Category Archives: Shiva Mantra Sadhna

श्रावण शिवरात्रि पूजा विधि How to do Pooja on Shivratri 1 August 2016

श्रावण शिवरात्रि पूजा विधि How to do Pooja on Shivratri  1 August 2016

सबसे पहले आप सभी को श्रावण मॉस शिवरात्रि की बहुत बहुत शुभकामनाएं। हमारी महाकाल से यही प्रार्थना है कि आप सभी सपरिवार सदैव प्रसन्न रहें और और आपके सभी कष्ट इस पवित्र शिवरात्रि पर दूर हो जाएँ।

अधिक जानकारी के लिए हमें संपर्क करें –

9410030994 (Sumit Girdharwal Ji) or 9917325788 (Shri Yogeshwaranand Ji)

lord shiva

आज के समय व्यस्तता के कारण किसी के पास अधिक समय नहीं है और न ही बहुत ही अधिक विधि विधान से पूजा करने का तरीका पता है। ऐसे लोगो के लिए ही हम यहाँ भगवान् शिव की पूजा की सरल विधि प्रस्तुत कर रहें हैं –

१- कल शिवलिंग पर एक लोटा जल चढ़ाएँ। जो थोड़ा अधिक कर सकतें हैं वो लोटे में सबसे पहले थोड़ा गंगा जल, उसके बाद साधारण जल , थोड़ा शहद , थोड़ा कच्चा दूध मिला लें और फिर ॐ नमः शिवाय बोलते हुए शिवलिंग पर चढ़ा दें। साथ में यदि हो सके तो कुछ बेल पत्र भी चढ़ाएँ। जो लोग और अधिक करना चाहते है वो १०८ लोटों से शिवलिंग को स्नान कराएं।

२ – जो लोग मंदिर नहीं जा सकते है वो लोग घर पर ही भगवान् शिव के सामने दीपक जलाएं यथा संभव ॐ नमः शिवाय का जप करें।

३ – सभी को यथा संभव पुरे दिन ॐ नमः शिवाय का मानसिक रूप से जप करना चाहिए।

४ – कल जिनके पास समय है उन्हें रुद्राभिषेक करना चाहिए। जो स्वयं नहीं कर सकते उन्हें किसी वेद पाठी ब्राह्मण से रुद्राभिषेक कराना चाहिए।

५- जो लोग स्वयं रुद्राभिषेक करना चाहते हैं उनके लिए नीचे यूटयूब वीडियो दी गयी है। जो लोग पाठ नहीं कर सकते वो इसको सुनकर लाभ ले सकते है। पढ़ने के लिए पीडीऍफ़ भी दी गयी है हिंदी इंग्लिश एवं संस्कृत में।

 

Rudrashtadhyayi HindiBook Pdf

Complete PDF of 16 Verses in praise of Rudra from Rudrashtadhyayi

हमारे द्वारा लिखे हुए कुछ अन्य लेख जो शिव साधना के लिए बहुत अधिक उपयोगी हैं नीचे दिए गए हैं –

Shiva Shadakshari Mantra Sadhna Evam Siddhi

Pashupatastra Mantra Sadhana Evam Siddhi

Aghorastra Mantra Sadhna Vidhi

Shiv Sadhana Vidhi on Shivratri

जानिए शिवपुराण के अनुसार धन लाभ यश प्राप्ति के उपाय

जो लोग कल रुद्राभिषेक करना चाहते हैं लेकिन किसी कारण आप उसमे स्वयं उपस्थित नहीं हो सकते तो हम आपके नाम से यह पाठ करा सकते हैं। इसके लिए आप हमें नीचे लिखी जानकारी भेजें –  (Those who want to get Rudrabhishek done on their behalf send us below details)
१. आपका नाम  ( Your Name )
२. आपके माता पिता का नाम  (Your Parent’s Name)
३. आपके परिवार के अन्य सदस्यों का नाम  (Name of other family members who want to get benefit)
४. आपका गोत्र  (Your gotra. If you don’t know it is ok not to send)
५. आपका एक फोटोग्राफ (Your latest photograph)

६. आपका पता जहां पूजा का प्रसाद आपको भेजा जायेगा। (Your address where we will send pooja prasaad)

पूजा के दौरान एक पारद शिवलिंग एवं एक रुद्राक्ष को प्राण प्रतिष्टित किया जायेगा जो आपके पते पर आपको भेज दिया जायेगा। इस पारद शिवलिंग को घर के पूजा घर में स्थापित करना है और रुद्राक्ष को अपने गले में अथवा पूजा घर में ही रखा जा सकता है। ( We will send one parad shivling and one rudraksha at your given address as a prasaad after this pooja )

इस संपूर्ण पूजा का  शुल्क Rs 3100 है जिसे आप नीचे लिखे अकाउंट में जमा करा सकते हैं।  (Deposit Rs 3100/= in below account)

Sumit Girdharwal
Axis Bank
912020029471298
IFSC Code – UTIB0001094

OR
Rupali Singh
34362973431
State Bank of India
IFSC Code – SBIN0003058

अधिक जानकारी के लिए हमें संपर्क करें –

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जानिए शिवपुराण के अनुसार धन लाभ यश प्राप्ति के उपाय

इस सृष्टि का निर्माण भगवान शिव की इच्छा मात्र से ही हुआ है। अत: इनकी भक्ति करने वाले व्यक्ति को संसार की सभी वस्तुएं प्राप्त हो सकती हैं। शिवजी अपने भक्तों की समस्त मनोकामनाएं पूरी कर देते हैं। शिवपुराण के अनुसार, नियमित रूप से शिवलिंग का पूजन करने वाले व्यक्ति के जीवन में दुखों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है।

शिवपुराण एक ऐसा शास्त्र है, जिसमें शिवजी और सृष्टि के निर्माण से जुड़ी रहस्यमयी बातें बताई गई हैं। इस पुराण में कई चमत्कारी उपाय भी बताए गए हैं, जो हमारे जीवन की धन संबंधी समस्याएं को तो खत्म करते हैं। साथ ही, अक्षय पुण्य भी प्रदान करते हैं।

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 इन उपायों से पिछले पापों का नाश होता है और भविष्य सुखद बनता है।

यदि आप भी शिवजी की कृपा से धन संबंधी समस्याओं से छुटकारा पाना चाहते हैं तो यहां बताया गया आसान और उपाय रोज रात को करना चाहिए, यह उपाय शिव पुराण में बताया गया है…

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Shiv Sadhana Vidhi on Shivratri 12 August 2015 Shiv Puja Vidhi in Hindi Pdf

Shiv Sadhana Vidhi on Shivratri 12 August 2015 Shiv Puja Vidhi in Hindi PDF

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Lord Shiva & Shakti ( Ardhanarishwar form)

शिव की महिमा अनंत है। उनके रूप, रंग और गुण अनन्य हैं। समस्त सृष्टि शिवमयी है। सृष्टि से पूर्व शिव हैं और सृष्टि के विनाश के बाद केवल शिव ही शेष रहते हैं। ऐसा माना जाता है कि ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की, परंतु जब सृष्टि का विस्तार संभव न हुआ तब ब्रह्मा ने शिव का ध्यान किया और घोर तपस्या की। शिव अर्द्धनारीश्वर रूप में प्रकट हुए। उन्होंने अपने शरीर के अर्द्धभागसे शिवा (शक्ति या देवी) को अलग कर दिया। इस प्रकार सृष्टि की रचना के लिए शिव दो भागों में विभक्त हो गए, क्योंकि दो के बिना सृष्टि की रचना असंभव है। शिव पांच तरह के कार्य करते हैं जो ज्ञानमय हैं। सृष्टि की रचना करना, सृष्टि का भरण-पोषण करना, सृष्टि का विनाश करना, सृष्टि में परिवर्तनशीलतारखना और सृष्टि से मुक्ति प्रदान करना। सृष्टि के आरंभ और विनाश के समय रुद्र ही शेष रहते हैं। कहा जाता है कि सृष्टि के आदि में महाशिवरात्रि को मध्य रात्रि में शिव का ब्रह्म से रुद्र रूप में अवतरण हुआ, इसी दिन प्रलय के समय प्रदोष स्थिति में शिव ने ताण्डव नृत्य करते हुए संपूर्ण ब्रह्माण्ड को अपने तीसरे नेत्र की ज्वाला से नष्ट कर दिया। इसीलिए महाशिवरात्रि अथवा काल रात्रि को पर्व के रूप में मनाने की प्रथा का प्रचलन है।
शिव को सहस्त्रमुखी यानी हजार मुंह वाला भी कहा गया है, लेकिन प्रमुखतया शिव पंचमुखी हैं। इन्हीं पांचों मुखों के जरिए शिव संसार को चलाते हैं। शिव की प्रिय संख्या है पांच। शिव मध्यमार्गी हैं। यानी न देवों के, न असुरों के। वह बीच के हैं, जो चाहे, वह प्राप्त कर ले। शून्यका विस्फोट हुआ, तो उससे नौ संख्याएं निकली-एक से नौ तक। पांच सबसे बीच की संख्या है। शिव पंचतत्व के देव हैं। इंद्रियां भी पांच होती हैं और शिव इंद्रियों के भी स्वामी हैं। शिव का प्रिय मंत्र है-नमः शिवाय। इसमें भी पांच ही अक्षर हैं, इसीलिए इसे ‘पंचाक्षर मंत्र’ कहा जाता है। यदि इसमें ॐ भी जोड़ दिया जाये तो यह षडाक्षरी मंत्र ॐ नमः शिवाय बन जाता है जो और भी अधिक प्रभावशाली है।
12 अगस्त 2015 को श्रावणी शिवरात्री है। इस दिन भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र नमः शिवाय अथवा ॐ नमः शिवाय का रूद्राक्ष की माला पर अथवा मानसिक रूप से जप करना चाहिए। जितना अधिक आप का जप होगा उतनी अधिक आपके ऊपर भगवान शिव की कृपा होगी।

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Mahashivratri Puja on 17th Feb 2015

Maha Shivratri Puja Vidhi in Hindi

lord shiva   शास्त्र कहते हैं कि संसार में अनेकानेक प्रकार के व्रत, विविध तीर्थस्नान नाना प्रकारेण दान अनेक प्रकार के यज्ञ तरह-तरह के तप      तथा जप आदि भी महाशिवरात्रि व्रत की समानता नहीं कर सकते। अतः अपने हित साधनार्थ सभी को इस व्रत का अवश्य पालन          करना चाहिए।  महाशिवरात्रि व्रत परम मंगलमय और दिव्यतापूर्ण है। इससे सदा सर्वदा भोग और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह शिव     रात्रि व्रत व्रतराज के नाम से विख्यात है एवं चारों पुरूषार्थो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाला है। हो सके तो इस व्रत को जीवन     पर्यंत करें नही तो चैदह वर्ष के बाद पूर्ण विधि विधान के साथ उद्यापन कर दें।

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Pashupatastra Mantra Sadhana Evam Siddhi in Hindi & Sanskrit पाशुपतास्त्र मंत्र साधना एवं सिद्धि

Pashupatastra Mantra Sadhana Evam Siddhi in Hindi & Sanskrit  ( पाशुपतास्त्र मंत्र साधना एवं सिद्धि )

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Lord Shiva & Shakti ( Ardhanarishwar form)

शिव का एक भीषण शूलास्त्र जिसे अर्जुन ने तपस्या करके प्राप्त किया था।  महाभारतका युद्ध हुआ, उसमें भगवान्‌ शंकरका दिया हुआ पाशुपतास्त्र अर्जुनके पास था, भगवान्‌ शंकरने कह दिया कि तुम्हें चलाना नहीं पड़ेगा । यह तुम्हारे पास पड़ा-पड़ा विजय कर देगा, चलानेकी जरूरत नहीं, चला दोगे तो संसारमें प्रलय हो जायगा । इसलिये चलाना नहीं ।

इस पाशुपत स्तोत्र का मात्र एक बार जप करने पर ही मनुष्य समस्त विघ्नों का नाश कर सकता है । सौ बार जप करने पर समस्त उत्पातो को नष्ट कर सकता है तथा युद्ध आदि में विजय प्राप्त कर सकता है । इस मंत्र का घी और गुग्गल से हवं करने से मनुष्य असाध्य कार्यो को पूर्ण कर सकता है । इस पाशुपातास्त्र मंत्र के पाठ मात्र से समस्त क्लेशो की शांति हो जाती है ।

यह अत्यन्त प्रभावशाली व शीघ्र फलदायी प्रयोग है। यदि मनुष्य इस स्तोत्र का पाठ गुरू के निर्देशानुसार संपादित करे तो  अवश्य फायदा मिलेगा। शनिदेव शिव भक्त भी हैं और शिव के शिष्य भी हैं। शनि के गुरु शिव होने के कारण इस अमोघ प्रयोग का प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है। यदि किसी साधारण व्यक्ति के भी गुरु की कोई आवभगत करें तो वह कितना प्रसन्न होता है। फिर शनिदेव अपने गुरु की उपासना से क्यों नहीं प्रसन्न होंगे। इस स्तोत्र के पाठ से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और शिव की प्रसन्नता से शनिदेव खुश होकर संबंधित व्यक्ति को अनुकूल फल प्रदान करते हैं। साथ ही एक विशेषता यह भी परिलक्षित होती है कि संबंधित व्यक्ति में ऐसी क्षमता आ जाती है कि वह शनिदेव के द्वारा प्राप्त दण्ड भी बड़ी सरलता से स्वीकार कर लेता है। साथ ही वह अपने जीवन में ऐसा कोई अशुभ कर्म भी नहीं करता जिससे उस पर शनिदेव भविष्य में भी नाराज हों।

यह किसी भी कार्य के लिए अमोघ राम बाण है। अन्य सारी बाधाओं को दूर करने के साथ ही युवक-युवतियों के लिए यह अकाटय प्रयोग माना ही नहीं जाता अपितु इसका अनेक अनुभूत प्रयोग किया जा चुका है। जिस वर या कन्या के विवाह में विलंब होता है, यदि इस पाशुपत-स्तोत्र का प्रयोग करें तो निश्चित रूप से शीघ्र ही उन्हें दाम्पत्य सुख का लाभ मिलता है। केवल इतना ही नहीं, अन्य सांसारिक कष्टों को दूर करने के लिए भी पाठ या जप, हवन, तर्पण, मार्जन आदि करने से अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है।

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Aghorastra Mantra Sadhna Vidhi in Hindi & Sanskrit Pdf

Aghorastra Mantra Sadhna Vidhi in Hindi & Sanskrit Pdf

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अघोरास्त्र मंत्र के स्मरण मात्र से मनुष्यों के सारे उपद्रव नष्ट हो जाते हैं। भगवन शिव का यह मंत्र बहुत ही शक्तिशाली है।

जहाँ असमय में गर्भपात हो या जहाँ बालक जन्म लेते ही मर जाता हो तथा जिस घर में विकृत अंग वाले शिशु उत्पन्न होते हों तथा जहाँ समय पूर्ण हाने से पूर्व ही बालक का जन्म होता हो, वहाँ इन सब दोषों के शमन के लिए दस हजार आहुतियां देनी चाहिये। सिद्धि साधन में तिल मिश्रित घी से एक लाख हवन किया जाय तो वह उत्तम है, मध्यम सिद्धि के साधन में अर्धलक्ष और अधम सिद्धि के लिए पचीस हजार आहुति देनी चाहिये। जैसा जप हो , उसके अनुसार ही होम होना चाहिये। इससे संग्राम में विजय प्राप्त होती हैा न्यासपूर्वक तेजस्वी पंचमुख का ध्यान करके ‘अघोरास्त्र’ का जप करना चाहिये।

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Aghorastra Mantra Sadhna Vidhi in Hindi & Sanskrit Pdf Part 1

Aghorastra Mantra Sadhna Vidhi in Hindi & Sanskrit Pdf Part 2

Aghorastra Mantra Sadhna Vidhi in Hindi & Sanskrit Pdf Part 3 Panchamukha-Shiva

Aghorastra Mantra Sadhna Vidhi in Hindi & Sanskrit Pdf Part 4 Panchamukha-Shiva Tatpursha Aghor Vamadeva

Aghorastra Mantra Sadhna Vidhi in Hindi & Sanskrit Pdf Part 5 mantra of five faced shiva

Aghorastra Mantra Sadhna Vidhi in Hindi & Sanskrit Pdf Part 6 Viniyoga Shadang Nyasa Dhyana Mantra

Aghorastra Mantra Sadhna Vidhi in Hindi & Sanskrit Pdf Part 7 Neelkanth Aghorastra Stotram Dhyana in Hindi

Aghorastra Mantra Sadhna Vidhi in Hindi & Sanskrit Pdf Part 8 Neelkanth Aghorastra Stotram

Aghorastra Mantra Sadhna Vidhi in Hindi & Sanskrit Pdf Part 9 Neelkanth Aghorastra Stotram

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Shiva Shadakshari Mantra Sadhna Evam Siddhi शिव षडाक्षरी मंत्र साधना एवं सिद्धि

Shiva Shadakshari Mantra Sadhna Evam Upasana Vidhi

शिव षडाक्षरी मंत्र साधना एवं सिद्धि

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सम्पुर्ण जगत में भगवान शिव के समान कोई नही हैा उनकी उपासना से बढ़कर कोई उपसाना नही है एवं उनके मंत्रो से बढ़कर कोई मंत्र नही हैा
मनुष्य योनि प्राप्त करना तभी सफल है जब यह भगवान शिव की सेवा एवं भक्ति में समर्पित हो जाये । भगवान शिव को प्रसन्न करना ही मनुष्य का एकमात्र लक्ष्य होना चाहिए । जिस व्यक्ति ने इस जन्म में भगवान शिव को प्रसन्न कर लिया, उसके लिए करने को कुछ शेष नही रह जाता ।
वैसे तो भगवान शिव को प्रसन्न करने की कोई विधि नही है क्योंकि वो अपने भक्तों पर कब और कैसे प्रसन्न हो जायें ये कोई नही जानता फिर भी गुरूओं के मुख से जो कुछ भी प्राप्त हुआ उसके अनुसार व्यक्ति को साधना करनी चाहिए ।
भगवान शिव का षडाक्षरी मंत्र सर्वश्रेष्ठ एवं सर्वशक्तिशाली मंत्र हैा इस मंत्र के जप से आध्यात्मिक विकास होता है एवं अन्त में मोक्ष प्राप्ति होती हैा इस संसार के सभी ऐश्वर्य एवं भोग शिव साधक के आगे नतमस्तक रहते हैा कोई दुख अथवा कष्ट भगवान शिव के साधक को नही छू सकता । शिव योगी सदैव निरोगी रहता है एवं 100 वर्ष की आयु पूर्ण कर मोक्ष प्राप्त करता हैा

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Shiva Shadakshari Mantra Sadhna Evam Siddhi in Hindi Part 1

Shiva Shadakshari Mantra Sadhna Evam Siddhi in Hindi Part 2

Shiva Shadakshari Mantra Sadhna Evam Siddhi in Hindi Part 3

Shiva Shadakshari Mantra Sadhna Evam Siddhi in Hindi Part 4

Shiva Shadakshari Mantra Sadhna Evam Siddhi in Hindi Part 5

Shiva Shadakshari Mantra Sadhna Evam Siddhi in Hindi Part 6

साधको के लिए कुछ अनमोल बातें

भक्ति, श्रद्धा , विश्वास एवं धैर्य साधना मार्ग के चार स्तम्भ हैं। हमारी साधना का प्रतिफल इन्ही चार स्तम्भों पर निर्भर करता है। जो लोग ये कहते हैं की उन्हें मंत्रो से कोई लाभ नहीं मिला तो उन्हें समझ लेना चाहिए कि उनमे स्वयं ही कोई कमी है। आजकल ऐसा देखने में आता है कि लोग एक – दो अनुष्ठान करने के बाद ही अपना धैर्य खो देते हैं और अपने गुरु, मंत्र एवं इष्ट पर अविश्वास करने लगते हैं। एक साधक को इस तरह धैर्य नहीं खोना चाहिए। ऐसा कोई भी व्यक्ति इस संसार में नहीं है जिसे कोई कष्ट या दुःख नहीं है। स्वयं भगवान् राम एवं कृष्ण के जीवन से हमे ये सीख लेनी चहिये जिन्होंने अपने जीवन में अनेको कष्टों का सामना किया। जो लोग अविश्वास करके अथवा लाभ न मिलने के कारण गुरु, मंत्र एवं देवता को बदल देते हैं वो नरकगामी होते हैं एवं अन्य देवता भी उन्हें शरण नहीं देते। कितना भी कष्ट क्यों न आ जाये हमे अपने गुरु, मंत्र एवं देवता को नहीं त्यागना चहिये। प्राचीन काल में जितने भी साधक एवं ऋषि हुए हैं उन्होंने एक ही देवता की तब तक उपासना की है जब तक वो देवता स्वयं उनके सामने वरदान देने के लिए नहीं आ गये। रावण ने हजारों वर्ष तपस्या की एवं भगवान् को स्वयं आकर वरदान देने के लिए विवश कर दिया। हमें उन लोगो से सीख लेनी चाहिए। किसी भी मंत्र एवं देवता में उतनी ही शक्ति होती है जितना आपका उन पर विश्वास होता है।

साधना को आरम्भ करने से पूर्व एक साधक को चाहिए कि वह मां भगवती  की उपासना अथवा अन्य किसी भी देवी या देवता की उपासना निष्काम भाव से करे। उपासना का तात्पर्य सेवा से होता है। उपासना के तीन भेद कहे गये हैं:- कायिक अर्थात् शरीर से , वाचिक अर्थात् वाणी से और मानसिक- अर्थात् मन से।  जब हम कायिक का अनुशरण करते हैं तो उसमें पाद्य, अर्घ्य, स्नान, धूप, दीप, नैवेद्य आदि पंचोपचार पूजन अपने देवी देवता का किया जाता है। जब हम वाचिक का प्रयोग करते हैं तो अपने देवी देवता से सम्बन्धित स्तोत्र पाठ आदि किया जाता है अर्थात् अपने मुंह से उसकी कीर्ति का बखान करते हैं। और जब मानसिक क्रिया का अनुसरण करते हैं तो सम्बन्धित देवता का ध्यान और जप आदि किया जाता है।
जो साधक अपने इष्ट देवता का निष्काम भाव से अर्चन करता है और लगातार उसके मंत्र का जप करता हुआ उसी का चिन्तन करता रहता है, तो उसके जितने भी सांसारिक कार्य हैं उन सबका भार मां स्वयं ही उठाती हैं और अन्ततः मोक्ष भी प्रदान करती हैं। यदि आप उनसे पुत्रवत् प्रेम करते हैं तो वे मां के रूप में वात्सल्यमयी होकर आपकी प्रत्येक कामना को उसी प्रकार पूर्ण करती हैं जिस प्रकार एक गाय अपने बछड़े के मोह में कुछ भी करने को तत्पर हो जाती है। अतः सभी साधकों को मेरा निर्देष भी है और उनको परामर्ष भी कि वे साधना चाहे जो भी करें, निष्काम भाव से करें। निष्काम भाव वाले साधक को कभी भी महाभय नहीं सताता। ऐसे साधक के समस्त सांसारिक और पारलौकिक समस्त कार्य स्वयं ही सिद्ध होने लगते हैं उसकी कोई भी किसी भी प्रकार की अभिलाषा अपूर्ण नहीं रहती ।
मेरे पास ऐसे बहुत से लोगों के फोन और मेल आते हैं जो एक क्षण में ही अपने दुखों, कष्टों का त्राण करने के लिए साधना सम्पन्न करना चाहते हैं। उनका उद्देष्य देवता या देवी की उपासना नहीं, उनकी प्रसन्नता नहीं बल्कि उनका एक मात्र उद्देष्य अपनी समस्या से विमुक्त होना होता है। वे लोग नहीं जानते कि जो कष्ट वे उठा रहे हैं, वे अपने पूर्व जन्मों में किये गये पापों के फलस्वरूप उठा रहे हैं। वे लोग अपनी कुण्डली में स्थित ग्रहों को देाष देते हैं, जो कि बिल्कुल गलत परम्परा है। भगवान शिव ने सभी ग्रहों को यह अधिकार दिया है कि वे जातक को इस जीवन में ऐसा निखार दें कि उसके साथ पूर्वजन्मों का कोई भी दोष न रह जाए। इसका लाभ यह होगा कि यदि जातक के साथ कर्मबन्धन शेष नहीं है तो उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाएगी। लेकिन हम इस दण्ड को दण्ड न मानकर ग्रहों का दोष मानते हैं।व्यहार में यह भी आया है कि जो जितनी अधिक साधना, पूजा-पाठ या उपासना करता है, वह व्यक्ति ज्यादा परेशान रहता है। उसका कारण यह है कि जब हम कोई भी उपासना या साधना करना आरम्भ करते हैं तो सम्बन्धित देवी – देवता यह चाहता है कि हम मंत्र जप के द्वारा या अन्य किसी भी मार्ग से बिल्कुल ऐसे साफ-सुुथरे हो जाएं कि हमारे साथ कर्मबन्धन का कोई भी भाग शेष न रह जाए।

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