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Gupt Navratri 2018 Ma Kamakhya Sadhana Vidhi माघ गुप्त नवरात्री 2018 माँ कामाख्या साधना विधि

Magh Gupt Navratri 2018 Ma Kamakhya Sadhana Vidhi ( माघ गुप्त नवरात्री 2018 माँ कामाख्या साधना विधि )

18 जनवरी से माघ गुप्त नवरात्री प्रारम्भ हो रही है। गुप्त नवरात्री में पूजा सामान्य नवरात्री के सामान ही होती है। लेकिन इस समय का उपयोग आप विशिष्ट साधनाओं को संपन्न करने में एवं अपने जीवन को उच्च कोटि पर ले जाने के लिए कर सकते हैं। भारत सदैव से ही अपनी आध्यात्मकि शक्तियों के कारण विश्व गुरु रहा है लेकिन आज की पीढ़ी विरासत में मिले इस ज्ञान का मोल नहीं समझ रही है और शायद यही कारण है की आज सभी सुख सुविधाएँ होने के पश्चात भी मनुष्य सुखी नहीं है। वास्तविक सुख ध्यान,योग एवं ईश्वरोपासना से ही प्राप्त किया जा सकता है ये जितना जल्दी हम समझेंगे उतना ही हमारे हित में होगा।

आगामी नवरात्रों के लिए एक विशिष्ट साधना यहाँ प्रस्तुत कर रहे हैं। गुरु आज्ञा लेकर इसका अभ्यास करें –

18 जनवरी 2018 (गुरुवार)– प्रतिपदा, घट स्थापना, शैलपुत्री पूजा
19 जनवरी 2018 (शुक्रवार)– द्वितीया, ब्रह्मचारिणी पूजा
20 जनवरी 2018 (शनिवार)– तृतीया, चंद्रघंटा पूजा
21 जनवरी 2018 (रविवार)– चतुर्थी, कुष्मांडा पूजा
22 जनवरी 2018 (सोमवार)– पंचमी, स्कंदमाता पूजा
23 जनवरी 2018 (मंगलवार)– षष्टी, कात्यायनी पूजा
24 जनवरी 2018 (बुधवार)– सप्तमी, कालरात्रि पूजा
25 जनवरी 2018 (गुरुवार)– महागौरी पूजा, दुर्गा महा अष्टमी पूजा, सरस्वती पूजा
26 जनवरी 2018 (शुक्रवार)– राम नवमी नवरात्रि पारना

If you need any guidance please call us on 9540674788 (Sumit Girdharwal Ji) or 9410030994 (Shri Yogeshwaranand Ji). Email us at shaktisadhna@yahoo.com

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Yantra Sadhana Book By Sri Yogeshwaranand & Sumit Girdharwal

Yantra Sadhana Book by Sri Yogeshwaranand Ji & Sumit Girdharwal (Collection of 131 Divine & Rare Yantras)

माँ पीताम्बरा की कृपा से यन्त्र साधना पुस्तक का प्रकाशन सम्भव हुआ। आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि ये आपके जीवन में उपयोगी सिद्ध होगी।

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Baglamukhi Shodashopachara Pujan बगलामुखी षोडशोपचार पूजन

Baglamukhi Shodashopachara Pujan बगलामुखी षोडशोपचार पूजन

शास्त्रों में देवी-देवताओं को प्रसन्न करने हेतु उपासना-विधियों में सर्वोत्तम उपासना-विधि उनके षोडशोपचार पूजन को माना गया है। षोडशोपचार पूजन का अर्थ होता है – सोलह उपचारों से पूजन करना। सोलह उपचार निम्नवत् कहे गए हैं।
(1) आवाहन (2) आसन (3) पाद्य (4) अर्घ्य (5) स्नान (6) वस्त्र
(7) यज्ञोपवीत (8) गन्ध (9) पुष्प तथा पुष्पमाला (10) दीपक (11) अक्षत (चावल) (12) पान-सुपारी-लौंग (13) नैवेद्य (14) दक्षिणा (15) आरती (16) प्रदक्षिणा तथा पुष्पाञ्जलि।
इन उपचारों के अतिरिक्त पांच उपचार, दश उपचार, बारह उपचार, अट्ठारह उपचार आदि भी होते हैं। लेकिन यहां 16 उपचारों की पूजन- सामग्री एवं उनका विधान अंकित किया जा रहा है। सामग्री को पूजा से पहले अपने पास रख लेना चाहिए। यहां सामग्री में हवन की सामग्री भी लिखी गयी है। यदि केवल पूजन ही करना हो तो वांछित सामग्री का चयन साधक अपनी सुविधा तथा उपलब्धता के अनुसार करके एकत्र कर लें।

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2017 Shardiya Navratri Puja Vidhi andDates  शारदीय नवरात्री  पूजा विधि  

2017 Shardiya Navratri Puja Vidhi & Dates  शारदीय नवरात्री  पूजा विधि

maa durga nava roop nine forms of shakti

शारदीय नवरात्रि शुरू हो रहे हैं और आने वाले नौ दिनों तक मां दुर्गा की 9 शक्ति की पूजा- आराधना की जाएगी। इस समय का उपयोग साधक विशिष्ट साधनाओं को सम्पन्न करने में किया करते हैं। यह समय सभी साधको के लिए बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इस काल में की गयी उपासना का विशेष फल प्राप्त होता है। जो लोग अभी तक किसी कारण से कोई अनुष्ठान अथवा पुरश्चरण नहीं कर सके हैं उन्हें कल से वह अवश्य शरू कर देना चाहिए। यह जरुरी नहीं है कि नवरात्र में केवल माँ दुर्गा की ही उपासना की जाती है बल्कि इस समय आप किसी भी इष्ट देवता के मंत्रो का अनुष्ठान कर सकते हैं। नवरात्र के पहले दिन अपने गुरु देव से मंत्र दीक्षा लेकर, उसका अनुष्ठान करना चाहिए। कुछ साधको के मन में एक प्रश्न रहता है कि क्या नवरात्र में शरू किया गया अनुष्ठान नवरात्र में ही पूर्ण करना जरुरी है , नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं है। ये अनुष्ठान आप २१ अथवा ४० दिन में भी पूर्ण कर सकते हैं लेकिन यदि हो सके तो अंतिम नवरात्र तक पूर्ण कर लेना चाहिए। यदि किसी कारण से अनुष्ठान करना सम्भव नहीं है तो नवरात्र में जितना अधिक जप हो सके उतना ही अच्छा है।

नवरात्र में अपने इष्ट देव के सहस्रनाम से अर्चन करना चाहिए। सहस्त्रनाम में देवी/देवता के एक हजार नाम होते हैं। इसमें उनके गुण व कार्य के अनुसार नाम दिए गए हैं। सर्व कल्याण व कामना पूर्ति हेतु इन नामों से अर्चन करने का प्रयोग अत्यधिक प्रभावशाली है। जिसे सहस्त्रार्चन के नाम से जाना जाता है।  सहस्र नामावली के एक-एक नाम का उच्चारण करके देवी की प्रतिमा पर, उनके चित्र पर, उनके यंत्र पर या देवी का आह्वान किसी सुपारी पर करके प्रत्येक नाम के उच्चारण के पश्चात नमः बोलकर देवी की प्रिय वस्तु चढ़ाना चाहिए। जिस वस्तु से अर्चन करना हो वह शुद्ध, पवित्र, दोष रहित व एक हजार से अधिक संख्या में होनी चाहिए।अर्चन में बिल्वपत्र, हल्दी, केसर या कुंकुम से रंग चावल, इलायची, लौंग, काजू, पिस्ता, बादाम, गुलाब के फूल की पंखुड़ी, मोगरे का फूल, चारौली, किसमिस, सिक्का आदि का प्रयोग शुभ व देवी को प्रिय है। यदि अर्चन एक से अधिक व्यक्ति एक साथ करें तो नाम का उच्चारण एक व्यक्ति को तथा अन्य व्यक्तियों को नमः का उच्चारण अवश्य करना चाहिए।सहस्त्रनाम के पाठ करने का फल भी महत्वपूर्ण है। अर्चन की सामग्री प्रत्येक नाम के पश्चात, प्रत्येक व्यक्ति को अर्पित करनी चाहिए। अर्चन के पूर्व पुष्प, धूप, दीपक व नैवेद्य देवी/देवता को अर्पित करना चाहिए। दीपक पूरी अर्चन प्रक्रिया तक प्रज्वलित रहना चाहिए।

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2017  Shardiya Navratri Dates

21 September 2017 ( Thursday ) Pratipada Ghatasthapana Shailputri Puja
22 September 2017 ( Friday ) Dwitiya Brahmacharini Puja
23 September 2017 ( Saturday )  Tritiya Chandraghanta Puja
24 September 2017 ( Sunday ) Chaturthi Kushmanda Puja
25 September 2017 ( Monday ) Panchami Skandamata Puja
26 September 2017 ( Tuesday) Shashthi Katyayani Puja
27 September 2017 ( Wednesday) Saptami Kalaratri Puja
28 September 2017(Thursday ) Ashtami Durga Ashtami Mahagauri Puja Sandhi Puja
29 September 2017 (Friday )Navami Siddhidatri Puja
30 September 2017 (Saturday )  Dashami Navratri Parana

21  सितम्बर 2017 ( गुरुवार) घट स्थापना, शैलपुत्री पूजा
22 सितम्बर 2017 ( शुक्रवार) द्वितीया ब्रह्मचारिणी पूजा
23 सितम्बर 2017 ( शनिवार )  तृतीया चंद्रघंटा पूजा
24 सितम्बर 2017 ( रविवार ) चतुर्थी कुष्मांडा पूजा
25 सितम्बर 2017 ( सोमवार ) पंचमी स्कंदमाता पूजा
26 सितम्बर 2017 ( मंगलवार) षष्ठी कात्यायनी पूजा
27 सितम्बर 2017 ( बुधवार ) सप्तमी कालरात्रि पूजा
28 सितम्बर 2017 (गुरुवार) अष्टमी महागौरी पूजा, दुर्गा महा अष्टमी पूजा,
29 सितम्बर 2017  (शुक्रवार) नवमी  सिद्धिदात्री पूजा
30 सितम्बर 2017 (शनिवार )  दशमी नवरात्री परायण

यह है घट स्थापना का समय

इस बार घटस्‍थापना और पूजा के लिए दो मुहूर्त है एक सुबह का और दूसरा दोपहर का ।  इस दिन कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 06:18 बजे से 8:10 बजे तक एवं  11:49 से दोपहर 12: 37 बजे तक है।
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Devi Baglamukhi Hridaya Stotra in Hindi & Sanskrit (बगलामुखी हृदय स्तोत्र)

Baglamukhi Hridaya Stotram बगलामुखी हृदय स्तोत्र

This Hymn  (Baglamukhi Hridaya Stotram) is considered to be heart of the Mother. Hymn’s follower attains whatever he see in this world.

For Baglamukhi Mantra Diksha & Sadhana guidance email to shaktisadhna@yahoo.com or call us on 9540674788. Visit http://www.baglamukhi.info and http://www.yogeshwaranand.org for more information.

किसी भी देवी या देवता से सम्बन्धित हृदय-स्तोत्र देवता का हृदय ही होता है। यह स्तोत्र भगवती बगलामुखी से सम्बन्धित है। उनके हृदय में बस जाना या फिर उन्हें अपने हृदय में बसा लेना ये दोनों ही विकल्प इस पाठ का उद्देश्य हैं। उनके हृदय में निवास कर पाना तो एक स्वप्न मात्र ही है, क्योंकि इसके लिए तो परम शक्तिमान भी लालायित रहते हैं। हां, हमारी भक्ति के प्रसाद-स्वरूप यह फल अवश्य मिल सकता है कि ये विश्वाश्रय हमारे हृदय में बस जाएं और वास्तव में जीवन का यही तो लक्ष्य है; तभी तो हमारा उद्धार सम्भव है।
‘हृदय-स्तोत्र’ के द्वारा भगवती बगला की कृपा प्राप्त करने हेतु एक विशिष्ट प्रयोग है। आश्विन मास की महा-अष्टमी के दिन पीताचारी, पीताहारी होकर किसी प्राचीन शिवालय अथवा शक्तिपीठ में इस हृदय-स्तोत्र का अनुष्ठान संकल्प लेकर करें। इस प्रकार इस स्तोत्र का पाठ करने से मां पीताम्बरा की कृपा प्राप्त होती है और साधक के शत्रु पराभव को प्राप्त होते हैं। (यह अनुभूत प्रयोग है।) बगला-हृदय-स्तोत्र वास्तव में साधक के लिए ‘वांछाकल्पद्रुम’ के समान है। यूं तो इस पाठ के विषय में कुछ भी कहना सूर्य को दीपक दिखाने के समान ही होगा, तो भी सामान्यतः कुछ विशिष्टताओं को स्पष्ट करना यहां उचित प्रतीत होता है।

यथा
1. यदि मात्र बगला-हृदय-स्तोत्र का ही पाठ कर लिया जाए तो फिर साधक को जप आदि अथवा अनुष्ठान की कोई आवश्यकता नहीं रहती।
2. इस पाठ के स्मरण-मात्र से ही साधक के सभी अभीष्ट पूर्ण हो जाते हैं।
3. इस स्तोत्र का पाठ करने वाले के लिए इस पृथ्वी पर कुछ भी अप्राप्य नहीं रह जाता है।
4. इस स्तोत्र का तीनों समय पाठ करने के प्रभाव से गूंगा बोलने लगता है, पंगु चलने लगता है, दीन सर्वशक्तिमान हो जाता है; घोर दरिद्र व्यक्ति धनवान हो जाता है; चारों ओर से निन्दित व्यक्ति भी ख्याति प्राप्त कर लेता है; और मूर्खतम व्यक्ति की वाणी में ओज एवं कवित्व की शक्ति आ जाती है।
5. इस स्तोत्र के पाठ में ध्यान आदि आवश्यक नहीं है। जप, होम, तर्पण आदि की भी कोई आवश्यकता नहीं है।
6. इस स्तोत्र-पाठ के पाठी का उल्लंघन करने मात्र से स्वयं ब्रह्मा भी सकुशल नहीं रह सकते। यह स्तोत्र परम संतोष-प्रदायक एवं सिद्धियां प्रदान करने वाला है, क्योंकि यह साक्षात् मां बगला का हृदय है।

भगवती बगला के इस हृदय स्तोत्र से प्राप्त होने वाले अनेक परिणामों के विषय में मेरा सुखद अनुभव रहा है। इसलिए मैं ऐसे पाठकों/साधकों को भी इस स्तोत्र का अनुष्ठान करने का परामर्श दूंगा।

जो सब तरफ से निराश हो चुके हैं और जिनको कोई भी रास्ता स्पष्ट नहीं होता। उनसे मैं निवेदन करूंगा कि संकल्प लेकर कम से कम ग्यारह सौ स्तोत्रों का अनुष्ठान अवश्य करें।

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