Advertisements

Blog Archives

2017 Shardiya Navratri Puja Vidhi andDates  शारदीय नवरात्री  पूजा विधि  

2017 Shardiya Navratri Puja Vidhi & Dates  शारदीय नवरात्री  पूजा विधि

maa durga nava roop nine forms of shakti

शारदीय नवरात्रि शुरू हो रहे हैं और आने वाले नौ दिनों तक मां दुर्गा की 9 शक्ति की पूजा- आराधना की जाएगी। इस समय का उपयोग साधक विशिष्ट साधनाओं को सम्पन्न करने में किया करते हैं। यह समय सभी साधको के लिए बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इस काल में की गयी उपासना का विशेष फल प्राप्त होता है। जो लोग अभी तक किसी कारण से कोई अनुष्ठान अथवा पुरश्चरण नहीं कर सके हैं उन्हें कल से वह अवश्य शरू कर देना चाहिए। यह जरुरी नहीं है कि नवरात्र में केवल माँ दुर्गा की ही उपासना की जाती है बल्कि इस समय आप किसी भी इष्ट देवता के मंत्रो का अनुष्ठान कर सकते हैं। नवरात्र के पहले दिन अपने गुरु देव से मंत्र दीक्षा लेकर, उसका अनुष्ठान करना चाहिए। कुछ साधको के मन में एक प्रश्न रहता है कि क्या नवरात्र में शरू किया गया अनुष्ठान नवरात्र में ही पूर्ण करना जरुरी है , नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं है। ये अनुष्ठान आप २१ अथवा ४० दिन में भी पूर्ण कर सकते हैं लेकिन यदि हो सके तो अंतिम नवरात्र तक पूर्ण कर लेना चाहिए। यदि किसी कारण से अनुष्ठान करना सम्भव नहीं है तो नवरात्र में जितना अधिक जप हो सके उतना ही अच्छा है।

नवरात्र में अपने इष्ट देव के सहस्रनाम से अर्चन करना चाहिए। सहस्त्रनाम में देवी/देवता के एक हजार नाम होते हैं। इसमें उनके गुण व कार्य के अनुसार नाम दिए गए हैं। सर्व कल्याण व कामना पूर्ति हेतु इन नामों से अर्चन करने का प्रयोग अत्यधिक प्रभावशाली है। जिसे सहस्त्रार्चन के नाम से जाना जाता है।  सहस्र नामावली के एक-एक नाम का उच्चारण करके देवी की प्रतिमा पर, उनके चित्र पर, उनके यंत्र पर या देवी का आह्वान किसी सुपारी पर करके प्रत्येक नाम के उच्चारण के पश्चात नमः बोलकर देवी की प्रिय वस्तु चढ़ाना चाहिए। जिस वस्तु से अर्चन करना हो वह शुद्ध, पवित्र, दोष रहित व एक हजार से अधिक संख्या में होनी चाहिए।अर्चन में बिल्वपत्र, हल्दी, केसर या कुंकुम से रंग चावल, इलायची, लौंग, काजू, पिस्ता, बादाम, गुलाब के फूल की पंखुड़ी, मोगरे का फूल, चारौली, किसमिस, सिक्का आदि का प्रयोग शुभ व देवी को प्रिय है। यदि अर्चन एक से अधिक व्यक्ति एक साथ करें तो नाम का उच्चारण एक व्यक्ति को तथा अन्य व्यक्तियों को नमः का उच्चारण अवश्य करना चाहिए।सहस्त्रनाम के पाठ करने का फल भी महत्वपूर्ण है। अर्चन की सामग्री प्रत्येक नाम के पश्चात, प्रत्येक व्यक्ति को अर्पित करनी चाहिए। अर्चन के पूर्व पुष्प, धूप, दीपक व नैवेद्य देवी/देवता को अर्पित करना चाहिए। दीपक पूरी अर्चन प्रक्रिया तक प्रज्वलित रहना चाहिए।

If you need any guidance please call us on 9917325788 (Sri Yogeshwarannad Ji ) & 9540674788 (Sumit Girdharwal)

2017  Shardiya Navratri Dates

21 September 2017 ( Thursday ) Pratipada Ghatasthapana Shailputri Puja
22 September 2017 ( Friday ) Dwitiya Brahmacharini Puja
23 September 2017 ( Saturday )  Tritiya Chandraghanta Puja
24 September 2017 ( Sunday ) Chaturthi Kushmanda Puja
25 September 2017 ( Monday ) Panchami Skandamata Puja
26 September 2017 ( Tuesday) Shashthi Katyayani Puja
27 September 2017 ( Wednesday) Saptami Kalaratri Puja
28 September 2017(Thursday ) Ashtami Durga Ashtami Mahagauri Puja Sandhi Puja
29 September 2017 (Friday )Navami Siddhidatri Puja
30 September 2017 (Saturday )  Dashami Navratri Parana

21  सितम्बर 2017 ( गुरुवार) घट स्थापना, शैलपुत्री पूजा
22 सितम्बर 2017 ( शुक्रवार) द्वितीया ब्रह्मचारिणी पूजा
23 सितम्बर 2017 ( शनिवार )  तृतीया चंद्रघंटा पूजा
24 सितम्बर 2017 ( रविवार ) चतुर्थी कुष्मांडा पूजा
25 सितम्बर 2017 ( सोमवार ) पंचमी स्कंदमाता पूजा
26 सितम्बर 2017 ( मंगलवार) षष्ठी कात्यायनी पूजा
27 सितम्बर 2017 ( बुधवार ) सप्तमी कालरात्रि पूजा
28 सितम्बर 2017 (गुरुवार) अष्टमी महागौरी पूजा, दुर्गा महा अष्टमी पूजा,
29 सितम्बर 2017  (शुक्रवार) नवमी  सिद्धिदात्री पूजा
30 सितम्बर 2017 (शनिवार )  दशमी नवरात्री परायण

यह है घट स्थापना का समय

इस बार घटस्‍थापना और पूजा के लिए दो मुहूर्त है एक सुबह का और दूसरा दोपहर का ।  इस दिन कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 06:18 बजे से 8:10 बजे तक एवं  11:49 से दोपहर 12: 37 बजे तक है।
Read the rest of this entry

Advertisements