Shardiya Navratri 2016 Puja Vidhi शारदीय नवरात्रि

Shardiya Navratri 2016 Puja Vidhi शारदीय नवरात्रि

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यह है घट स्थापना का समय

शारदीय नवरात्रि का पहला दिन इस बार 01 अक्टूबर 2016 को पड़ रहा है। इस दिन कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 07:46 बजे से 09:14 बजे तक है।

यह है कलश स्थापना के लिए सामान

शारदीय नवरात्रि के लिए मिट्टी का पात्र और जौ, शुद्ध, साफ मिट्टी, शुद्ध जल से भरा हुआ सोना, चांदी, तांबा, पीतल या मिट्टी का कलश, मोली (कलवा), साबुत सुपारी, कलश में रखने के लिए सिक्के, फूल और माला, अशोक या आम के 5 पत्ते, कलश को ढकने के लिए मिट्टी का ढक्कन, साबुत चावल, एक पानी वाला नारियल, लाल कपड़ा या चुनरी की आवस्यकता होती है।

ऐसे करें कलश स्थापना

  • नवरात्रि में कलश स्थापना करने के दौरान सबसे पहले पूजा स्थल को शुद्ध कर लें।
  • लकड़ी की चौकी रखकर उसपर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं।
  • कपड़े पर थोड़े-थोड़े चावल रखें।
  • चावल रखते हुए सबसे पहले गणेश जी का स्मरण करें।
  • एक मिट्टी के पात्र में जौ बोयें।
  • इस पात्र पर जल से भरा हुआ कलश स्थापित करें।
  • कलश पर रोली से स्वस्तिक या ‘ऊँ’ बनायें।
  • कलश के मुख पर कलवा बांधकर इसमें सुपारी, सिक्का डालकर आम या अशोक के पत्ते रखें।
  • कलश के मुख को चावल से भरी कटोरी से ढक दें।
  • एक नारियल पर चुनरी लपेटकर इसे कलवे से बांधें और चावल की कटोरी पर रख दें।
  • सभी देवताओं का आवाहन करें और धूप दीप जलाकर कलश की पूजा करें।
  • भोग लगाकर मां की पूजा करें।

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Mantra Siddhi Rahasya मंत्र सिद्धि रहस्य

Mantra Siddhi Rahasya मंत्र सिद्धि रहस्य

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Pitra Paksha 2016 पितृ पक्ष ( Pitra Gayatri Mantra in Sanskrit )

Pitra Paksha 2016 पितृ पक्ष ( Pitra Gayatri Mantra in Sanskrit )

पितृ पक्ष में पितृ गायत्री मंत्र की कम से कम 11 माला का जप प्रतिदिन सूर्योदय के समय करना चाहिए।  साथ में यदि हो सके तो विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी प्रतिदिन करना चाहिए।  जिन लोगो की कुंडली में पितृ दोष है उन्हें पितृ गायत्री का अनुष्ठान करना अथवा कराना चाहिए।  अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे : +91-9410030994 और ईमेल करे sumitgirdharwal@yahoo.com

Pitra Paksha Date – 16 September 2016 – 1 October 2016

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Pitra Dosha Nivaran Pitra Gayatri mantra

 

पित्र दोष निवारण के उपाय

  • पितृ गायत्री का अनुष्ठान करना अथवा कराना चाहिए।
  • पीपल के वृक्ष पर दोपहर में जल, पुष्प, अक्षत, दूध, गंगाजल, काले तिल चढ़ाएं और स्वर्गीय परिजनों का स्मरण कर उनसे आशीर्वाद मांगें।
  • यदि आपके पूर्वजों ने आपके पितरो के लिए कोई स्थान बनाया है तो होली एवं दीपावली पर उस स्थान पर जाकर पूजा करनी चाहिए।

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Ganesh Chaturthi ( गणेश चतुर्थी ) 5th September 2016

आप सभी को गणेश चतुर्थी की बहुत-बहुत शुभकामनाएं । हमारी गणपति जी  से यही प्रार्थना है कि आप सभी सपरिवार सदैव प्रसन्न रहें और और आपके सभी कष्ट  दूर हो जाएँ।

 

ganesh chaturthi

आज से 10 दिवसीय गणपित उत्सव की शुरुआत हो रही है। गणेश चतुर्थी के मौके पर भगवान गणपति की प्रतिमा को घर लाकर हम पूजा की शुरुआत करते हैं। आज के दिन भगवान गणेश की प्रतिमा को घर लाना सबसे पवित्र समझा जाता है। जब आप बप्‍पा की मूर्ति को घर लाएं, उससे पहले इन चीजों को तैयार रखें। अगरबत्‍ती और धूप, आरती थाली, सुपारी, पान के पत्‍ते और मूर्ति पर डालने के लिए कपड़ा, चंदन के लिए अलग से कपड़ा और चंदन।
गणपति मूर्ति की पूजा करने के लिए सबसे पहले एक आरती की थाली में अगरबत्‍ती-धूप को जलाएं। इसके बाद पान के पत्‍ते और सुपारी को भी इसमें रखें। इस दौरान मंत्र ‘ ऊं गं गणपतये नम:’ का जाप करें। यदि कोई पुजारी इसे अंजाम दे रहे हों तो दक्षिणा भी अर्पित करें। जो श्रद्धालु गणेश जी की मूर्ति को चतुर्थी से पहले अपने घर ला रहे हैं, उन्‍हें मूर्ति को एक कपड़े से ढककर लाना चाहिए और पूजा के दिन मूर्ति स्‍थापना के समय ही इसे हटाना चाहिए। घर में मूर्ति के प्रवेश से पहले इस पर अक्षत जरूर डालना चाहिए। स्‍थापना के समय भी अक्षत को आसन के निकट डालना चाहिए। साथ ही, वहां सुपारी, हल्‍दी, कुमकुम और दक्षिणा भी वहां रखना चाहिए।
पूजा के लिए जरूरी सामग्री – गणपति की मूर्ति को घर में स्‍थापित करने के समय सभी विधि विधान के अलावा जिन सामग्री की जरूरत होती है, वो इस प्रकार हैं। जैसे लाल फूल, दूर्वा, मोदक, नारियल, लाल चंदन, धूप और अगरबत्‍ती।

आज के दिन लाल रंग के वस्त्र पहनना अति शुभ होता है। गणपति का पूजन शुद्ध आसन पर बैठकर अपना मुख पूर्व अथवा उत्तर दिशा की तरफ करके करें।

पंचामृत से श्री गणेश को स्नान कराएं तत्पश्चात केसरिया चंदन, अक्षत, दूर्वा अर्पित कर कपूर जलाकर उनकी पूजा और आरती करें। उनको मोदक के लड्डू अर्पित करें। उन्हें रक्तवर्ण के पुष्प विशेष प्रिय हैं। श्री गणेश जी का श्री स्वरूप ईशाण कोण में स्थापित करें और उनका श्री मुख पश्चिम की ओर रहे।

संध्या के समय गणेश चतुर्थी की कथा, गणेश पुराण, गणेश चालीसा, गणेश स्तुति, श्रीगणेश सहस्रनामावली, गणेश जी की आरती, संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करें। अंत में गणेश मंत्र ‘ ऊं गणेशाय नम:’ अथवा ‘ऊं गं गणपतये नम: का अपनी श्रद्धा के अनुसार जाप करें।

आज के दिन किया जाने वाला विशेष काम – भगवान गणेश अपने भक्तों के समस्त विघ्नों को दूर करने के लिए विघ्नों के मार्ग में विकट स्वरूप धारण करके खड़े हो जाते हैं। अपने घर, दुकान, फैक्टरी आदि के मुख्य द्वार के ऊपर तथा ठीक उसकी पीठ पर अंदर की ओर गणेश जी का स्वरूप अथवा चि‍‍त्रपट जरूर लगाएं। ऐसा करने से गणेश जी कभी भी आपके घर, दुकान अथवा फैक्टरी की दहलीज पार नहीं करेंगे तथा सदैव सुख-समृद्धि बनी रहेगी। कोई भी नकारात्मक शक्ति घर में प्रवेश नहीं कर पाएगी।

अपने दोनों हाथ जोड़कर स्थापना स्थल के समीप बैठकर किसी धर्म ग्रंथ का पाठ रोजाना करेंगे तो शुभ फल मिलेगा। सच्‍चे मन और शुद्ध भाव से गणपति की पूजा करने से बुद्धि, स्‍वास्‍थ्‍य और संपत्ति मिलती है।

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Listen Ganpati Sahasranamavali

जो लोग माँ बगलामुखी साधक हैं वो लोग हरिद्रा गणपति की दीक्षा लेकर हरिद्रा गणपति का अनुष्ठान प्रारंभ कर सकते हैं।

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Shatkarma Vidhaan New Book षट्कर्म विधान

Shatkarma Vidhaan षट्कर्म विधान

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Ganapati Prayoga  ( गणपति प्रयोग )
Hanumat Prayoga ( हनुमत प्रयोग )
Baglamukhi Prayoga ( बगलामुखी प्रयोग )
Dhanada Yakshini Prayoga ( धनदा यक्षिणी प्रयोग )
Pratyangira Prayoga ( प्रत्यंगिरा प्रयोग )
Aghori Prayoga ( अघोरी प्रयोग )
Saundarya Lehri Ke Tantrik Prayoga  (  सौर्न्दर्य लहरी के तांत्रिक प्रयोग )
Durga Tantra Prayoga ( दुर्गा तंत्र प्रयोग )
Pitambara Panchastra Prayoga
Dhumavati Tantra Prayoga
Kaalratri Prayoga
Bhairav Prayoga
Navarna Mantra Prayoga
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Shatkarma Vidhaan षट्कर्म विधान

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आप सभी को कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें krishna janmashtami 2016

आप सभी को कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें।  वेदान्त के परम ब्रह्म ही साकार रूप में भगवान श्रीकृष्ण हैं| उनका जन्म निरंतर हमारे ह्रदय में हो, हम निरंतर उनके चैतन्य में रहें, उनकी ज्योति हमारी ज्योति हो, और उनके व हमारे मध्य कोई भेद ना हो|

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“न तत्र सूर्यो भाति न चन्द्र तारकं,
नेमा विद्युतो भान्ति कुतोSयमग्निः,
तमेव भान्तमनुभाति सर्वं,
तस्य भासा सर्वमिदं विभाति |”

श्री कृष्णजन्माष्टमी भगवान श्री कृष्ण का जनमोत्स्व है। योगेश्वर कृष्ण के भगवद गीता के उपदेश अनादि काल से जनमानस के लिए जीवन दर्शन प्रस्तुत करते रहे हैं। जन्माष्टमी भारत में हीं नहीं बल्कि विदेशों में बसे भारतीय भी इसे पूरी आस्था व उल्लास से मनाते हैं। श्रीकृष्ण ने अपना अवतार भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि को अत्याचारी कंस का विनाश करने के लिए मथुरा में लिया। चूंकि भगवान स्वयं इस दिन पृथ्वी पर अवतरित हुए थे अत: इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं।

श्रीकृष्ण-जन्माष्टमी की रात्रि को मोहरात्रि कहा गया है। इस रात में योगेश्वर श्रीकृष्ण का ध्यान, नाम अथवा मंत्र जपते हुए जगने से संसार की मोह-माया से आसक्तिहटती है। जन्माष्टमी का व्रत व्रतराज है। इसके सविधि पालन से आज आप अनेक व्रतों से प्राप्त होने वाली महान पुण्यराशिप्राप्त कर लेंगे।

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प्रबल कामना और अभ्यास ही सफलता और चमत्कार की कुंजी है।

प्रबल कामना और अभ्यास ही सफलता और चमत्कार की कुंजी है।
बहुत से लोग संदेह में ही अपनी सफलता को नष्ट कर लेते हैं। जरा सी कठिनाई हुई नहीं कि असमंजस में पड़ जाते हैं। प्रकृति से भी कुछ नहीं सीखते। यहाँ एक व्यवस्था कायम है। आप जैसी कामना करेंगे और उस पर अभ्यास करेंगे, वह सब कुछ आपको प्राप्त होगा। प्रकृति के शब्दकोश में असंभव शब्द नहीं है।
आध्यात्मिक रूप से कहा जाए, तो इस प्रकृति के प्रत्येक इकाई में परमात्मा का ही अंश विद्यमान है। भले ही वह स्थानीय धाराओं और अपने ऊर्जा चक्रों में बंधा हुआ है, पर वह परमात्मा है। वह लगातार गहन कामना करता रहे और अपने शरीर को कामना के अनुसार अभ्यासित करता रहे ; तो वह अपनी कामना के अनुरूप ही अतिरिक्त शक्तियों को प्राप्त कर सकता है। सर्कस में , रेस में, पर्वतारोहण में सर्वत्र इसे फलित होते देखनेवाला मनुष्य यह नहीं देखता कि किसीने चाहा कि दुनिया को रौशन कर दे, उसने कर दिया। किसी ने चाहा कि वह हवा में उड़े, उसने सबको उड़ने का मार्ग बता दिया। साधनाएं चाहे बाहरी आविष्कारों की हो, या शरीर की ऊर्जा को प्रयुक्त करने की नियम सबकी प्राप्ति के लिए एक ही हैं। प्रबल कामना , अभ्यास और जिद्द । प्रो. राम मूर्ती इतने दुर्बल थे कि हाईस्कूल तक सभी उनका मजाक उड़ाते थे और यह व्यक्ति अपनी छाती पर हाथियों को पास करवाने लगा। किशोर कुमार ने कहीं संगीत की शिक्षा नहीं ली थी। एक व्यक्ति में नेचर था कि जैसे ही कुछ शरीर के नजदीक आता, वह सिहर जाता था।किशोरवस्था में ही उसके शरीर में बिजली बनने लगी।

जब मैं सनातन धर्म के इन नियमों का परिक्षण कर रहा था, मुझे जानकारियों के लिए बहुत परिश्रम करना पड़ता था। हर चीज स्वयं परीक्षित और अनुभव करनी पड़ती थी, पर आज जब मैं डिस्कवरी जैसे चैनलों को देखता हूँ; तो पाता हूँ कि प्रत्येक जीव ने अपनी-अपनी अलग-अलग क्षमताएं विकसित कर ली है। कुछ हवा से पानी में उतर गये और उसके अनुसार ढल गये। जिसको जहाँ जैसा खतरा हुआ, वैसा ही रूप रंग शरीर विकसित हो गया , जिसको जहाँ जैसे औजार कीई जरूरत हुई , वह उसके शरीर में ही विकसित हो गये। यहाँ तक कि जीन्स तक परिवर्तित हो गये, अंग परिवर्तित हो गये।
इन्हें अलग-अलग मत देखिये। इनमें इन नियमों की समानता देखिये, जिसने जैसी कामना की, जैसा अभ्यास  किया , वह वैसा ही हो गया। योग का एक आधार सूत्र है कि ध्यान योग में डूबकर जैसी कामना करोगे, वैसे ही हो जाओगे। तन्त्र भी यही कहता है और समस्त आध्यात्मिक जगत इसी सूत्र पर खड़ा है। जैसी भावना होगी, वैसे ही कर्म होंगे , वैसा ही अगला-पिछ्ला जन्म होगा।
एक बहुत बड़ी अज्ञानता है यह सोचना कि यह केवल आध्यात्म के सूत्र हैं। यह जीवन के प्रत्येक क्षेत्र की प्राप्ति के लिए सफलता के सूत्र हैं। यह प्रकृति परमात्मा की कामना से उत्पन्न हुई है और यह वचनबद्ध है (नियमबद्ध है) कि अपने अंदर की प्रत्येक इकाई की कामना की पूर्ती करे। इसके प्रत्येक क्षेत्र में व्याप्त ऊर्जा में घूर्णन बल अधिक है, इसलिए परिवर्तन की गति संघर्ष युक्त होने के कारण तुंरत फल अनुभूत नहीं होता, पर यदि भावनात्मक गहनता अधिक हो, तो यह शीघ्र ही अनुभूत होने लगता है

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Upcoming Book Shatkarm Vidhan

All the articles on Mantra Tantra Sadhana

1. Baglamukhi Puja Vidhi in English (Ma Baglamukhi Pujan Vidhi)

2. Dus Mahavidya Tara Mantra Sadhana Evam Siddhi

3. Baglamukhi Pitambara secret mantras by Shri Yogeshwaranand Ji

4. Bagalamukhi Beej Mantra Sadhana Vidhi

5. Baglamukhi Pratyangira Kavach

6. Durga Shabar Mantra

7. Orignal Baglamukhi Chalisa from pitambara peeth datia

8. Baglamukhi kavach in Hindi and English

9. Baglamukhi Yantra Puja

10. Download Baglamukhi Chaturakshari Mantra and Puja Vidhi in Hindi Pdf

11. Dusmahavidya Dhuamavai (Dhoomavati) Mantra Sadhna Vidhi 

12. Mahashodha Nyasa from Baglamukhi Rahasyam Pitambara peeth datia

13. Mahamritunjaya Mantra Sadhana Vidhi in Hindi and Sanskrit

14. Very Rare and Powerful Mantra Tantra by Shri Yogeshwaranand Ji

15. Mahavidya Baglamukhi Sadhana aur Siddhi

16. Baglamukhi Bhakt Mandaar Mantra 

17. Baglamukhi Sahasranamam

18. Dusmahavidya Mahakali Sadhana

19. Shri Balasundari Triyakshari Mantra Sadhana

20. Sri Vidya Sadhana

21. Click Here to Download Sarabeswara Kavacham

22. Click Here to Download Sharabh Tantra Prayoga

23. Click Here to Download Swarnakarshan Bhairav Mantra Sadhana Vidhi By Gurudev Shri Yogeshwaranand Ji

34. Download Mahakali Mantra Tantra Sadhna Evam Siddhi in Hindi Pdf

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36. Download Shri Hanuman Vadvanal Stotra in Hindi Sanskrit and English Pdf

37. Download Shri Narasimha Gayatri Mantra Sadhna Evam Siddhi in Hindi Pdf

38. Download Santan Gopal Mantra Vidhi in Hindi and Sanskrit  Pdf

39. Download Shabar Mantra Sadhana Vidhi in Hindi Pdf

40. Download sarva karya siddhi hanuman mantra in hindi

41. Download Baglamukhi Hridaya Mantra in Hindi Pdf

42. Download Baglamukhi Mantra Avam Sadhna Vidhi in Hindi

43. Download Shiva Shadakshari Mantra Sadhna Evam Siddhi ( Upasana Vidhi)

44. Download Vipreet Pratyangira Mantra Sadhna Evam Siddhi & Puja Vidhi in Hindi Pdf

45. Download Aghorastra Mantra Sadhna Vidhi in Hindi & Sanskrit  Pdf

46. Download Shri Lalita Tripura Sundari khadgamala Stotram in Sanskrit & Hindi Pdf

47. Download Sarva Karya Siddhi Saundarya Lahri Prayoga in Hindi Pdf

48. Download Pashupatastra Mantra Sadhana Evam Siddhi  Pdf in Hindi & Sanskrit

49. Download Param Devi Sukt of Ma Tripursundari Mantra to attract Money & Wealth

50. Download Very Powerful Hanuman Mantra Sadhna and Maruti Kavach in Hindi Pdf

51. Download Baglamukhi Pitambara Ashtottar Shatnam Stotram

52. Download Magha Gupta Navaratri 2015 Puja Vidhi and Panchanga

53. Download Baglamukhi Chaturakshari Mantra and Puja Vidhi in Hindi Pdf

54. Chinnamasta Mantra Sadhana Evam Siddhi in Hindi

55. Download Baglamukhi Ashtakshar Mantra Sadhana in Hindi

56. Download Baglamukhi Bhakt Mandaar Mantra for Wealth & Money

57. Download Shiv Sadhana Vidhi on Shivratri 12 August 2015 Shiv Puja Vidhi in Hindi Pdf

58. Pushp Kinnari Sadhana Evam Mantra Siddhi in Hindi

59. Download Bhagwati Baglamukhi Sarva Jana Vashikaran Mantra in Hindi and English Pdf

श्रावण शिवरात्रि पूजा विधि How to do Pooja on Shivratri 1 August 2016

श्रावण शिवरात्रि पूजा विधि How to do Pooja on Shivratri  1 August 2016

सबसे पहले आप सभी को श्रावण मॉस शिवरात्रि की बहुत बहुत शुभकामनाएं। हमारी महाकाल से यही प्रार्थना है कि आप सभी सपरिवार सदैव प्रसन्न रहें और और आपके सभी कष्ट इस पवित्र शिवरात्रि पर दूर हो जाएँ।

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lord shiva

आज के समय व्यस्तता के कारण किसी के पास अधिक समय नहीं है और न ही बहुत ही अधिक विधि विधान से पूजा करने का तरीका पता है। ऐसे लोगो के लिए ही हम यहाँ भगवान् शिव की पूजा की सरल विधि प्रस्तुत कर रहें हैं –

१- कल शिवलिंग पर एक लोटा जल चढ़ाएँ। जो थोड़ा अधिक कर सकतें हैं वो लोटे में सबसे पहले थोड़ा गंगा जल, उसके बाद साधारण जल , थोड़ा शहद , थोड़ा कच्चा दूध मिला लें और फिर ॐ नमः शिवाय बोलते हुए शिवलिंग पर चढ़ा दें। साथ में यदि हो सके तो कुछ बेल पत्र भी चढ़ाएँ। जो लोग और अधिक करना चाहते है वो १०८ लोटों से शिवलिंग को स्नान कराएं।

२ – जो लोग मंदिर नहीं जा सकते है वो लोग घर पर ही भगवान् शिव के सामने दीपक जलाएं यथा संभव ॐ नमः शिवाय का जप करें।

३ – सभी को यथा संभव पुरे दिन ॐ नमः शिवाय का मानसिक रूप से जप करना चाहिए।

४ – कल जिनके पास समय है उन्हें रुद्राभिषेक करना चाहिए। जो स्वयं नहीं कर सकते उन्हें किसी वेद पाठी ब्राह्मण से रुद्राभिषेक कराना चाहिए।

५- जो लोग स्वयं रुद्राभिषेक करना चाहते हैं उनके लिए नीचे यूटयूब वीडियो दी गयी है। जो लोग पाठ नहीं कर सकते वो इसको सुनकर लाभ ले सकते है। पढ़ने के लिए पीडीऍफ़ भी दी गयी है हिंदी इंग्लिश एवं संस्कृत में।

 

Rudrashtadhyayi HindiBook Pdf

Complete PDF of 16 Verses in praise of Rudra from Rudrashtadhyayi

हमारे द्वारा लिखे हुए कुछ अन्य लेख जो शिव साधना के लिए बहुत अधिक उपयोगी हैं नीचे दिए गए हैं –

Shiva Shadakshari Mantra Sadhna Evam Siddhi

Pashupatastra Mantra Sadhana Evam Siddhi

Aghorastra Mantra Sadhna Vidhi

Shiv Sadhana Vidhi on Shivratri

जानिए शिवपुराण के अनुसार धन लाभ यश प्राप्ति के उपाय

जो लोग कल रुद्राभिषेक करना चाहते हैं लेकिन किसी कारण आप उसमे स्वयं उपस्थित नहीं हो सकते तो हम आपके नाम से यह पाठ करा सकते हैं। इसके लिए आप हमें नीचे लिखी जानकारी भेजें –  (Those who want to get Rudrabhishek done on their behalf send us below details)
१. आपका नाम  ( Your Name )
२. आपके माता पिता का नाम  (Your Parent’s Name)
३. आपके परिवार के अन्य सदस्यों का नाम  (Name of other family members who want to get benefit)
४. आपका गोत्र  (Your gotra. If you don’t know it is ok not to send)
५. आपका एक फोटोग्राफ (Your latest photograph)

६. आपका पता जहां पूजा का प्रसाद आपको भेजा जायेगा। (Your address where we will send pooja prasaad)

पूजा के दौरान एक पारद शिवलिंग एवं एक रुद्राक्ष को प्राण प्रतिष्टित किया जायेगा जो आपके पते पर आपको भेज दिया जायेगा। इस पारद शिवलिंग को घर के पूजा घर में स्थापित करना है और रुद्राक्ष को अपने गले में अथवा पूजा घर में ही रखा जा सकता है। ( We will send one parad shivling and one rudraksha at your given address as a prasaad after this pooja )

इस संपूर्ण पूजा का  शुल्क Rs 3100 है जिसे आप नीचे लिखे अकाउंट में जमा करा सकते हैं।  (Deposit Rs 3100/= in below account)

Sumit Girdharwal
Axis Bank
912020029471298
IFSC Code – UTIB0001094

OR
Rupali Singh
34362973431
State Bank of India
IFSC Code – SBIN0003058

अधिक जानकारी के लिए हमें संपर्क करें –

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सरल स्वभाव एवं अंतः करण की शुद्धता

इस कहानी को पढ़कर बहुत ही अच्छा लगा सोचा आप सब लोगों से भी शेयर करूँ।  इससे हमें यह शिक्षा मिलती है की प्रभु को प्राप्त करने के लिए कठोर साधना की नहीं बल्कि सरल स्वभाव एवं शुद्ध अंतः करण  की आवश्यक्ता है।

छोटे-से गांव में एक दरिद्र विधवा ब्राह्मणी रहती थी। छह वर्षीय बालक मोहन के अतिरिक्त उसका और कोई नहीं था।

वह दो-चार भले घरों से भिक्षा मांगकर अपना तथा बच्चे का पेट भर लेती और भगवान का भजन करती थी। भीख पूरी न मिलती तो बालक को खिलाकर स्वयं उपवास कर लेती। यह कम चलता रहा।  ब्राह्मणी को लगा कि ब्राह्मण के बालक को दो अक्षर न आए यह ठीक नहीं है। गांव में पढ़ाने  की व्यवस्था नहीं थी। गाँव से दो कोस पर एक पाठशाला थी। ब्राह्मणी अपने बेटे को लेकर वहा गई। उसकी दरिद्रता तथा रोने पर दया करके वहां के अध्यापक ने बच्चे को पढ़ाना स्वीकार कर लिया।

वहां पढने वाले छात्र गुरु के घर में रहते थे किंतु ब्राह्मणी का पुत्र मोहन अभी बहुत छोटा था और ब्राह्मणी को भी अपने पुत्र को देखे विना चैन नहीं पड़ता था अत: मोहन नित्य पढ़ने जाता और सायंकाल घर लौट आता। उसको विद्या प्राप्ति के लिए प्रतिदिन चार कोस चलना पड़ता। मार्ग में कुछ दूर जंगल था। शाम को लौटने में अंधेरा होने लगता था। उस जंगल में मोहन को डर लगता था।

एक दिन गुरुजी के यहा कोई उत्सव था। मोहन को अधिक देर हो गई और जब वह घर लौटने लगा रात्रि हो गई थी। अंधेरी रात जंगली जानवरों की आवाजों से बालक मोहन भय से थर-थर कांपने लगा। ब्राह्मणी भी देर होने के कारण बच्चे को ढूंढने निकली थी। किसी प्रकार अपने पुत्र को वह घर ले आई। मोहन ने सरलता से कहा : ”मां ! दूसरे लड़को को साथ ले जाने तो उनके नौकर आते हैं। मुझे जंगल में आज बहुत डर लगा। तू मेरे लिए भी एक नौकर रख दे।” बेचारी ब्राह्मणी रोने लगी। उसके पास इतना पैसा कहा कि नौकर रख सके।

माता को रोते देख मोहन ने कहा : ”मां ! तू रो मत ! क्या हमारा और कोई नहीं है ?” अब ब्राह्मणी क्या उत्तर दे ? उसका हृदय व्यथा से भर गया।उसने कहा : ”बेटा ! गोपाल को छोड़कर और कोई हमारा नहीं है।” बच्चे की समझ में इतनी ही बात आई कि कोई गोपाल उसका है।
उसने पूछा : ”गोपाल कौन ? वे क्या लगते हैं मेरे और कहा रहते हैं ?” ब्राह्मणी ने सरल भाव से कह दिया : ”वे तुम्हारे भाई लगते हैं। सभी जगह रहते हैं परंतु आसानी से नहीं दिखते। संसार में ऐसा कौन सा स्थान है जहां वे नहीं रहते। लेकिन उनको तो देखा था ध्रुव ने, प्रहलाद ने ओर गोकुल के गोपों ने।” बालक को तो अपने गोपाल भाई को जानना था। वह पूछने लगा : गोपाल मुझसे छोटे हैं या बड़े अपने घर आते हैं या नहीं?माता ने उसे बताया : ”तुमसे वे बड़े हैं और घर भी आते हैं पर हम लोग उन्हें देख नहीं सकते। जो उनको पाने के लिए व्याकुल होता है उसी के पुकारने पर वे उसके पास आते हैं।”

मोहन ने कहा : ”जंगल में आते समय मुझे बड़ा डर लगता है। मैं उस समय खूब व्याकुल हो जाता हूं। वहां पुकारू तो क्या गोपाल भाई आएंगे ?” माता ने कहा : ”तू विश्वास के साथ पुकारेगा तो अवश्य वे आएंगे।” मोहन की समझ में इतनी बात आई कि जंगल में अब डरने की जरूरत नहीं है। डर लगने पर मैं व्याकुल होकर पुकारूंगा तो मेरा गोपाल भाई वहा आ जाएगा। दूसरे दिन पाठशाला से लौटते समय जब वह वन में पहुचा उसे डर लगा। उसने पुकारा : ”गोपाल भाई ! तुम कहां हो ? मुझे यहा डर लगता है। मैं व्याकुल हो रहा हूं। गोपाल भाई !” जो दीनबंधु हैं दीनों के पुकारने पर वह कैसे नहीं बोलेंगे। मोहन को बड़ा ही मधुर स्वर सुनाई पड़ा : ”भैया ! तू डर मत। मैं यह आया।” यह स्वर सुनते ही मोहन का भय भाग गया।

थोड़ी दूर चलते ही उसने देखा कि एक बहुत ही सुंदर ग्वालबाल उसके पास आ गया। वह हाथ पकड़कर बातचीत करने लगा। साथ-साथ चलने लगा। उसके साथ खेलने लगा। वन की सीमा तक वह पहुंचाकर लौट गया। गोपाल भाई को पाकर मोहन का भय जाता रहा। घर आकर उसने जब माता को सब बातें बताईं तब वह ब्राह्मणी हाथ जोडकर गदगद हो अपने प्रभु को प्रणाम करने लगी।

उसने समझ लिया जो दयामयी द्रोपदी और गजेंद्र की पुकार पर दौड़ पड़े थे मेरे भोले बालक की पुकार पर भी वही आए थे। ऐसा ही नित्य होने लगा.. एक दिन उसके गुरुजी के पिता का श्राद्ध होने लगा। सभी विद्यार्थी कुछ न कुछ भेंट देंगे। गुरुजी सबसे कुछ लाने को कह रहे थे।

मोहन ने भी सरलता से पूछा : “गुरुजी ! मैं क्या ले आऊं ?” गुरु को ब्राह्मणी की अवस्था का पता था। उन्होंने कहा : ‘बेटा ! तुमको कुछ नहीं लाना होगा।’ लेकिन मोहन को यह बात कैसे अच्छी लगती। सब लड़के लाएंगे तो मैं क्यों न लाऊं उसके हठ को देखकर गुरुजी ने कह दिया : ”अच्छा तुम एक लोटा दूध ले आना।”  घर जाकर मोहन ने माता से गुरुजी के पिता के श्राद्ध की बात कही और यह भी कहा” मुझे एक लोटा दूध ले जाने की आज्ञा मिली है।” ब्राह्मणी के घर में था क्या जो वह दूध ला देती। मांगने पर भी उसे दूध कौन देता लेकिन मोहन ठहरा बालक। वह रोने लगा।  अंत में माता ने उसे समझाया : ”तू गोपाल भाई से दूध मांग लेना। वे अवश्य प्रबंध कर देंगे।”
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दूसरे दिन मोहन ने जंगल में गोपाल भाई को जाते ही पुकारा और मिलने पर कहा : ”आज मेरे गुरुजी के पिता का श्राद्ध है। मुझे एक लोटा दूध ले जाना है। मां ने कहा है कि गोपाल भाई से मांग लेना। सौ मुझे तुम एक लोटा दूध लाकर दो।”  गोपाल ने कहा : ”मैं तो पहले से यह लौटा भर दूध लाया हूं । तुम इसे ले जाओ।” मोहन बड़ा प्रसन्न हुआ।  पाठशाला में गुरुजी दूसरे लड़कों के उपहार देखने और रखवाने में लगे थे। मोहन हंसता हुआ पहुंचा। कुछ देर तो वह प्रतीक्षा करता रहा कि उसके दूध को भी गुरुजी देखेंगे। पर जब किसी का ध्यान उसकी ओर न गया तब वह बोला : ‘गुरुजी ! मैं दूध लाया हूं।’ गुरु जी ढेरों चीजें सम्हालने में व्यस्त थे। मोहन ने जब उन्हें स्मरण दिलाया तब झुंझलाकर बोले : ”जरा-सा दूध लाकर यह लड़का कान खाए जाता है जैसे इसने हमें निहाल कर दिया। इसका दूध किसी बर्तन से डालकर हटाओ इसे यहां से।” मोहन अपने इस अपमान से खिन्न हो गया। उसका उत्साह चला गया। उसके नेत्रों से आंसू गिरने लगे। नौकर ने लोटा लेकर दूध कटोरे मे डाला तो कटोरा भर गया फिर गिलास में डाला तो वह भी भर गया। बाल्टी में टालने लगा तो वह भी भर गई। भगवान के हाथ से दिया वह लोटा भर दूध तो अक्षय था। नौकर घबराकर गुरुजी के पास गया। उसकी बात सुनकर गुरुजी तथा और सब लोग वहां आए अपने सामने एक बड़े पात्र में दूध डालने को उन्होंने कहा। पात्र भर गया पर लोटा तनिक भी खाली नहीं हुआ। इस प्रकार बड़े-बड़े बर्तन दूध से भर गए।
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अब गुरुजी ने पूछा : ”बेटा ! तू दूध कहां से लाया हें ?” सरलता से बालक ने कहा : ”मेरे गोपाल भाईआ ने दिया।” गुरुजी और चकित हुए। उन्होंने पूछा : ”गोपाल भाई कौन ? तुम्हारे तो कोई भाई नहीं।” मोहन ने दृढ़ता से कहा : ”है क्यों नहीं। गौपाल भाई मेरा बड़ा भाई है। वह मुझे रोज वन में मिल जाते है। मां कहती हैं कि वह सब जगह रहता है पर दिखता नहीं कोई उसे खूब व्याकुल होकर पुकारे तभी वह आ जाता है। उससे जो कुछ मांगा जाए वह तुरंत दे देता है।” अब गुरुजी को कुछ समझना नहीं था। मोहन को उन्होंने हृदय से लगा लिया। श्राद्ध में उस दूध से खीर बनी और ब्राह्मण उसके स्वाद का वर्णन करते हुए तृप्त नहीं होते थे । गोपाल भाई के दूध का स्वाद स्वर्ग के अमृत में भी नहीं तब संसार के किसी पदार्थ में कहां से होगा। उस दूध का बना श्राद्धान्त पाकर गुरुजी के पितर तृप्त ही नहीं हुए, माया से मुक्त भी हो गए।

श्राद्ध समाप्त हुआ। संध्या को सब लोग चले गए। मोहन को गुरुजी ने रोक लिया था। अब उन्होंने कहा : ”बेटा ! मैं तेरे साथ चलता हूं। तू मुझे अपने गोपाल भाई के दर्शन करा देगा न ?” मोहन ने कहा : ”चलिए मेरा गोपाल भाई तो पुकारते ही आ जाता है।” वन में पहुंच कर उसने पुकारा। उत्तर में उसे सुनाई पड़ा : ”आज तुम अकेले तो हो नहीं तुम्हें डर तो लगता नहीं, फिर मुझे क्यों बुलाते हो ?”  मोहन ने कहा : ”मेरे गुरुजी तुम्हें देखना चाहते हैं तुम जल्दी आओ !” जब मोहन ने गोपाल भाई को देखा तो गुरुजी से कहा : ”आपने देखा मेरा गोपाल भाई कितना सुदर है ?”  गुरुजी कहने लगे : “मुझे तो दिखता ही नहीं। मैं तो यह प्रकाशमात्र देख रहा हूं।”  अब मोहन ने कहा : “गोपाल भाई ! तुम मेरे गुरुजी को दिखाई क्यों नहीं पड़ते ?”

उत्तर मिला : ”तुम्हारी बात दूसरी है। तुम्हारा अत: करण शुद्ध है तुम्हारा स्वभाव सरल है, अत: मैं तुम्हारे पास आता हूं।तुम्हारे गुरुदेव को जो प्रकाश दिख गया उनके लिए वही बहुत है। उनका इतने से ही कल्याण हो जाएगा।”  उस अमृत भरे स्वर को सुनकर गुरुदेव का हृदय गदगद हो गया। उनको अपने हृदय में भगवान के दर्शन हुए। भगवान की उन्होंने स्तुति की। कुछ देर में जब भगवान अंतर्धान हो गए, तब मोहन को साथ लेकर वे उसके घर आए और वहां पहुंचकर उनके नेत्र भी धन्य हो गए।

गोपाल भाई उस ब्राह्मणी की गोद में बैठे थे और माता के नेत्रों की अश्रुधार उनकी काली धराली अलकों को भिगो रही थी। माता को शरीर की सुध-बुध ही नहीं थी।


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