Advertisements

Category Archives: साधना पथ

Success Mantra

Everyone wants to be successful in life. Below are few success mantras which you should remember if you want to be successful. Whether you are doing any sadhana or you are into  education, job or business below mantras will help you to achieve success.

Be prepared

if we need to achieve tremendous success at something, we need to do our full research on it. If we are fully prepared, it becomes easier for us to becoming successful at something.

Don’t stop mid way

No matter what happens, do not stop doing any work mid way. If you take a break, chances are that your motivation to do that particular thing too drops and this isn’t a good sign. Do everything from start to finish.

Value time

A person who does not value the importance of time has already lost half the battle. Value time when it comes to achieving success. Don’t waste time or digress from something that you are already doing to do something else.

Keep your emotions in control

Read the rest of this entry

Advertisements

Chaur Ganesh Mantra चौर गणेश मंत्र

Chaur Ganesh Mantra चौर गणेश मंत्र
ganesha-mantra

तन्त्र-शास्त्र ‘वर्णविल’ के अनुसार चौर गणेश-मन्त्र का जप किए बिना कोई पूजा-कर्म नहीं करना चाहिए। इसमें स्पष्ट कहा गया है कि चौर मंत्रो को जाने बिना जो पुराण भी पढ़ता है, वह साक्षात् ‘कलि’ के समान होता है। वह पापी, चोर अथवा कुत्ते की योनि में जाता है। इस मंत्र का जप किए बिना यदि पूजा या जप कर्म किया जाए तो पूजा व पूजा के तेज का स्वयं गणेश हरण कर लेते हैं।
मनुष्य-देह में कुण्डलिनी कमल के प्रत्येक द्वार के पथ में पचास गण, देवताओं के ज्योतिरूप जो मुनिगण हैं, वे जम्हाई लेते हैं तथा प्रत्येक चक्र के कमलदल में स्थित होकर जप का तेज हरण कर लेते हैं। स्मरण रखें! जप-तप आदि में एक दिव्य तेज होता है, जहां-जहां ये तेजस्वी क्रियाएं होती हैं, वहां-वहां ये चौर गण होते हैं। इसलिए इनके प्रबोधन हेतु ये मंत्र पढ़े जाते हैं।

For Astrology, Mantra Diksha & Sadhana Guidance email us to shaktisadhna@yahoo.com or call us on 9410030994, 9540674788.

Download Chaur Ganesh Mantra चौर गणेश मंत्र Pdf

View Chaur Ganesh Mantra चौर गणेश मंत्र Pdf on Google

Read the rest of this entry

How to stop worrying and remove stress and depression of life

Dear Friends,

Today i watched this video and thought to share this with all of you. May be this can help you somewhere in your life. It also proves that why people in the field of Sadhna and spirituality lives a very happy life as they leave all their problems in hand of their deity. Adding to this you should chant mantras and remove all the burden from your head.

अपनी सभी चिंताओं को परमपिता के चरणों में समर्पित कर दो और एक सुन्दर व खुशहाल जीवन जियो


For mantra diksha & sadhana guidance email to shaktisadhna@yahoo.com or call us on 9410030994, 9540674788 . For more information visit www.baglamukhi.info or http://www.yogeshwaranand.org

Buy our Books from Ebay –

Buy Agama Rahasya By Sri Yogeshwaranand Ji
Buy Shatkarm Vidhan Book
Buy Baglamukhi Sadhana Aur Siddhi
Buy Shodashi Mahavidya (Sri Vidya Sadhana)

Read the rest of this entry

प्रबल कामना और अभ्यास ही सफलता और चमत्कार की कुंजी है।

प्रबल कामना और अभ्यास ही सफलता और चमत्कार की कुंजी है।
बहुत से लोग संदेह में ही अपनी सफलता को नष्ट कर लेते हैं। जरा सी कठिनाई हुई नहीं कि असमंजस में पड़ जाते हैं। प्रकृति से भी कुछ नहीं सीखते। यहाँ एक व्यवस्था कायम है। आप जैसी कामना करेंगे और उस पर अभ्यास करेंगे, वह सब कुछ आपको प्राप्त होगा। प्रकृति के शब्दकोश में असंभव शब्द नहीं है।
आध्यात्मिक रूप से कहा जाए, तो इस प्रकृति के प्रत्येक इकाई में परमात्मा का ही अंश विद्यमान है। भले ही वह स्थानीय धाराओं और अपने ऊर्जा चक्रों में बंधा हुआ है, पर वह परमात्मा है। वह लगातार गहन कामना करता रहे और अपने शरीर को कामना के अनुसार अभ्यासित करता रहे ; तो वह अपनी कामना के अनुरूप ही अतिरिक्त शक्तियों को प्राप्त कर सकता है। सर्कस में , रेस में, पर्वतारोहण में सर्वत्र इसे फलित होते देखनेवाला मनुष्य यह नहीं देखता कि किसीने चाहा कि दुनिया को रौशन कर दे, उसने कर दिया। किसी ने चाहा कि वह हवा में उड़े, उसने सबको उड़ने का मार्ग बता दिया। साधनाएं चाहे बाहरी आविष्कारों की हो, या शरीर की ऊर्जा को प्रयुक्त करने की नियम सबकी प्राप्ति के लिए एक ही हैं। प्रबल कामना , अभ्यास और जिद्द । प्रो. राम मूर्ती इतने दुर्बल थे कि हाईस्कूल तक सभी उनका मजाक उड़ाते थे और यह व्यक्ति अपनी छाती पर हाथियों को पास करवाने लगा। किशोर कुमार ने कहीं संगीत की शिक्षा नहीं ली थी। एक व्यक्ति में नेचर था कि जैसे ही कुछ शरीर के नजदीक आता, वह सिहर जाता था।किशोरवस्था में ही उसके शरीर में बिजली बनने लगी।

जब मैं सनातन धर्म के इन नियमों का परिक्षण कर रहा था, मुझे जानकारियों के लिए बहुत परिश्रम करना पड़ता था। हर चीज स्वयं परीक्षित और अनुभव करनी पड़ती थी, पर आज जब मैं डिस्कवरी जैसे चैनलों को देखता हूँ; तो पाता हूँ कि प्रत्येक जीव ने अपनी-अपनी अलग-अलग क्षमताएं विकसित कर ली है। कुछ हवा से पानी में उतर गये और उसके अनुसार ढल गये। जिसको जहाँ जैसा खतरा हुआ, वैसा ही रूप रंग शरीर विकसित हो गया , जिसको जहाँ जैसे औजार कीई जरूरत हुई , वह उसके शरीर में ही विकसित हो गये। यहाँ तक कि जीन्स तक परिवर्तित हो गये, अंग परिवर्तित हो गये।
इन्हें अलग-अलग मत देखिये। इनमें इन नियमों की समानता देखिये, जिसने जैसी कामना की, जैसा अभ्यास  किया , वह वैसा ही हो गया। योग का एक आधार सूत्र है कि ध्यान योग में डूबकर जैसी कामना करोगे, वैसे ही हो जाओगे। तन्त्र भी यही कहता है और समस्त आध्यात्मिक जगत इसी सूत्र पर खड़ा है। जैसी भावना होगी, वैसे ही कर्म होंगे , वैसा ही अगला-पिछ्ला जन्म होगा।
एक बहुत बड़ी अज्ञानता है यह सोचना कि यह केवल आध्यात्म के सूत्र हैं। यह जीवन के प्रत्येक क्षेत्र की प्राप्ति के लिए सफलता के सूत्र हैं। यह प्रकृति परमात्मा की कामना से उत्पन्न हुई है और यह वचनबद्ध है (नियमबद्ध है) कि अपने अंदर की प्रत्येक इकाई की कामना की पूर्ती करे। इसके प्रत्येक क्षेत्र में व्याप्त ऊर्जा में घूर्णन बल अधिक है, इसलिए परिवर्तन की गति संघर्ष युक्त होने के कारण तुंरत फल अनुभूत नहीं होता, पर यदि भावनात्मक गहनता अधिक हो, तो यह शीघ्र ही अनुभूत होने लगता है

If you want to learn sadhana and want to take mantra diksha then please call us on 9410030994 or email us sumitgirdharwal@yahoo.com For more information visit http://www.baglamukhi.info

Upcoming Book Shatkarm Vidhan

All the articles on Mantra Tantra Sadhana

1. Baglamukhi Puja Vidhi in English (Ma Baglamukhi Pujan Vidhi)

2. Dus Mahavidya Tara Mantra Sadhana Evam Siddhi

3. Baglamukhi Pitambara secret mantras by Shri Yogeshwaranand Ji

4. Bagalamukhi Beej Mantra Sadhana Vidhi

5. Baglamukhi Pratyangira Kavach

6. Durga Shabar Mantra

7. Orignal Baglamukhi Chalisa from pitambara peeth datia

8. Baglamukhi kavach in Hindi and English

9. Baglamukhi Yantra Puja

10. Download Baglamukhi Chaturakshari Mantra and Puja Vidhi in Hindi Pdf

11. Dusmahavidya Dhuamavai (Dhoomavati) Mantra Sadhna Vidhi 

12. Mahashodha Nyasa from Baglamukhi Rahasyam Pitambara peeth datia

13. Mahamritunjaya Mantra Sadhana Vidhi in Hindi and Sanskrit

14. Very Rare and Powerful Mantra Tantra by Shri Yogeshwaranand Ji

15. Mahavidya Baglamukhi Sadhana aur Siddhi

16. Baglamukhi Bhakt Mandaar Mantra 

17. Baglamukhi Sahasranamam

18. Dusmahavidya Mahakali Sadhana

19. Shri Balasundari Triyakshari Mantra Sadhana

20. Sri Vidya Sadhana

21. Click Here to Download Sarabeswara Kavacham

22. Click Here to Download Sharabh Tantra Prayoga

23. Click Here to Download Swarnakarshan Bhairav Mantra Sadhana Vidhi By Gurudev Shri Yogeshwaranand Ji

34. Download Mahakali Mantra Tantra Sadhna Evam Siddhi in Hindi Pdf

35. Download Twenty Eight Divine Names of Lord Vishnu in Hindi Pdf

36. Download Shri Hanuman Vadvanal Stotra in Hindi Sanskrit and English Pdf

37. Download Shri Narasimha Gayatri Mantra Sadhna Evam Siddhi in Hindi Pdf

38. Download Santan Gopal Mantra Vidhi in Hindi and Sanskrit  Pdf

39. Download Shabar Mantra Sadhana Vidhi in Hindi Pdf

40. Download sarva karya siddhi hanuman mantra in hindi

41. Download Baglamukhi Hridaya Mantra in Hindi Pdf

42. Download Baglamukhi Mantra Avam Sadhna Vidhi in Hindi

43. Download Shiva Shadakshari Mantra Sadhna Evam Siddhi ( Upasana Vidhi)

44. Download Vipreet Pratyangira Mantra Sadhna Evam Siddhi & Puja Vidhi in Hindi Pdf

45. Download Aghorastra Mantra Sadhna Vidhi in Hindi & Sanskrit  Pdf

46. Download Shri Lalita Tripura Sundari khadgamala Stotram in Sanskrit & Hindi Pdf

47. Download Sarva Karya Siddhi Saundarya Lahri Prayoga in Hindi Pdf

48. Download Pashupatastra Mantra Sadhana Evam Siddhi  Pdf in Hindi & Sanskrit

49. Download Param Devi Sukt of Ma Tripursundari Mantra to attract Money & Wealth

50. Download Very Powerful Hanuman Mantra Sadhna and Maruti Kavach in Hindi Pdf

51. Download Baglamukhi Pitambara Ashtottar Shatnam Stotram

52. Download Magha Gupta Navaratri 2015 Puja Vidhi and Panchanga

53. Download Baglamukhi Chaturakshari Mantra and Puja Vidhi in Hindi Pdf

54. Chinnamasta Mantra Sadhana Evam Siddhi in Hindi

55. Download Baglamukhi Ashtakshar Mantra Sadhana in Hindi

56. Download Baglamukhi Bhakt Mandaar Mantra for Wealth & Money

57. Download Shiv Sadhana Vidhi on Shivratri 12 August 2015 Shiv Puja Vidhi in Hindi Pdf

58. Pushp Kinnari Sadhana Evam Mantra Siddhi in Hindi

59. Download Bhagwati Baglamukhi Sarva Jana Vashikaran Mantra in Hindi and English Pdf

सरल स्वभाव एवं अंतः करण की शुद्धता

इस कहानी को पढ़कर बहुत ही अच्छा लगा सोचा आप सब लोगों से भी शेयर करूँ।  इससे हमें यह शिक्षा मिलती है की प्रभु को प्राप्त करने के लिए कठोर साधना की नहीं बल्कि सरल स्वभाव एवं शुद्ध अंतः करण  की आवश्यक्ता है।

छोटे-से गांव में एक दरिद्र विधवा ब्राह्मणी रहती थी। छह वर्षीय बालक मोहन के अतिरिक्त उसका और कोई नहीं था।

वह दो-चार भले घरों से भिक्षा मांगकर अपना तथा बच्चे का पेट भर लेती और भगवान का भजन करती थी। भीख पूरी न मिलती तो बालक को खिलाकर स्वयं उपवास कर लेती। यह कम चलता रहा।  ब्राह्मणी को लगा कि ब्राह्मण के बालक को दो अक्षर न आए यह ठीक नहीं है। गांव में पढ़ाने  की व्यवस्था नहीं थी। गाँव से दो कोस पर एक पाठशाला थी। ब्राह्मणी अपने बेटे को लेकर वहा गई। उसकी दरिद्रता तथा रोने पर दया करके वहां के अध्यापक ने बच्चे को पढ़ाना स्वीकार कर लिया।

वहां पढने वाले छात्र गुरु के घर में रहते थे किंतु ब्राह्मणी का पुत्र मोहन अभी बहुत छोटा था और ब्राह्मणी को भी अपने पुत्र को देखे विना चैन नहीं पड़ता था अत: मोहन नित्य पढ़ने जाता और सायंकाल घर लौट आता। उसको विद्या प्राप्ति के लिए प्रतिदिन चार कोस चलना पड़ता। मार्ग में कुछ दूर जंगल था। शाम को लौटने में अंधेरा होने लगता था। उस जंगल में मोहन को डर लगता था।

एक दिन गुरुजी के यहा कोई उत्सव था। मोहन को अधिक देर हो गई और जब वह घर लौटने लगा रात्रि हो गई थी। अंधेरी रात जंगली जानवरों की आवाजों से बालक मोहन भय से थर-थर कांपने लगा। ब्राह्मणी भी देर होने के कारण बच्चे को ढूंढने निकली थी। किसी प्रकार अपने पुत्र को वह घर ले आई। मोहन ने सरलता से कहा : ”मां ! दूसरे लड़को को साथ ले जाने तो उनके नौकर आते हैं। मुझे जंगल में आज बहुत डर लगा। तू मेरे लिए भी एक नौकर रख दे।” बेचारी ब्राह्मणी रोने लगी। उसके पास इतना पैसा कहा कि नौकर रख सके।

माता को रोते देख मोहन ने कहा : ”मां ! तू रो मत ! क्या हमारा और कोई नहीं है ?” अब ब्राह्मणी क्या उत्तर दे ? उसका हृदय व्यथा से भर गया।उसने कहा : ”बेटा ! गोपाल को छोड़कर और कोई हमारा नहीं है।” बच्चे की समझ में इतनी ही बात आई कि कोई गोपाल उसका है।
उसने पूछा : ”गोपाल कौन ? वे क्या लगते हैं मेरे और कहा रहते हैं ?” ब्राह्मणी ने सरल भाव से कह दिया : ”वे तुम्हारे भाई लगते हैं। सभी जगह रहते हैं परंतु आसानी से नहीं दिखते। संसार में ऐसा कौन सा स्थान है जहां वे नहीं रहते। लेकिन उनको तो देखा था ध्रुव ने, प्रहलाद ने ओर गोकुल के गोपों ने।” बालक को तो अपने गोपाल भाई को जानना था। वह पूछने लगा : गोपाल मुझसे छोटे हैं या बड़े अपने घर आते हैं या नहीं?माता ने उसे बताया : ”तुमसे वे बड़े हैं और घर भी आते हैं पर हम लोग उन्हें देख नहीं सकते। जो उनको पाने के लिए व्याकुल होता है उसी के पुकारने पर वे उसके पास आते हैं।”

मोहन ने कहा : ”जंगल में आते समय मुझे बड़ा डर लगता है। मैं उस समय खूब व्याकुल हो जाता हूं। वहां पुकारू तो क्या गोपाल भाई आएंगे ?” माता ने कहा : ”तू विश्वास के साथ पुकारेगा तो अवश्य वे आएंगे।” मोहन की समझ में इतनी बात आई कि जंगल में अब डरने की जरूरत नहीं है। डर लगने पर मैं व्याकुल होकर पुकारूंगा तो मेरा गोपाल भाई वहा आ जाएगा। दूसरे दिन पाठशाला से लौटते समय जब वह वन में पहुचा उसे डर लगा। उसने पुकारा : ”गोपाल भाई ! तुम कहां हो ? मुझे यहा डर लगता है। मैं व्याकुल हो रहा हूं। गोपाल भाई !” जो दीनबंधु हैं दीनों के पुकारने पर वह कैसे नहीं बोलेंगे। मोहन को बड़ा ही मधुर स्वर सुनाई पड़ा : ”भैया ! तू डर मत। मैं यह आया।” यह स्वर सुनते ही मोहन का भय भाग गया।

थोड़ी दूर चलते ही उसने देखा कि एक बहुत ही सुंदर ग्वालबाल उसके पास आ गया। वह हाथ पकड़कर बातचीत करने लगा। साथ-साथ चलने लगा। उसके साथ खेलने लगा। वन की सीमा तक वह पहुंचाकर लौट गया। गोपाल भाई को पाकर मोहन का भय जाता रहा। घर आकर उसने जब माता को सब बातें बताईं तब वह ब्राह्मणी हाथ जोडकर गदगद हो अपने प्रभु को प्रणाम करने लगी।

उसने समझ लिया जो दयामयी द्रोपदी और गजेंद्र की पुकार पर दौड़ पड़े थे मेरे भोले बालक की पुकार पर भी वही आए थे। ऐसा ही नित्य होने लगा.. एक दिन उसके गुरुजी के पिता का श्राद्ध होने लगा। सभी विद्यार्थी कुछ न कुछ भेंट देंगे। गुरुजी सबसे कुछ लाने को कह रहे थे।

मोहन ने भी सरलता से पूछा : “गुरुजी ! मैं क्या ले आऊं ?” गुरु को ब्राह्मणी की अवस्था का पता था। उन्होंने कहा : ‘बेटा ! तुमको कुछ नहीं लाना होगा।’ लेकिन मोहन को यह बात कैसे अच्छी लगती। सब लड़के लाएंगे तो मैं क्यों न लाऊं उसके हठ को देखकर गुरुजी ने कह दिया : ”अच्छा तुम एक लोटा दूध ले आना।”  घर जाकर मोहन ने माता से गुरुजी के पिता के श्राद्ध की बात कही और यह भी कहा” मुझे एक लोटा दूध ले जाने की आज्ञा मिली है।” ब्राह्मणी के घर में था क्या जो वह दूध ला देती। मांगने पर भी उसे दूध कौन देता लेकिन मोहन ठहरा बालक। वह रोने लगा।  अंत में माता ने उसे समझाया : ”तू गोपाल भाई से दूध मांग लेना। वे अवश्य प्रबंध कर देंगे।”
.
दूसरे दिन मोहन ने जंगल में गोपाल भाई को जाते ही पुकारा और मिलने पर कहा : ”आज मेरे गुरुजी के पिता का श्राद्ध है। मुझे एक लोटा दूध ले जाना है। मां ने कहा है कि गोपाल भाई से मांग लेना। सौ मुझे तुम एक लोटा दूध लाकर दो।”  गोपाल ने कहा : ”मैं तो पहले से यह लौटा भर दूध लाया हूं । तुम इसे ले जाओ।” मोहन बड़ा प्रसन्न हुआ।  पाठशाला में गुरुजी दूसरे लड़कों के उपहार देखने और रखवाने में लगे थे। मोहन हंसता हुआ पहुंचा। कुछ देर तो वह प्रतीक्षा करता रहा कि उसके दूध को भी गुरुजी देखेंगे। पर जब किसी का ध्यान उसकी ओर न गया तब वह बोला : ‘गुरुजी ! मैं दूध लाया हूं।’ गुरु जी ढेरों चीजें सम्हालने में व्यस्त थे। मोहन ने जब उन्हें स्मरण दिलाया तब झुंझलाकर बोले : ”जरा-सा दूध लाकर यह लड़का कान खाए जाता है जैसे इसने हमें निहाल कर दिया। इसका दूध किसी बर्तन से डालकर हटाओ इसे यहां से।” मोहन अपने इस अपमान से खिन्न हो गया। उसका उत्साह चला गया। उसके नेत्रों से आंसू गिरने लगे। नौकर ने लोटा लेकर दूध कटोरे मे डाला तो कटोरा भर गया फिर गिलास में डाला तो वह भी भर गया। बाल्टी में टालने लगा तो वह भी भर गई। भगवान के हाथ से दिया वह लोटा भर दूध तो अक्षय था। नौकर घबराकर गुरुजी के पास गया। उसकी बात सुनकर गुरुजी तथा और सब लोग वहां आए अपने सामने एक बड़े पात्र में दूध डालने को उन्होंने कहा। पात्र भर गया पर लोटा तनिक भी खाली नहीं हुआ। इस प्रकार बड़े-बड़े बर्तन दूध से भर गए।
.
अब गुरुजी ने पूछा : ”बेटा ! तू दूध कहां से लाया हें ?” सरलता से बालक ने कहा : ”मेरे गोपाल भाईआ ने दिया।” गुरुजी और चकित हुए। उन्होंने पूछा : ”गोपाल भाई कौन ? तुम्हारे तो कोई भाई नहीं।” मोहन ने दृढ़ता से कहा : ”है क्यों नहीं। गौपाल भाई मेरा बड़ा भाई है। वह मुझे रोज वन में मिल जाते है। मां कहती हैं कि वह सब जगह रहता है पर दिखता नहीं कोई उसे खूब व्याकुल होकर पुकारे तभी वह आ जाता है। उससे जो कुछ मांगा जाए वह तुरंत दे देता है।” अब गुरुजी को कुछ समझना नहीं था। मोहन को उन्होंने हृदय से लगा लिया। श्राद्ध में उस दूध से खीर बनी और ब्राह्मण उसके स्वाद का वर्णन करते हुए तृप्त नहीं होते थे । गोपाल भाई के दूध का स्वाद स्वर्ग के अमृत में भी नहीं तब संसार के किसी पदार्थ में कहां से होगा। उस दूध का बना श्राद्धान्त पाकर गुरुजी के पितर तृप्त ही नहीं हुए, माया से मुक्त भी हो गए।

श्राद्ध समाप्त हुआ। संध्या को सब लोग चले गए। मोहन को गुरुजी ने रोक लिया था। अब उन्होंने कहा : ”बेटा ! मैं तेरे साथ चलता हूं। तू मुझे अपने गोपाल भाई के दर्शन करा देगा न ?” मोहन ने कहा : ”चलिए मेरा गोपाल भाई तो पुकारते ही आ जाता है।” वन में पहुंच कर उसने पुकारा। उत्तर में उसे सुनाई पड़ा : ”आज तुम अकेले तो हो नहीं तुम्हें डर तो लगता नहीं, फिर मुझे क्यों बुलाते हो ?”  मोहन ने कहा : ”मेरे गुरुजी तुम्हें देखना चाहते हैं तुम जल्दी आओ !” जब मोहन ने गोपाल भाई को देखा तो गुरुजी से कहा : ”आपने देखा मेरा गोपाल भाई कितना सुदर है ?”  गुरुजी कहने लगे : “मुझे तो दिखता ही नहीं। मैं तो यह प्रकाशमात्र देख रहा हूं।”  अब मोहन ने कहा : “गोपाल भाई ! तुम मेरे गुरुजी को दिखाई क्यों नहीं पड़ते ?”

उत्तर मिला : ”तुम्हारी बात दूसरी है। तुम्हारा अत: करण शुद्ध है तुम्हारा स्वभाव सरल है, अत: मैं तुम्हारे पास आता हूं।तुम्हारे गुरुदेव को जो प्रकाश दिख गया उनके लिए वही बहुत है। उनका इतने से ही कल्याण हो जाएगा।”  उस अमृत भरे स्वर को सुनकर गुरुदेव का हृदय गदगद हो गया। उनको अपने हृदय में भगवान के दर्शन हुए। भगवान की उन्होंने स्तुति की। कुछ देर में जब भगवान अंतर्धान हो गए, तब मोहन को साथ लेकर वे उसके घर आए और वहां पहुंचकर उनके नेत्र भी धन्य हो गए।

गोपाल भाई उस ब्राह्मणी की गोद में बैठे थे और माता के नेत्रों की अश्रुधार उनकी काली धराली अलकों को भिगो रही थी। माता को शरीर की सुध-बुध ही नहीं थी।


Read the rest of this entry