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Category Archives: नवरात्रि पूजा विधि

2019 Shardiya Navratri Puja Vidhi and Dates शारदीय 2019 नवरात्री पूजा विधि

2019 Shardiya Navratri Puja Vidhi and Dates 2019 शारदीय नवरात्री पूजा विधि

maa durga nava roop nine forms of shakti

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शारदीय नवरात्रि आज से प्रारम्भ हो रहे हैं और आने वाले नौ दिनों तक मां दुर्गा की 9 शक्ति की पूजा- आराधना की जाएगी। इस समय का उपयोग साधक विशिष्ट साधनाओं को सम्पन्न करने में किया करते हैं। यह समय सभी साधको के लिए बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इस काल में की गयी उपासना का विशेष फल प्राप्त होता है। जो लोग अभी तक किसी कारण से कोई अनुष्ठान अथवा पुरश्चरण नहीं कर सके हैं उन्हें वह अवश्य शरू कर देना चाहिए। यह जरुरी नहीं है कि नवरात्र में केवल माँ दुर्गा की ही उपासना की जाती है बल्कि इस समय आप किसी भी इष्ट देवता के मंत्रो का अनुष्ठान कर सकते हैं। नवरात्र के पहले दिन अपने गुरु देव से मंत्र दीक्षा लेकर, उसका अनुष्ठान करना चाहिए। कुछ साधको के मन में एक प्रश्न रहता है कि क्या नवरात्र में शरू किया गया अनुष्ठान नवरात्र में ही पूर्ण करना जरुरी है , नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं है। ये अनुष्ठान आप २१ अथवा ४० दिन में भी पूर्ण कर सकते हैं लेकिन यदि हो सके तो अंतिम नवरात्र तक पूर्ण कर लेना चाहिए। यदि किसी कारण से अनुष्ठान करना सम्भव नहीं है तो नवरात्र में जितना अधिक जप हो सके उतना ही अच्छा है।

नवरात्र में अपने इष्ट देव के सहस्रनाम से अर्चन करना चाहिए। सहस्त्रनाम में देवी/देवता के एक हजार नाम होते हैं। इसमें उनके गुण व कार्य के अनुसार नाम दिए गए हैं। सर्व कल्याण व कामना पूर्ति हेतु इन नामों से अर्चन करने का प्रयोग अत्यधिक प्रभावशाली है। जिसे सहस्त्रार्चन के नाम से जाना जाता है।  सहस्र नामावली के एक-एक नाम का उच्चारण करके देवी की प्रतिमा पर, उनके चित्र पर, उनके यंत्र पर या देवी का आह्वान किसी सुपारी पर करके प्रत्येक नाम के उच्चारण के पश्चात नमः बोलकर देवी की प्रिय वस्तु चढ़ाना चाहिए। जिस वस्तु से अर्चन करना हो वह शुद्ध, पवित्र, दोष रहित व एक हजार से अधिक संख्या में होनी चाहिए।अर्चन में बिल्वपत्र, हल्दी, केसर या कुंकुम से रंगे चावल, इलायची, लौंग, काजू, पिस्ता, बादाम, गुलाब के फूल की पंखुड़ी, मोगरे का फूल, चारौली, किसमिस, सिक्का आदि का प्रयोग शुभ व देवी को प्रिय है। यदि अर्चन एक से अधिक व्यक्ति एक साथ करें तो नाम का उच्चारण एक व्यक्ति को तथा अन्य व्यक्तियों को नमः का उच्चारण अवश्य करना चाहिए।सहस्त्रनाम के पाठ करने का फल भी महत्वपूर्ण है। अर्चन की सामग्री प्रत्येक नाम के पश्चात, प्रत्येक व्यक्ति को अर्पित करनी चाहिए। अर्चन के पूर्व पुष्प, धूप, दीपक व नैवेद्य देवी/देवता को अर्पित करना चाहिए। दीपक पूरी अर्चन प्रक्रिया तक प्रज्वलित रहना चाहिए।

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2019  Shardiya Navratri Dates

29 September 2019 ( Sunday ) Pratipada Ghatasthapana Shailputri Puja
30 September 2019 ( Monday ) Dwitiya Brahmacharini Puja
01 October 2019 ( Tuesday )  Tritiya Chandraghanta Puja
02 October 2019 ( Wednesday ) Chaturthi Kushmanda Puja
03 October 2019 ( Thursday) Panchami Skandamata Puja
04 October 2019( Friday) Shashthi Katyayani Puja
05 October 2019 ( Saturday) Saptami Kalaratri Puja
06 October 2019( Sunday ) Ashtami Durga Ashtami Mahagauri Puja Sandhi Puja
07 October 2019 ( Monday ) Navami Siddhidatri Puja
08 October 2019 ( Tuesday )  Dashami Navratri Parayna

29  सितम्बर 2019 ( रविवार ) घट स्थापना, शैलपुत्री पूजा
30 सितम्बर 2019 ( सोमवार ) द्वितीया ब्रह्मचारिणी पूजा
01 अक्टूबर 2019 ( मंगलवार )  तृतीया चंद्रघंटा पूजा
02 अक्टूबर 2019 (  बुधवार ) चतुर्थी कुष्मांडा पूजा
03 अक्टूबर 2019 (  गुरुवार ) पंचमी स्कंदमाता पूजा
04 अक्टूबर 2019 (  शुक्रवार ) षष्ठी कात्यायनी पूजा
05 अक्टूबर 2019 (  शनिवार ) सप्तमी कालरात्रि पूजा
06 अक्टूबर 2019 (  रविवार ) अष्टमी महागौरी पूजा, दुर्गा महा अष्टमी पूजा,
07 अक्टूबर 2019  (  सोमवार ) नवमी  सिद्धिदात्री पूजा
08 अक्टूबर 2019 (  मंगलवार )  दशमी नवरात्री परायण

यह है घट स्थापना का समय

कलश स्थापना :- दिन रविवार 29 सितंबर को द्विस्वभाव या स्थिर लग्न या अभिजित मुहुर्त दिन में 11:36 बजे से लेकर 12:24 बजे तक किया जायेगा । साथ ही यदि शुभ चौघड़िया भी मिल जाये तो अति उत्तम होगा। जो निम्न है–
सुबह 7:30 से 9 बजे तक चर चौघड़िया
सुबह 9:00 से 10:30 बजे तक लाभ चौघड़िया
सुबह 10:30 से 12 बजे तक अमृत चौघड़िया
दोपहर 1:30 बजे से 3 बजे तक शुभ चौघड़िया।

( अच्छा कर्म किसी भी समय किया जाय वह अच्छा फल ही प्रदान करता है। )

यह है कलश स्थापना के लिए सामान

नवरात्रि के लिए मिट्टी का पात्र और जौ, शुद्ध, साफ मिट्टी, शुद्ध जल से भरा हुआ सोना, चांदी, तांबा, पीतल या मिट्टी का कलश, मोली (कलवा), साबुत सुपारी, कलश में रखने के लिए सिक्के, फूल और माला, अशोक या आम के 5 पत्ते, कलश को ढकने के लिए मिट्टी का ढक्कन, साबुत चावल, एक पानी वाला नारियल, लाल कपड़ा या चुनरी की आवस्यकता होती है।

ऐसे करें कलश स्थापना

  • नवरात्रि में कलश स्थापना करने के दौरान सबसे पहले पूजा स्थल को शुद्ध कर लें।
  • लकड़ी की चौकी रखकर उसपर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं।
  • कपड़े पर थोड़े-थोड़े चावल रखें।
  • चावल रखते हुए सबसे पहले गणेश जी का स्मरण करें।
  • एक मिट्टी के पात्र में जौ बोयें।
  • इस पात्र पर जल से भरा हुआ कलश स्थापित करें।
  • कलश पर रोली से स्वस्तिक या ‘ऊँ’ बनायें।
  • कलश के मुख पर कलवा बांधकर इसमें सुपारी, सिक्का डालकर आम या अशोक के पत्ते रखें।
  • कलश के मुख को चावल से भरी कटोरी से ढक दें।
  • एक नारियल पर चुनरी लपेटकर इसे कलवे से बांधें और चावल की कटोरी पर रख दें।
  • सभी देवताओं का आवाहन करें और धूप दीप जलाकर कलश की पूजा करें।
  • भोग लगाकर मां की पूजा करें।

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नवरात्रि साधना (Navratri Sadhna)

प्रतिपदा अर्थात् नवरात्र के प्रथम दिवस से चण्डी-पाठ अर्थात् दुर्गा सप्तशती का पाठ आरम्भ किया जाता है। कुछ साधक प्रतिदिन सम्पूर्ण दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं, लेकिन कुछ साधक समयाभाव के कारण अथवा अन्य किन्हीं कारणों से सम्पूर्ण दुर्गा सप्तशती का पाठ नहीं कर पाते हैं और वे नवरात्र के समापन तक दुर्गा सप्तशती पूर्ण करते है। ऐसे व्यक्ति, जो सम्पूर्ण नवरात्र में केवल दुर्गा सप्तशती का मात्र एक ही पाठ करते हों, उन्हें चाहिए कि वे निम्नानुसार अपने पाठ करें –

प्रतिपदा – अध्याय एक का पाठ करें।

द्वितीया – अध्याय दो व तीन का पाठ करें।

तृतीया – अध्याय चार का पाठ करें।

चतुर्थी – अध्याय पांच, छः, सात व आठ का पाठ करें।

पंचमी – अध्याय नौ व दस का पाठ करके लक्ष्मी-पूजन करें।

षष्ठी – अध्याय ग्यारह का पाठ करें।

सप्तमी – अध्याय बारह व तेरह का पाठ करें।

अष्टमी – इस दिन महा अष्टमी का व्रत रखें।

नवमी – महा नवमी व्रत, हवन

शापोद्धार मंत्र
ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं क्रां क्रीं चण्डिकादेव्यै शापनाशानुग्रहं कुरु कुरु स्वाहा। इस मंत्र का आदि और अन्त में सात बार जप करें।

उत्कीलन मंत्र
ॐ श्रीं क्लीं ह्रीं सप्तशति चण्डिके उत्कीलनं कुरु कुरु स्वाहा। इस मंत्र का आदि और अन्त में इक्कीस-इक्कीस बार जप करें।

मृत संजीवनी विद्या
ॐ ह्रीं ह्रीं वं वं ऐं ऐं मृत संजीवनी विद्ये मृतमुत्थापयोत्थापय क्रीं ह्रीं ह्रीं वं स्वाहा। इस मंत्र का आदि और अन्त में सात बार जप करें।

शाप विमोचन मंत्र ( मारीच कल्प के अनुसार )
ॐ श्रीं श्रीं क्लीं हूं छोभय मोहय उत्कीलय उत्कीलय उत्कीलय ठं ठं । इस मंत्र का आरम्भ में ही एक सौ आठ बार जप करना चाहिए, पाठ के अंत में नहीं।

इसके बाद छः अङ्गों सहित दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है। कवच , अर्गला , कीलक और तीनो रहस्य, ये ही सप्तशती के छः अङ्ग माने गए हैं।

Sri Durga Saptashloki ( श्री दुर्गा सप्तश्लोकी )

जो लोग समयाभाव के कारण दुर्गा सप्तशती का पाठ नहीं कर सकते उन्हें नियमित रूप से श्री दुर्गा सप्तश्लोकी का पाठ करना चाहिए

शिव उवाच –
देवी त्वं भक्तसुलभे सर्वकार्यविधायिनी |
कलौ हि कार्यसिद्ध्यर्थमुपायं ब्रूहि यत्नतः ||
देव्युवाच –
शृणु देव प्रवक्ष्यामि कलौ सर्वेष्टसाधनम् |
मया तवैव स्नेहेनाप्यम्बास्तुतिः प्रकाश्यते ||

ॐ अस्य श्रीदुर्गासप्तश्लोकीस्तोत्रमहामन्त्रस्य नारायण ऋषिः, अनुष्टुप छन्दः, श्रीमहाकालीमहालक्ष्मीमहासरस्वत्यो देवताः , श्रीदुर्गाप्रीत्यर्थं सप्तश्लोकीदुर्गापाठे विनियोगः ॥

ज्ञानिनामपि चेतांसि देवि भगवती हि सा । बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति ॥१॥

दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि । दारिद्रयदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्र चित्ता ॥2॥

सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥3॥

शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे । सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥4॥

सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते । भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवी नमोऽस्तु ते ॥5॥

रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान् । त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति ॥6॥

सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि । एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरि विनाशनम् ॥7॥

Sri Durga Saptashloki Path in Hindi

शिव उवाच – शिवजी बोले – हे देवी ! तुम भक्तों के लिये सुलभ हो और समस्त कर्मों का विधान करनेवाली हो। कलियुग में कामनाओं की सिद्धि हेतु यदि कोई उपाय हो तो उसे अपनी वाणी द्वारा सम्यकरूपसे व्यक्त करो।

देवी ने कहा – हे देव ! आपका मेरे ऊपर बहुत स्नेह है। कलियुग में समस्त कामनाओं को सिद्ध करने वाला जो साधन है वह बतलाऊँगी , सुनो ! उसका नाम है अम्बास्तुति।

वे भगवती महामाया देवी ज्ञानियों के भी चित्त को बलपूर्वक खींचकर मोह में डाल देती हैं ।

माँ दुर्गे ! आप स्मरण करने पर सब प्राणियों का भय हर लेती हैं और स्वस्थ पुरुषों द्धारा चिन्तन करने पर उन्हें परम कल्याणमयी बुद्धि प्रदान करती हैं । दुःख, दरिद्रता और भय हरनेवाली देवी ! आपके सिवा दूसरी कौन है, जिसका चित्त सबका उपकार करने के लिए सदा ही दयार्द्र रहता हो ।

नारायणी ! आप सब प्रकार का मंगल प्रदान करनेवाली मंगलमयी हैं, आप ही कल्याणदायिनी शिवा हैं । आप सब पुरुषार्थ्रो को सिद्ध करने वाली, शरणागतवत्सला, तीन नेत्रों वाली गौरी हैं । आपको नमस्कार है ।

शरणागतों, दिनों एवं पीड़ितों की रक्षा में संलग्न रहनेवाली तथा सबकी पीड़ा दूर करनेवाली नारायणी देवी ! आपको नमस्कार है ।

सर्वस्वरूपा, सर्वेश्वरी तथा सब प्रकार की शक्तियों से सम्पन्न दिव्यरूपा दुर्गे देवी ! सब भयों से हमारी रक्षा कीजिये आपको नमस्कार है ।

देवी ! आप प्रसन्न होने पर सब रोगों को नष्ट कर देती हैं और कुपित होने पर मनोवांछित सभी कामनाओं का नाश कर देती हैं । जो लोग आपकी शरण में हैं, उनपर विपत्ति तो आती ही नहीं ; आपकी शरण में गए हुए मनुष्य दूसरों को शरण देनेवाले हो जाते हैं ।

सर्वेश्वरि ! आप ऐसी प्रकार तीनों लोकों की समस्त बाधाओं को शान्त करें और हमारे शत्रुओं का नाश करती रहें ।

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जो लोग शत्रु , ऊपरी बाधा एवं तंत्र प्रयोगो से ग्रस्त हैं उन्हें नवरात्र में माँ बगलामुखी अथवा माँ प्रत्यंगिरा का अनुष्ठान करना चाहिए

Ma Pratyangira Puja Vidhi

Ma Baglamukhi Puja Vidhi Part 1

Ma Baglamukhi Puja Vidhi Part 2

धन प्राप्ति एवं जीवन में चारो और सफलता प्राप्ति के लिए नवरात्र में श्री विद्या उपासना करनी चाहिए

Sri Vidya Upasana Vidhi

दश महाविद्याओ के किसी भी स्वरुप की पूजा जीवन में सफलता लेकर आती है।

Dhumavati Upasana Vidhi

Ma Kamakhya Upasana Vidhi

Mahakali Upasana Vidhi

Ma Tara Upasana Vidhi

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नवरात्रि का महत्व ( Importance Of Navratri)

These nine days are very good to start any sadhana. If anyone is willing to do dus mahavidya upasana then he/she should not waste this time. These nine days alone can change your life & your future, but it depends on you how you spend your life in these nine days. Those who never had any spiritual experience in their life they should practice mantras in these navaratri. Those who have taken diksha from us they must do anusthaan in this navaratri. It is not compulsory to 1.25 lakh mantras. You can do anusthaan of 21000 mantras, 31000 mantras etc, but you have to complete in nine days only. Homam can be done on 10th day.  Who have already in any anusthaan please do continue it , no new anusthaan is required for them.

Those who have not taken mantra diksha as of yet they should take it in this navaratri as it is the best time.

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Ashadha Gupta Navratri 13 July 2018 ( आषाढ़ मास गुप्त नवरात्री 2018 )

Ashadha Gupta Navratri July 2018 ( आषाढ़ मास गुप्त नवरात्री 2018  )

13 जुलाई से आषाढ़ गुप्त नवरात्री प्रारम्भ हो रही है। गुप्त नवरात्री में पूजा सामान्य नवरात्री के सामान ही होती है, लेकिन इस समय का उपयोग आप विशिष्ट साधनाओं को संपन्न करने में एवं अपने जीवन को उच्च कोटि पर ले जाने के लिए कर सकते हैं। गुप्त नवरात्री में विशेष रूप से दस महाविद्याओं की उपासना की जाती है। भारत सदैव से ही अपनी आध्यात्मकि शक्तियों के कारण विश्व गुरु रहा है लेकिन आज की पीढ़ी विरासत में मिले इस ज्ञान का मोल नहीं समझ रही है और शायद यही कारण है की आज सभी सुख सुविधाएँ होने के पश्चात भी मनुष्य सुखी नहीं है। वास्तविक सुख ध्यान,योग एवं ईश्वरोपासना से ही प्राप्त किया जा सकता है ये जितना जल्दी हम समझेंगे उतना ही हमारे हित में होगा।

13 जुलाई को आंशिक सूर्य ग्रहण भी घटित हो रहा है लेकिन भारत में इसका प्रभाव न के बराबर है।  इसके पश्चात भी यदि कोई व्यक्ति जप , पूजन अथवा अनुष्ठान करता है तो उसका विशेष फल उसे प्राप्त होगा। यह जप आप शाम 6 बजे के बाद करें।

13 जुलाई 2018 (शुक्रवार) – प्रतिपदा, घट स्थापना, शैलपुत्री पूजा
14 जुलाई 2018 (शनिवार) – द्वितीया, ब्रह्मचारिणी पूजा
15 जुलाई  2018 (रविवार) – तृतीया, चंद्रघंटा पूजा
16 जुलाई 2018 (सोमवार) – चतुर्थी, कुष्मांडा पूजा
17 जुलाई 2018 (मंगलवार)– पंचमी, स्कंदमाता पूजा
18 जुलाई 2018 (बुधवार) – षष्टी, कात्यायनी पूजा
19 जुलाई 2018 (गुरुवार) – सप्तमी, कालरात्रि पूजा
20 जुलाई 2018 (शुक्रवार) – महागौरी पूजा, दुर्गा महा अष्टमी पूजा
21जुलाई 2018 (शनिवार)– नवमी नवरात्रि

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Chaitra Navratri 2018 ( चैत्र नवरात्रि 2018 )

Chaitra Navratri 2018 Ma Kamakhya Sadhana Vidhi ( चैत्र नवरात्रि 2018 माँ कामाख्या साधना विधि )

18 मार्च से चैत्र नवरात्री प्रारम्भ हो रही है।   इस समय का उपयोग आप विशिष्ट साधनाओं को संपन्न करने में एवं अपने जीवन को उच्च कोटि पर ले जाने के लिए कर सकते हैं। भारत सदैव से ही अपनी आध्यात्मकि शक्तियों के कारण विश्व गुरु रहा है लेकिन आज की पीढ़ी विरासत में मिले इस ज्ञान का मोल नहीं समझ रही है और शायद यही कारण है की आज सभी सुख सुविधाएँ होने के पश्चात भी मनुष्य सुखी नहीं है। वास्तविक सुख ध्यान,योग एवं ईश्वरोपासना से ही प्राप्त किया जा सकता है ये जितना जल्दी हम समझेंगे उतना ही हमारे हित में होगा।

आगामी नवरात्रों के लिए एक विशिष्ट साधना यहाँ प्रस्तुत कर रहे हैं। गुरु आज्ञा लेकर इसका अभ्यास करें –

18 मार्च 2018 (रविवार)– प्रतिपदा, घट स्थापना, शैलपुत्री पूजा
19 मार्च 2018 (सोमवार)– द्वितीया, ब्रह्मचारिणी पूजा
20 मार्च 2018 (मंगलवार)– तृतीया, चंद्रघंटा पूजा
21 मार्च 2018 (बुधवार)– चतुर्थी, कुष्मांडा पूजा
22 मार्च 2018 (गुरुवार)– पंचमी, स्कंदमाता पूजा
23 मार्च 2018 (शुक्रवार)– षष्टी, कात्यायनी पूजा
24 मार्च 2018 (शनिवार)– सप्तमी, कालरात्रि पूजा महागौरी पूजा, दुर्गा महा अष्टमी पूजा
25 मार्च 2018 (रविवार)–  राम नवमी
26 मार्च 2018 (सोमवार)–  दशमी  नवरात्रि पारना

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Gupt Navratri 2018 Ma Kamakhya Sadhana Vidhi माघ गुप्त नवरात्री 2018 माँ कामाख्या साधना विधि

Magh Gupt Navratri 2018 Ma Kamakhya Sadhana Vidhi ( माघ गुप्त नवरात्री 2018 माँ कामाख्या साधना विधि )

18 जनवरी से माघ गुप्त नवरात्री प्रारम्भ हो रही है। गुप्त नवरात्री में पूजा सामान्य नवरात्री के सामान ही होती है। लेकिन इस समय का उपयोग आप विशिष्ट साधनाओं को संपन्न करने में एवं अपने जीवन को उच्च कोटि पर ले जाने के लिए कर सकते हैं। भारत सदैव से ही अपनी आध्यात्मकि शक्तियों के कारण विश्व गुरु रहा है लेकिन आज की पीढ़ी विरासत में मिले इस ज्ञान का मोल नहीं समझ रही है और शायद यही कारण है की आज सभी सुख सुविधाएँ होने के पश्चात भी मनुष्य सुखी नहीं है। वास्तविक सुख ध्यान,योग एवं ईश्वरोपासना से ही प्राप्त किया जा सकता है ये जितना जल्दी हम समझेंगे उतना ही हमारे हित में होगा।

आगामी नवरात्रों के लिए एक विशिष्ट साधना यहाँ प्रस्तुत कर रहे हैं। गुरु आज्ञा लेकर इसका अभ्यास करें –

18 जनवरी 2018 (गुरुवार)– प्रतिपदा, घट स्थापना, शैलपुत्री पूजा
19 जनवरी 2018 (शुक्रवार)– द्वितीया, ब्रह्मचारिणी पूजा
20 जनवरी 2018 (शनिवार)– तृतीया, चंद्रघंटा पूजा
21 जनवरी 2018 (रविवार)– चतुर्थी, कुष्मांडा पूजा
22 जनवरी 2018 (सोमवार)– पंचमी, स्कंदमाता पूजा
23 जनवरी 2018 (मंगलवार)– षष्टी, कात्यायनी पूजा
24 जनवरी 2018 (बुधवार)– सप्तमी, कालरात्रि पूजा
25 जनवरी 2018 (गुरुवार)– महागौरी पूजा, दुर्गा महा अष्टमी पूजा, सरस्वती पूजा
26 जनवरी 2018 (शुक्रवार)– राम नवमी नवरात्रि पारना

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2017 Shardiya Navratri Puja Vidhi andDates  शारदीय नवरात्री  पूजा विधि  

2017 Shardiya Navratri Puja Vidhi & Dates  शारदीय नवरात्री  पूजा विधि

maa durga nava roop nine forms of shakti

शारदीय नवरात्रि शुरू हो रहे हैं और आने वाले नौ दिनों तक मां दुर्गा की 9 शक्ति की पूजा- आराधना की जाएगी। इस समय का उपयोग साधक विशिष्ट साधनाओं को सम्पन्न करने में किया करते हैं। यह समय सभी साधको के लिए बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इस काल में की गयी उपासना का विशेष फल प्राप्त होता है। जो लोग अभी तक किसी कारण से कोई अनुष्ठान अथवा पुरश्चरण नहीं कर सके हैं उन्हें कल से वह अवश्य शरू कर देना चाहिए। यह जरुरी नहीं है कि नवरात्र में केवल माँ दुर्गा की ही उपासना की जाती है बल्कि इस समय आप किसी भी इष्ट देवता के मंत्रो का अनुष्ठान कर सकते हैं। नवरात्र के पहले दिन अपने गुरु देव से मंत्र दीक्षा लेकर, उसका अनुष्ठान करना चाहिए। कुछ साधको के मन में एक प्रश्न रहता है कि क्या नवरात्र में शरू किया गया अनुष्ठान नवरात्र में ही पूर्ण करना जरुरी है , नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं है। ये अनुष्ठान आप २१ अथवा ४० दिन में भी पूर्ण कर सकते हैं लेकिन यदि हो सके तो अंतिम नवरात्र तक पूर्ण कर लेना चाहिए। यदि किसी कारण से अनुष्ठान करना सम्भव नहीं है तो नवरात्र में जितना अधिक जप हो सके उतना ही अच्छा है।

नवरात्र में अपने इष्ट देव के सहस्रनाम से अर्चन करना चाहिए। सहस्त्रनाम में देवी/देवता के एक हजार नाम होते हैं। इसमें उनके गुण व कार्य के अनुसार नाम दिए गए हैं। सर्व कल्याण व कामना पूर्ति हेतु इन नामों से अर्चन करने का प्रयोग अत्यधिक प्रभावशाली है। जिसे सहस्त्रार्चन के नाम से जाना जाता है।  सहस्र नामावली के एक-एक नाम का उच्चारण करके देवी की प्रतिमा पर, उनके चित्र पर, उनके यंत्र पर या देवी का आह्वान किसी सुपारी पर करके प्रत्येक नाम के उच्चारण के पश्चात नमः बोलकर देवी की प्रिय वस्तु चढ़ाना चाहिए। जिस वस्तु से अर्चन करना हो वह शुद्ध, पवित्र, दोष रहित व एक हजार से अधिक संख्या में होनी चाहिए।अर्चन में बिल्वपत्र, हल्दी, केसर या कुंकुम से रंग चावल, इलायची, लौंग, काजू, पिस्ता, बादाम, गुलाब के फूल की पंखुड़ी, मोगरे का फूल, चारौली, किसमिस, सिक्का आदि का प्रयोग शुभ व देवी को प्रिय है। यदि अर्चन एक से अधिक व्यक्ति एक साथ करें तो नाम का उच्चारण एक व्यक्ति को तथा अन्य व्यक्तियों को नमः का उच्चारण अवश्य करना चाहिए।सहस्त्रनाम के पाठ करने का फल भी महत्वपूर्ण है। अर्चन की सामग्री प्रत्येक नाम के पश्चात, प्रत्येक व्यक्ति को अर्पित करनी चाहिए। अर्चन के पूर्व पुष्प, धूप, दीपक व नैवेद्य देवी/देवता को अर्पित करना चाहिए। दीपक पूरी अर्चन प्रक्रिया तक प्रज्वलित रहना चाहिए।

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2017  Shardiya Navratri Dates

21 September 2017 ( Thursday ) Pratipada Ghatasthapana Shailputri Puja
22 September 2017 ( Friday ) Dwitiya Brahmacharini Puja
23 September 2017 ( Saturday )  Tritiya Chandraghanta Puja
24 September 2017 ( Sunday ) Chaturthi Kushmanda Puja
25 September 2017 ( Monday ) Panchami Skandamata Puja
26 September 2017 ( Tuesday) Shashthi Katyayani Puja
27 September 2017 ( Wednesday) Saptami Kalaratri Puja
28 September 2017(Thursday ) Ashtami Durga Ashtami Mahagauri Puja Sandhi Puja
29 September 2017 (Friday )Navami Siddhidatri Puja
30 September 2017 (Saturday )  Dashami Navratri Parana

21  सितम्बर 2017 ( गुरुवार) घट स्थापना, शैलपुत्री पूजा
22 सितम्बर 2017 ( शुक्रवार) द्वितीया ब्रह्मचारिणी पूजा
23 सितम्बर 2017 ( शनिवार )  तृतीया चंद्रघंटा पूजा
24 सितम्बर 2017 ( रविवार ) चतुर्थी कुष्मांडा पूजा
25 सितम्बर 2017 ( सोमवार ) पंचमी स्कंदमाता पूजा
26 सितम्बर 2017 ( मंगलवार) षष्ठी कात्यायनी पूजा
27 सितम्बर 2017 ( बुधवार ) सप्तमी कालरात्रि पूजा
28 सितम्बर 2017 (गुरुवार) अष्टमी महागौरी पूजा, दुर्गा महा अष्टमी पूजा,
29 सितम्बर 2017  (शुक्रवार) नवमी  सिद्धिदात्री पूजा
30 सितम्बर 2017 (शनिवार )  दशमी नवरात्री परायण

यह है घट स्थापना का समय

इस बार घटस्‍थापना और पूजा के लिए दो मुहूर्त है एक सुबह का और दूसरा दोपहर का ।  इस दिन कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 06:18 बजे से 8:10 बजे तक एवं  11:49 से दोपहर 12: 37 बजे तक है।
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