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Lunar Eclipse (Chandra Grahan) 27th July 2018 चंद्रग्रहण

Lunar Eclipse (Chandra Grahan) 27th July 2018 चंद्रग्रहण

27 जुलाई को साल 2018 का दूसरा चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan) पड़ रहा है,  यह ग्रहण रात 11.54 से शुरू होकर अगले दिन 28 जुलाई सुबह 3.49 तक रहेगा

For astrology, mantra diksha & sadhna guidance email to shaktisadhna@yahoo.com or call us on 9917325788 (Shri Yogeshwaranand Ji) & 9540674788 (Sumit Girdharwal).

ग्रहण काल में क्या न करें :
1. ग्रहण के समय ईश्वर की मूर्ति अथवा यन्त्र को हाथ ना लगाएं एवं इस दौरान मंत्र जप करते हुए दीपक अथवा धुप भी ना जलाएं।
2. ग्रहण काल में भोजन नहीं करना चाहिए।
3. कोई भी नया कार्य प्रारम्भ नहीं करें।
4. ग्रहण काल में सोना नहीं चाहिए एवं मल – मूत्र का विसर्जन नहीं करना चाहिए। (बच्चे, बुजुर्गों एवं रोगीओं के लिए अनिवार्य नहीं है लेकिन फिर भी जितना नियम संभव हो पालन करना चाहिए )
5. पति पत्नी को शारीरिक सम्बन्ध नहीं बनाने चाहिए।
6. किसी भी पाप कर्म से बचना चाहिए क्योंकि ग्रहण में किये गए पाप का भी कई गुना फल प्राप्त होता है।
7. गर्भवती महिलाओं को घर में ही रहना चाहिए क्योंकि ग्रहण का गर्भ में पल रहे बच्चे पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

ग्रहण काल में क्या करें :

  1. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सामान्य दिनों से ग्रहण काल में किया गया पुण्यकर्म (जप, ध्यान, दान आदि) कईं लाख गुना फलदायक होता है, इसीलिए ग्रहण काल में अधिक से अधिक पुण्य कर्म करने चाहिए।
  2.  ग्रहण काल से पहले ही खाने के सभी पदार्थों जैसे दूध, दही, पकी हुई सब्जी में तुलसी पत्र डाल देना चाहिए। ऐसा न करने पर वो भोजन खाने योग्य नहीं रह जाता है।
  3. ग्रहण काल में अपने गुरु एवं इष्ट देवता का मंत्र जप अवश्य करना चाहिए। इससे साधक को गुरु एवं देवता की विशेष कृपा प्राप्त होती है एवं मानसिक शक्ति बढ़ती है ।
  4. ग्रहण काल में मंत्र जप करने से मंत्र सिद्धि मिलती है एवं मंत्र जाग्रत हो जाते हैं।
  5. किसी साधना में यदि आपको बार बार असफलता मिल रही है तो उस साधना को ग्रहण काल में अवश्य करें।
  6. ग्रहण समाप्त हो जाने के पश्चात स्वयं स्नान करके देवी देवता को ( मूर्ति अथवा यन्त्र ) को गंगा जल से स्नान करना चाहिए एवं भोग लगाना चाहिए।
  7. ग्रहण काल समाप्त होने के पश्चात दान करना चाहिए।
  8. जो लोग घर पर न हो अथवा यात्रा कर रहे हो वो मानसिक रूप से जप करें ।

ग्रहण काल में किस मंत्र का जप करें ( चंद्र ग्रहण में कैसे पूजा करें )

ग्रहण काल में अपने गुरु एवं इष्ट देवता का मंत्र जप अवश्य करना चाहिए। जिसका कोई गुरु नहीं है अथवा कोई इष्ट नहीं है तो वो भगवान् शिव के पंचाक्षरी मंत्र – ” नमः शिवाय ” का अथवा भगवान् विष्णु के मंत्र – ” ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ” का जप कर सकते हैं।

कुछ अन्य विशिष्ट मंत्र हम यहाँ साधकों के हितार्थ यहाँ प्रस्तुत कर रहे हैं। अपनी श्रद्धानुसार आप इनका जप भी कर सकते हैं।

गणपति मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः

लक्ष्मी मंत्र

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नम:

दुर्गा मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥ ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा॥

हनुमान मंत्र
ॐ नमो भगवते हनुमते महा रुद्रात्मकाय हुं फट् स्वाहा

महाकाली मंत्र 

क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा

बगलामुखी मंत्र
ॐ आं ह्ल्रीं क्रों हुं फट् स्वाहा

बाला सुंदरी मंत्र
ऐं क्लीं सौः

कामाख्या मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कामाख्यै स्वाहा

गायत्री मंत्र
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्

ग्रहण के समय आप शाबर मंत्रो का जप भी कर सकते हैं। 

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Lunar Eclipse ( Chandra Grahan ) 31st January 2018 ( चंद्रग्रहण 2018)

Lunar Eclipse ( Chandra Grahan ) 31st January 2018 ( चंद्रग्रहण 2018)
आज संवत 2074 माघशुक्ल पूर्णिमा को चंद्रग्रहण पड़ रहा है। आज चंद्रमा कर्क राशि में पुष्य नक्षत्र में राहु  के साथ है और उस पर  केतु की पूर्ण दृष्टि हैं। इस तरह चंद्रमा, राहु-केतु से पूरी तरह पीडि़त हो गया हैं।
अधिक जानकारी के लिए ईमेल करें – shaktisadhna@yahoo.com , 9540674788
चंद्र ग्रहण समय : भारतीय ज्योर्तिविज्ञान परिषद के अनुसार ,पृथ्वी चंद्र ग्रहण के प्रभाव वाले क्षेत्र में 04 बजकर 22 मिनट में दाखिल होगी। दरअसल, इस दौरान पृथ्वी की एक आंशिक बाहरी छाया चंद्रमा पर पड़ेगी। आंशिक चंद्रग्रहण  शाम 5 बजकर 18 मिनट से शुरू होगा। पूर्ण चंद्रग्रहण शाम 06:22 बजे से लेकर 07:38 बजे तक चलेगा। आंशिक चंद्रगहण 8 बजकर 41 मिनट पर खत्म होगा। चंद्रमा पृथ्वी की छाया से पूरी तरह रात 9 बजकर 39 मिनट पर बाहर निकलेगा।
ग्रहण काल में क्या न करें :  
  • ग्रहण के समय ईश्वर की मूर्ति अथवा यन्त्र को  हाथ ना लगाएं  एवं  इस दौरान मंत्र जप करते हुए दीपक अथवा धुप  भी ना जलाएं।
  • ग्रहण काल में भोजन नहीं करना चाहिए।
  • कोई भी नया कार्य प्रारम्भ नहीं करें।
  • ग्रहण काल में सोना नहीं चाहिए एवं मल – मूत्र का विसर्जन नहीं करना चाहिए। (बच्चे, बुजुर्गों एवं रोगीओं के लिए अनिवार्य नहीं है लेकिन फिर भी जितना नियम संभव हो पालन करना चाहिए )
  • पति पत्नी को शारीरिक सम्बन्ध नहीं बनाने चाहिए।
  • किसी भी पाप कर्म से बचना चाहिए क्योंकि ग्रहण में किये गए पाप का भी कई गुना फल प्राप्त होता है।
  • गर्भवती महिलाओं को घर में ही रहना चाहिए क्योंकि ग्रहण का गर्भ में पल रहे बच्चे पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
ग्रहण काल में क्या करें  : 
  • पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सामान्य दिनों से ग्रहण काल में किया गया पुण्यकर्म (जप, ध्यान, दान आदि) कईं लाख गुना फलदायक होता है, इसीलिए ग्रहण काल में अधिक से अधिक पुण्य कर्म करने चाहिए।
  • ग्रहण काल से पहले ही खाने के सभी पदार्थों जैसे दूध, दही, पकी हुई सब्जी में तुलसी पत्र डाल देना चाहिए। ऐसा न करने पर वो भोजन खाने योग्य नहीं रह जाता है।
  • ग्रहण काल में अपने गुरु एवं इष्ट देवता का मंत्र जप अवश्य करना चाहिए। इससे साधक को गुरु एवं देवता की विशेष कृपा प्राप्त होती है एवं  मानसिक शक्ति बढ़ती है ।
  • ग्रहण काल में मंत्र जप करने से मंत्र सिद्धि मिलती है एवं मंत्र जाग्रत हो जाते हैं।
  • किसी साधना में यदि आपको बार बार असफलता मिल रही है तो उस साधना को ग्रहण काल में अवश्य करें।
  •  ग्रहण समाप्त हो जाने के पश्चात स्वयं स्नान करके देवी देवता को ( मूर्ति अथवा यन्त्र ) को गंगा जल से स्नान करना चाहिए एवं भोग लगाना चाहिए।
  • ग्रहण काल समाप्त होने के पश्चात दान करना चाहिए।
  • जो लोग घर पर न हो अथवा यात्रा कर रहे हो वो मानसिक रूप से जप करें ।

ग्रहण काल में किस मंत्र का जप करें ( चंद्र ग्रहण में कैसे पूजा करें )

ग्रहण काल में अपने गुरु एवं इष्ट देवता का मंत्र जप अवश्य करना चाहिए। जिसका कोई गुरु नहीं है अथवा कोई इष्ट नहीं है तो वो भगवान् शिव के पंचाक्षरी मंत्र – ” नमः शिवाय ” का अथवा भगवान् विष्णु के मंत्र – ” ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ” का जप कर सकते हैं।

कुछ अन्य विशिष्ट मंत्र हम यहाँ साधकों के हितार्थ यहाँ प्रस्तुत कर रहे हैं। अपनी श्रद्धानुसार आप इनका जप भी कर सकते हैं।
गणपति मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः
लक्ष्मी मंत्र  
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नम:
दुर्गा मंत्र 
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥ ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल
ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा॥
हनुमान मंत्र
ॐ नमो भगवते हनुमते महा रुद्रात्मकाय हुं फट् स्वाहा
महाकाली मंत्र
क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा
बगलामुखी मंत्र
ॐ आं ह्ल्रीं क्रों हुं फट् स्वाहा
बाला सुंदरी मंत्र
ऐं क्लीं सौः
कामाख्या मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कामाख्यै स्वाहा
गायत्री मंत्र
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्
For astrology, mantra diksha & sadhna guidance email to shaktisadhna@yahoo.com or call us on 9410030994 (Shri Yogeshwaranand Ji) & 9540674788 (Sumit Girdharwal).
Lunar Eclipse also known as Chandra Grahan will be observed between 5.18 PM to 8.41 Pm on 31st January 2018.
What we should not do during Eclipse ( Grahan) :
  • We should not touch idols of God or Yantras. One should also not lit lamp or use dhoop during mantra chanting.
  • One should not eat anything during Eclipse (Grahan).
  • One should not start any new work like business / house construction/sale purchase of property as this time is not auspicious.

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चंद्र ग्रहण में कैसे करें पूजा Lunar eclipse/Chandra Grahan on 8th October 2014

आज चंद्रमा पर राहु-केतु का पूरा असर होने से ग्रहण योग बना हैं। चंद्रमा आज मीन राशि में केतु के साथ है और उस पर राहु की पूरी दृष्टि हैं। इस तरह चंद्रमा, राहु-केतु से पूरी तरह पीडि़त हो गया हैं। इसके अलावा आज सूर्य भी इन दोनों ग्रहों से पीडि़त हैं, क्योंकि सूर्य राहु के साथ कन्या राशि में हैं। आज हो रहा चंद्र ग्रहण मीन राशि पर हैं।

दिल्ली में यह  चंद्र  ग्रहण  केवल कुछ मिनट  के लिए ही दिखेगा।  लेकिन  इसका प्रभाव दोपहर २ बजे से ही शुरू हो जायेगा।  साधको को परामर्श है कि दोपहर २. ३० से शाम ६. ३०  अपने इष्ट के मंत्रो का जप करें।  अपनेयदि आप माँ बगलामुखी की  साधना करतें हैं तो माँ के कवच एवं बीज मंत्र का जप करें।  यदि आप बीज  मंत्र के अलावा किसी और मंत्र का जप  करते है तो  कवच के  साथ  उसी का जप करें।   ग्रहण काल में जप  करने  से  मंत्र जाग्रत हो जाता है।ग्रहण के समय किसी भी मूर्ति अथवा यन्त्र को  हाथ ना लगाएं।  इस दौरान पूजा करते हुए दीपक अथवा धुप  ना जलाएं।  इस दौरान भगवान को भोग भी नहीं लगाया जाता है।  आपको केवल माला से मंत्र  जप करना है।  ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करने के बाद ही अपनी नियमित पूजा करें।  यन्त्र को स्नान कराये एवं  दीपक आदि जलाकर भोग लगाएं।For astrology, mantra diksha & sadhna guidance email to sumitgirdharwal@yahoo.com, shaktisadhna@yahoo.com or call us on 9917325788 (Shri Yogeshwaranand Ji). For more information visit http://www.baglamukhi.info or http://www.yogeshwaranand.org

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