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Author Archives: sumit girdharwal

शिवरात्रि पूजा विधि How to do Pooja on Shivratri  9 August 2018

शिवरात्रि पूजा विधि How to do Pooja on Shivratri  9 August 2018

सबसे पहले आप सभी को शिवरात्रि की बहुत बहुत शुभकामनाएं। हमारी महाकाल से यही प्रार्थना है कि आप सभी सपरिवार सदैव प्रसन्न रहें और और आपके सभी कष्ट इस पवित्र शिवरात्रि पर दूर हो जाएँ।

अधिक जानकारी के लिए हमें संपर्क करें –

9540674788 (Sumit Girdharwal Ji) or 9917325788 (Shri Yogeshwaranand Ji)

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आज के समय व्यस्तता के कारण किसी के पास अधिक समय नहीं है और न ही बहुत ही अधिक विधि विधान से पूजा करने का तरीका पता है। ऐसे लोगो के लिए ही हम यहाँ भगवान् शिव की पूजा की सरल विधि प्रस्तुत कर रहें हैं –

१- शिवलिंग पर एक लोटा जल चढ़ाएँ। जो थोड़ा अधिक कर सकतें हैं वो लोटे में सबसे पहले थोड़ा गंगा जल, उसके बाद साधारण जल , थोड़ा शहद , थोड़ा कच्चा दूध मिला लें और फिर ॐ नमः शिवाय बोलते हुए शिवलिंग पर चढ़ा दें। साथ में यदि हो सके तो कुछ बेल पत्र भी चढ़ाएँ। जो लोग और अधिक करना चाहते है वो १०८ लोटों से शिवलिंग को स्नान कराएं।

२ – जो लोग मंदिर नहीं जा सकते है वो लोग घर पर ही भगवान् शिव के सामने दीपक जलाएं यथा संभव ॐ नमः शिवाय का जप करें।

३ – सभी को यथा संभव पुरे दिन ॐ नमः शिवाय का मानसिक रूप से जप करना चाहिए।

४ – जिनके पास समय है उन्हें रुद्राभिषेक करना चाहिए। जो स्वयं नहीं कर सकते उन्हें किसी वेद पाठी ब्राह्मण से रुद्राभिषेक कराना चाहिए।

५- जो लोग स्वयं रुद्राभिषेक करना चाहते हैं उनके लिए नीचे यूटयूब वीडियो दी गयी है। जो लोग पाठ नहीं कर सकते वो इसको सुनकर लाभ ले सकते है। पढ़ने के लिए पीडीऍफ़ भी दी गयी है हिंदी इंग्लिश एवं संस्कृत में।

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Chinnamasta Kavach छिन्नमस्ता कवच

Chinnamasta Kavach छिन्नमस्ता कवच

साधकों को मां छिन्नमस्ता का जप करने से पहले कवच का पाठ अवश्य करना चाहिए। यह एक बहुत ही उच्चकोटि की एवं उग्र साधना है, इसलिए सर्वप्रथम किसी योग्य गुरू से दीक्षा अवश्य ग्रहण करें। किताबों से पढकर यह साधना करने का प्रयास कदापि न करें। जो साधक कुण्डलिनी जागरण में रूचि रखते हैं उन्हें छिन्नमस्ता साधना अवश्य करनी चाहिए। मां छिन्नमस्ता की साधना से योग की सिद्धि भी सरलता से मिल जाती है। बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान इस साधना से सम्भव है। मां छिन्नमस्ता आप पर कृपा करें।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें – 9917325788, 9540674788

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Read Another Article on Ma Chinnamasta Mantra Sadhana Evam Siddhi

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Guru Purnima Puja Vidhi in Hindi 27th July 2018 गुरूपूर्णिमा पूजन विधि

Guru Purnima Puja Vidhi in Hindi 27th July 2018  गुरूपूर्णिमा पूजन विधि

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27th July 2018 को चंद्र ग्रहण होने के कारण पूजन सही समय पर कर लेना जरूरी है। ग्रहण का सूतक 27 जुलाई को दोपहर 2.54 बजे से शुरू हो जाएगा। इसलिए गुरु पूर्णिमा की पूजा सूतक प्रारम्भ होने से पहले ही कर लेना शुभ रहेगा।  चंद्र ग्रहण में मंत्र साधना कैसे करें 

ईश्वर उपासना में सर्वप्रथम गुरू पूजन किया जाता है। परमात्मा का साक्षात्कार तो इतना सरल नही है लेकिन वही परमात्मा इस संसार में साकार रूप में आपकी प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप में सहायता करता है। गुरूदेव के मार्गदर्शन से ही साधक ईश्वर को प्राप्त करता है। बिना गुरू के ईश्वर को पाना इतना सरल नही है। यदि ईश्वर को पाना इतना सरल हो जाये तो ईश्वर का महत्व ही इस संसार से समाप्त हो जायेगा। यदि ईश्वर की अनुभूति शीघ्र हो जाये तो साधक को इस बात का अंहकार हो जाता है एवं उसकी आध्यात्मिक प्रगति रूक जाती है, इसीलिए ईश्वर ही स्वप्न व ध्यान में संकेत द्वारा गुरू रूप में दर्शन देकर मार्ग प्रदर्शन करता है। इष्ट ही गुुरू रूप में दर्शन देता है। गुरू ईश्वर की महिमा का वर्णन करता है एवं इष्ट ही गुरू रूप में दर्शन देकर गुरू की महिमा बढ़ाता है।
आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा या व्यास पूर्णिमा कहते हैं। भारत भर में यह पर्व बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दिन गुरुपूजा का विधान है।
वैसे तो दुनिया में कई विद्वान हुए हैं परंतु चारों वेदों के प्रथम व्याख्या कर्ता व्यास ऋषि थे, जिनकी आज के दिन पूजा की जाती है। हमें वेदों का ज्ञान देने वाले व्यासजी ही हैं। अतः वे हमारे आदिगुरु हुए, इसीलिए गुरुपूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है।
उनकी स्मृति को ताजा रखने के लिए हमें अपने-अपने गुरुओं को व्यासजी का अंश मानकर उनकी पूजा करके उन्हें कुछ न कुछ दक्षिणा देते हैं। हमें यह याद रखना चाहिए कि महात्माओं का श्राप भी मोक्ष की प्राप्ति कराता है। यदि राजा परीक्षित को ऋषि का श्राप नहीं होता तो उनकी संसार के प्रति जो आसक्ति थी वह दूर नहीं होती। आसक्ति होने के कारण उन्हें वैराग्य नहीं होता और वैराग्य के बिना श्रीमद्भागवत के श्रवण का अधिकार प्राप्त नहीं होता। साधु के श्राप से ही उन्हें भगवान नारायण, शुकदेव के दर्शन और उनके द्वारा देव दुर्लभ श्रीमद्भागवत का श्रवण प्राप्त हुआ।
इसके मूल में ही साधु का श्राप था। जब साधु का श्राप इतना मंगलकारी है तो साधु की कृपा न जाने क्या फल देने वाली होती होगी। अतः हमें गुरूपूर्णिमा के दिन अपने गुरु का स्मरण अवश्य करना चाहिए।

गुरू पूजन विधि
यदि इस दिन अपने गुरू देव के दर्शन प्राप्त हो जाये तो इससे अधिक प्रसन्नता का विषय तो हो नही सकता, लेकिन किसी कारण वश यदि गुरू देव का साक्षात्कार इस दिन ना हो सके तो उनका पूजन अवश्य करना चाहिए।
सर्वप्रथम आसन पर बैठ जायें एवं आचमन करें। उसके पश्चात अपने गुरूदेव का ध्यान करें एवं उनकी फोटो के आगे दीपक जलायें, यदि फोटो ना हो तो भगवान शिव के आगे भी ऐसा कर सकते हैं। उसके पश्चात उनके आगे कुछ प्रसाद रखें एवं पीले पुुष्पों की माला उनका भेंट करें। सामर्थ्यानुसार  उनके लिए कुछ दक्षिणा एवं कपडे़ रखने चाहिए जिन्हे बाद मेें मिलने पर उन्हें भेंट करें।
इसके पश्चात गुरू मंत्र का अधिक से अधिक संख्या में जप करना चाहिए।

मंत्र – ओम् परमतत्वाय योगेश्वराय गुरूभ्यो नमः

इसके पश्चात अपने इष्ट का जप करें एवं वह जप अपने गरूदेव को समर्पित करें।
इस दिन अपने गुरू देव के सर्व मंगल की एवं उनके शतायु होने की प्रार्थना परमात्मा से अवश्य करनी चाहिए।
आप सभी पर परमात्मा एवं गुरूजनों की सदैव अनुकम्पा बनी रहे, इसी प्रार्थना के साथ अपने शब्दों  को विराम देते हैं।

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Lunar Eclipse (Chandra Grahan) 27th July 2018 चंद्रग्रहण

Lunar Eclipse (Chandra Grahan) 27th July 2018 चंद्रग्रहण

27 जुलाई को साल 2018 का दूसरा चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan) पड़ रहा है,  यह ग्रहण रात 11.54 से शुरू होकर अगले दिन 28 जुलाई सुबह 3.49 तक रहेगा

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ग्रहण काल में क्या न करें :
1. ग्रहण के समय ईश्वर की मूर्ति अथवा यन्त्र को हाथ ना लगाएं एवं इस दौरान मंत्र जप करते हुए दीपक अथवा धुप भी ना जलाएं।
2. ग्रहण काल में भोजन नहीं करना चाहिए।
3. कोई भी नया कार्य प्रारम्भ नहीं करें।
4. ग्रहण काल में सोना नहीं चाहिए एवं मल – मूत्र का विसर्जन नहीं करना चाहिए। (बच्चे, बुजुर्गों एवं रोगीओं के लिए अनिवार्य नहीं है लेकिन फिर भी जितना नियम संभव हो पालन करना चाहिए )
5. पति पत्नी को शारीरिक सम्बन्ध नहीं बनाने चाहिए।
6. किसी भी पाप कर्म से बचना चाहिए क्योंकि ग्रहण में किये गए पाप का भी कई गुना फल प्राप्त होता है।
7. गर्भवती महिलाओं को घर में ही रहना चाहिए क्योंकि ग्रहण का गर्भ में पल रहे बच्चे पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

ग्रहण काल में क्या करें :

  1. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सामान्य दिनों से ग्रहण काल में किया गया पुण्यकर्म (जप, ध्यान, दान आदि) कईं लाख गुना फलदायक होता है, इसीलिए ग्रहण काल में अधिक से अधिक पुण्य कर्म करने चाहिए।
  2.  ग्रहण काल से पहले ही खाने के सभी पदार्थों जैसे दूध, दही, पकी हुई सब्जी में तुलसी पत्र डाल देना चाहिए। ऐसा न करने पर वो भोजन खाने योग्य नहीं रह जाता है।
  3. ग्रहण काल में अपने गुरु एवं इष्ट देवता का मंत्र जप अवश्य करना चाहिए। इससे साधक को गुरु एवं देवता की विशेष कृपा प्राप्त होती है एवं मानसिक शक्ति बढ़ती है ।
  4. ग्रहण काल में मंत्र जप करने से मंत्र सिद्धि मिलती है एवं मंत्र जाग्रत हो जाते हैं।
  5. किसी साधना में यदि आपको बार बार असफलता मिल रही है तो उस साधना को ग्रहण काल में अवश्य करें।
  6. ग्रहण समाप्त हो जाने के पश्चात स्वयं स्नान करके देवी देवता को ( मूर्ति अथवा यन्त्र ) को गंगा जल से स्नान करना चाहिए एवं भोग लगाना चाहिए।
  7. ग्रहण काल समाप्त होने के पश्चात दान करना चाहिए।
  8. जो लोग घर पर न हो अथवा यात्रा कर रहे हो वो मानसिक रूप से जप करें ।

ग्रहण काल में किस मंत्र का जप करें ( चंद्र ग्रहण में कैसे पूजा करें )

ग्रहण काल में अपने गुरु एवं इष्ट देवता का मंत्र जप अवश्य करना चाहिए। जिसका कोई गुरु नहीं है अथवा कोई इष्ट नहीं है तो वो भगवान् शिव के पंचाक्षरी मंत्र – ” नमः शिवाय ” का अथवा भगवान् विष्णु के मंत्र – ” ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ” का जप कर सकते हैं।

कुछ अन्य विशिष्ट मंत्र हम यहाँ साधकों के हितार्थ यहाँ प्रस्तुत कर रहे हैं। अपनी श्रद्धानुसार आप इनका जप भी कर सकते हैं।

गणपति मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः

लक्ष्मी मंत्र

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नम:

दुर्गा मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥ ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा॥

हनुमान मंत्र
ॐ नमो भगवते हनुमते महा रुद्रात्मकाय हुं फट् स्वाहा

महाकाली मंत्र 

क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा

बगलामुखी मंत्र
ॐ आं ह्ल्रीं क्रों हुं फट् स्वाहा

बाला सुंदरी मंत्र
ऐं क्लीं सौः

कामाख्या मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कामाख्यै स्वाहा

गायत्री मंत्र
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्

ग्रहण के समय आप शाबर मंत्रो का जप भी कर सकते हैं। 

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Ashadha Gupta Navratri 13 July 2018 ( आषाढ़ मास गुप्त नवरात्री 2018 )

Ashadha Gupta Navratri July 2018 ( आषाढ़ मास गुप्त नवरात्री 2018  )

13 जुलाई से आषाढ़ गुप्त नवरात्री प्रारम्भ हो रही है। गुप्त नवरात्री में पूजा सामान्य नवरात्री के सामान ही होती है, लेकिन इस समय का उपयोग आप विशिष्ट साधनाओं को संपन्न करने में एवं अपने जीवन को उच्च कोटि पर ले जाने के लिए कर सकते हैं। गुप्त नवरात्री में विशेष रूप से दस महाविद्याओं की उपासना की जाती है। भारत सदैव से ही अपनी आध्यात्मकि शक्तियों के कारण विश्व गुरु रहा है लेकिन आज की पीढ़ी विरासत में मिले इस ज्ञान का मोल नहीं समझ रही है और शायद यही कारण है की आज सभी सुख सुविधाएँ होने के पश्चात भी मनुष्य सुखी नहीं है। वास्तविक सुख ध्यान,योग एवं ईश्वरोपासना से ही प्राप्त किया जा सकता है ये जितना जल्दी हम समझेंगे उतना ही हमारे हित में होगा।

13 जुलाई को आंशिक सूर्य ग्रहण भी घटित हो रहा है लेकिन भारत में इसका प्रभाव न के बराबर है।  इसके पश्चात भी यदि कोई व्यक्ति जप , पूजन अथवा अनुष्ठान करता है तो उसका विशेष फल उसे प्राप्त होगा। यह जप आप शाम 6 बजे के बाद करें।

13 जुलाई 2018 (शुक्रवार) – प्रतिपदा, घट स्थापना, शैलपुत्री पूजा
14 जुलाई 2018 (शनिवार) – द्वितीया, ब्रह्मचारिणी पूजा
15 जुलाई  2018 (रविवार) – तृतीया, चंद्रघंटा पूजा
16 जुलाई 2018 (सोमवार) – चतुर्थी, कुष्मांडा पूजा
17 जुलाई 2018 (मंगलवार)– पंचमी, स्कंदमाता पूजा
18 जुलाई 2018 (बुधवार) – षष्टी, कात्यायनी पूजा
19 जुलाई 2018 (गुरुवार) – सप्तमी, कालरात्रि पूजा
20 जुलाई 2018 (शुक्रवार) – महागौरी पूजा, दुर्गा महा अष्टमी पूजा
21जुलाई 2018 (शनिवार)– नवमी नवरात्रि

If you need any guidance please call us on 9540674788 (Sumit Girdharwal Ji) or 9410030994 (Shri Yogeshwaranand Ji). Email us at shaktisadhna@yahoo.com

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