Shri Hanuman Vadvanal Stotra in Hindi, Sanskrit and English Pdf

Shri Hanuman Vadvanal Stotra in Hindi, Sanskrit and English Pdf ( श्री हनुमान वडवानल स्तोत्र )

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Vadvanal Stotra Meaning & Benefits in Hindi

महावीर हनुमान् महाकाल शिव के 11 वे रुद्रावतार हैं, जिनकी विधिवत् उपासना करने से सभी बाधाओं का नाश होता हैा ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए नित्य वडवानल स्तोत्र का 108 बार पाठ करना चाहिये। इसके पाठ से भूत बाधा, प्रेत बाधा,  ब्रह्मराक्षस , ऊपरी बाधा का निवारण होता हैा सर्व कष्टों एवं रोगों का निवारण भी इसी पाठ से हो जाता हैा
ऐसा कोई भी कार्य नही है जो हनुमान जी अपने भक्तो के लिए ना कर सकें, बस आवश्यकता है सच्चे मन से उन्हें याद करने की ।

हनुमान जी के कुछ विशिष्ट मंत्र हैं जिनका जप यदि इस स्तोत्र के साथ किया जाये तो सभी कामनाओं की पूर्ति सम्भव हैा कोई भी साधना बिना गुरू की आज्ञा के ना करें ।

Vadvanal Stotra Meaning & Benefits in English

This stotra is in Sanskrit and it is creation of Bibhishana- Ravana’s brother. Initially this stotra starts with praise of shri Hanuman admiring his virtues and tremendous power. Then very wisely, God Hanuman is requested to remove all the diseases, bad health and all sorts of troubles from the life. Further God Hanuman is requested to protect from all sorts of fear, trouble and make us free from all evil things. Finally God Hanuman is requested to give the blessing, success Sound Health and everything we ask from him.

This stotra is very auspicious and powerful. Anybody reciting this stotra daily at least once; with full concentration, devotion and unshakable faith in mind, receives all the good things in life as described above. Please have a faith.

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Shri Hanuman Vadvanal Stotra in Hindi Sanskrit and English Pdf

Shri Hanuman Vadvanal Stotra in Hindi Sanskrit and English Pdf Part 2

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साधको के लिए कुछ अनमोल बातें

भक्ति, श्रद्धा , विश्वास एवं धैर्य साधना मार्ग के चार स्तम्भ हैं। हमारी साधना का प्रतिफल इन्ही चार स्तम्भों पर निर्भर करता है। जो लोग ये कहते हैं की उन्हें मंत्रो से कोई लाभ नहीं मिला तो उन्हें समझ लेना चाहिए कि उनमे स्वयं ही कोई कमी है। आजकल ऐसा देखने में आता है कि लोग एक – दो अनुष्ठान करने के बाद ही अपना धैर्य खो देते हैं और अपने गुरु, मंत्र एवं इष्ट पर अविश्वास करने लगते हैं। एक साधक को इस तरह धैर्य नहीं खोना चाहिए। ऐसा कोई भी व्यक्ति इस संसार में नहीं है जिसे कोई कष्ट या दुःख नहीं है। स्वयं भगवान् राम एवं कृष्ण के जीवन से हमे ये सीख लेनी चहिये जिन्होंने अपने जीवन में अनेको कष्टों का सामना किया। जो लोग अविश्वास करके अथवा लाभ न मिलने के कारण गुरु, मंत्र एवं देवता को बदल देते हैं वो नरकगामी होते हैं एवं अन्य देवता भी उन्हें शरण नहीं देते। कितना भी कष्ट क्यों न आ जाये हमे अपने गुरु, मंत्र एवं देवता को नहीं त्यागना चहिये। प्राचीन काल में जितने भी साधक एवं ऋषि हुए हैं उन्होंने एक ही देवता की तब तक उपासना की है जब तक वो देवता स्वयं उनके सामने वरदान देने के लिए नहीं आ गये। रावण ने हजारों वर्ष तपस्या की एवं भगवान् को स्वयं आकर वरदान देने के लिए विवश कर दिया। हमें उन लोगो से सीख लेनी चाहिए। किसी भी मंत्र एवं देवता में उतनी ही शक्ति होती है जितना आपका उन पर विश्वास होता है।

साधना को आरम्भ करने से पूर्व एक साधक को चाहिए कि वह मां भगवती  की उपासना अथवा अन्य किसी भी देवी या देवता की उपासना निष्काम भाव से करे। उपासना का तात्पर्य सेवा से होता है। उपासना के तीन भेद कहे गये हैं:- कायिक अर्थात् शरीर से , वाचिक अर्थात् वाणी से और मानसिक- अर्थात् मन से।  जब हम कायिक का अनुशरण करते हैं तो उसमें पाद्य, अर्घ्य, स्नान, धूप, दीप, नैवेद्य आदि पंचोपचार पूजन अपने देवी देवता का किया जाता है। जब हम वाचिक का प्रयोग करते हैं तो अपने देवी देवता से सम्बन्धित स्तोत्र पाठ आदि किया जाता है अर्थात् अपने मुंह से उसकी कीर्ति का बखान करते हैं। और जब मानसिक क्रिया का अनुसरण करते हैं तो सम्बन्धित देवता का ध्यान और जप आदि किया जाता है।
जो साधक अपने इष्ट देवता का निष्काम भाव से अर्चन करता है और लगातार उसके मंत्र का जप करता हुआ उसी का चिन्तन करता रहता है, तो उसके जितने भी सांसारिक कार्य हैं उन सबका भार मां स्वयं ही उठाती हैं और अन्ततः मोक्ष भी प्रदान करती हैं। यदि आप उनसे पुत्रवत् प्रेम करते हैं तो वे मां के रूप में वात्सल्यमयी होकर आपकी प्रत्येक कामना को उसी प्रकार पूर्ण करती हैं जिस प्रकार एक गाय अपने बछड़े के मोह में कुछ भी करने को तत्पर हो जाती है। अतः सभी साधकों को मेरा निर्देष भी है और उनको परामर्ष भी कि वे साधना चाहे जो भी करें, निष्काम भाव से करें। निष्काम भाव वाले साधक को कभी भी महाभय नहीं सताता। ऐसे साधक के समस्त सांसारिक और पारलौकिक समस्त कार्य स्वयं ही सिद्ध होने लगते हैं उसकी कोई भी किसी भी प्रकार की अभिलाषा अपूर्ण नहीं रहती ।
मेरे पास ऐसे बहुत से लोगों के फोन और मेल आते हैं जो एक क्षण में ही अपने दुखों, कष्टों का त्राण करने के लिए साधना सम्पन्न करना चाहते हैं। उनका उद्देष्य देवता या देवी की उपासना नहीं, उनकी प्रसन्नता नहीं बल्कि उनका एक मात्र उद्देष्य अपनी समस्या से विमुक्त होना होता है। वे लोग नहीं जानते कि जो कष्ट वे उठा रहे हैं, वे अपने पूर्व जन्मों में किये गये पापों के फलस्वरूप उठा रहे हैं। वे लोग अपनी कुण्डली में स्थित ग्रहों को देाष देते हैं, जो कि बिल्कुल गलत परम्परा है। भगवान शिव ने सभी ग्रहों को यह अधिकार दिया है कि वे जातक को इस जीवन में ऐसा निखार दें कि उसके साथ पूर्वजन्मों का कोई भी दोष न रह जाए। इसका लाभ यह होगा कि यदि जातक के साथ कर्मबन्धन शेष नहीं है तो उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाएगी। लेकिन हम इस दण्ड को दण्ड न मानकर ग्रहों का दोष मानते हैं।व्यहार में यह भी आया है कि जो जितनी अधिक साधना, पूजा-पाठ या उपासना करता है, वह व्यक्ति ज्यादा परेशान रहता है। उसका कारण यह है कि जब हम कोई भी उपासना या साधना करना आरम्भ करते हैं तो सम्बन्धित देवी – देवता यह चाहता है कि हम मंत्र जप के द्वारा या अन्य किसी भी मार्ग से बिल्कुल ऐसे साफ-सुुथरे हो जाएं कि हमारे साथ कर्मबन्धन का कोई भी भाग शेष न रह जाए।

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About sumit girdharwal

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Posted on September 3, 2014, in Hanuman Mantra Sadhna and tagged , , , , , , , , , , , , , , . Bookmark the permalink. 3 Comments.

  1. Jai Swami Ji,

    Maine apne original place me ghar banvaya. Mujhe rat din us ghar me chat
    par dham, dham awaj sunai deti hai. Google site se pata chalta hai ki
    expansion and compression se awaj aati hai. Ek Pujari Ji se poochha to unke
    anusaar koi Mata ji hai aur wo bhala karne aai hain. Unhe har varsh kali
    chaudas ke din Narial wa sarab dena padega aur agarvatti ki dhoop. Swami Ji
    mujhe nahi pata ki mai kya karun Kya Mata Ji sachmuch sarab leti hai. Mai
    MAA Durga, wa Shiva Ji ka Upashak hun.

    Kripaya Swami Ji upay bataen. Ek Maa Kali ka mantra hai “” Kali Kali
    Mahakali Indra ki beti Brahma ki saali, Piti bhar bhar rakt payali, Uth
    baithi pipal ki daali, Dono haath bajaye tali. Jai kamroo kamkhya Naina
    jogini ki, Ishwar Mahadeo parvati ki, Jai peer Mashan KI. Eh mantra 40 din
    ek mala japna hai, uske baad 3 baar padhkar tali bajayen. Jo badha hogi
    bhaag jayegi.

    Mantra sidhi me Guru ki jaroorat hoti hai. Yadi aap ko guru maan kar sdhi
    kar sakte hain. Eh sabar mantra hai. Kripaya batayen ki eh mantra uttam
    rahega ya nahi.

    JAI MATA KI.

    Apka Shishya

    Brijesh Narain

  2. Jai Swami Ji, Jai Maa Maha Kali, Jai Bahubali Hanuman Ji.

    Thanks for forwarding Sidha Hanuman Ji Mantra. Will send to your holiness
    the detailed vidhi before starting the jaap.

    Your Shishya,

    Brijesh Narain

  3. jai swami ji jai mataji thanks

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