7) यज्ञोपवीत (8) गन्ध (9) पुष्प तथा पुष्पमाला (10) दीपक (11) अक्षत (चावल) (12) पान-सुपारी-लौंग (13) नैवेद्य (14) दक्षिणा (15) आरती (16) प्रदक्षिणा तथा पुष्पाञ्जलि।

यदि संभव हो तो षोडशोपचार पूजन अवश्य करें –

बगलामुखी षोडशोपचार पूजन

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Baglamukhi Pitambara Ashtottar Shatnam Stotram in Hindi

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श्री कामाख्या साधना रहस्य Shri Kamakhya Sadhana Rahasya By Sri Yogeshwaranand Ji & Sumit Girdharwal

श्री कामाख्या साधना रहस्य Shri Kamakhya Sadhana Rahasya By Sri Yogeshwaranand Ji & Sumit Girdharwal

माँ पीताम्बरा की कृपा से श्री कामाख्या साधना रहस्य ग्रंथ का प्रकाशन सम्भव हुआ। आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि ये आपके जीवन में उपयोगी सिद्ध होगी।  अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें – 9540674788 , 9410030994. Email : shaktisadhna@yahoo.com. ISBN – 978-93-5300-470-5

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  1. Sri Baglamukhi Tantram श्री बगलामुखी तन्त्रम
  2. Agama Rahasya आगम रहस्य
  3. Shatkarm Vidhaan षट्कर्म विधान
  4. Pratyangira Sadhana Rahasya श्री प्रत्यंगिरा साधना रहस्य ग्रन्थ
  5. Yantra Sadhana यन्त्र साधना
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Chaitra Navratri 2018 ( चैत्र नवरात्रि 2018 )

Chaitra Navratri 2018 Ma Kamakhya Sadhana Vidhi ( चैत्र नवरात्रि 2018 माँ कामाख्या साधना विधि )

18 मार्च से चैत्र नवरात्री प्रारम्भ हो रही है।   इस समय का उपयोग आप विशिष्ट साधनाओं को संपन्न करने में एवं अपने जीवन को उच्च कोटि पर ले जाने के लिए कर सकते हैं। भारत सदैव से ही अपनी आध्यात्मकि शक्तियों के कारण विश्व गुरु रहा है लेकिन आज की पीढ़ी विरासत में मिले इस ज्ञान का मोल नहीं समझ रही है और शायद यही कारण है की आज सभी सुख सुविधाएँ होने के पश्चात भी मनुष्य सुखी नहीं है। वास्तविक सुख ध्यान,योग एवं ईश्वरोपासना से ही प्राप्त किया जा सकता है ये जितना जल्दी हम समझेंगे उतना ही हमारे हित में होगा।

आगामी नवरात्रों के लिए एक विशिष्ट साधना यहाँ प्रस्तुत कर रहे हैं। गुरु आज्ञा लेकर इसका अभ्यास करें –

18 मार्च 2018 (रविवार)– प्रतिपदा, घट स्थापना, शैलपुत्री पूजा
19 मार्च 2018 (सोमवार)– द्वितीया, ब्रह्मचारिणी पूजा
20 मार्च 2018 (मंगलवार)– तृतीया, चंद्रघंटा पूजा
21 मार्च 2018 (बुधवार)– चतुर्थी, कुष्मांडा पूजा
22 मार्च 2018 (गुरुवार)– पंचमी, स्कंदमाता पूजा
23 मार्च 2018 (शुक्रवार)– षष्टी, कात्यायनी पूजा
24 मार्च 2018 (शनिवार)– सप्तमी, कालरात्रि पूजा महागौरी पूजा, दुर्गा महा अष्टमी पूजा
25 मार्च 2018 (रविवार)–  राम नवमी
26 मार्च 2018 (सोमवार)–  दशमी  नवरात्रि पारना

If you need any guidance please call us on 9540674788 (Sumit Girdharwal Ji) or 9410030994 (Shri Yogeshwaranand Ji). Email us at shaktisadhna@yahoo.com

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शिवरात्रि पूजा विधि How to do Pooja on Shivratri  13 Feb 2018

शिवरात्रि पूजा विधि How to do Pooja on Shivratri  13 Feb 2018

सबसे पहले आप सभी को शिवरात्रि की बहुत बहुत शुभकामनाएं। हमारी महाकाल से यही प्रार्थना है कि आप सभी सपरिवार सदैव प्रसन्न रहें और और आपके सभी कष्ट इस पवित्र शिवरात्रि पर दूर हो जाएँ।

अधिक जानकारी के लिए हमें संपर्क करें –

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आज के समय व्यस्तता के कारण किसी के पास अधिक समय नहीं है और न ही बहुत ही अधिक विधि विधान से पूजा करने का तरीका पता है। ऐसे लोगो के लिए ही हम यहाँ भगवान् शिव की पूजा की सरल विधि प्रस्तुत कर रहें हैं –

१- शिवलिंग पर एक लोटा जल चढ़ाएँ। जो थोड़ा अधिक कर सकतें हैं वो लोटे में सबसे पहले थोड़ा गंगा जल, उसके बाद साधारण जल , थोड़ा शहद , थोड़ा कच्चा दूध मिला लें और फिर ॐ नमः शिवाय बोलते हुए शिवलिंग पर चढ़ा दें। साथ में यदि हो सके तो कुछ बेल पत्र भी चढ़ाएँ। जो लोग और अधिक करना चाहते है वो १०८ लोटों से शिवलिंग को स्नान कराएं।

२ – जो लोग मंदिर नहीं जा सकते है वो लोग घर पर ही भगवान् शिव के सामने दीपक जलाएं यथा संभव ॐ नमः शिवाय का जप करें।

३ – सभी को यथा संभव पुरे दिन ॐ नमः शिवाय का मानसिक रूप से जप करना चाहिए।

४ – जिनके पास समय है उन्हें रुद्राभिषेक करना चाहिए। जो स्वयं नहीं कर सकते उन्हें किसी वेद पाठी ब्राह्मण से रुद्राभिषेक कराना चाहिए।

५- जो लोग स्वयं रुद्राभिषेक करना चाहते हैं उनके लिए नीचे यूटयूब वीडियो दी गयी है। जो लोग पाठ नहीं कर सकते वो इसको सुनकर लाभ ले सकते है। पढ़ने के लिए पीडीऍफ़ भी दी गयी है हिंदी इंग्लिश एवं संस्कृत में।

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Lunar Eclipse ( Chandra Grahan ) 31st January 2018 ( चंद्रग्रहण 2018)

Lunar Eclipse ( Chandra Grahan ) 31st January 2018 ( चंद्रग्रहण 2018)
आज संवत 2074 माघशुक्ल पूर्णिमा को चंद्रग्रहण पड़ रहा है। आज चंद्रमा कर्क राशि में पुष्य नक्षत्र में राहु  के साथ है और उस पर  केतु की पूर्ण दृष्टि हैं। इस तरह चंद्रमा, राहु-केतु से पूरी तरह पीडि़त हो गया हैं।
अधिक जानकारी के लिए ईमेल करें – shaktisadhna@yahoo.com , 9540674788
चंद्र ग्रहण समय : भारतीय ज्योर्तिविज्ञान परिषद के अनुसार ,पृथ्वी चंद्र ग्रहण के प्रभाव वाले क्षेत्र में 04 बजकर 22 मिनट में दाखिल होगी। दरअसल, इस दौरान पृथ्वी की एक आंशिक बाहरी छाया चंद्रमा पर पड़ेगी। आंशिक चंद्रग्रहण  शाम 5 बजकर 18 मिनट से शुरू होगा। पूर्ण चंद्रग्रहण शाम 06:22 बजे से लेकर 07:38 बजे तक चलेगा। आंशिक चंद्रगहण 8 बजकर 41 मिनट पर खत्म होगा। चंद्रमा पृथ्वी की छाया से पूरी तरह रात 9 बजकर 39 मिनट पर बाहर निकलेगा।
ग्रहण काल में क्या न करें :  
  • ग्रहण के समय ईश्वर की मूर्ति अथवा यन्त्र को  हाथ ना लगाएं  एवं  इस दौरान मंत्र जप करते हुए दीपक अथवा धुप  भी ना जलाएं।
  • ग्रहण काल में भोजन नहीं करना चाहिए।
  • कोई भी नया कार्य प्रारम्भ नहीं करें।
  • ग्रहण काल में सोना नहीं चाहिए एवं मल – मूत्र का विसर्जन नहीं करना चाहिए। (बच्चे, बुजुर्गों एवं रोगीओं के लिए अनिवार्य नहीं है लेकिन फिर भी जितना नियम संभव हो पालन करना चाहिए )
  • पति पत्नी को शारीरिक सम्बन्ध नहीं बनाने चाहिए।
  • किसी भी पाप कर्म से बचना चाहिए क्योंकि ग्रहण में किये गए पाप का भी कई गुना फल प्राप्त होता है।
  • गर्भवती महिलाओं को घर में ही रहना चाहिए क्योंकि ग्रहण का गर्भ में पल रहे बच्चे पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
ग्रहण काल में क्या करें  : 
  • पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सामान्य दिनों से ग्रहण काल में किया गया पुण्यकर्म (जप, ध्यान, दान आदि) कईं लाख गुना फलदायक होता है, इसीलिए ग्रहण काल में अधिक से अधिक पुण्य कर्म करने चाहिए।
  • ग्रहण काल से पहले ही खाने के सभी पदार्थों जैसे दूध, दही, पकी हुई सब्जी में तुलसी पत्र डाल देना चाहिए। ऐसा न करने पर वो भोजन खाने योग्य नहीं रह जाता है।
  • ग्रहण काल में अपने गुरु एवं इष्ट देवता का मंत्र जप अवश्य करना चाहिए। इससे साधक को गुरु एवं देवता की विशेष कृपा प्राप्त होती है एवं  मानसिक शक्ति बढ़ती है ।
  • ग्रहण काल में मंत्र जप करने से मंत्र सिद्धि मिलती है एवं मंत्र जाग्रत हो जाते हैं।
  • किसी साधना में यदि आपको बार बार असफलता मिल रही है तो उस साधना को ग्रहण काल में अवश्य करें।
  •  ग्रहण समाप्त हो जाने के पश्चात स्वयं स्नान करके देवी देवता को ( मूर्ति अथवा यन्त्र ) को गंगा जल से स्नान करना चाहिए एवं भोग लगाना चाहिए।
  • ग्रहण काल समाप्त होने के पश्चात दान करना चाहिए।
  • जो लोग घर पर न हो अथवा यात्रा कर रहे हो वो मानसिक रूप से जप करें ।

ग्रहण काल में किस मंत्र का जप करें ( चंद्र ग्रहण में कैसे पूजा करें )

ग्रहण काल में अपने गुरु एवं इष्ट देवता का मंत्र जप अवश्य करना चाहिए। जिसका कोई गुरु नहीं है अथवा कोई इष्ट नहीं है तो वो भगवान् शिव के पंचाक्षरी मंत्र – ” नमः शिवाय ” का अथवा भगवान् विष्णु के मंत्र – ” ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ” का जप कर सकते हैं।

कुछ अन्य विशिष्ट मंत्र हम यहाँ साधकों के हितार्थ यहाँ प्रस्तुत कर रहे हैं। अपनी श्रद्धानुसार आप इनका जप भी कर सकते हैं।
गणपति मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः
लक्ष्मी मंत्र  
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नम:
दुर्गा मंत्र 
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥ ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल
ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा॥
हनुमान मंत्र
ॐ नमो भगवते हनुमते महा रुद्रात्मकाय हुं फट् स्वाहा
महाकाली मंत्र
क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा
बगलामुखी मंत्र
ॐ आं ह्ल्रीं क्रों हुं फट् स्वाहा
बाला सुंदरी मंत्र
ऐं क्लीं सौः
कामाख्या मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कामाख्यै स्वाहा
गायत्री मंत्र
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्
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Lunar Eclipse also known as Chandra Grahan will be observed between 5.18 PM to 8.41 Pm on 31st January 2018.
What we should not do during Eclipse ( Grahan) :
  • We should not touch idols of God or Yantras. One should also not lit lamp or use dhoop during mantra chanting.
  • One should not eat anything during Eclipse (Grahan).
  • One should not start any new work like business / house construction/sale purchase of property as this time is not auspicious.

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